सेब


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सतरंगी (सप्तचक्रा)

सुपारी

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संतरा

सनाय

सौंफ

सिंघाड़ा

सुदर्शन

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  सेब एक फल है जिसकी गणना उत्तम कोटि के फलों में की जाती है। इसका मूल देश यूरोप और एशिया के ठंडे पहाड़ी प्रदेश है। सेब के गुणों की प्रशंसा में अनेक लोकोक्तियां प्रसिद्ध हैपरिचय :

       सेब एक फल है जिसकी गणना उत्तम कोटि के फलों में की जाती है। इसका मूल देश यूरोप और एशिया के ठंडे पहाड़ी प्रदेश है। सेब के गुणों की प्रशंसा में अनेक लोकोक्तियां प्रसिद्ध है जैसे सोते समय रोजाना एक सेब खाते रहे तो डाक्टर छाती पीट कर रह जायें। सेब के पेड़ की ऊंचाई ज्यादा बड़ी नही होती है। सेब की अनेक किस्में होती है। इनमें गोल्डन डिलीशन, प्रिन्स आल्बर्ट, चार्ल्स रोस, न्यूटन वन्डर, बेमले सीडलिग, लेकस्टन सुपर्व, ब्लेनहीम आरेन्ज, आरेन्ज पिपिन, रेड सोल्जर और अमेरिकन मदुर ये दस किस्में खास और प्रसिद्ध है। सेब का अचार, मुरब्बा, चटनी और शर्बत भी बनाया जाता है।

स्वरूप :

        सेब काफी पुराना फल है। इसकी प्राचीनता का प्रमाण यही से मिलता है कि चीन, बेबीलोन और मिस्र के साहित्य में इसका उल्लेख मिलता है। इसकी बहुत सी प्रजातियां है और हर प्रजाति के स्वाद, आकार और रंगत में भिन्नता होती है। इस समय विश्व में सेब की लगभग 7,000 किस्में पाई जाती है।

        भारत के पर्वतीय क्षेत्र में सेब का उत्पादन ज्यादा होता है। नैनीताल में इसकी सबसे ज्यादा पैदावार होती है। उत्पादन के मामले मे दूसरे नंबर पर अल्मोड़ा है। हिमाचल प्रदेश, कश्मीर और गढ़वाल में भी इसका अच्छा उत्पादन होता है। हमारे देश मे कश्मीर का सेब काफी प्रसिद्ध है। भारत में सेब को एक व्यावसायिक फसल माना गया है। इसका उत्पादन क्षेत्र 6,000 से 8,000 फीट ऊंची पहाडियां है। सेब की विशेषता यह है कि यह ऊपर से देखने में ठोस लगता है, परंतु इसका छिलका मुलायम और भीतरी भाग गूदेदार होता है। इसकी गोलाई 5 से 8 सेंटीमीटर तक होती है।

तासीर :

      सेब का स्वाद खट्टा-मीठा होता है। खट्टे-मीठे स्वाद वाला सेब ही उत्तम माना जाता है। सेब पित्त-वायु को शांत करता है। तृषा (प्यास) मिटाता है और आंतों को मजबूत करता है। आमयुक्त पेचिश मिटाने का गुण भी सेब में है। सेब का ऊपर वाला छिलका निकालकर खाने से मीठे लगते है। सेब को छील कर नही खाना चाहियें क्योंकि इसके छिलके में कई महत्वपूर्ण क्षार होते है। सेब के टुकड़ों को शक्कर में रखने के बाद खाने से वे बहुत मीठे लगते है। सुबह खाली पेट खाने पर सेब ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। रक्तचाप को कम करने में यह उत्तम माना जाता है। यह शरीर में स्थित विषाक्त तत्व को दूर करता है। सेब का सेवन करने से दांत और मसूढ़ें मजबूत बनते है। सेब के छोटे-छोटे टुकड़े करके कांच या चीनी मिट्टी के बर्तन में चांदनी रात में बाहर रखकर रोज सुबह-शाम 1 महीने तक सेवन करने से शरीर तन्दुरुस्त बनता है।

वैज्ञानिक मतानुसार :

