मूत्रकृच्छ


मूत्रकृच्छ

DYSURIA, STRANGURY


परिचय :-

          मूत्रकृच्छ अर्थात पेशाब करने में कष्ट होना। इस रोग में पेशाब करते समय पेशाब एक साथ न आकर बूंद-बूंद करके आता रहता है। पेशाब करते समय मूत्रनली में जलन व दर्द होता है। कभी-कभी पेशाब आना बिल्कुल बन्द हो जाता है और जल्द उपचार न होने पर रोगी की हालत अधिक खराब हो जाती है। मूत्रकृच्छ रोग अधिक ठण्ड लगने के कारण, गोनोरिया, मूत्राशय की पथरी होने पर तथा प्रोस्टेट की सूजन आदि के कारण होता है। स्त्रियों में यह रोग गर्भाशय के अपने स्थान से हटने के कारण होता है।

          मूत्रकृच्छ रोग के उपचार के लिए होम्योपैथिक औषधियों में स्पिरिट ऑफ कैम्फर, कैन्थरिस, कोपेवा, एपिस, टेरिबिन्थिना, क्लेमेटिस तथा बोरेक्स आदि मुख्य औषधियां है।

मूत्रकृच्छ रोग में प्रयोग की जाने वाली औषधियां :-

1. स्पिरिट-कैम्फर :-  यदि किसी को अचानक मूत्रकृच्छ रोग हो गया है। पेशाब करने में कष्ट होता है तो ऐसे लक्षणों में तुरन्त उसे स्पिरिट ऑफ कैम्फर औषधि की 2-3 बूंद चीनी में मिलाकर 10-10 मिनट पर दें। इससे रोग में तुरन्त लाभ होता है।

2. कैंन्थरिस :- मूत्रकृच्छ रोग होने पर रोगी को पेशाब करते समय, करने के बाद या करने से पहले ऐंठन या काटता हुआ दर्द होता है। पेशाब करते समय ऐसा महसूस होता है जैसे पेशाब गर्म तरल पदार्थ के रूप में निकल रहा है। पेशाब करते समय मूत्रनली में जलन होती है। रोगी को बार-बार पेशाब की इच्छा होती है और पेशाब करने के बाद भी उसे ऐसा महसूस होता है जैसे अभी कुछ पेशाब बाकी है। रोगी को पेशाब खुलकर नहीं आता बल्कि बूंद-बूंदकर आता रहता है। पेशाब करते समय दर्द, जलन के साथ खून मिला हुआ पेशाब भी आता रहता है। मूत्रकृच्छ रोग में मूत्रनली से लेकर गुर्दो तक जलन व दर्द होता रहता है। कभी-कभी रोगी को ऐसा लगता है जैसे उसे जोर से पेशाब लगा है परन्तु पेशाब करने के लिए जाने पर पेशाब नहीं आता है। ऐसे लक्षणों वाले मूत्रकृच्छ रोग में रोगी को कैन्थरिस औषधि की 6 या 30 शक्ति का उपयोग करना हितकारी होता है।

3. कोपेवा :- इस औषधि के सेवन से यह श्लैष्मिक झिल्ली पर विशेष क्रिया करके रोग को समाप्त करती है। अत: मूत्रनली की श्लैष्मिक झिल्ली से सम्बंधित किसी भी प्रकार के रोग को ठीक करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। पेशाब करते समय मूत्रनली में जलन व दर्द होना, पेशाब बूंद-बूंद करके आना, मूत्रनली के अगले भाग में सूजन आ जाना, बार-बार पेशाब लगना, पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस होना जैसे अभी कुछ पेशाब बाकी है। ऐसे लक्षणों में रोगी को कोपेवा औषधि की 3 शक्ति का सेवन करना लाभकारी होता है। इस औषधि के प्रयोग से वह लक्षणों को उत्पन्न नहीं करती बल्कि लक्षणों को समाप्त करती है। कोपेवा औषधि मुख्य रूप से स्त्रियों के मूत्रकृच्छ रोग में अधिक लाभकारी होती है।

