हृदय गति तथा सांस क्रिया को दुबारा शुरु करना (CPR)


हृदय गति तथा सांस क्रिया को दुबारा शुरु करना

MAKING HEARTBEAT AND RESPIRATION NORMAL AGAIN (CPR)


प्राथमिक चिकित्सा :

परिचय-

     CPR सी.पी.आर. एक ऐसी क्रिया है जो उस समय प्रयोग में लाई जाती है जब कोई दुर्घटना-ग्रस्त व्यक्ति बेहोश होता है और सांस नहीं ले पा रहा होता है। उसके शरीर में खून का संचार भी नहीं हो रहा होता है। हृदय से संबंधित कार्य को कार्डियो (Cardio) और फेफड़ों से संबंधित कार्य को प्यूल्मोनरी (Pulmonary) कहते हैं। CPR में दो ऐसे कृत्रिम कार्य किए जाते हैं जिनका उद्देश्य डॉक्टरी सहायता मिलने तक पीड़ित दुर्घटना-ग्रस्त व्यक्ति को जीवित रखना होता है।

यह दो कार्य निम्नलिखित है-

  1. मुंह द्वारा सांस भरना
  2. छाती को दबाना।

इन दोनों कार्यों का उद्देश्य दिमाग को ऑक्सीजन पहुंचाना है क्योंकि 3 मिनट तक ऑक्सीजन न पहुंचने पर दिमाग काम करना बंद कर देता है अर्थात मृत हो जाता है।

     CPR क्रिया की जरूरत दिल का दौरा पड़ने, गला घुटने, पानी में डूबने, बिजली का झटका लगने, धुएं से दम घुटने या जहरीली गैसों को सूंघ लेने जैसी स्थितियों में पड़ती है।

CPR की कार्य योजना- CPR क्रिया को शुरु करने से पहले यह निश्चित कर लें कि पीड़ित और उसके पास खड़े लोग खतरे में तो नहीं है। इसके बाद ही आगे की कार्यवाही करें। अगर पीड़ित बेहोश होने लगे तो उससे कुछ प्रश्न पूछें जैसे- तुम्हारा नाम क्या है, अपनी आंखें खोलों आदि।

     इसके बाद पीड़ित की पीठ थपथपाएं। इससे वह होश में आ जाएगा। अगर इससे पीड़ित होश में न आए तो उसके पेट को दबाएं। अचानक तंतुपट पर खिंचाव से छाती दबती है और इससे बाहरी वस्तु या खाना बाहर निकल सकता है।

खड़े होकर- सबसे पहले पीड़ित के पीछे खड़े होकर अपनी बांहो से उसकी कमर को पकड़ें। फिर उसके पेट को अंगूठे से दबाते हुए एक हाथ की मुट्टी बनाएं। अब दूसरे हाथ से उसकी पसलियों को दबाते हुए मुट्टी को पकड़े। पकड़ी हुई मुट्ठियों को पेट की खोह में ऊपर तथा अंदर की ओर झटका दें। फिर आपस में पकड़ी हुई मुट्ठियों से तंतुपट को ऊपर की ओर अंदर की ओर दबाते हुए पेट पर जल्दी-जल्दी दबाव डालें। इस तरह पेट पर 5 बार दबाव डाले। अगर अब भी बाहरी वस्तु नहीं निकलती तो 5 बार पीछे से पीड़ित की पीठ को थपथपाएं और 5 बार पेट को बारी-बारी से दबाएं।

लेटने की अवस्था- जब पीड़ित व्यक्ति बेहोश हो तो उसे पीठ के बल लिटाकर अपने घुटने के बल बैठकर हथेलियों से उसके पेट पर दबाव डालें।

आपातकाल स्थिति में जरूरी बातें- यदि कोई व्यक्ति बेहोश हो गया हो तो सबसे पहले उसे हिला-डुलाकर उसे होश में लाने की कोशिश करें। यदि वह कोई प्रतिक्रिया न करें तो उसकी सांस की जांच करके देखें कि उसकी सांस चल रही है या नहीं। अगर वह सही स्थिति में न हो तो उसे सही स्थिति में लिटाएं ताकि उसे शुद्ध वायु मिल सके।

