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Daily health tips :

1.स्तनशोधक : अनन्तमूल की जड़ का चूर्ण 3 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से स्तनों की शुद्धि होती है। यह दूध को बढ़ा देता है। जिन महिलाओं के बच्चे बीमार और कमजोर हो, उन्हें अनन्तमूल की जड़ का सेवन करना चाहिए।
2.दंत रोग : अनन्तमूल के पत्तों को पीसकर दांतों के नीचे दबाने से दांतों के रोग दूर होते हैं।

1.मिट्टी या कोयला खाने की आदत : एक चम्मच अजवाइन का चूर्ण रात में सोते समय नियमित रूप से 3 हफ्ते तक खिलाएं। इससे बच्चों की मिट्टी खाने की आदत छूट जाती है।
2.पेट में दर्द : एक ग्राम काला नमक और 2 ग्राम अजवाइन गर्म पानी के साथ सेवन कराएं।

1.मुंह की दुर्गध : एक चम्मच अदरक का रस एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुख की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।
2.दांत का दर्द : महीन पिसा हुआ सेंधानमक अदरक के रस में मिलाकर दर्द वाले दांत पर लगाएं।

1.सुन्दर, सिल्की और लंबे बाल : आम की गुठलियों के तेल को लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं तथा काले बाल जल्दी सफेद नहीं होते हैं। इससे बाल झड़ना व रूसी में भी लाभ होता है।
2.खांसी और स्वरभंग : पके हुए बढ़िया आम को आग में भून लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चूसने से सूखी खांसी मिटती है।
1. बवासीर : बवासीर में आयापान के पत्तों को पीसकर लगाने तथा रस 10-20 मिलीलीटर दिन में 2-3 बार पीने से चमत्कारी लाभ होता है।
2.वमन (उल्टी) : आयापान के पंचाग के गर्म काढ़े को अधिक मात्रा में देने से वमन (उल्टी) हो जाती है तथा दस्त लग जाते हैं। इसका उपयोग पेट साफ करने के लिए करना चाहिए।
1.पित्त के अतिसार पर : अतीस, कुटकी की छाल और इन्द्रजव के चूर्ण को शहद में मिलाकर चटाना चाहिए। इससे पित्त के कारण उत्पन्न अतिसार ठीक हो जाता है। 
2.बच्चों के आमतिसार (दस्त) पर : सोंठ, नागरमोथा और अतीस का काढ़ा देना चाहिए। 
1.पेशाब का बार-बार आना : खरैटी की जड़ की छाल का चूर्ण यदि चीनी के साथ सेवन करें तो पेशाब के बार-बार आने की बीमारी से छुटकारा मिलता है।
2.प्रमेह (वीर्य प्रमेह) : अतिबला के बारीक चूर्ण को यदि दूध और मिश्री के साथ सेवन किया जाए तो यह प्रमेह को नष्ट करती है। महावला मूत्रकृच्छू को नष्ट करती है।
1.शीतज्वर : बड़ी अरनी की जड़ को मस्तक से बांधना चाहिए। इससे शीतज्वर नष्ट हो जाता है। 
2.स्तन में दूध की वृद्धि : छोटी अरनी की सब्जी बनाकर प्रसूता महिलाओं को खिलाने से उनके स्तनों में दूध की वृद्धि होती है। 
1.श्वेतप्रदर : महिलाओं में होने वाले श्वेतप्रदर तथा पेशाब की जलन को रोकना भी इसके विशेष गुणों में है।
2.पुरानी खांसी : छाती में जलन, पुरानी खांसी आदि को रोकने में यह सक्षम है।
3.हार्ट फेल : हार्ट फेल और हृदयशूल में अर्जुन की 3 से 6 ग्राम छाल दूध में उबालकर लें।
1.गर्मी से उत्पन्न रोग : अरीठे का फेन दिन में 2-3 बार लगाकर मलना चाहिए। इसके बाद गर्म पानी से धो लेना चाहिए
2.धूप में नंगे पैर घूमने से उत्पन्न हुई जलन : अरीठे के फेन को पैर पर मलने से ठंडक मिलती है।

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