हार्टफेल


हार्टफेल

(CARDIAC FALIURE)


जब दिल अचानक काम करना बंद कर देता है तो हार्टफेल या हृदयावसाद कहलाता है। यदि दिल में अचानक बहुत तेजी से दर्द उठे तो वह हार्टफेल की स्थिति हो सकती है।परिचय :

      जब दिल अचानक काम करना बंद कर देता है तो हार्टफेल या हृदयावसाद कहलाता है। यदि दिल में अचानक बहुत तेजी से दर्द उठे तो वह हार्टफेल की स्थिति हो सकती है।

नाम :

       हृदयावसाद, हार्टफेल।

लक्षण :

       दिल के स्थान पर बाएं कंधे में चुभन, दिल में घबराहटधड़कन बढ़ जाती है। दिल में सुराख होना और रक्तनली में रुकावट हो जाती है।

भोजन और परहेज:

  • अधिक वजन या परिश्रम नहीं करना चाहिए।
  • मानसिक तनाव से मुक्त रहना चाहिए।
  • सुबह जल्दी उठकर नंगे पांव घास में घुमना-टहलना चाहिए जिससे शरीर में ताजगी आती है और शरीर में रक्तसंचार में सहायता मिलती है।
  • इस दवा के सेवनकाल में तली चीज़े, मांस, मछली, अण्डे, शराब आदि का सेवन और धूम्रपान न करें। नमक व चिकनाई का प्रयोग कम करें।

विभिन्न औषधियों से उपचार-

1. मालिश: सबसे पहले शरीर के समस्त कपड़ों को ढीला कर दें। बायें स्तन के नीचे के स्थान को थपथपायें या ऊपर की ओर मालिश करें इससे रक्तसंचार जारी रहने में सहायता मिलती है।

2. बरियारा: 5 से 10 ग्राम बरियारा (बला, खिरैटी) की जड़ को कस्तूरी और मकरध्वज के साथ देने से रोगी को आराम होगा। बाद में सुबह और शाम देते रहने से लाभ होगा।

3. लहसुन: हार्टफेल के रोगी को लहसुन का रस 10 से 30 बूंद तुरंत दें। इसके बाद सुबह-शाम लहसुन का रस देते रहें।

4. मुलहठी: मुलहठी का चूर्ण घी या दूध के साथ तत्काल और बाद में सुबह और शाम खुराक के रूप में रोगी को दें।

5. कबाबचीनी (शीतलचीनी): कबाबचीनी (शीतल चीनी) का चूर्ण 1 ग्राम से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करते रहने से हार्टफेल की संभावना कम हो जाती है। इससे हृदय शक्ति सम्पन्न हो जाता है।

6. पटुआ (सन): पटुआ (सन) के पत्तों के 10 मिलीलीटर रस को कालीमिर्च के साथ रोगी को देने तत्काल सेवन कराने से आराम होगा। एवं बाद में सुबह-शाम दे सकते हैं।

7. मकोय: मकोय के पत्ते, फल और डालियों के रस को निकालकर 2 से 6 ग्राम तक की मात्रा में दिन में 2-3 बार देने से जलोदर और सभी प्रकार के हृदय रोग मिट जाते हैं।

8. प्याज: सुबह 1 प्लेट प्याज के टुकड़े करके उसको तले या उबाल लें। इस प्याज के रोजाना सेवन करने से व्यक्ति को दिल के दौरे नहीं पड़ते हैं।

9. लहसुन: 4-5 लहसुन की कलियों को उसी समय चबाकर खाना चाहिए। ऐसा करने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा नहीं रहता है। इसके बाद लहसुन को दूध में उबालकर देते रहना चाहिए। दिल के रोग में लहसुन देने से पेट की वायु निकलकर दिल का दबाव हल्का हो जाता है और दिल को ताकत मिलती है।

10. पीपल : पीपल के ताजा विकसित कोमल 15 पत्ते लें, फिर हर पत्ते का ऊपर और नीचे का कुछ हिस्सा कैंची से काटकर फेंक दें। अब पत्तों को साफ पानी से धो लें। इन सभी 15 पत्तों को लगभग 400 मिलीलीटर पानी में डालकर धीमी आग पर उबाल लें। जब एक तिहाई पानी शेष बच जाये तब उतार कर ठंडा कर लें और किसी साफ कपड़े से छान लें और किसी ठंडे साफ स्थान पर ढककर रख दें। इस दवा की 3 खुराक बनाकर दिन में 3-3 घंटे बाद रोगी को देने से दिल के दौरे में आराम मिलेगा। इस प्रकार ताजा नई दवा बनाकर 15 दिन तक रोगी को पिला दें।

सावधानी: खुराक के रूप में दवा को लेते समय पेट बिल्कुल खाली नहीं होना चाहिए। दलिया, बिस्कुट या हल्का नाश्ता करने के थोड़ी देर बाद दवा लें।

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