     इसके बाद पीड़ित व्यक्ति की सांस नली की जांच करें। अगर सांस चल रही है तो उसे अधोमुखी अवस्था में लिटाएं। अगर सांस नहीं चल रही हो तो उसे पीठ के बल लेटाकर अपने मुंह से कृत्रिम सांस दें।

इसके बाद उसके रक्तसंचार की जांच करें। अगर धमनी से खून का संचार सही तरह से हो रहा हो तो मुंह द्वारा उसे कृत्रिम सांस देने की प्रक्रिया जारी रखें। अगर खून का संचार बंद हो तो CPR विधि शुरु करें। 30 बार उसकी छाती दबाएं तथा 2 बार मुंह के द्वारा कृत्रिम सांस दें। धीरे से उसके कंधों को हिलाएं। यदि इसका उत्तर मिलता है तो पीड़ित होश में है और यदि कोई जवाब नहीं मिलता है तो वह होश में नहीं है। ऐसे में तुरंत मदद के लिए दूसरे लोगों को पुकारें।

श्वासनली को खोलें- श्वासनली बेहोशी की अवस्था में सिकुड़ सकती है या फिर जीभ उल्ट जाने के कारण बिल्कुल बंद हो सकती है। ऐसी स्थिति में निम्नलिखित प्राथमिक उपचार द्वारा पीड़ित व्यक्ति की श्वासनली को दुबारा खोला जा सकता है-

  • सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति को को पीठ के बल फर्श या पलंग आदि पर लिटा दें।
  • फिर अपने घुटनों के बल पीड़ित की ओर मुंह करके बैठ जाएं।
  • अपने एक हाथ को पीडित के माथे पर रखते हुए उसको पीछे की ओर करें।
  • अगर उसके मुंह में कोई चीज फंसी हो जैसे- बाहरी वस्तु, नकली दांत, उल्टी आदि तो उसे मुंह में अंगुली डालकर बाहर निकाल दें।
  • फिर अपने दूसरे हाथ की अंगुलियों को पीड़ित व्यक्ति की ठोडी के नीचे रखकर ऊपर की ओर उठाएं।  
  • अगर पीड़ित व्यक्ति की नाक में चोट लगने की आशंका हो तो उसके जबड़े को पूरी जान लगाकर खोलें। अपने हाथों को उसके चेहरे के दोनों तरफ रखें। अपने हाथों की अंगुलियों से उसकी श्वासनली खोलने के लिए उसके जबड़े को उठाएं लेकिन उसके सिर या गर्दन को ना घुमाएं।

श्वासनली को देखें-

  • श्वासनली को खुला रखते हुए अपने कान को पीड़ित व्यक्ति की नाक और मुंह के पास रखकर दस सेकेंड तक सुनकर और महसूस करते हुए आपनी आंखों को रोगी के सीने पर टिका लें।
  • अगर सीना ऊपर और नीचे हो रहा हो तो समझिये की पीड़ित व्यक्ति की श्वास चल रही है।
  • सांसों की आवाज को सुनें।
  • अपने कान पर गर्म सांसों को महसूस करें।
  • यदि पीड़ित व्यक्ति सांस ले रहा हो तो उसे अधोमुखी अवस्था में लिटा दें।
  • यदि पीड़ित व्यक्ति सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो तो अपने साथी को एंबुलेंस या डॉक्टर को बुलाने के लिए कहें।
  • जब तक डॉक्टर या एंबुलेंस का बंदोबस्त नहीं हो जाता तब तक पीड़ित व्यक्ति को कृत्रिम सांस देते रहें।

कृत्रिम सांस देने की विधि- पीड़ित व्यक्ति को कृत्रिम सांस देने से पहले यह निश्चित कर लें कि उसकी श्वासनली खुली हुई है। इसके बाद पीड़ित व्यक्ति की नाक को अपने हाथ के अंगूठे और पहली अंगुली से दबाएं लेकिन उसका मुंह खुला रखें। अब अपने फेफड़ों में हवा भरने के लिए लम्बी सांस लें। फिर अपने मुंह को पीड़ित व्यक्ति के मुंह पर रखें और उसके मुंह में आरामपूर्वक वायु तब तक भरे जब तक उसकी छाती फूल न जाए। अब अपने मुंह को हटाएं और रोगी की छाती को नीचे होने दें। छाती का ऊपर और नीचे होना यह यह दर्शाता है कि पीड़ित व्यक्ति की सांस क्रिया प्रभावित है।