      सेब में, ग्लूकोज, कार्बोहाइड्रेट, पोटेशियम, फास्फारस, लौह, ईथर, मैलिक एसिड, लिसिथिन, खनिज आदि क्षार है। इसमें विटामिन ‘बी और ‘सी भी है। सेब में टार्टरिक एसिड होने के कारण आमाशय में सेब मात्र एक घंटा में ही पच जाता है और साथ ही खाए हुए अन्नाहार को भी पचा देता है।

यूनानियों के अनुसार :

      सेब हृदय (दिल), मस्तिष्क (दिमाग), यकृत (जिगर) और जठर को बल देता है। भूख को बढ़ाता है और शरीर की कान्ति (चमक) में वृद्धि करता है। 

सेब में पाये जाने वाले तत्त्व :

तत्त्व मात्रा
प्रोटीन 0.3 प्रतिशत
वसा 0.1 प्रतिशत
कार्बोहाइड्रेट 9.5 प्रतिशत
पानी 85.9 प्रतिशत
विटामिन-बी 40 प्रतिशत
कैल्शियम 0.01 प्रतिशत
फांस्फोरस 0.02 प्रतिशत
लौह लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग, 100 ग्राम
तांबा थोड़ी मात्रा में
विटामिन–सी थोड़ी मात्रा में

हानिकारक :

         सेब के सेवन की मात्रा 1 बार में 1 से 3 सेब तक है। गला बैठने की दशा में तथा गायक कलाकारों को सेब का सेवन नही करना चाहियें।

गुण :

  •  सेब में फास्फोरस होता है। अर्थात जलन करने वाला पदार्थ होता है। जिसे खाने से पेट साफ होता है और आमाशय की पुष्टि होती है।
  • 2 सेब के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर उस पर आधा लीटर उबलता हुआ पानी डालकर रख दें। जब वह पानी ठंडा हो जायें तो उसे छानकर पी लें। अगर उसमें मिठास की आवश्यकता हो तो उसमें मिश्री मिला लें। यह सेब का पौष्टिक और स्वादिष्ट शर्बत है। यह शर्बत जल्दी ही खून में मिलकर हृदय (दिल), मस्तिष्क (दिमाग), यकृत (जिगर) और शरीर के प्रत्येक कोष में शक्ति एवं स्फूर्ति पहुंचाती है।
  • दांत गलते हो, दांतो में छेद हो, मसूढ़े फूलते हों तो ऐसी दशा में भोजन के बाद रोज सेब खाने से फायदा होता है। इसके प्रयोग से दांत और मसूढ़े ठीक हो जाते हैं।

सेब 

Apple

 

परिचय :

   सेब एक फल है जिसकी गणना उत्तम कोटि के फलों में की जाती है। इसका मूल देश यूरोप और एशिया के ठंडे पहाड़ी प्रदेश है। सेब के गुणों की प्रशंसा में अनेक लोकोक्तियां प्रसिद्ध है जैसे सोते समय रोजाना एक सेब खाते रहे तो डाक्टर छाती पीट कर रह जायें। सेब के पेड़ की ऊंचाई ज्यादा बड़ी नही होती है। सेब की अनेक किस्में होती है। इनमें गोल्डन डिलीशन, प्रिन्स आल्बर्ट, चार्ल्स रोस, न्यूटन वन्डर, बेमले सीडलिग, लेकस्टन सुपर्व, ब्लेनहीम आरेन्ज, आरेन्ज पिपिन, रेड सोल्जर और अमेरिकन मदुर ये दस किस्में खास और प्रसिद्ध है। सेब का अचार, मुरब्बा, चटनी और शर्बत भी बनाया जाता है।

स्वरूप :

   सेब काफी पुराना फल है। इसकी प्राचीनता का प्रमाण यही से मिलता है कि चीन, बेबीलोन और मिस्र के साहित्य में इसका उल्लेख मिलता है। इसकी बहुत सी प्रजातियां है और हर प्रजाति के स्वाद, आकार और रंगत में भिन्नता होती है। इस समय विश्व में सेब की लगभग 7,000 किस्में पाई जाती है।