4. एपिस :- रोगी में मूत्र रोग से सम्बंधित ऐसे लक्षण जिसमें मूत्राशय में पेशाब को रोकने की क्षमता बिल्कुल समाप्त हो जाती है। ऐसे में थोड़ी-सी पेशाब मूत्राशय में जाने से तुरन्त पेशाब लग जाता है। पेशाब करते समय तेज जलन होती है और दर्द भी होता है। बार-बार पेशाब करने की इच्छा होती रहती है। कभी-कभी पेशाब में खून आता है या पेशाब अधिक गाढ़े रूप में आता है। पेशाब करते समय अन्त में तेज जलन के साथ पेशाब समाप्त होता है।  पेशाब करते समय डंक मारने की तरह मूत्राशय में दर्द होता है। इस तरह के लक्षणों में एपिस औषधि की 3 या 30 शक्ति का उपयोग करना अत्यधिक लाभकारी होता है।

5. एपिस-मेल :-  यदि रोगी के हाथ-पैर या गुर्दे या जननेन्द्रिय में सूजन आती है तथा पेशाब करते समय तेज जलन होती है। ऐसे लक्षणों में रोगी को एपिस-मेल औषधि की 6 शक्ति का सेवन करना चाहिए।

6. ऐकोनाइट :- यदि किसी को मूत्रकृच्छ रोग ओस लगकर या ठण्डी सूखी हवा लगकर हो तो उस रोगी को एकोनाइट औषधि की 3x देनी चाहिए।

7. टेरिबिन्थिना :- यदि रोगी मूत्रकृच्छ रोग से पीड़ित है और पेशाब करने में कष्ट होने के साथ कमर में दर्द भी रहता है। खून मिला हुआ पेशाब आता है, कमर दर्द रहता है, बूंद-बूंद करके पेशाब टपकता है, पेशाब करने पर जलन व दर्द होता है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को टेरिबिन्थिना औषधि की 3 शक्ति का सेवन करना चाहिए। इस औषधि का प्रयोग पेशाब से बनफ्शे की गंध आने तथा मीठी गंध पर भी किया जाता है।

8. क्लेमेटिस :- यदि रोगी को पेशाब रुक-रुक कर आता है, पेशाब करते समय पेशाब बन्द होकर फिर शुरू हो जाता है। कभी-कभी रोगी को ऐसा महसूस होता है जैसे बहुत तेज पेशाब लगा है परन्तु पेशाब करने पर पेशाब तुरन्त खत्म हो जाता है और थोड़ी देर बाद फिर से तेज पेशाब लग जाता है। पेशाब बूंद-बूंद करके टपकता रहता है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को क्लेमेटिस औषधि की 3 या 30 शक्ति का सेवन कराना उचित होता है। इस औषधि का उपयोग सुजाक रोग में भी लाभकारी होता है।

9. बोरेक्स :- यदि कोई बच्चा पेशाब करने से पहले रोता है या पेशाब करते समय रोता है तो समझना चाहिए कि बच्चे को मूत्रकृच्छ रोग हो गया है। यह रोग बच्चे को हो जाने पर बच्चा पेशाब करने से डरता रहता है क्योंकि पेशाब करते समय तेज दर्द व जलन के लक्षण उत्पन्न होते हैं। ऐसे में बच्चे को बोरेक्स औषधि देनी चाहिए। कभी-कभी मूत्राशय की पथरी के कारण भी यह रोग हो जाता है। पथरी के कारण पेशाब करने में परेशानी हो तो बच्चे को सार्सापैरिल्ला या लाइकोपोडियम औषधि की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि पेशाब करने में कठिनाई मूत्राशय की सूजन के कारण हो तो एकोनाइट, कैन्थरिस या पेट्रोसिलिनम औषधि का उपयोग कराना हितकारी होता है।

विशेष :-

  • यदि पेशाब करते समय जलन होती हो तो पुरुष को कैन्थरिस औषधि की 3 शक्ति लेनी चाहिए।
  • यदि स्त्री को पेशाब करते समय जलन होती हो तो उसे कोपेवा और युपेट-पर्फ औषधि की 3x लेनी चाहिए।
  • स्नायविक रोग के कारण पेशाब करने में कठिनाई होने पर बेल- 2x, एपिस- 3, कैप्सिकम- 6 या पेट्रोसेलिनम-1 औषधि की शक्ति का सेवन करना लाभकरी होता है।
  • गर्म पानी से सेंकना और दूध में पानी मिलाकर देना मूत्रकृच्छ रोग में लाभदायक होता है।

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