सांस भरने पर यदि रोगी की छाती नहीं फूलती तब निम्नलिखित देखें- सिर अच्छी तरह पीछे की ओर झुका है और ठोढी ऊपर उठी है। यह सुनिश्चित कर लें कि पीड़ित का मुंह और नथुने सही प्रकार से बंद है। यह देख लें कि पीड़ित के मुंह में कोई भी बाहर की वस्तु तो नहीं अटकी है। इसके बाद दो बार कृत्रिम सांस देने के बाद यह जांच लें कि उसकी सांस चल रही है या नहीं।

छठा परिभ्रमण की जांच-

  • प्राथमिक उपचारकर्त्ता पीड़ित व्यक्ति की नब्ज के चलने या न चलने का परिभ्रमण 10 सेकेंड तक जांच करें। दूसरे केवल 10 सेकेंड तक देखें, सुने और अनुभव करें कि परिभ्रमण के चिन्हों जैसे सांस, खांसी और गतिविधि हो रही है।
  •  यदि परिभ्रमण उपस्थित है तो कृत्रिम श्वास प्रक्रिया को जारी रखें।

सातवां CPR शुरू करें-

  • अगर परिभ्रमण नही है तो तुरंत CPR को प्रारंभ करें और पीड़ित की छाती को 30 बार दबाएं तथा दो बार कृत्रिम सांस दें। यह  क्रिया 30:2 के अनुपात में दोहराएं। जब तक आपातकालीन सहायता नहीं पहुंचती या रोगी सामान्य सांस लेना न शुरू कर दे तब तक उसे CPR देते रहे।
  • यदि वहां पर ऐसे दो व्यक्ति जिनको CPR का ज्ञान हो तब एक व्यक्ति छाती को दबाएं और दूसरा व्यक्ति कृत्रिम श्वास दें।।
  • दोनों व्यक्ति छाती के दबाव और कृत्रिम श्वास देने के काम को थकावट न होने के लिए हर दो मिनट बाद बदले।
  • CPR ऑक्सीजन के साथ दिमाग को और दिल की मांसपेशियों को भरपूर मात्रा में रक्त प्रदान करता है।

छाती पर दबाव डालना- छाती पर दबाव डालने की क्रिया में छाती की हड्डी के निचले भाग पर नियमित रूप से दबाव दिया जाता है ताकि उससे छाती की हड्डी एवं रीढ़ की हड्डी के बीच हृदय पर दबाव पड़े। इससे हृदय में खून का बहाव बढाता है और छाती की आंतरिक स्नायुओं पर भी दबाव पड़ता है।

छाती पर दबाव देने की पद्धति-

  • इस क्रिया के लिए रोगी को पीठ के बल फर्श या किसी ठोस जगह पर लिटा दें।
  • फिर रोगी के एक ओर, घुटनों के बल बैठ जाएं।
  • इसके बाद अपने बाएं हाथ की अंगुलियों को छाती के सबसे निचली हड्डी से खिसकाते हुए उस स्थान पर ले जाएं जहां पर छाती की हड्डियां मिलती है उस स्थान पर बीच की अंगुलियां तथा उससे ऊपर पहली अंगुलियों हो।
  • दूसरे हाथ की हथेली को पहली अंगुली की ओर खिसकाएं। यही वह स्थान है जहां पर दबाव डालना है और यह स्थान छाती के हड्डी के बीच से आधे से नीचे की ओर दोनों नितम्बों के बीच हैं।
  • पहले हाथ को दूसरे हाथ के ऊपर रखते हुए अंगुलियों को बांध लें।
  • अपनी बाजुओं और कोहनियों को कंधों के ऊपर सीधा रखते हुए शरीर को साधे।
  • अब छाती की हड्डी को सीधा नीचे की ओर दबाएं। छाती पर यह प्रति मिनट 100 बार की गति से उसकी छाती पर दबाव दें। छाती पर यह दबाव 4-5 सेमीमीटर का होना चाहिए।
  • इसके बाद अपना वजन हटाएं जिससे कि छाती अपनी साधारण अवस्था में आ जाए किंतु अपने हाथ छाती पर रखें रहने दें।
  • दबाव देने, छोड़ने, दबाव देने छोड़ने-छोड़ने की क्रिया एक लय से 30 बार करें। दबाव देने और छोड़ने का समय बराबर होना चाहिए।