          भारत के पर्वतीय क्षेत्र में सेब का उत्पादन ज्यादा होता है। नैनीताल में इसकी सबसे ज्यादा पैदावार होती है। उत्पादन के मामले मे दूसरे नंबर पर अल्मोड़ा है। हिमाचल प्रदेश, कश्मीर और गढ़वाल में भी इसका अच्छा उत्पादन होता है। हमारे देश मे कश्मीर का सेब काफी प्रसिद्ध है। भारत में सेब को एक व्यावसायिक फसल माना गया है। इसका उत्पादन क्षेत्र 6,000 से 8,000 फीट ऊंची पहाडियां है। सेब की विशेषता यह है कि यह ऊपर से देखने में ठोस लगता है, मगर परंतु इसका छिलका मुलायम और भीतरी भाग गूदेदार होता है। इसकी गोलाई 5 से 8 सेंटीमीटर तक होती है।

तासीर :

   सेब का स्वाद खट्टा-मीठा होता है। खट्टे-मीठे स्वाद वाला सेब ही उत्तम माना जाता है। सेब पित्त-वायु को शांत करता है। तृषा (प्यास) मिटाता है और आंतों को मजबूत करता है। आमयुक्त पेचिश मिटाने का गुण भी सेब में है। सेब का ऊपर वाला छिलका निकालकर खाने से मीठे लगते है। सेब को छील कर नही खाना चाहियें क्योंकि इसके छिलके में कई महत्वपूर्ण क्षार होते है। सेब के टुकड़ों को शक्कर में रखने के बाद खाने से वे बहुत मीठे लगते है। सुबह खाली पेट खाने पर सेब ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। रक्तचाप को कम करने में यह उत्तम माना जाता है। यह शरीर में स्थित विशाक्त तत्व को दूर करता है। सेब का सेवन करने से दांत और मसूढ़ें मजबूत बनते है। सेब के छोटे-छोटे टुकड़े करके कांच या चीनी मिट्टी के बर्तन में चांदनी रात में बाहर रखकर रोज सुबह-शाम 1 महीने तक सेवन करने से शरीर तन्दुरुस्त बनता है।

वैज्ञानिको के अनुसार :

   सेब में, ग्लूकोज, कार्बोहाइड्रेट पोटेशियम, फास्फारस, लौह, ईथर, मैलिक एसिड, लिसिथिन, खनिज आदि क्षार है। इसमें विटामिन बी और सी भी है। सेब में टार्टरिक एसिड होने के कारण आमाशय में सेब मात्र एक घंटा में ही पच जाता है और साथ ही खाए हुए अन्नाहार को भी पचा देता है।

युनानियों के अनुसार :

  सेब हृदय (दिल), मस्तिष्क (दिमाग), यकृत (जिगर) और जठर को बल देता है। भूख को बढ़ाता है और शरीर की कान्ति (चमक) में वृद्धि करता है। 

                   सेंब में पायें जाने वाले तत्त्व :-

तत्त्व

मात्रा

प्रोटीन

0.3 प्रतिशत

वसा

0.1 प्रतिशत

कार्बोहाइड्रेट

9.5 प्रतिशत

पानी

85.9 प्रतिशत

विटामिन-बी

40 प्रतिशत

कैल्शियम

0.01 प्रतिशत

फांस्फोरस

0.02 प्रतिशत

लौह

लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग, 100 ग्राम

तांबा

थोड़ी मात्रा में

विटामिन–सी

थोड़ी मात्रा में

हानिकारक :

   सेब के सेवन की मात्रा 1 बार में 1 से 3 सेब तक है। गला बैठने की दशा में तथा गायक कलाकारों को सेब का सेवन नही करना चाहियें।

गुण :

सेब में फास्फोरस होता है। अर्थात जलन करने वाला पदार्थ होता है। जिसे खाने से पेट साफ होता है और आमाशय की पुष्टि प्राप्त होती है।

·       

2 सेब के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर उस पर आधा लीटर उबलता हुआ पानी डालकर रख दें। जब वह पानी ठंडा हो जायें तो उसे छानकर पी लें। अगर उसमें मिठास की आवशकता हो तो उसमें मिश्री मिला लें। यह सेब का पौश्टिक और स्वादिष्ट शर्बत है। यह शर्बत जल्दी ही खून में मिलकर हृदय (दिल), मस्तिष्क (दिमाग), यकृत (जिगर) और शरीर के प्रत्येक कोष में शक्ति एवं स्फूर्ति पहुंचाती है।

