सूजन


सूजन

Swelling


अन्य महत्वपूर्ण रोगों का उपचार:

एल्कोहल

उरूस्तम्भ

बदन दर्द

बाला रोग (नारू)

बौनापन

कैन्सर (कर्कट रोग)

चेहरे का लकवा

गर्दन का दर्द

अधिक गर्मी लगना

गीली खांसी

गिल्टी

हैजा (कालरा)

शरीर का सुन्न हो जाना

शरीर की जलन

सभी प्रकार के दर्द

शरीर के सभी रोगों से छुटकारा

शरीर को ताकतवर बनाना

टीके से उत्पन्न दोष

तृषा व दाह (प्यास और जलन)

हिचकी का रोग

हॉजकिन

च्छा-अनिच्छा

जलन

काली (कुकुर) खांसी

कमर दर्द

कमजोरी

कंठपेशियों का पक्षाघात

खांसी

कील कांटा चुभना

कुबड़ापन

पक्षाघात-लकवा- फालिस फेसियल परालिसिस

दीर्घ जीवी या लम्बी उम्

क्षय रोग (टी.बी.)

तालुरोग

धनुष्टंकार

थकावट होना

Read more articles

परिचय :

          जब शरीर में खून की कमी हो जाती है तो शरीर के अंग कार्य करना बन्द कर देते हैं और निष्क्रिय हो जाते हैं। इसी कारण मनुष्य के शरीर पर सूजन आ जाती है। पाण्डु (पीलिया) के रोग, जिगर रोग, हृदय रोग और मूत्र पिण्ड रोग इन चार कारणों से सूजन आ जाती है।

विभिन्न भाषाओं में नाम :

हिन्दी      सूजन
अरबी      ब्रण शोथ, फूला भिका
बंगाली          ब्रण शोथ, शोथा
गुजराती    गडगुम्बारा सोजो
कन्नड़          हुन्निया बावू, उटा बावू
मलयालम  व्रण विकम, नीरू
मराठी     सूज
उड़िया     बाथ, शोथ, शोथफूटा
तमिल          विक्कम, सोबइ
तेलगू      व्रणमू, इन्फ्लेमेशन, ननजू
अंग्रेजी          ड्रोप्सी, ओडेमा

कारण :

         शरीर पर सूजन आने के कारणों की जांच के लिए आजकल खून की जांच की जाती है। मूत्र परीक्षण, सोनोग्राफी और अन्य जांचों से सूजन के असली कारणों का पता चल जाता है। इसके अलावा उपवास करने, खट्टे या तीखे या गर्म चीजें खाने के कारण सूजन आ जाती है। खराब खाना-खाने के कारण भी शरीर पर सूजन आ जाती है। कभी-कभी चोट लगने के कारण भी सूजन आ जाती है।

लक्षण :

          सूजन स्वयं कोई बीमारी या रोग नहीं है। यह शरीर के किसी भाग में चोट या खराबी होने पर होती है। शरीर के जिस भाग में सूजन आती है, वहां पर वह भाग फुला हुआ और पिलपिला हो जाता है। इस भाग में पानी भरने के कारण यह भाग फूल जाता है। जिसको कि हाथ से दबाने पर वहां पर गड्ढा पड़ जाता है। इसके अलावा सूजन आने पर अरुचि (भोजन में इच्छा न कना), प्यास, हल्का बुखार, कमजोरी और त्वचा सूखी सी लगती है। गुर्दों में खराबी के कारण चेहरे पर, हृदय रोग के कारण जांघ और हाथों पर, यकृत या तिल्ली में खराबी के कारण पेट पर और स्त्रियों में मासिकधर्म (एम.सी.) की गड़बड़ी के कारण हाथ, मुंह और पैर पर सूजन आ जाती है।

भोजन और परहेज :

          शरीर की सूजन को कम करने के लिए अनाज या अन्न को छोड़ देना चाहिए और सिर्फ दूध और फल खाने चाहिए। पुराना जौ, कच्चा केला, मूली, गन्ने का रस, नारियल का पानी, चौलाई, गाजर, परवल, बकरी या गाय का दूध, जुलाब और गर्म पानी से स्नान करने से शरीर की सूजन में आराम मिलता है।

          सूजन बढ़ाने वाले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। गर्मी देने वाला भोजन, हींग, उड़द, सेम की फली, शराब, नमक, मिर्च, गुड़, दही, टमाटर, सरसों का साग, पान, तेल, खराब, बासी और नमकीन चीजों से परहेज करना चाहिए।

विभिन्न औषधियों से उपचार-

1. अरनी (गनियारी) :

  • बड़ी अरनी के पत्तों को पीसकर इसकी पट्टी सूजन पर बांधना चाहिए। इससे सूजन ठीक हो जाती है।
  • अरनी की जड़ का 100 मिलीलीटर काढ़ा बना लें। सुबह-शाम दोनों समय पीने से पेट के दर्द, जलोदर (पेट में पानी की अधिकता) और सभी प्रकार की सूजन मिट जाती है।
  • अरनी की जड़ और पुनर्नवा की जड़ दोनों को एक साथ पीसकर गर्म करके लेप करने से शरीर की ढीली पड़ी हुई सूजन ठीक हो जाती है।
  • सूजन पर अरनी को पीसकर लेप करें और इसी का पाउड़र 1 से 2 ग्राम सुबह और शाम चाटे। इससे लाभ मिलेगा।

2. भटकटैया : भट कटैया की जड़ का काढ़ा 20 से 40 मिलीलीटर या इसके पत्ते का रस चौथाई से 5 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से शरीर का दर्द कम हो जाता है।

3. मदार :

  • पीड़ित अंग पर अरण्डी का तेल लगाकर आक का गर्म पत्ता बांधे। इससे आराम मिलेगा।
  • आक के दुध में नमक मिलाकर पतला लेप बना लें। इस लेप को चोट, मोच का दर्द और सूजन वाले स्थान पर लगाए। इससे दर्द कम हो जाएगा तथा आराम मिलेगा। ध्यान रहें कि मोटा लेप न करें वरना जलन होकर फोड़ा बना सकता है।
  • आक के पत्तों पर एरण्ड का तेल गरम करके दर्द युक्त सूजन पर बांधे इससे दर्द और सूजन दोनों कम होती है।
  • आक के पत्तों को तेल में डालकर गर्म करें। इससे तेल से चोट के दर्द पर मालिश करने से आराम मिलता है।

4. कनेर :

  • लाल या सफेद फूल वाली कनेर के पत्तों का काढ़ा बना लें। इस काढ़े से सूजन वाली भाग पर मालिश करें। इससे आराम मिलेगा।
  • सूजनयुक्त दर्द को ठीक करने के लिए लाल या सफेद फूल वाली कनेर की जड़ को गाय के मूत्र में पीसकर दर्द वाले स्थान पर लगाएं।

5. बाकस (अडूसा) :

  • सूजन पर बाकस के पत्ते की पट्टी बांधने से आराम मिलता है।
  • लाल बाकस के पत्तों को नारियल के पानी में पीसकर लेप करें और इस पर मदार के पत्ते बांधे इससे सूजन दूर हो जाती है।

