Error message

  • User warning: The following theme is missing from the file system: global. For information about how to fix this, see the documentation page. in _drupal_trigger_error_with_delayed_logging() (line 1156 of /home/jkheakmr/public_html/hindi/includes/bootstrap.inc).
  • User warning: The following module is missing from the file system: mobilizer. For information about how to fix this, see the documentation page. in _drupal_trigger_error_with_delayed_logging() (line 1156 of /home/jkheakmr/public_html/hindi/includes/bootstrap.inc).
  • User warning: The following module is missing from the file system: global. For information about how to fix this, see the documentation page. in _drupal_trigger_error_with_delayed_logging() (line 1156 of /home/jkheakmr/public_html/hindi/includes/bootstrap.inc).

विदारीकंद


विदारीकंद

Indian kudzu, Fabaceae, Pueraria tuberosa (Roxb. ex Willd.) DC.


विदारीकंद की चक्राकार लताएं नदी, नालों के किनारे और हिमालय प्रदेश की निचली पहाड़ियों में अधिक पायी जाती हैं। विदारीकंद की जड़ में इसका फल होता है।परिचय :

        विदारीकंद की चक्राकार लताएं नदी, नालों के किनारे और हिमालय प्रदेश की निचली पहाड़ियों में अधिक पायी जाती हैं। विदारीकंद की जड़ में इसका फल होता है। इसके फल स्वाद और आकार में यष्टिमधु के समान होते हैं। इसलिए इसे स्वादुकंद के नाम से जाना जाता है। इसकी लताएं घोड़े और हाथियों को बहुत अधिक प्रिय है। इसी कारण से इसकी लताएं गज वाजिप्रिया कहलाती हैं। विदारीकंद के नये फल बाजारों में सुराल के नाम से बिकते हैं। इसके फल के छिलके हल्के भूरे रंग के तथा अन्दर का गूदा सफेद रंग का होता है।

विभिन्न भाषाओं में नाम :

हिन्दी बिलाईकंद, सुराल, पतालकोहड़ा, विदारीकंद।
संस्कृत स्वादुकन्दा, गजवाजिप्रिया, विदारी।
अंग्रेजी इंडियन कुज्जु।
गुजराती विदारी, खाखर बेल।
मराठी  बेल, बींदरी, बेदंरिया।
बंगाली शीमिया।
तेलगू दरीगुम्मडि।
मलयालम गुमडिगिडा

बाहरी स्वरूप : विदारीकंद की चक्राकार चढ़ती हुई लताएं होती हैं, इसका  तना मोटा तथा छेददार होता है। इसकी पत्तियां पलाश की तरह तीन पत्तों वाली 4 से 6 इंच लम्बी व 3 से 4 इंच चौड़ी और नुकीली होती हैं। इसमें नवम्बर-दिसम्बर में नीले या बैंगनी रंग के फूल आते हैं। विदारीकंद की कलियां 2 से 3 इंच लम्बी और रोमश होती हैं। इसमें 3 से 6 बीज होते हैं।

रासायनिक संघटन : विदारीकंद के कन्दों (फलों) में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा रालीय तत्त्व पाये जाते हैं।

गुण : विदारीकंद मीठा, चिकना, ठंडा (शीतल), बलवीर्यवर्धक, पौष्टिक, मूत्रवर्धक (पेशाब को बढ़ाने वाला), वर्ण (घाव) को ठीक करने वाला, पित्त, रुधिर विकार तथा वातनाशक होता है। यह वीर्य तथा स्तनों में दूध की वृद्धि करता है। इसके प्रयोग से पेशाब खुलकर आता है तथा यह शक्तिवर्धक, बाजीकारक व जलन को शांत करता है।