योगाभ्यास से रोग का उपचार

Yogabhyas ke dwara koee bhi purane se purane rog door ho sakata hai. iske bad bhi agar in yog aasanon ke saath tarike se kriya kiya jaye to koee bhi vyakti kaphi lambi umr achchhe swasthy ke sath ji sakata hail.


योगाभ्यास से रोग का उपचार


मधुमेह (डायबिटीज)    |    सिरदर्द    |    उच्च रक्तचाप    |    यकृत शोथ    |    व्यग्रता की विसंगति    |    नाक की प्रदाह (सायनासायटिस)    |    अतिसार,  पेचिश,   दस्त    |    बहि:सरित चक्रिका    |    गठिया (संधिवात)    |    हर्निया    |    कब्ज    |    थायरॉयड रोग    |    टांसिल का प्रदाह (गले की गांठ में जलन)     |    हृदय रोग (रक्तवाहिका से संबंधित हृदय रोग)     |    पेट का घाव (पेप्टिक अल्सर)    |    आंखों के रोग     |    मासिकस्राव की अनियमितता    |  

योग के गुरुओं के मुताबिक लम्बे समय तक आराम से एक ही स्थिति में बैठने आदि का अभ्यास करना `आसन´ कहलाता है। योग के आसन भी एक तरह के व्यायाम की तरह ही होते हैं। लेकिन दूसरे शारीरिक व्यायामों की अपेक्षा ये पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हैं। जिनको हमारे भारतीय महर्षियों ने मनुष्य जाति भलाई के लिए हजारों वर्षो की खोजबीन और प्रयोगों के बाद हम तक पहुंचाया है। इन योगासनों को अक्सर रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। वैसे तो ये आसन हर तरह की अवस्था में लाभ करते हैं और बच्चे से लेकर बूढ़ों तक इन आसनों को करके लाभ उठा सकते हैं। लेकिन फिर भी अगर 9 साल की उम्र से कम बच्चे इन आसनों को न करें तो ज्यादा अच्छा है। क्योंकि बच्चों के शारीरिक अंग उस समय तक पूरी तरह से बढ़ नहीं पाते और इसके साथ ही वह बहुत ज्यादा नाजुक होते हैं।