6. फरहद : फरहद के पत्तों को पीसकर लेप करने से सूजन कम हो जाती है और इसके साथ ही दर्द भी खत्म हो जाता है।

7. सहजन : सहजन की छाल को पीसकर गर्म-गर्म लेप करने से चोट-मोच की पीड़ा कम होती है।

8. सिनुआर : सिनुआर के पत्ते और जड़ से तेल निकाल लें। इस तेल से चोट-मोच, दर्द तथा सूजन के स्थान पर लगाने से आराम मिलता है।

9. सफेद गुंजा : किसी भी तरह के चोट मोच के कारण उत्पन्न दर्द व सूजन पर सफेद गुंजा के पत्ते का रस या इसके रस को तेल में मिलाकर लगाने से अधिक आराम मिलता है। यदि यह न मिले तो लाल गुंजा के पत्ते के रस या पत्ते का मिश्रण उपयोग में लिया जा सकता है।

10. अतिबला : दर्द वाले स्थान पर अतिबला से सिंकाई करने पर आराम मिलता है।

11. अगियारवर : किसी भी कारण से दर्द हो रहा हो तो उसे दूर करने के लिए अगियारवर के तेल से मालिश करें। इससे लाभ मिलेगा।

12. विदारी कन्द : चोट-मोच की सूजन पर विदारी कन्द को पीसकर बांधने से सूजन खत्म हो जाती है।

13. इन्द्रायण :

  • चोट, मोच या किसी भी तरह से उत्पन्न हुए दर्द या सूजन पर इन्द्रायण की जड़ को पीसकर लेप लगाने से आराम मिलता है।
  • इन्द्रायण की जड़ों को सिरके में पीसकर गरम करके सूजन वाली जगह पर लगाने से सूजन मिट जाती है।

14. दोपातीलता : चोट, मोच या इससे उत्पन्न सूजन पर दोपातीलता के पत्तों को पीसकर बांधने से आराम मिलता है।

15. गुड़मार : गुड़मार के पत्तों को पीसकर लेप करने से चोट और मोच के कारण से पैदा हुई सूजन में लाभ मिलता है।

16. पाताल गरूड़ी : चोट मोच के कारण उत्पन्न हुए सूजन को दूर करने के लिए पाताल गरूड़ी के पत्तों को पीसकर दर्द, सूजन और जलन युक्त स्थान पर लगाएं। इससे आराम मिलेगा।

17. बान्दा (बांझी) : बान्दा के पत्तों और फूल को पीसकर गरम-गरम लेप सूजन व दर्द वाले स्थान पर लगाएं। इससे आराम मिलता है।

18. सुदर्शन : सुदर्शन के पत्तों को गर्म करके इस पर एरण्ड़ तेल लगाकर रोग ग्रस्त स्थान पर बांध लें। इससे आराम मिलेगा।

19. गुलिया जैव- किसी भी तरह की सूजन में गुलिया जैव के पत्तों को पीसकर लेप करने से लाभ मिलता है।

20. अगस्त :

  • चोट, मोच की पीड़ा पर अगस्त के पत्तों का लेप करने से आराम मिलता है।
  • लाल अगस्ते और धतूरे की जड़ को साथ-साथ गर्म पानी में घिसकर उसका लेप करने से तुरन्त ही सभी प्रकार की सूजन नष्ट हो जाती है।

21. बरगद :

  • चोट, मोच की दर्द में बरगद का दूध अलसी के तेल में मिलाकर मालिश करने से दर्द कम होता है।
  • बरगद के पत्तों पर घी चुपड़कर (लगाकर) सूजन व दर्द युक्त स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

22. बेलिया पीपल : चोट, मोच व दर्द में बेलिया पीपल के जड़ और पत्तों से निकले तेल से मालिश करने पर अधिक आराम मिलता है।

23. पीपल : पीपल के दूध से मालिश (मसाज) करें। इससे सूजन व दर्द में आराम मिलता है।

24. कुम्भी : चोट मोच या किसी अन्य कारण से उत्पन्न दर्द युक्त सूजन को ठीक करने के लिए कुम्भी के पेड़ की छाल को पीसकर लेप करें।

25. कालामूका : कालामूका की छाल को पीसकर लेप करने या बांधने से दर्द कम हो जाता है।

26. बड़ी लोणा (बड़ी नोनी साग) : चोट-मोच की पीड़ा या चोट मोच की सूजन पर बड़ी लोणा (बड़ी नोनी साग) पीसकर लेप करने से पीड़ा और सूजन दोनों मिट जाती है।

27. चूका शाक : चोट, मोच से पैदा हुई सूजन पर चूका शाक को पीसकर लगाने या बांधने से सूजन, दर्द और जलन दूर होती है।

28. गाजर :

  • गाजर के 5 ग्राम बीजों को 250 मिलीलीटर पानी में उबालकर छानकर पीने से पेशाब आने के कारण होने वाली सूजन दूर हो जाती है।
  • लगभग 1 से 3 ग्राम की मात्रा में गाजर के बीजों को पीसकर चूर्ण बना लें और सुबह-शाम को इस चूर्ण का सेवन करने पेशाब खुलकर आता है, जिससे पूरे शरीर की सूजन ठीक हो जाती है।
  • शरीर पर सूजन होने पर गाजर को कसकर या कुचल कर इसे गर्म करके सूजन वाले भाग पर बांधने से सूजन या शोथ ठीक हो जाती है।
  • चोट मोच के कारण या किसी अन्य कारण से उत्पन्न सूजन पर गाजर को कद्दूकस पर कसकर गर्म करके बांधने से सूजन खत्म हो जाती है।

29. हस्तिकर्ण के फल : हस्तिकर्ण के फल को पीसकर लेप करने से दर्द ठीक हो जाता है।

30. गार (हब्बुलगार) : गार के तेल की मालिश करने से चोट मोच का दर्द ठीक हो जाता है।

31. निर्विशी : चोट-मोच के दर्द पर निर्विशी की जड़ को पीसकर लेप करने से आराम मिलता है।

32. पिसा : पिसा के बीजों का तेल मोच पर लगाने से लाभ होता है।

33. मैदालकड़ी : चोट-मोच के दर्द या सूजन पर मैदा लकड़ी की छाल को पीसकर लेप करने से आराम मिलता है।

34. हरमल- चोट और मोच का दर्द चाहे किसी भी तरह का क्यों न हो हरमल के बीज का चूर्ण 2 से 4 ग्राम रोजाना 2 बार खाने से दर्द में आराम मिलता है।

35. तिल :

  • तिल की खल कूटकर पानी में पकाकर हल्का गर्म करके मोच पर बांध दें। इससे दर्द में आराम मिलता है।
  • तिल के तेल और मक्खन को मिलाकर सूजन पर लगाकर मालिश करने से सूजन ठीक हो जाती है।
  • तिल, नींबू के पत्ते, सैंधव, हरिद्राफल, दारुहरिद्रा की जड़ और त्रिवृत की जड़ के चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर इसको घी में डालकर काढ़ा बनाकर शरीर के सूजन वाले स्थान पर लगाने से सूजन खत्म हो जाती है।
  • 10 ग्राम तिल और 100 ग्राम मूली को एक साथ खाने से चमड़ी के नीचे इकट्ठा हुआ, पानी खत्म हो जाता है तथा शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।
  • 2 चम्मच तिलों को पीसकर भैंस के मक्खन और दूध में शरीर के सूजन वाले भाग पर लगाने से सूजन खत्म हो जाती है।

