साइनोवियल जोड़


साइनोवियल जोड़

(Synovial joints)


परिचय-

       शरीर के ज्यादातर स्थायी जोड़ साइनोवियल होते हैं। इस प्रकार के जोड़ों में हड्डियों के सिरे एक पतली, चिकनी जोड़ बनाने वाली उपास्थि (आर्टिक्यूलर हाएलिन कार्टिलेज) से ढके रहते हैं। इसमें एक सन्धि (जोड़) गुहा (Joint cavity) होती है, जिसमें एक साफ, गाढ़ा, लसलसा तैलीय द्रव (साइनोवियल फ्लयूड) भरा रहता है, जो सन्धि (जोड़) को चिकना बनाए रखता है और रक्तवाहिका विहीन आर्टिक्यूलर कार्टिलेज का पोषण प्रदान करता है। सन्धि एक तन्तुमय आर्टिक्यूलरर कैप्सूल द्वारा घिरी रहती है, जिसमें साइनोवियल कला या मेम्ब्रेन का अस्तर रहता है। यह अस्तर हड्डी के सिरों, उपास्थि और डिस्क पर नहीं रहता। तन्तुमय कैप्सूल (Fibrous capsule) कोलेजन तन्तुओं की मोटी परत, जिसे लिगामेन्ट कहते हैं, से जुड़ा रहता है। इस तरह के जोड़ों के बीच दूसरे तरह के जोड़ों की अपेक्षा अधिक स्वच्छन्दता पूर्वक गतियां होती है।

     साइनोवियल जोड़ों को अपने में होने वाली गतियों की सीमा अथवा हड्डियों के आर्टिकुलेटिंग सतहों के आकार के अनुसार अलग-अलग वर्गों में बांटी जा सकती है-

कोर या हिन्ज जोड़ (Hinge joints)- इस प्रकार के जोड़ों को चूलदार जोड़ भी कहते हैं। इनमें केवल एक ही दिशा में गति होना सम्भव होता है। इस प्रकार के जोड़ों में सिर्फ आंकुचन (Flexion) एवं प्रसारण (Extension) ही हो पाता है। कोहनी, घुटने, टखने, जबड़े और उंगलियों में इसी प्रकार के जोड़ रहते हैं।