विधारा


विधारा

VIDHARA


विधाराबीज 2 से 4 ग्राम चूर्ण (विधारा बीजों को प्रयोग से पहले अपामार्ग का रस या लवणजल में भिगोकर धूप में सूखा लें), 7 से 14 मिलीलीटर गाय के पेशाब के साथ दिन में 2 बार पीना चाहिए।विभिन्न रोगों का विधारा से उपचार :

1. शुक्राल्पता (शुक्राणुओं की कमी) : विधारा के 1 से 2 ग्राम बीजों का चूर्ण 5 ग्राम घी के साथ मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करना चाहिए।

2. श्लीपद (हाथीपांव) : विधाराबीज 2 से 4 ग्राम चूर्ण (विधारा बीजों को प्रयोग से पहले अपामार्ग का रस या लवणजल में भिगोकर धूप में सूखा लें), 7 से 14 मिलीलीटर गाय के पेशाब के साथ दिन में 2 बार पीना चाहिए।

3. विद्रधि (फोड़ा के जख्म) : फोडे़ के घाव और सूजन के लिए विधारा के पत्तों में एरण्ड तेल लगाकर हल्का गर्म करके घाव वाले जगहों पर बांध देना चाहिए।

4. कब्ज : विधारा की जड़ 3 से 6 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से कब्ज मिट जाती है।

5. कमजोरी : लगभग 2 से 3 ग्राम विधारा का चूर्ण मिश्री मिले दूध के साथ रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से शरीर की कमजोरी मिट जाती है।

6. वीर्य रोग : 100 ग्राम विधारा की जड़ को 1 लीटर दूध में पकाकर और घी मिलाकर रख लें। भोजन के बाद रोज 20 ग्राम की मात्रा में खाने से वीर्य पुष्ट होता है।

7. अंगुलियों की सूजन : 3 ग्राम विधारा की जड़ को पीसकर अंगुलियों पर बांधने से अंगुलियों की सूजन मिटती है।

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