·       

दांत गलते हो, दांतो में छेद हो, मसूढ़े फूलते हों तो ऐसी दशा में भोजन के बाद रोज सेब खाने से फायदा होता है। इसके प्रयोग से दांत और मसूढ़े ठीक हो जाते हैं।


For reading tips click below links     विभिन्न रोगों का सेब से उपचार :
1. जुकाम :

जुकाम :

कमजोर दिमाग के कारण भी सर्दी-जुकाम बना रहता है। ऐसे रोगियों को जुकाम की दवाओं के सेवन से लाभ नही होता इसलियें ऐसे रोगियों का जुकाम ठीक करने के लिये भोजन से पहले छिलके सहित सेब खाने से दिमाग की कमजोरी दूर होकर जुकाम ठीक हो जाता है।
2. खांसी :

खांसी :

पके हुए सेब का रस 1 गिलास निकालकर मिश्री मिलाकर सुबह के समय पीते रहने से पुरानी खांसी में लाभ होता है।
3. सूखी खांसी :

सूखी खांसी :

रोजाना पके हुए मीठे सेब खाने से सूखी खांसी में लाभ होता है। मानसिक रोग, कफ (बलगम), खांसी, टी.बी रोग में सेब का रस व मुरब्बा खाने से फायदा होता है।
4. आंत्रज्वर (टायफायड) :

आंत्रज्वर (टायफायड) :

सेब का मुरब्बा 15-20 दिन लगातार खाते रहने से दिल की कमजोरी और दिल का बैठना ठीक हो जाता है।
5. हाई बल्डप्रैशर :

हाई बल्डप्रैशर :

हाई बल्डप्रैशर होने पर 2 सेब रोज खाने से लाभ होता है।
6. याददाश्तवर्धक :

याददाश्तवर्धक :

जिन लोगों के मस्तिष्क (दिमाग) और स्नायु दुर्बल हो गए हों, याददाश्त की कमी हो, उन लोगों को सेब के सेवन करने से याददाश्त बढ़ जाती है, इस हेतु 1 या 2 सेब बिना छीले खूब चबा-चबाकर भोजन से 15 मिनट पहले खायें।
7. पथरी :

पथरी :

गुर्दे और मूत्राशय में पथरियां बनती रहती हो या आपरेशन कराके पथरी निकाल देने के बाद भी पथरी रह जाती हो तो ऐसे में सेब का रस पीते रहने से पथरी बनना बंद हो जाती है तथा बनी हुई पथरी घिस-घिस कर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है। यह गुर्दो को शुद्ध करता है, गुर्दे का दर्द दूर होता है। यदि कुछ दिन रोगी केवल सेब खाकर ही रहें तो पथरी निकल जाती है। ज्यादा भूख लगे तो और दूसरी साग-सब्जी या फल खायें।
8. पेशाब ज्यादा आने पर :

पेशाब ज्यादा आने पर :

सेब खाने से रात को बार-बार पेशाब जाना कम हो जाता है।
9. नींद न आने पर :

नींद न आने पर :

सेब का मुरब्बा खाने से नींद आने लगती है। सेब खाकर सोना भी नींद लाने में सहायक है।
10. शराब पीने की आदत पर :

शराब पीने की आदत पर :

सेब का रस बार-बार सेवन करने से अथवा अच्छी तरह पका हुआ 1-1 सेब रोजाना 3 बार खाते रहने से शराब पीने की आदत छूट जाती है। नशे के समय सेब खाने से शराब का नशा उतर जाता है। सेब का रस भी पीया जा सकता है। भोजन के साथ सेब खाने से भी शराब की आदत छूट जाती है।
11. भूख न लगने पर :

भूख न लगने पर :

1 गिलास सेब के रस में स्वाद के अनुसार मिश्री मिलाकर रोजाना कुछ दिनों तक पीते रहने से भूख अच्छी तरह लगने लग जाती है। खट्टे सेब के रस में आटा गूंदकर रोटी बनाकर रोजाना खाना भी फायदेमंद है।
12. मलेरिया ज्वर :

मलेरिया ज्वर :