36. एरण्ड : एरण्ड के बीज की गिरी 10 ग्राम और काले तिल 10 ग्राम दोनों को मिलाकर दूध में पीसकर हल्की आंच पर गर्म करके मोच पर बांधने से आराम मिलता है।

37. लहसुन :

  • लहसुन, गिलोय, गोखरू, मुण्डी, पुनर्नवा और त्रिफला का काढ़ा बनाकर रोगी को पिलाने से गुर्दे की खराबी के कारण होने वाली सूजन दूर हो जाती है।
  • लहसुन, बेलगिरी, कचूर, ग्वारपाठा और अम्बाहल्दी को पीसकर लेप की तरह से लगाने से किसी कीड़े के कारण काटने से होने वाली सूजन दूर हो जाती है।
  • लगभग 10 से 30 बूंद लहसुन के रस को दूध में मिलाकर या 2 से 3 ग्राम लहसुन के काढ़े को घी में मिलाकर खाने से हृदय मजबूत होता है और पेशाब खुलकर आता है जिसके फलस्वरूप शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।
  • 2 गांठ लहसुन को पीसकर 100 मिलीलीटर तेल में मिलाकर गर्म करके लगाने से दर्द दूर हो जाता है।

38. सरसों : 50 ग्राम सरसों के तेल में 5 ग्राम कपूर मिलाकर मालिश करने से दर्द ठीक हो जाता है।

39. पानी : शरीर के किसी भी भाग में, कैसा भी दर्द हो, पहले गर्म पानी से 3 मिनट सिंकाई करें। इसके तुरन्त बाद बर्फ जैसे ठंड़े पानी से एक मिनट सिंकाई करें। इससे आराम मिलता है।

40. गेहूं : गेहूं के आटे की रोटी को एक ओर कच्ची तथा एक ओर पक्की सेंक लें। रोटी के कच्ची की ओर तिल का तेल लगाकर दर्द वाले अंग पर बांधने से दर्द खत्म हो जाता है।

41. चना : कमर, हाथ, पैर या कहीं भी दर्द हो वहां बेसन लगाकर मालिश करने से दर्द ठीक हो जाता है।

42. इलायची :

  • इलायची को पीसकर दर्द व सूजन पर लगाएं। इससे आराम मिलता है।
  • इलायची के दाने, हींग, इन्द्रजव और सेंधानमक का काढ़ा बनाकर एरण्ड के तेल में मिला लें। इस तेल से कमर, हृदय, उदर, नाभि, पीठ, मस्तक तथा कान आदि भागों पर मालिश करने से आराम मिलता है।

43. इलायची छोटी : इलायची खाने से कई प्रकार के दर्द जैसे- सिर-दर्द, पेट का दर्द, मिचली और जोड़ों का दर्द आदि दूर हो जाते हैं।

44. कॉफी : कहीं भी कैसा भी दर्द हो, कॉफी पीने से दर्द कम हो जाता है। काफी में कैफीन तत्व होता है जो मस्तिष्क के अनुभव केन्द्र जिसे सेन्सरी कार्टेक्स कहा जाता है को प्रभावित कर उत्तेजना लाता है। इससे दर्द कम हो जाता है।

45. मेथी : 100 ग्राम मेथी के दानों को तवे पर इस तरह भूनें कि वे आधी कच्ची व आधी सिंकी हुई रहें। फिर इसे पीस लें। इसमें 25 ग्राम अर्थात 20 ग्राम काला नमक मिला दें। इसमें से सुबह-शाम 2 चम्मच गर्म पानी से लेने से जोड़ों का दर्द, कमर-दर्द, घुटनों का दर्द तथा हर प्रकार कें दर्द ठीक हो जाते हैं और गैस भी नहीं बनती है।

46. हल्दी : एक गिलास गर्म दूध में एक चाय के चम्मच भर हल्दी मिलाकर पीने से शरीर का दर्द दूर हो जाता है।

47. आंबाहल्दी : आंबा हल्दी को ग्वारपाठा (ऐलोवेरा) के गुदा पर डालकर कुछ गरम करके बांधने से सूजन दूर होती है।

48. दारूहल्दी : दारूहल्दी का बनाया हुआ लेप 2-3 बार सूजन लगाने से सूजन की कठोरता दूर होकर दर्द में आराम मिलता है।

49. जीरा : दर्द होने पर 2 चम्मच जीरा एक गिलास पानी में डालकर गर्म करके सिंकाई करने से लाभ मिलता है। इसके बाद जीरा को पीसकर दर्द वाली जगह लेप करने से लाभ मिलता है।

50. तारपीन :

  • 40 मिलीलीटर तारपीन का तेल में 10 ग्राम कपूर, 8 ग्राम नौसादर और 1 ग्राम अफीम पीसकर मिला लें। इसे धूप में 7 दिनों तक रखने के बाद दर्द के स्थान पर मालिश करने से आराम मिलता है।
  • तारपीन के तेल और सरसों के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर सूजन वाले स्थान पर लगाने से सूजन दूर हो जाती है।

51. पुनर्नवादि गुग्गुलु : पुनर्नवादि गुग्गुलु 2-2 गोली गर्म पानी के साथ सुबह-शाम लेने से दर्द दूर हो जाता है।

52. नारीकेल : नारीकेल लवन एक ग्राम पानी से सुबह-शाम लें। इससे दर्द में आराम मिलता है।

53 विल्वपत्र : घावों पर विल्वपत्ते की पट्टी लाभदायक होती है। इससे दर्द और सूजन कम होती है।

54. आलू : कच्चे आलू को सब्जी की तरह काट लें। जितना वजन आलुओं का हो, उसके डेड़ गुना पानी में उसे उबाले। जब पानी मात्र एक भाग शेष रह जाए तो इस पानी से चोट से आई हुई सूजन वाले अंग को धोएं और सिंकाई करें। इससे आराम मिलेगा।

55. मेहंदी : मेहंदी के पत्तों का लेप पीड़ित अंग पर लगाने से सूजन कम हो जाती है।

56. राई:

  • हाथ पैर मुड़ जाने से दर्द सूजन आ जाये तो अरण्ड के पत्तों पर राई का लेप चुपड़कर सूजन युक्त स्थान पर बांध दें। इससे आराम मिलता है।
  • राई और नमक को पानी में पीसकर लेप करने से भी सूजन खत्म हो जाती है।

57. मजीठ : मजीठ की जड़ और मुलेठी को समान मात्रा में पानी में पीसकर लेप बना लें। इस लेप को सूजन पर लगाने से सभी प्रकार की सूजन और दर्द में आराम मिलता है।

58. धनिया : धनिया का सेवन करने से सूजन दूर हो जाती है। धनिया का सेवन करने के बाद फलों का रस पीना चाहिए। इससे पाचन क्रिया सुधार हो जाता है और अधिक आराम मिलता है।

59. धतूरा :

