हस्तमुद्रा का परिचय और परिणाम

Aasano ki unchi bhoomikaon men dudraye prakat hoti hai. Jis prakar se shabd ki barik aawaj naad hai, waise hi sharer ke antarang sokshm sapandan ka awataran mudra hai.


हस्तमुद्रा का परिचय और परिणाम


आदि युग का सहज मानव    |    मुद्रा की जानकारी    |    हठयोग और मुद्राएं    |    मुद्रा और दिव्य शक्ति    |    मुद्रा की शुरुआत    |    संस्कारगत अभिव्यक्ति    |    मुद्राओं का शरीर पर असर    |    मुद्राओं के दो प्रकार    |    शरीर में स्विच बोर्ड    |    नृत्य द्वारा भावों को प्रकट करना    |    शरीर की भाषा- मुद्रा    |    शरीर परमाणुओं का पिण्ड    |    विकरित परमाणु पुंज    |    योग तत्व मुद्राएं    |    योग में मुद्रा का महत्व    |    वर्गणा और मुद्रा

 

आसन के अंदर भी अलग-अलग तरह की मुद्राएं होती हैं जिन्हें अंग्रेजी में पोज या पोस्चर कहा जाता है। ये आकृतियां मुख्य रूप से प्राणियों के शरीर रचना की अनुकृतियां होती हैं, आसन स्थूल हैं। आसनों की ऊंची भूमिकाओं में मुद्राएं प्रकट होती हैं। जिस प्रकार से शब्द की बारीक आवाज नाद है, वैसे ही शरीर के अंतरंग सूक्ष्म स्पंदन का अवतरण मुद्रा है। जब ध्यान लगाने पर मुद्राओं का अवतरण आसान और सहज होने लगता है तब साधक ध्यान के रास्ते पर प्रगति करने लगता है।