लसीका परिसंचरण


लसीका परिसंचरण

(Circulation of Lymph)


        लसीकीय वाहिकाओं की रचना शिराओं के जैसी होती है तथा इनकी भित्तियां बहुत पतली होती हैं। शिराओं की तरह इनमें भी थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बहुत से अर्द्धचन्द्राकार कपाट (semilunar valve) होते हैं। ये कपाट (वाल्व) इस तरह स्थित रहते हैं, कि लसीका एक ही दशा में लगातार प्रवाहित होता रहे। लसीका को लसीकीय वाहिकाओं में आगे को धकेलने के लिए रक्त परिसंचरण संस्थान में मौजूद हृदय की तरह कोई शक्तिशाली पम्प नहीं होता, बल्कि बड़ी लसीकीय वाहिकाओं की भित्तियों में मौजूद वृत्ताकार (circular) एवं लम्बवत् (longitudinal) चिकनी पेशियों की गति से लसीका लसीकीय वाहिकाओं में आगे की तरफ बढ़ती रहती है। ऊतकीय तरल का उत्पादन बढ़ने से, श्वसन-तन्त्र की पेशियों तथा शरीर की अन्य पेशियों की गति से उत्पन्न दाब से लसीका शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में पहुंचती है। लसीकीय वाहिकाओं में एक दिशा में खुलने वाले कपाट (valves) रहने के कारण लसीका दुबारा पीछे को प्रवाहित नहीं हो पाती।

        सारी लसीका वाहिकाएं वक्षीय-गुहा (thoracic cavity) की ओर पहुंचती हैं। दाईं लसीकीय नलिका (right lymphatic duct) सिर, चेहरे और गर्दन के दाहिने भाग, दाहिनी ऊर्ध्व भुजा, दाहिनी वक्ष और फेफड़ा, हृदय के दाहिने भाग तथा जिगर के ऊपरी भाग की लसीकीय वाहिकाओं (लिम्फेटिक्स) द्वारा संचित लसीका को दाईं सबक्लेवियन शिरा (right subclavian vein) में पहुंचाती है।

        वक्षीय नलिका (thoracic duct) दाईं लसीकीय नलिका से ज्यादा बड़ी और मोटी होती है। यह पेट के भीतर, डायाफ्राम के नीचे एक फैले हुए भाग के रूप में शुरु होती है जिसे सिस्टर्ना काइलि (Cisterna chyli) कहते हैं। यहां से यह नलिका डायाफ्राम के महाधमनी-छिद्र से होकर ऊपर को हृदय के पीछे स्थित मीडियास्टाइनम में होती हुई गर्दन के आधार में बाईं ओर पहुंचती है। यहां पर यह सिर और गर्दन से आने वाली बाईं जगुलर शिरा के मुख्य भाग (left jugular trunk), बाईं ऊपरी भुजा से आने वाली बाईं सबक्लेवियन शिरा के मुख्य भाग (left subclavian trunk) तथा वक्ष (छाती) और इससे सम्बन्धित भागों से आने वाली अन्य लसीकीय वाहिकाओं (lymphatic vessels) से जुड़ती है। अन्ततः वक्षीय नलिका (thoracic duct) बाईं सबक्लेवियन शिरा में खुलती है और लसीका को रक्त में पहुंचा देती है।

        इस तरह लसीकीय नलिकाएं दाईं और बाईं सबक्लेवियन शिराओं में खुलकर लगातार रक्त प्रवाह में लसीका को मिलाती रहती हैं।

 

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