  • धतूरे की जड़ को गोमूत्र में पीसकर लेप बना लें। इस लेप को गर्म करके सूजन पर लगाने से सूजन नष्ट हो जाती है।
  • धतूरा के पिसे हुए पत्तों में शिलाजीत मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को अण्डकोष की सूजन, पेट के अन्दर की सूजन, संधियों (जोड़ों) की सूजन और हडि्डयों की सूजन पर लगाने से लाभ मिलता है।

60. जटामांसी : जटामांसी के चूर्ण को पानी में पीसकर लेप बनायें और सूजन पर लगाएं। इससे सूजन ठीक हो जाती है।

61. मरूआ : मरूआ की टहनियों को पानी में उबालकर बफारा देने से पीड़ा युक्त सूजन और संधिवात में लाभ मिलता है।

62. द्रोणपुष्पी : द्रोणपुष्पी और नीम के पत्ते को पीसकर लेप बना लें। इसे गर्म करके सूजन पर लगाने से आराम मिलता है।

63. दूब हरी : दूब के रस में कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से सूजन ठीक हो जाती है।

64. मूली :

  • काले तिलों के साथ मूली का सेवन करने से सभी प्रकार की सूजन दूर हो जाती है।
  • सूखी मूली को जलाकर राख बनाकर सरसों के तेल में मिलाकर लेप बना ले। इस लेप को सूजन वाले स्थान पर लगाने से सूजन नष्ट हो जाती है।
  • 5 ग्राम तिल के साथ मूली के 1 से 2 ग्राम बीजों का सेवन दिन में 2 से 3 बार करने से सब प्रकार की सूजन मिट जाती है।
  • मूली के ताजे पत्तों का रस मूत्रल (पेशाब का अधिक आना) और मृदु विरेचक होता है।

65. कचनार : कचनार की जड़ को पानी में घिसकर लेप बनाएं। इसे गर्म करके सूजन पर लगाने से लाभ मिलता है।

66. चिरायता : चिरायता और सोंठ बराबर मात्रा में मिलाकर काढ़ा बना लें और एक कप की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करें। इससे शरीर की सूजन नष्ट हो जाती है।

67. चिरचिटा : चिरचिटा की लगभग 1 से 3 ग्राम पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) का क्षार नींबू के रस में या शहद के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से शारीरिक दर्द में आराम मिलता है।

68. काकड़ासिंगी : सूजन होने पर काकड़ासिंगी कोष को स्वस्थ गाय के मूत्र के साथ पीसकर लेप बना लें। इस लेप को सूजन वाले अंग पर लगाने से सूजन ठीक हो जाती है।

69. अदरक :

  • सोंठ, पिप्पली, जमालगोटा की जड़, चित्रक मूल, बायविडिंग इन सभी द्रव्यों को दोगुनी मात्रा हरीतकी चूर्ण में मिला दें। इसमें से 3 से 6 ग्राम चूर्ण गरम पानी के साथ सुबह लेने से सूजन नष्ट हो जाती है।
  • सोंठ, पिप्पली, पाण, गज पिप्पली, छोटी कटेरी, चित्रकमूल, पिप्पलामूल, हल्दी, जीरा मोथा इन सभी द्रव्यों को समान मात्रा में लेकर पीसकर छानकर मिला दें। इस चूर्ण को 2 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से त्रिदोष जनित सूजन तथा चिरकाल जनित सूजन नष्ट हो जाती है।
  • 10 से 20 मिलीलीटर अदरक के रस को गुड़ मिलाकर सुबह में सेवन करने से सभी प्रकार की सूजन ठीक हो जाती है।

70. काला धतूरा : धतूरे के पत्तों का रस, अफीम और सोंठ आदि को अच्छी तरह से पीसकर लेप बनाकर लगाने से वात का दर्द और हाथ-पैर की सूजन से छुटकारा मिल जाता है।

71. गदहपुरैना : लगभग 20 से 25 मिलीलीटर गदहपुरना की जड़ का रस दिन में 2 बार सूजन युक्त स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

72. रीठा : रीठा के लगभग 1 चौथाई ग्राम चूर्ण को शर्बत या पानी के साथ लेने से दर्द दूर हो जाता है।

73. कालीमिर्च : कालीमिर्च को पानी के साथ पीसकर लेप करने से सूजन खत्म हो जाती है।

74. काली राई : राई के तेल से मालिश करने से सूजन ठीक हो जाती है।

75. गुड़ : कांटा, पत्थर तथा कांच आदि पैरों में गड़ जाने पर गुड़ को आग पर रखकर गरम-गरम चिपका देने से आराम मिलता है।

76. अजमोद : अजमोद की जड़ का 10-20 मिलीलीटर क्वाथ या दो से पांच ग्राम चूर्ण किसी भी तरह के दर्द और शूजन में दिन में 2-3 बार लगाने से लाभ मिलता है।

77. गोखरू :

  • बड़े गोखरू के पंचांग को पीसकर सूजन वाले स्थान पर गर्म-गर्म लेप करने से सूजन दूर हो जाती है।
  • 50 ग्राम गोखरू को लगभग 400 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर 50 मिलीलीटर बाकी रहने पर इसमें 1 ग्राम शिलाजीत मिलाकर रोगी को पिलाने से उसके शरीर की सूजन दूर हो जाती है।

78. इमली :

  • इमली की छाल का चूर्ण अथवा राख गर्म जल में डालकर पीने से दर्द में लाभ मिलता है।
  • सूजन होने पर इमली के पत्तों को गर्म करके सूजन की सिंकाई करने से लाभ मिलता है।

79. ग्वारपाठा : घी ग्वार का पत्ता, सफेद जीरा और हल्दी को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को दिन में 2-3 बार सूजन पर लगाने से लाभ मिलता है।

80. अजवाइन : 50 ग्राम गर्म अजवायन को दोहरे कपड़े की पोटली में डालकर हल्का गर्म करके सूजन युक्त स्थान की सिंकाई करें। इससे आराम मिलता है। जरूरत हो तो जख्म पर कपड़ा डाल दें ताकि जले नहीं। किसी भी प्रकार की चोट पर अजवायन का सेंक रामबाण सिद्ध होता है।

81. गूलर : गूलर की छाल को पीसकर लेप करने से भिलावें की धुंए से उत्पन्न हुई सूजन ठीक हो जाती है।

82. गुड़हल : गुड़हल के पत्तों को पानी में पीसकर गाढ़ा लेप बना लें। इस लेप को सूजन पर लगाने से सूजन ठीक हो जाती है।

83. गुलाब :

  • किसी भी रूप में गुलाब के सेवन से दर्द ठीक हो जाता है। हृदय, मस्तिष्क और आमाशय का दर्द इसके सेवन से दूर हो जाता है तथा त्वचा की खुश्की कम हो जाती है।
  • शरीर में सूजन आने पर गुलाब के फूलों की पंखुड़ियों को पीसकर पानी में डालकर पतला करके सारे शरीर पर लेप या मालिश करें। इसके 1 घंटे बाद स्नान करने से शरीर की सूजन ठीक हो जाती है।

