सूर्य की सातों किरणों द्वारा धूप स्नान

Dhoop men saton rango ki kiranon ke roganashak gun rahate hain jinki prapti hamen dhoop sanan, soory sanan, sptkiran sanan men hoti hai. Sardiyon ke dinon men waise to sabhi nange badan dhoop ka sanan karate hai.


सूर्य की सातों किरणों द्वारा धूप स्नान


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सप्तकिरण स्नान या धूपस्नान पूर्ण धूप स्नान की ही तरह होता है जो स्थानीय अथवा आंशिक रूप से लिया जाता है। सूर्य के प्रकाश के सातों रंगों की किरणों के एकत्र होने से सफेद रंग बनता है। इसी कारण से धूप का रंग सफेद होता है।

धूप में सातों रंगों की किरणों के रोगनाशक गुण रहते हैं जिनकी प्राप्ति हमें धूप-स्नान, सूर्य स्नान, सप्तकिरण स्नान से होती है। सर्दियों के दिनों में वैसे तो सभी नंगे बदन धूप का स्नान करते हैं। किन्तु रोग से पीड़ित होने की अवस्था में वैज्ञानिक तरीके से ही धूप का स्नान करके रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।

सूर्य स्नान के वैज्ञानिक तरीके-

1. सूर्य स्नान करते समय सिर को धूप से बचाकर रखना चाहिए। इसके लिए सिर को छाया में रखते हैं अथवा भीगे हुए रूमाल या हरे पत्तों से ढके रहना चाहिए। धूप स्नान से पूर्व सिर, मुंह और गर्दन को ठीक प्रकार से धोकर किसी साफ रूमाल से पोंछना आवश्यक होता है।

2. अधिक तेज धूप में सूर्य स्नान नहीं करना चाहिए। सूर्य स्नान के लिए सुबह के समय की किरणें और शाम के समय की किरणें लाभकारी होती हैं।

3. धूप स्नान का समय धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए। एक बार में धूप का स्नान 1 घंटे से अधिक समय तक नहीं करना चाहिए क्योंकि अधिक भोजन चाहे जितना भी स्वादिष्ट क्यों न हो वह शरीर के लिए हानिकारक होता है। उसी प्रकार सूर्य का तापमान भी होता है। उचित समय तक सूर्य स्नान करने से मानव के शरीर को विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं..............

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