योग के सिद्धांत

Yog ke sidhant ke anusar yog sadhana ki utpati kab hue iski vastawik jankari kisi ke paas nahi hai.


योग के सिद्धांत

योग का परिचय :

योग का वर्णन कई ग्रंथों, उपनिषदों, पुराणों व गीता में किया गया है। सभी योगग्रंथों में योग के अलग-अलग रास्ते बताये गये हैं, परन्तु सभी योग का एक ही लक्ष्य है- शरीर और मन को स्वस्थ व शांत बनाना। योग साधना सभी व्यक्ति के लिए वैसे ही जरूरी है जैसे- भोजन, पानी व हवा। योग क्रिया केवल योगियों के लिए है, ऐसा सोचना अज्ञानता है। ................................

योग का इतिहास :

 योग के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करने की दिशा में खोज करते हुए एक शताब्दी से अधिक समय हो गया है, फिर भी कोई योग की उत्पत्ति का सही समय नहीं जान पाया है। भारतीय योग जानकारों के अनुसार योग की उत्पत्ति भारत में लगभग 5000 वर्ष से भी अधिक समय पहले हुई थी। परन्तु कुछ भारतीय विद्धानों का मानना था ..............................

योग के अंग :

योगाभ्यास के मूल सिद्धांत का वर्णन ´कठोपनिषद´, ´भागवत गीता´ ´योग सूत्र´, ´पुराणों´, ´उपनिषदों´ और योग ग्रंथों में किया गया है। योग क्रिया का अभ्यास पहले ऋषि-मुनि अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तथा आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति के लिए करते थे। योग क्रिया की उत्पत्ति मानव जाति को स्वस्थ बनाए रखने के लिए हुई है ................................

योगनिद्रा :

योगनिद्रा के अभ्यास के दौरान जब शरीर पूरी तरह से ढीला हो जाए तब शरीर में अन्त:चेतना की लहर को पैर से लेकर सिर की ओर बहता हुआ सा महसूस करना चाहिए तथा दुबारा करते समय उसे ऊपर से नीचे की ओर लौटाकर छोड़ देना चाहिए।................................

योगासन करते समय पालन करने वाले नियम :

योगासन करने के समय शरीर बिल्कुल साफ-सुथरा होना चाहिए। उस समय शरीर में किसी भी तरह की थकावट या दर्द आदि नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा कुछ लगे तो योगासन नहीं करना चाहिए। लेकिन जिन योगासनों का अभ्यास खास तौर से रोगों को दूर करने के लिए ही किया जाता है, उन्हें तो किया जा सकता है।................................

कुछ खास अर्टिकल


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