84. अलसी : 40 ग्राम कुटी हुई अलसी को 100 मिलीलीटर उबलते हुए पानी में डालकर धीरे-धीरे मिलायें। इस पानी में कपड़े को भिगोकर पुल्टिस बना लें। ध्यान रहें कि यह पुल्टिस बहुत मोटी नहीं होनी चाहिए। इस पुल्टिस का प्रयोग करते समय इसके नीचे के भाग पर तेल चुपड़कर लगाना चाहिए। इसके प्रयोग से सूजन व पीड़ा दूर होती है। ध्यान रहें कि अलसी की पुल्टिस सब पुल्टिसों में उत्तम है।

85. केसर : केसर को पानी के साथ पीसकर लेप करने से यकृत वृद्धि के कारण होने वाली सूजन दूर हो जाती है।

86. केला : सभी प्रकार की सूजन में केला खाना फायदेमन्द है। केले के छिलके गले के ऊपर बांधने से गले की सूजन ठीक हो जाती है और टॉन्सिल में भी लाभ मिलता है।

87. पुनर्नवा :

  • पुनर्नवा के पत्तों की सब्जी रोजाना सेवन करें तथा इसके बाद इसके जड़ का चूर्ण आधा चम्मच की मात्रा में आधा ग्राम नौसादर के साथ हल्का गर्म पानी से सुबह-शाम लेने से तुरन्त आराम मिलता है।
  • 20-20 ग्राम पुनर्नवा, नीम की छाल, पटोल के पत्तें, सोंठ, कटुकी, गिलोय, दारूहल्दी, हरड़ मिश्रित को लगभग 320 मिलीलीटर पानी में डालकर गर्म करें। जब इसका चौथाई भाग शेष रह जायें तो इसे छान लें।  इसमें से 20 से 30 मिलीलीटर की मात्रा सुबह और शाम पीने से सभी प्रकार की सूजन, उदर रोग (पेट के रोग), पाश्र्वशूल (कमर का दर्द), दमा आदि रोग ठीक हो जाते हैं।
  • 10-10 ग्राम पुनर्नवा की जड़, नागरमोथा लेकर कल्क (मिश्रण) बना लें। इसे 640 मिलीलीटर गाय के दूध में पकाकर सुबह और शाम पीने से लाभ मिलता है।
  • लगभग 1 चौथाई ग्राम पुनर्नवा मण्डूर दिन में 3 बार पानी के साथ लेने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।
  • पुनर्नवा की जड़, देवदारू तथा मूर्वा को मिलाकर 3 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सेवन कराने से गर्भावस्था से उत्पन्न शोथ (सूजन) ठीक हो जाती है।
  • पुनर्नवा की जड़, चिरायता और शुंठी, तीनों को बराबर मात्रा में मिला दें। इसमें से 20 ग्राम मात्रा को 400 मिलीलीटर पानी में पकाएं जब चौथाई भाग शेष रह जाए तो इस काढ़े को हल्का ठंड़ा करके पी लें। इस प्रकार से कुछ दिनों तक उपचार करने से लाभ मिलता है।

88. अमलतास : अमलतास के पत्तों को सेंककर सूजन युक्त स्थान पर बांधने से लाभ मिलता है।

89. खजूर : खजूर खाने से सूजन ठीक हो जाती है।

90. अनन्नास :

  • शरीर की सूजन के साथ पेशाब कम आता हो, एल्बूमिन पेशाब में आ रहा हो, मन्दाग्नि हो, आंखों के आस-पास और चेहरे पर विशेष रूप से सूजन हो तो ऐसी अवस्था में रोजाना अनन्नास खायें और पीने में सिर्फ दूध लें। इस प्रकार से उपचार करने पर कुछ ही दिनों में आराम मिल जाएगा।
  • यकृत वृद्धि, अग्निमान्द्य तथा आंखों के नीचे सूजन हो तो इच्छानुसार अनन्नास रस लगभग 10 से 15 दिन तक पीने से लाभ मिलता है।
  • अनन्नास के पत्तों पर एरण्ड तेल चुपड़कर कुछ गर्म करें और सूजन पर बांध दें। इससे आराम मिलेगा।

91. पवांड़ (चक्रमर्द) :

  • चक्रमर्द (पवांड़) के पत्तों को पानी में उबाल लें। इसके बाद इस पानी को छानकर 50 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से शरीर के किसी भी भाग के सूजन में आराम मिलता है।
  • चक्रमर्द (पवांड़) के पत्तों की सब्जी बनाकर लगातार 6 दिन तक खाने से सूजन दूर हो जाती है।

92. सिंघाड़ा : सिंघाड़े की छाल घिसकर लगाने से दर्द व सूजन खत्म हो जाती है।

93. सोंठ ::

  • सोंठ, सज्जीखार और हींग का चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करने से सारे तरह के दर्द नष्ट हो जाते हैं।
  • एक चुटकी सोंठ का चूर्ण और एक चम्मच करेले का ताजा जूस (रस) और आधा चम्मच नींबू के रस को मिलाकर भोजन करने के बाद सेवन करने से शरीर की सूजन दूर हो जाती है।
  • लगभग 400 मिलीलीटर पानी में 10-10 ग्राम की मात्रा में सोंठ, दारुहल्दी, गिलोय, हरड़ और पुनर्नवा को पीसकर उबालकर काढ़ा बनाएं और 50 मिलीलीटर पानी बाकी रहने पर इसे छानकर इसमें 1 ग्राम गुग्गल और 6 ग्राम गाय के पेशाब मिलाकर पीने से शरीर की सूजन दूर हो जाती है।

94. हल्दी :

  • लगभग 10 ग्राम की मात्रा में सोंठ को गुड़ के साथ मिलाकर खाने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।
  • हल्दी और चूने को बराबर मात्रा में लेकर शरीर के सूजन वाले भाग पर लगाने से शरीर की सूजन ठीक हो जाती है।
  • गर्म दूध के साथ लगभग 2 ग्राम हल्दी और लगभग 1 ग्राम मिश्री खाने से सूजन खत्म हो जाती है।
  • जल के साथ रोजाना एक चौथाई चम्मच पिसी हुई हल्दी की फंकी लेने से शरीर की सूजन ठीक हो जाती है।

95. नारियल : 1 साफ नारियल में थोड़ा-सा छेद करके उसमें नमक भर दें, फिर उस पर बाहर से मिट्टी लगाकर सुखा दें। सुख जाने के बाद उसे धीमी आग पर पकाएं। फिर नारियल के खोपरे को नमक के साथ पिसकर चूर्ण बना लें। इस बनें चूर्ण को पीपर (पीपल) के चूर्ण के साथ सेवन करने से सभी प्रकार के दर्द दूर हो जाते हैं।

96. करेला : 2 चम्मच करेले का रस और 2 चम्मच मकोय के रस को मिलाकर इसमें चुटकी भर सेंधानमक डाल दें। इसको खाली पेट 3-4 दिन तक पीने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।

97. नमक : गर्म पानी में नमक मिलाकर गरारे करने से या गर्म पानी के सेवन करने से ग्रंथि पर आई सूजन कम हो जाती है।

98. नागरमोथा : नागरमोथा, मुलेठी, कैथ की पत्ती तथा लाल चंदन को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इस बने हुए लेप को दर्द वाले अंग (भाग) पर लगाने से दर्द ठीक हो जाता है।