मलेरिया के ज्वर (बुखार) में सेब खाने से बुखार जल्दी ठीक होता है।
13. बच्चों के पेट के रोगों में :

बच्चों के पेट के रोगों में :

बच्चों को रोजाना सेब खिलाने से बच्चों के पेट के सभी रोग ठीक हो जाते हैं।
14. बच्चों के दस्त पर :

बच्चों के दस्त पर :

जब बच्चों को दूध नही पचता हो, दूध पिलाते ही उल्टी और दस्त आते हों तो ऐसी दशा में उनका दूध बंद करके थोड़े-थोड़े समय बाद सेब का रस पिलाने से उल्टी और दस्तों में आराम आ जाता है। पुराने दस्तों में भी सेब का रस लाभकारी है। मरोड़ लगकर होने वाली बड़ों के दस्तों में भी यह फायदेमंद है। सेब खून के दस्तों को भी बंद करता है। दस्तों में सेब बिना छिलके वाली होनी चाहियें। दस्तों में सेब का मुरब्बा भी फायदेमंद है। सेब के छिलके उतारकर छोटे-छोटे टुकड़े करके दूध में उबालें। इस दूध का आधा कप हर घण्टे के बीच रोगी को पिलाने से दस्त बंद हो जाते है।
15. लीवर को मजबूत करना :

लीवर को मजबूत करना :

लीवर (जिगर) के रोगों में सेब का सेवन फायदेमंद है। इससे लीवर (जिगर) को शक्ति मिलती है।
16. आंतों में घाव व सूजन पर :

आंतों में घाव व सूजन पर :

सेब का रस पीते रहने से आंतों के घाव और सूजन में आराम मिलता है।
17. कब्ज :

कब्ज :

  • खाली पेट सेब खाने से कब्ज (पेट की गैस) दूर होती है। खाना खाने के बाद सेब खाने से कब्ज होती है। सेब का छिलका दस्तावर होता है। कब्ज वाले रोगियों को सेब छिलके सहित ही खाना चाहियें।
  • सेब, अंगूर या पपीता खाने से कब्ज (पेट की गैस) में राहत मिलती है। सेब छिलके सहित सुबह खाली पेट खाने से कब्ज (पेट की गैस) ठीक हो जाती है।
18. पेट के कीड़ों पर :

पेट के कीड़ों पर :

2 सेब रात को सोते समय कुछ दिन यानी कम से कम 7 दिन तक खाने से कीड़े मरकर गुदामार्ग से मल के साथ बाहर आ जाते हैं। सेब खाने के बाद रात भर पानी न पीएं।
19. मस्सा और तिल :

मस्सा और तिल :

खट्टी सेब का रस मस्सों पर लगने से मस्सों के छोटे-छोटे टुकड़े होकर मस्से जड़ से गिर जाते हैं।
20. बुखार :

बुखार :

सेब के पेड़ की 4 ग्राम छाल और 200 ग्राम पत्ते उबलते हुए पानी में डालकर 10-15 मिनट तक ढंक कर रखें। उसके बाद उसे छान लें। उसमें 1 टुकड़ा नीबू का रस और 10 ग्राम या 20 ग्राम चीनी मिलाकर खाने से बुखार की घबराहट, प्यास, थकान और जलन दूर होती है यह यकृत के विकार (जिगर के होने वाले रोग) से आने वाले बुखार में भी लाभदाक है। इस प्रयोग से बुखार उतरता है और मन खुश रहता है।
21. पाचनक्रिया खराब होने पर :

पाचनक्रिया खराब होने पर :

सेब को अंगारों पर सेंक कर खाने से बिगड़ी हुई पाचनक्रिया (भोजन पचाने की क्रिया) में भी सुधार होता है।
22. मल में रूकावट होने पर :

मल में रूकावट होने पर :

रात में सेब खाने से जीर्ण मलावरोधक और जरावस्था का मलावरोध मिटता है और उदर (पेट) साफ होता है।
23. दांत साफ करने के लिए :

दांत साफ करने के लिए :

सेब का रस सोड़े के साथ मिलाकर दांतों पर मलने से दांतो से निकलने वाला खून बंद होता है और दांतों पर जमी हुई पपड़ी दूर होती है और दांत साफ बनते हैं।
24. स्वास्थ सुधारने के लिए:

स्वास्थ सुधारने के लिए:

सेब का ताजे रस में शहद मिलाकर पीने से कुछ ही दिनों में सेहत मे सुधार दिखाई पड़ता है।
25. दांतों की बीमारी :

दांतों की बीमारी :

जिन लोगो के दांतों से खून निकलता हो और दांतों पर मैल जमी हो उन्हें सेब के रस में खाने वाला सोडा मिलाकर दांतों पर रोजाना 2 से 3 बार मलना चाहिए।
26. खांसी :

खांसी :

पके हुई सेब का रस निकालकर उसमें मिश्री मिलाकर रोजाना सुबह पीने से खांसी बंद हो जाती है।
27. आमाशय (पेट) का जख्म :

आमाशय (पेट) का जख्म :

  • 1 सेब में लौंग को अच्छी तरह चारों तरफ से चुभों दें कि कोई भाग खाली न रह जायें। फिर 40 दिन बाद लौंगों को निकाल कर शीशी में रख दें। खाना खाने के बाद एक लौंग को चूसने से पेट का घाव भरने लगता है।
  • 250 मिलीलीटर गर्म पानी में 1 सेब के टुकड़े-टुकड़े कर डाल दें और उसे ढक दें। 15 मिनट के बाद उसे निचोड़कर छान लें। इसमें 2 चम्मच शहद डालकर पीने से अल्सर (पेट के जख्म) मे लाभ होता है।
  • सेब का रस पीने से शरीर के पाचन अंगो पर एक पतली तह चढ़ जाती हैं जिसकी मदद से संक्रमण और बदबू से रक्षा होती है और पेट में गैस नहीं बनती है। मलाशय (वह स्थान जहां भोजन पचकर मल एकत्रित होता है) और निचली आंतों में दुर्गन्ध को होने नहीं देता है। साथ-ही साथ सेब के रस के बाद गुनगुना पानी पीने से आंतों में होने वाले घाव (जख्म) और सूजन में लाभ मिलता है।
28. मसूढ़ों का रोग :

मसूढ़ों का रोग :

मसूढ़े फूलते हों तो खाना खाने के बाद रोजाना 1 सेब खायें। इससे दांत व मसूढ़ों के रोग ठीक हो जाते है।
29. वमन (उल्टी) :

वमन (उल्टी) :

कच्चे सेब के रस में सेंधा नमक मिलाकर पीने से उल्टी होना बंद हो जाती है।
30. दस्त के लिए :

दस्त के लिए :

  • सेब का रस पिलाने से छोटे बच्चों को दूध के पीने से होने वाली उल्टी और दस्त में लाभ मिलता हैं।
  • सेब को छोटे-छोटे टुकड़े में काटकर गर्म पानी में डालकर निचोड़कर रख लें, फिर इसी पानी युक्त रस में शहद को मिलाकर रोगी को देने से दस्त और उल्टी में लाभ पहुंचता हैं।
  • रोजाना सेब का मुरब्बा खाने से दस्त बंद हो जाते है।
31. मूत्ररोग :

मूत्ररोग :

रोजाना सेब का रस पीने से बहुमूत्रता (बार-बार पेशाब आना), गुर्दे का दर्द एवं मूत्राशय की पथरी दूर होती है।
32. कमजोरी :

कमजोरी :

  • सेब का रोजाना सेवन करने से हृदय (दिल), मस्तिष्क (दिमाग) और आमाशय को समान रूप से शक्ति मिलती है। इससे कमजोरी भी मिट जाती है।
  • सुबह 2-3 सेब खाकर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से कमजोरी दूर हो जाती है।
33. जिगर का रोग :

जिगर का रोग :

सेब के सेवन से यकृत (जिगर) को शक्ति मिलती है।
34. प्यास अधिक लगना :

प्यास अधिक लगना :

सेब का रस पानी में मिलाकर पीने से प्यास कम लगती है। जिन्हें वायु विकार हो उन्हें सेब का रस नहीं पीना चाहिए।
35. मोटापा का रोग :

मोटापा का रोग :

