मुद्रा

Yoga ke abhyas men dudraon ka bahut mahtw hai. In mudraon ke abhyas se budapa door hota hai aur ayu men vridhi hoti hai. Yogiyon ke anusar inke abhyas se sansar men maujood 8 prakar ka aishwary prapt hota hai.


मुद्रा

जलंधर बंध का मतलब होता है सांस की नली को सिकोड़ना। सबसे पहले जमीन पर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। फिर दोनों घुटनों को जमीन पर टिका लें। इसके बाद दोनों हाथों की हथेलियों को घुटनों पर रखकर बैठ जाएं। अब दोनों आंखों को बंद करके शरीर को ढीला छोड़ दें।...............................
आसन के अंदर भी अलग-अलग तरह की मुद्राएं होती हैं जिन्हें अंग्रेजी में पोज या पोस्चर कहा जाता है। ये आकृतियां मुख्य रूप से प्राणियों के शरीर रचना की अनुकृतियां होती हैं, आसन स्थूल हैं। आसनों की ऊंची भूमिकाओं में मुद्राएं प्रकट होती हैं। ..............................
मुद्रा के अभ्यास से पहले शौच क्रिया से निवृत हो जाना चाहिए। अपने दांतों को भी साफ कर लेना चाहिए और नहाकर मुद्रा करें तो सबसे अच्छा है। वैसे मुद्रा करने के बाद भी नहा सकते हैं। लेकिन मुद्रा करने से पहले पूरा शरीर बिल्कुल साफ होना चाहिए।..............................
प्राणायाम और आसन के बीच की स्थिति को मुद्रा कहा जाता है क्योंकि मुद्रा आसन और प्राणायाम दोनों से संबंधित होती है। परंतु पुराने ऋषि-मुनियों ने मुद्राओं को आसन और प्राणायाम से भी बढ़कर नाम दिया है। योगासन करने से शरीर का पूरा हडि्डयों का ढांचा मजबूत होता है..............................
मुद्राओं द्वारा विभिन्न प्रकार के रोगों का इलाज किया जा सकता है जैसे- आधे सिर का दर्द, आमाशय की जलन और सूजन, आमाशय का घाव (अल्सर), अनार्तव ऋतुरोध, पतले दस्त या अतिसार,  बेहोशी, मानसिक तनाव, ब्रांकियल अस्थमा, एक्यूट ब्रोंकाइटिस ...............................

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