99. सूरजमुखी :

  • फोड़े के ऊपर सूरजमुखी के पत्ते बांधने से सूजन कम हो जाती है।
  • फोड़े-फुंसियों को सूरजमुखी के पत्ते के काढ़े से धोएं। इससे आराम मिलेगा और सूजन कम हो जाएगी।

100. एरण्ड :

  • किसी भी प्रकार की सूजन, आमवात इत्यादि में एरण्ड के पत्तों को गर्म करके इस पर तेल चुपड़कर बांधने से लाभ मिलता है।
  • एरण्ड के पत्तों पर सरसों का गर्म तेल लगाकर सूजन वाले अंग पर बांधने से शरीर के अंग की सूजन दूर हो जाती है।
  • एरण्ड के तेल को हल्का गर्म करके मालिश करने से घुटनों का दर्द और सूजन दूर हो जाती है।
  • छिले हुए एरण्ड के बीजों और गोधूम को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को घी में मिलाकर दूध में उबालें और लेप बना लें। इसे सूजन पर लगाने लाभ मिलता है।

101. पलास : पलास के फूल की पोटली बनाकर बांधने से सूजन नष्ट हो जाती है।

102. बेल : लगभग 10 से 15 मिलीलीटर बेल के पत्तों का रस 1 ग्राम मिर्च के चूर्ण के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से लाभ मिलता है।

103. अर्जुन : हृदय रोगों के अतिरिक्त शरीर के विभिन्न अंगों में पानी पड़ जाने और शरीर पर आई सूजन आ जाने पर अर्जुन का उपयोग करने से लाभ मिलता है।

104. अरहर : शरीर के सूजन वाले अंग पर 4 चम्मच अरहर की दाल को पीसकर बांधने से उस अंग की सूजन खत्म हो जाती है।

105. त्रिफला :

  • गाय के पेशाब में त्रिफला मिलाकर सुबह और शाम पीने से अण्डकोष (वृषण) में रुकी वात श्लेष्मज की सूजन कम होती जाती है।
  • त्रिफला, दो पोथी लहसुन, अर्जुन वृक्ष की छाल और साठी की जड़ का काढ़ा बनाकर रोगी को पिलाने से दिल की खराबी के कारण होने वाली सूजन दूर हो जाती है।

106. कद्दू : लगभग 8 से 10 कद्दू के बीजों की गिरी को निकालकर उनको शहद के साथ मिलाकर चाटने से सूजन खत्म हो जाती है।

107. सेंधानमक : सेंधानमक को सरसों के तेल में मिलाकर शरीर पर मालिश करने से सर्दी के कारण आने वाली हाथ पैरों और अंगुलियों की सूजन खत्म हो जाती है।

108. देवदारु :

  • देवदारु, सौंठ, हल्दी, हरड़, गिलोय, भारंगी, चीता और पुनर्नवा को बराबर मात्रा में लेकर 4 कप पानी में मिलाकर आग पर पकायें और जब आधा कप पानी रह जाए तो उसे आग पर से उतारकर छानकर पीने से हाथ, मुंह और पैर की सूजन खत्म हो जाती है।
  • लगभग 10-10 ग्राम की मात्रा में देवदारु, चित्रक, पीपरामूल और सोंठ को लेकर 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर इस पानी को पीने से शरीर की सूजन दूर हो जाती है।
  • लगभग 4 से 6 ग्राम की मात्रा में देवदारु का चूर्ण या लगभग 10 से 40 बूंद देवदारु के तेल (केलोन का तेल) का सेवन सुबह और शाम को करने से पसीना अधिक आता है, जिससे चमड़ी में पानी भरने के कारण आई सूजन दूर हो जाती है। सूजन में होने वाला बुखार भी ठीक हो जाता है।

109. नीम :

  • 5-5 ग्राम की मात्रा में नीम की छाल, आक के पत्ते और पुनर्नवा को लेकर 2 कप पानी में उबालें और कुछ समय बाद उस जल को आग से उतारकर छानकर इस गर्म किये गये जल से सूजन वाले स्थान की सिंकाई करने से उस भाग की सूजन खत्म हो जाती है।
  • नीम की छाल, हरड़ की छाल, दारुहल्दी, गिलोय, कुटकी, सोंठ, परवल, और सांठी की जड़ का लगभग 40 मिलीलीटर की मात्रा में काढ़ा बनाकर पूरे बदन पर लेप की तरह से लगाने से शरीर या बदन की सूजन दूर हो जाती है।
  • बराबर मात्रा में नीम के पत्तों का काढ़ा, दारूहरिद्रा का तना, यिष्टमधु की जड़, शहद, सफेद जीरा और राल को घी में मिलाकर लेप की तरह शरीर पर लगाने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।
  • शरीर पर नीम के तेल की मालिश करने से शरीर की सूजन दूर हो जाती है।

110. सेहुंड़ : शरीर पर सेहुंड़ के पत्तों के रस की मालिश करने से शरीर की सूजन दूर हो जाती है।

111. सहजना : लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सहजना की छाल, अमलतास की जड़, करंज, आक और दारुहल्दी को लेकर गाय के पेशाब के साथ पीसकर शरीर या बदन पर लेप करने से शरीर की सूजन दूर हो जाती है।

112. इन्द्रायण :

  • शरीर में सूजन होने पर इन्द्रायण की जड़ को सिरके में पीसकर लेप करने से सूजन दूर हो जाती है।
  • इन्द्रायण को बारीक पीसकर इसका चूर्ण बना लें। 200 मिलीलीटर पानी में 50 ग्राम धनिये को मिलाकर काढ़ा बनाकर इन्द्रायण के चूर्ण को इस काढ़े में पीसकर शरीर पर लेप की तरह लगाने से सूजन खत्म हो जाती है।

113. हरड़ :

  • लगभग 50 ग्राम हरड़ का काढ़ा और 5 ग्राम गुग्गल के काढ़े को मिलाकर पीने से नाभि के नीचे के हिस्से (मूत्राशय) में होने वाली सूजन दूर हो जाती है।
  • 300 मिलीलीटर पानी में 5-5 ग्राम की मात्रा में हरड़ का छिलका, हल्दी, देवदारू, सोंठ, सांठी की जड़, चित्रक, गिलोय और भारंगी को मोटा-मोटा कूटकर रात्रि को सोते समय भिगोयें और सुबह उठकर इसे गर्म करें। एक चौथाई पानी रहने पर इसे छानकर हल्का गर्म रोगी को पीने को दें। इससे लाभ मिलता है।
  • लगभग 50-50 ग्राम की मात्रा में हरड़ के छिलके, सोंठ और पीपल को पीसकर तथा छानकर 50 ग्राम गुड़ में मिलाकर 10-10 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम पानी के साथ लेने से किसी भी प्रकार की सूजन दूर हो जाती है।

114. गुग्गल :

  • लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में गुग्गल और त्रिफला के चूर्ण को मिलाकर रात में कम गर्म पानी के साथ लेने से काफी लम्बे समय से बनी हुई कोष्ठबद्धता (कब्ज) और सूजन दूर हो जाती है।
  • लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में गुग्गल, रेवन्दचीनी, लाइफबोय साबुन और मैनफल को जल में पीसकर गर्म करके कपड़े पर फैलाकर फोड़े की सूजन पर बांधने से फोड़ा फूट जाता है।

115. अपामार्ग (चिरचिटा) :

  • लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में चिरचिटा खार, सज्जी खार और जवाखार को लेकर पानी में पीसकर सूजन वाली गांठ पर लेप की तरह लगाने से सूजन दूर हो जाती है।
  • 50 ग्राम चिरचिटा या अपामार्ग को 300 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनायें और जब इस काढ़े की मात्रा लगभग 50 मिलीलीटर रह जाये तो इस काढ़े को पीने से हर तरह की सूजन दूर हो जाती है।

116. तरबूज :

  • लगभग 50 मिलीलीटर तरबूज के रस में लगभग 2 ग्राम कालीमिर्च के चूर्ण को मिलाकर दिन में 2 बार लेने से सूजन (शोथ) दूर हो जाती है।
  • तरबूज के बीजों का रस या जूस पीने से गुर्दों की खराबी के कारण होने वाली सूजन खत्म हो जाती है।

117. बच : लगभग 10-10 ग्राम की मात्रा में बच और सरसों को पानी में पीसकर अण्डकोष की सूजन पर लेप की तरह से लगाने से सूजन दूर हो जाती है।

118. सोडा : लगभग 10-10 ग्राम की मात्रा में खाने का सोडा और तम्बाकू को लेकर 50 मिलीलीटर जल में गर्म करें और गाढ़ा होने तक गर्म करके हल्के गर्म गाढ़े को लेप की तरह से लगाने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।

119. राख : उपलों को जलाकर बनाई गई राख को सूजन वाले अंग पर बांधने और उस राख पर जल डालते रहने से सूजन खत्म हो जाता है।

120. मटर : मटर को पानी में उबालकर इस पानी से अंगुलियों को धोने से अंगुलियों की सूजन दूर हो जाती है।

121. शलगम : लगभग 50 ग्राम की मात्रा में शलगम लेकर उसको लगभग 1 लीटर पानी में उबालें और इस गर्म पानी से हाथ और पैर की अंगुलियों को धोने से सूजन खत्म हो जाती है।

122. हरीतकी :

  • शरीर में सूजन होने पर हरीतकी फल मज्जा का गर्म-गर्म लेप लगाने से सूजन में आराम मिलता है।
  • हरीतकी फल मज्जा, पिप्पली फल, पिण्याक, बालुका और शिग्रु की छाल को बराबर मात्रा में लेकर इनको पानी में मिलाकर बदन पर लेप की तरह लगाने से शरीर की सूजन दूर हो जाती है।

123. शाखोटक : शरीर में शाखोटक की छाल और इसकी जड़ की कांजी बनाकर घी में मिलाकर लेप की तरह लगाने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।

124. यष्टिमधु : यष्टिमधु की जड़ को पीसकर घी में मिलाकर शरीर पर लेप करने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।

125. तुखमलंगा : तुखमलंगा या चूने के पानी या चावलों को पीसकर घी में लेप की लगाने से शरीर की सूजन दूर हो जाती है।

126. बिजौरा :

  • बिजौरा की जड़, अग्निमन्थ, रास्ना की जड़, शुंठी, देवदारू की लकड़ी और कण्टकारी को पानी में पीसकर इसको गर्म करके शरीर पर लेप लगाने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।
  • बिजौरा नींबू के पत्तों को गर्म करके पीड़ा युक्त स्थानों पर बांधने से सूजन ठीक हो जाती है।
  • बिजौरा नींबू के बीजों को पीसकर सूजन पर लगाने से आराम मिलता है।

127. उड़द : काले उड़द, यव (जौ) और गोधूम को बराबर मात्रा में लेकर पानी में पीस लें और इसको लेप की तरह शरीर पर लगाने से सूजन खत्म हो जाती है।

128. नींबू : नींबू के पत्तों और तिल के तेल को बराबर मात्रा में लेकर और इनको आपस में मिलाकर शरीर पर लेप की तरह से लगाने से सूजन ठीक हो जाती है।

129. पटोल : पटोल के पत्तों या दशमूल के काढ़े से घाव को धोने से उस घाव के कारण होने वाली सूजन खत्म हो जाती है।

130. कपूर : शरीर में सूजन होने पर कपूर को गाय के घी में मिलाकर लेप की तरह शरीर पर लगाने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।

131. अजमोदा : लगभग 1 से 4 ग्राम की मात्रा में अजमोदा की जड़ को सुबह-शाम खाने से पेशाब खुलकर आता है जिससे पूरे शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।

132. कलौंजी : कलौंजी (मंगरैला) को पीसकर हाथ पैरों पर लेप करने से हाथ पैरों की सूजन दूर हो जाती है।

133. कूठ : कूठ को गुलाबजल में पीसकर हाथ पैरों पर लगाने से सूजन ठीक हो जाती है।

134. भारंगी : बदन या शरीर में सूजन होने पर भारंगी के बीजों को घी में भूनकर पीसकर डेढ़ से तीन ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सूजन पर लगाने से आराम मिलता है।

135. रसौत : शरीर में सूजन होने पर रसौत का लेप करने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।

136. प्रियंगु : लगभग 1 से 3 ग्राम प्रियंगु को सुबह-शाम खाने से सूजन और सूजन के कारण होने वाले रोग दूर हो जाते हैं।

137. गम्भारी : लगभग 2 से 4 ग्राम की मात्रा में गम्भारी की जड़ का काढ़ा बनाकर दिन में 2 या तीन बार पीने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है।

138. चिल्हक : चिल्हक या चिल्ला के फल का गूदा सूजन के रोगी को खिलाने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है। इसके अलावा चिल्हक के छाल को पीसकर पूरे शरीर पर लेप की तरह लगाने से शरीर की सूजन खत्म हो जाती है। इसके अतिरिक्त चिल्हक के पत्तों का काढ़ा बनाकर स्नान करने से शरीर की सूजन कम हो जाती है।

139. अंकोल : लगभग आधा ग्राम की मात्रा में अंकोल की जड़ की छाल को रोजाना दो बार रोगी को देने से यकृत वृद्धि, जल वृद्धि और वृक्क में गड़बड़ी के कारण होने वाली सूजन दूर हो जाती है।

140. दोपाती लता : दोपाती लता (वृद्धादारु) के पत्तों को पीसकर सूजन पर लगाने से आराम मिलता है।

141. तालमखाना : लगभग 1 से 2 ग्राम की मात्रा में तालमखाना के पंचांग की राख को गाय के पेशाब या पानी के साथ सुबह-शाम को लेने से सूजन ठीक हो जाती है।

142. मकोय :

  • मकोय की शाखा और पत्तों को सब्जी के रूप में इस्तेमाल करने से किसी भी प्रकार की सूजन दूर हो जाती है।
  • सभी प्रकार के दर्द को ठीक करने के लिए दर्द युक्त स्थान पर मकोय के फलों का गर्म लेप करने से लाभ मिलता है।
  • मकोय, शतावरी, बथुआ शाक, सौवर्चल, इनको घी तथा मांसरस में भूनकर सेवन करने से दर्द में आराम मिलता है।