छाती पर दबाव श्वास के अनुपात में-

  • यदि प्राथमिक उपचारकर्त्ता अकेला हो तो पीड़ित व्यक्ति को 2:30के अनुपात में दो बार कृत्रिम सांस और 30 बार छाती पर दबाव दें।
  • अगर प्राथमिक उपचारकर्त्ता के साथ एक और व्यक्ति भी तो हो और पीड़ित कोई व्यस्क हो तो 2:30 के अनुपात में उसको कृत्रिम श्वास और छाती पर दबाव दें। अगर पीड़ित कोई बच्चा या नवजात शिशु हो उसे 2:15 के अनुपात में कृत्रिम श्वास और छाती पर दबाव दें।

बच्चों के लिए CPR- अगर 1 से लेकर 7 साल तक के किसी बच्चे को CPR दे रहे हों तो इस दौरान उसकी छाती पर दबाव डालने के लिए एक हाथ की हथेली का ही प्रयोग करें और छाती के एक तिहाई भाग को एक बार दबाएं।

नवजात शिशुओं के लिए CPR- अगर किसी नवजात शिशु को CPR के अंतर्गत कृत्रिम श्वास दी जा रही है तो श्वास देते समय उसके मुंह और नाक को अपने मुंह से ढक लें।  फिर उसे सिर्फ छोटे-छोटे श्वास दें। इसके बाद शिशु की छाती और नितंबों के बीच में सिर्फ दो अंगुलियों का प्रयोग करते उसकी छाती के सिर्फ एक तिहाई भाग को दबाएं।

जानकारी-

  • अगर पीड़ित व्यक्ति थोड़ा-थोडा़ होश में हो उसकी छाती पर दबाव न दें।
  • पीड़ित की छाती पर हल्का दबाव ही दें क्योंकि ज्यादा जोर से दबाव देने से उसकी पसलियों पर असर पड़ सकता है।
  • पीड़ित व्यक्ति पर CPR क्रिया का प्रयोग सिर्फ उसी दौरान करना चाहिए जब वह या तो बहुत ही गंभीर हालत में हो या फिर उसको तुरंत ऑप्रेशन की जरूरत न हो।
  • अगर प्राथमिक उपचार के दौरान किसी एच.आई.वी. से पीड़ित व्यक्ति को मुंह द्वारा कृत्रिम श्वास देनी पड़े तो इस दौरान प्राथमिक उपचारकर्त्ता को डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है क्योंकि एच.आई.वी. रोग ऐसे नहीं फैलता।
  • अगर अचानक किसी व्यक्ति के हृदय की गति रुक जाती है तो उसकी छाती की हड्डी के निचले भाग पर मुक्के मारने से उसकी हृदय की गति दुबारा चल सकती है।
  • अचानक हृदय गति रुकने पर CPR देने से रोगी के जीवित होने की संभावना दोगुनी हो जाती है।
  • अगर किसी कारणवश प्राथमिक उपचारकर्त्ता पीड़ित व्यक्ति को मुंह द्वारा कृत्रिम श्वास देने में असर्म्थ हो या सांस देना नहीं चाहता तो ऐसी स्थिति में उसकी छाती पर दबाव केवल CPR क्रिया द्वारा दबाव देना चाहिए।

बिजली का झटका लगने पर- अगर किसी व्यक्ति को बिजली का झटका लग जाता है तो ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को बचाने के साथ-साथ अपना बचाव करना भी जरूरी है। इसके बाद बिजली के मेन स्विच को बंद कर दें या किसी लकड़ी आदि की मदद से रोगी को झटका लगने वाले स्थान से दूर कर दें। फिर पीड़ित व्यक्ति की श्वास-क्रिया और नब्ज को चेक करें कि वह सही तरह से अपना काम कर रही है या नहीं। अगर नब्ज चलने में या सांस लेने में रोगी की तरफ से परेशानी नजर आती है तो उसे तुरंत कृत्रिम सांस या CPR दें।

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