लसीका पर्व

 


लसीका पर्व

(Lymph nodes)


     लसीकीय वाहिकाओं के मार्ग में एक धागे में पिरोए हुए मोतियों के समान सेम के बीज की आकृति के छोटे-छोटे (1 से 25 मिमी. लम्बे) ऊतक के पिण्ड होते हैं जिन्हें लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) कहा जाता है। ये नोड्स मुख्य रूप से गर्दन, बगल, वक्ष (छाती), पेट एवं उरू-सन्धियों (पेट और जांघ के बीच) में अधिक संख्या में तथा कोहनी एवं घुटनों के जोड़ के पीछे कम संख्या में पाए जाते हैं। सुपरफीशियल लिम्फ नोड्स त्वचा के पास गर्दन, बगल (कांख) और उरू-सन्धियों में स्थित रहते हैं तथा गहन (डीप) नोड्स उरू-सन्धि क्षेत्र के भीतर गहराई में, लम्बर वर्टिब्री (कशेरुका) के पास, फेफड़ों के आधार (base) पर, छोटी आंत के आस-पास के ऊतकों (मीसेन्ट्री) में और जिगर में स्थित रहते हैं। ज्यादातर लसीका (लिम्फ) रक्त प्रवाह में वापस पहुंचने के लिए कम से कम एक लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) से होकर गुजरते हैं।

    लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) चारों ओर से तन्तुमय संयोजी ऊतक के एक कैप्सूल से आच्छादित (ढकी) होती हैं। कैप्सूल से लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) के केन्द्र की ओर संयोजी ऊतक के प्रवर्ध (इन्हें तन्तुबन्ध (trabeculae) कहा जाता है) अन्दर की ओर निकले होते हैं। इससे नोड कई भागों में (compartments) बंट जाता है। हर भाग का बाह्य भाग लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) का कॉर्टेक्स (cortex) कहलाता है जिसमें लिम्फोसाइट्स घने गुच्छों में मौजूद रहती हैं। इन्हें लसीका पिण्ड (lymph nodules) कहा जाता है। हर नोड्यूल के बीच में जर्मिनल केन्द्र (germinal center) होता है जहां कोशिका विभाजन लिम्फोसाइट्स पैदा होते हैं। लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) रोजाना लगभग 10 अरब लिम्फोसाइट्स पैदा करते हैं। लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) के आन्तरिक भाग को मेड्यूला (medulla) कहते हैं जिसमें लिम्फोसाइट्स की रस्सीनुमा रचनाएं (medullary cords) नोड्यूल से निकली रहती हैं, जो एक-दूसरे से लिपटकर एक ढीला, स्पंजी (reticula) जाल बनाती हैं।

     प्रत्येक लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) में लसीका (लिम्फ) को लाने वाली चार या पांच अभिवाही लसीकीय वाहिकाएं (afferent lymph vessels) होती हैं जो कैप्सूल के उत्तल (convex) किनारी से होती हुई नोड के अपेक्षाकृत कोशिका-मुक्त क्षेत्र, कॉर्टिकल साइनस (cortical sinus) में प्रवेश करती हैं और अपने लसीका को छोड़ देती है। साइनसेस से होकर लसीका धीरे-धीरे छनता (filter) है तथा अपवाही लसीका वाहिकाएं (efferent lymph vessels) कैप्सूल की अवतल (concave) किनारी (इसे हाइलम (Hilum) कहते हैं) से होती हुई लसीका को उठा करके लसीकीय नलिकाओं में पहुंचाती हैं।

कार्य-

1. लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) फिल्टर (छलनी) का कार्य करती हैं। इन नोड्स में पहुंचा लसीका छन जाता है जिससे ये बाह्य हानिकारक पदार्थ एवं रोगों को पैदा करने वाले जीवाणु (micro organism) आदि को रोक लेती हैं।

2. लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) में लसीका कोशिकाओं (लिम्फोसाइट्स), विशेष रूप से बी-लिम्फोसाइट्स की उत्पत्ति होती है तथा इनमें वृहत्भक्षक कोशिकाएं (macrophages) मौजूद रहती हैं, जिनसे पैदा होने वाले एण्टीबॉडीज और एन्टीटॉक्सिन्स (antitoxins) द्वारा रोगोत्पादक जीवाणु आदि नष्ट हो जाते हैं। इस प्रकार लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) रोगोंत्पादक जीवाणुओं आदि को रक्त में जाने से रोककर अथवा उन्हें नष्ट करके संक्रमण को शरीर के अन्य भागों में फैलने से रोकती हैं।

3. लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) परिसंचरण के लिए नये लिम्फोसाइट्स को बनाती है।