योगा

Sadhaaran bhasha men yog jiwan ko such v shanti ke sath jine ka sabse aasan rasta hai. Yog ke abhav men sharer aur man anek prakar ke rogon ka kendr ban jata hai. Yog ke bina vyakti sansarik v adhyatmik such kop rapt nahi kar pata.


योगा


योग का परिचय


योग का वर्णन कई ग्रंथों, उपनिषदों, पुराणों व गीता में किया गया है। सभी योगग्रंथों में योग के अलग-अलग रास्Yog sadhana sabhi vyakti ke liye vaise hi jaroori hai jaise bhojan, pani v hava.ते बताये गये हैं, परन्तु सभी योग का एक ही लक्ष्य है- शरीर और मन को स्वस्थ व शांत बनाना। योग साधना सभी व्यक्ति के लिए वैसे ही जरूरी है जैसे- भोजन, पानी व हवा। योग क्रिया केवल योगियों के लिए है, ऐसा सोचना अज्ञानता है। योगग्रंथों में योग के 8 अंगों का वर्णन किया गया है- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारण, ध्यान और समाधि। इन यौगिक क्रियाओं में योगियों के लिए केवल ध्यान की अंतिम अवस्था और समाधि ही है। अन्य सभी क्रियाओं का अभ्यास कोई भी व्यक्ति कर सकता है, क्योंकि योग में आसन का अभ्यास शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए बनाया गया है। प्राणायाम से मन व मस्तिष्क स्थिर व स्वस्थ होता है। प्रत्याहार और धारणा में आंतरिक शक्तियों या दिव्य शक्ति की प्राप्ति के लिए मन को एकाग्र कर स्थिर किया जाता है। ध्यान के अभ्यास में सूक्ष्म शरीर व आंतरिक शक्तियों पर चिंतन व मनन करते हुए शक्ति को प्राप्त किया जाता है और उन शक्तियों का प्रयोग अच्छे कार्य के लिए किया जाता है।

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