143. भुई आमला : लगभग 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में भुई आमला का रस या 3 से 6 ग्राम की मात्रा में भुंई आमला के चूर्ण को सुबह-शाम खाने से चमड़ी में पानी भरने के कारण होने वाली सूजन दूर हो जाती है।

144. कटसरैया : लगभग 10 ग्राम खाण्ड के साथ ताजी कटसरैया की छाल के रस को मिलाकर खाने से चमड़ी के अन्दर पानी भरने के कारण होने वाली सूजन खत्म हो जाती है।

145. अर्जुन :

  • लगभग 5 ग्राम से 10 ग्राम की मात्रा में अर्जुन की छाल का चूर्ण क्षीर पाक विधि से (दूध में पकाकर) खिलाने से हृदय में होने वाली सूजन खत्म हो जाती है।
  • लगभग 1 से 3 ग्राम की मात्रा में अर्जुन की छाल का सूखा हुआ चूर्ण खाने सूजन ठीक हो जाती है।

146. विजयसार : शरीर में सूजन होने पर विजयसार के पत्तों को पीसकर सूजन पर लगाने से आराम मिलता है।

147. जिंगना : जिंगना (जिंगन) के पत्तों को उबालकर सूजन वाले अंग या भाग पर बांधने से उस अंग या भाग की सूजन खत्म हो जाती है।

148. मूसली :

  • पेट में जल भरने के कारण होने वाली सूजन में मूसली का पेय बनाकर सुबह-शाम सेवन करने से सूजन ठीक हो जाती है।
  • काली मूसली पीसकर चोट-मोच या कमजोर हड्डी पर लगाने से लाभ मिलता है।

149. सागोन : सागोन (सागवान) की छाल या लकड़ी को पीसकर लेप की तरह सूजन वाले हिस्से पर लगाने से सूजन खत्म हो जाती है।

150. अखरोट :

  • अखरोट का 10 से 40 मिलीलीटर तेल 250 मिलीलीटर गौमूत्र में मिलाकर पीने से पूरे शरीर की सूजन दूर हो जाती है।
  • वात-जन्य सूजन में 10 से 20 ग्राम अखरोट की गिरी को कांजी में पीसकर लेप करने से लाभ मिलता है।
  • किसी भी कारण या चोट के कारण हुए सूजन पर अखरोट के पेड़ की छाल पीसकर लेप करने से सूजन कम होती है।
  • अखरोट के पेड़ की छाल को पीसकर सूजन वाले भाग पर लेप लगाने से शरीर के उस भाग की सूजन दूर हो जाती है।

151. रेवन्दचीनी : शरीर में सूजन होने पर रेवन्दचीनी को पानी में पीसकर लेप करने से बदन की सूजन दूर हो जाती है।

152. तीसी : तीसी के बीजों को कूटकर इनको पानी में मिलाकर हल्का गर्म करके सूजन वाले भाग पर बांधने से सूजन दूर हो जाती है और यदि अन्दर मवाद बन गया है तो वह पककर फूट जाता है।

153. चांगेरी : चांगेरी (तिनपतिया) के साग को पीसकर सूजन वाले भाग पर बांधने से सूजन और उससे होने वाला दर्द तथा जलन दूर हो जाती है।

154. चूका शाक :

  • चूका शाक को सब्जी के रूप में खाने से आमाशय में होने वाली सूजन ठीक हो जाती है।
  • चूका शाक के पत्तों को पीसकर सूजन वाले भाग पर लेप की तरह लगाने से सूजन या ‘शोथ ठीक हो जाती है।

155. कसोंदी : लगभग 5 से 10 मिलीलीटर की मात्रा में कसोंदी की जड़ का रस सुबह-शाम पीने से जलीय शोथ (चमड़ी में पानी भरना) में आराम मिलता है।

156. मानकन्द : लगभग 10 से 20 ग्राम की मात्रा में मानकन्द (मानकचू) के सूखे फल का चूर्ण बना लें और इसे चावल के माण्ड (पकाये हुए चावलों का पानी) के साथ पकाकर छानकर रोगी को देने से उसके शरीर की सूजन दूर हो जाती है। इसका सेवन करने के दिनों में यह ध्यान रखना चाहिए कि इस पेय के अलावा रोगी को कोई दूसरा आहार न दिया जाये।

157. आर्तगल : सूजन वाले भाग या हिस्से पर आर्तगल के पत्तों को पीसकर लेप की तरह लगाने से या बांधने से उस भाग की सूजन दूर हो जाती है।

158. उशक : उशक (उशष) के सूखे फूलों को जल में मिलाकर और घोलकर सूजन वाले भाग पर लगाने से सूजन दूर हो जाती है।

159. कासनीग्राम्य : शरीर में सूजन होने पर कासनीग्राम्य की जड़ को पीसकर सूजन वाले भाग पर लेप की तरह लगाने या बांधने से सूजन खत्म हो जाती है।

160. खूबकलां : खूबकलां (खाकसीर) को शरीर के सूजन वाले हिस्से में बांधने से सूजन (शोथ) खत्म हो जाती है।

161. गेंदा : गेंदा के फूल के पत्तों को पीसकर लेप की तरह लगाने या बांधने से शरीर की शोथ या सूजन मिट जाती है।

162. फा-जूफा : फा-जूफा को पीसकर शरीर पर लेप की तरह लगाने से शरीर की शोथ या सूजन मिट जाती है।

163. डिजिटेलिस : लगभग 5 से 15 बूंद डिजिटेलिस के पत्तों का रस रोजाना दिन में 2 से 3 बार रोगी को देने से हृदय रोग के कारण होने वाली सूजन ठीक हो जाती है।

164. तम्बाकू : शरीर पर सूजन होने पर तम्बाकू के पत्तों से सेक करने से सूजन या शोथ दूर हो जाती है।

165. तोदरी : शरीर में सूजन होने पर तोदरी के बीजों को पीसकर और इस बने हुए चूर्ण को पानी में मिलाकर शरीर पर लेप की तरह से लगाने से सूजन खत्म हो जाती है।

166. मैदालकड़ी : मैदालकड़ी की छाल को पीसकर लेप की तरह लगाने से स्थानिक सूजन दूर हो जाती है।

167. रुमीमस्तगी : लगभग थोड़ी सी मात्रा में रुमी मसतगी सुबह-शाम खाने से पेशाब अधिक आता है, जिस कारण शरीर की सूजन या शोथ खत्म हो जाती है।

168. सकमुनिया : लगभग थोड़ी सी मात्रा में सकमुनिया की दाल सुबह-शाम खाने से जलीय शोथ (चमड़ी में पानी भरना) या जलीय सूजन ठीक हो जाती है। इसके अलावा सभी प्रकार की सूजन इससे ठीक हो जाती है।

Tags:  Sharir ki sujan, Maida, Rumi mastagi, Todri, Khoobklan, Tambaku, Jaharmar, Rumimastagi, Kasnigramy, Ushak, Kooth, uUrad, Kapoor, Nagarmotha