रोगवृत्त तथा सुग्राह्यता


रोगवृत्त तथा सुग्राह्यता


रोगवृत्त

किसी भी रोग पर चुम्बक चिकित्सा का प्रयोग करने से पहले यह जानने की जरूरत है कि रोगी की किस रोग की चिकित्सा करनी है, रोग किस कारण से हुआ है और अब तक रोग की क्या अवस्था है। फिर रोग के लक्षणों को जानना चाहिए। यह सब जानकरी लेने के बाद रोगी का इलाज करना चाहिए।

        रोग होने का समय, रोग का विभिन्न अंगों से सम्बन्ध, रोग का निश्चित केन्द्र जैसे दर्द कहां हो रहा है तथा यह जानना कि रोग क्रमिक प्रकृति का है ...........

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  सुग्राह्यता

यदि हम मानव जीवन के इतिहास के बारे में जानेंगे तो पता चलेगा कि जब मनुष्य स्वस्थ रहता है तो ही उसका जीवन आगे चलता रहता है और कार्य करता रहता है। जब मनुष्य रोग ग्रस्त होता है तो वह जीवित अवश्य रहता है लेकिन कष्ट में। मनुष्य चेतन तथा अचेतन अतिशयोक्ति में अपने आप ही स्वयं ही ज्ञान प्राप्त करता रहता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि सुग्राह्मता चाहे मानसिक हो या शारीरिक, यह  एक राज्य के समान होती है तथा राज्य संगठनों............

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