सेब और गाजर को बराबर मात्रा में कद्दूकस करके रख लें, सुबह खाली पेट जितना खा सकें उतना या 200 ग्राम की मात्रा में खाने के बाद लगभग 2 घण्टे तक कुछ न खाने से वजन कम होता है शरीर में स्फूर्ति आती है और सुन्दरता में लाभ होता है।
36. मोटापे की बढ़ोत्तरी के लिए :

मोटापे की बढ़ोत्तरी के लिए :

सेब और गाजर को बराबर मात्रा में छिलके सहित घिसकर दोपहर के भोजन के बाद खाने से मोटापा बढ़ता और कमजोरी मिटती है।
37. पेट के सभी प्रकार के रोग :

पेट के सभी प्रकार के रोग :

रोजाना दिन में 1 से 3 बार सेब खाने से बच्चों के पेट के रोगों में लाभ होता है।
38. पेट के कीड़ों के लिए :

पेट के कीड़ों के लिए :

रात को सोने से पहले कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेब खाकर ऊपर से पानी पीने से कीड़े मरकर सुबह मल के साथ बाहर निकल जाते हैं।
39. नींद ना आना (अनिंद्रा) :

नींद ना आना (अनिंद्रा) :

लगभग 10 से 20 ग्राम सेब की जड़ का चूर्ण सुबह और शाम रोगी को खिलाने से नींद अच्छी आती है।
40. आधासीसी (माइग्रेन) अधकपारी :

आधासीसी (माइग्रेन) अधकपारी :

रोजाना सुबह खाली पेट आधा सेब खाने से आधे सिर का दर्द हमेशा के लिए चला जाता है।
41. मुर्च्छा (बेहोशी) :

मुर्च्छा (बेहोशी) :

पके हुए सेब के रस को मिश्री मिलाकर बेहोश रोगी को पिलाने से बेहोशी दूर हो जाती है।
42. दिल की तेज धड़कन :

दिल की तेज धड़कन :

100 मिलीलीटर सेब के रस में 10 ग्राम शहद मिलाकर पीने से दिल की तेज धड़कन सामान्य हो जाती है।
43. चेहरे की झाई के लिए :

चेहरे की झाई के लिए :

सेब का थोड़ा सा गूदा लेकर उसमें बेसन, चंदन का पाउडर और हल्दी मिलाकर लेप बनाकर चेहरे पर हल्कें-हल्के हाथों से लगाकर मालिश करनी चाहिए। चेहरे की झुर्रियां, मुहांसे और दाग-धब्बे दूर करने में यह बहुत ही लाभकरी है।
44. चर्म रोग के लिए :

चर्म रोग के लिए :

सेब को पीसकर उसका रस चमड़ी के रोगों पर लगाने से चमड़ी के रोगों मे लाभ होता है।
45. दिल की कमजोरी :

दिल की कमजोरी :

रोजाना सेब या सेब का मुरब्बा खाने से शारीरिक शक्ति बढ़ने से दिल की कमजोरी दूर होती है।
46. त्वचा के रोग के लिए :

त्वचा के रोग के लिए :

सेब रोजाना खाने से चमड़ी के रोगों ठीक हो जाते हैं।
  • 1 सेब को अच्छी तरह से पीसकर लेप बना लें। इस लेप को हल्के हाथ से चेहरे पर लगा लें। 10 से 15 मिनट के बाद चेहरे को गर्म पानी से धो ले। इससे जिनकी तेलीय त्वचा होती है वो ठीक हो जाती है।
47. दिल की कमजोरी :

दिल की कमजोरी :

दिल की कमजोरी दूर करने के लिए सेब खाना लाभदायक है।
48. मानसिक उन्माद (पागलपन) :

मानसिक उन्माद (पागलपन) :

सेब के शर्बत में ब्राह्मी के चूर्ण को मिलाकर पागलपन के रोगी को पिलाने से गर्मी के कारण हुआ पागलपन ठीक हो जाता है।
49. सिर का दर्द :

सिर का दर्द :

सेब को काटकर उस पर सेंधा नमक डालकर खाने से कुछ दिनों में ही होने वाला सिर दर्द हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
50. याददाश्त कमजोर होना :

याददाश्त कमजोर होना :

भोजन करने से 15 मिनट पहले 1-2 सेब बगैर छीले खाने से विद्यार्थियों की याददाश्त मजबूत हो जाती है।



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