रासायनिक परिवर्तन


रासायनिक परिवर्तन

(Chemical reactions)


रसायनिक क्रियाओं के अंतर्गत कोशिकाओं में दो प्रकार के रासायनिक परिवर्तन होते हैं-

  • उपचय (Anabolism)- कोशिकाओं के बनने की क्रिया।
  • अपचय (Catabolism)- कोशिकाओं के टूटने की क्रिया।

इन दोनों क्रियाओं को सामूहिक रूप में चयापचय (metabolism) कहते हैं।

उपचय (Anabolism)- उपचय रचनात्मक चयापचय होता है, जिसके अंतर्गत वे सभी जैव-रासायनिक क्रियाएं शामिल होती है जिनसे कोशिकाओं का निर्माण एवं विकास होता है तथा टूटी-फूटी कोशिकाओं की मरम्मत होती है। शरीर के सामान्य कार्यों के लिए कोशिकाओं में मौजूद पोषक तत्वों का ऑक्सीकरण होने से ऊर्जा (energy) उपलब्ध होती है तथा शरीर में रासायनिक क्रियाओं के पूरा होने के लिए शरीर के तापमान को सामान्य बनाये रखने के लिए ऊष्मा पैदा होती है। उपचय को बायोसिन्थेसिस (Biosynthesis) भी कहा जाता है।

अपचय (Catabolism)- अपचय हानिकारक चयापचय होता है, जिसमें वह सभी जैव रासायनिक क्रियाएं शामिल होती है जिनसे जटिल रासायनिक तत्व सरल तत्वों में बदल जाते हैं तथा ऊर्जा मुक्त हो जाती है। ऊष्मा तथा ऊर्जा देने वाले सरल पोषक तत्व क्रमशः टूटते-फूटते जाते हैं और अंत में कुछ ऐसे पदार्थ बन जाते हैं, जिनकी शरीर में कोई कार्य करने की जरूरत ही नहीं रहती है। ऐसे पदार्थ सामान्यतः उत्सर्गी अंगों द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं। टूट-फूट की इस प्रक्रिया में ऊष्मा (heat) भी मुक्त होती है। इसमें से कुछ ऊष्मा शरीर को गरम रखने के उपयोग में आती है। अपचय के दौरान पैदा हुई ऊर्जा तथा सरल तत्व, दोनों की ही उपचय प्रक्रियाओं के दौरान जरूरत पड़ती है।

       यह समझना यहां पर बहुत महत्वपूर्ण है कि कोशिकाओं में उपचय एवं अपचय संबंधी दोनों जैव-रासायनिक क्रियाएं सामान्यतः साथ-साथ तथा लगातार होती रहती है।

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