मांसपेशियां फट जाने और जोड़ उतर जाने पर


मांसपेशियां फट जाने और जोड़ उतर जाने पर

SPLITTING OF MUSCLES AND JOINT'S LUXATION


प्राथमिक चिकित्सा :

परिचय-

         मांसपेशियां शरीर के वे मांसल अंग हैं जिनकी मदद से शरीर के समस्त अंगों का संचालन होता है। मांसपेशियां ही शरीर के विभिन्न अंगों को आकृति प्रदान करती हैं। ये दो प्रकार की होती है-

  • ‘ऐच्छिक मांसपेशियां’
  • ‘अनैच्छिक मांसपेशियां’

हड्डियां तीन प्रकार की होती है-

  • लम्बी
  • छोटी
  • चपटी

हड्डियों का मुख्य कार्य-

  • शरीर को आकृति और मजबूती देना।
  • मांसपेशियों को चिपकाकर रखना।
  • अलग-अलग जोड़ों पर पुट्ठों को आपस में जोड़कर रखना।
  • शरीर के जरूरी अंगों की रक्षा करना जैसे- मस्तिष्क, फेफड़े, दिल आदि।
  • मज्जा के रक्त की लाल कोशिकाओं का निर्माण करना।

हड्डियों के जोड़- शरीर में जिस स्थान पर दो या उससे अधिक हड्डियां जुड़ती है उसको जोड़ कहते हैं। जोड़ दो प्रकार के होते हैं-

  • अचल जोड़- यह जोड सिर की हड्डियों में पाया जाता है।
  • सचल जोड़- यह गेंद और कटोरी के आकार का जोड़ होता है। इस प्रकार का जोड़ कंधे में पाया जाता है।
  • कम सचल जोड़- रीढ़ की हड्डियों के जोड़ को कम सचल जोड़ कहा जाता है।
  • कब्जेदार जोड़- यह जोड़ कोहनी व घुटने में पाया जाता है।
  • अस्थिबंध- जोड़ों को बांधने तथा सहारे का कार्य अस्थिबंध करते हैं।

मांसपेशियां-  मांसपेशियां हड्डियों से जुड़ी होती है और सिकुड़ने पर गति पैदा करती है। मांसपेशियों के ऊपर चर्बी तथा जोड़ने वाले तंतु होते हैं जो मांसपेशियों को त्वचा से बांधते हैं। यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है-

  • ऐच्छिक
  • अनैच्छिक।

मांसपेशियां तथा त्वचा के बीच रक्तवाहनियों का जाल बिछा हुआ है।

त्वचा- त्वचा के अंदर पसीने की ग्रंथियां, चर्बी की ग्रंथियां तथा बालों की जड़े होती है। पसीने की ग्रंथियां शरीर के तापमान को सामान्य रखने में सहायता करती है।

धड़ और उसके अंग-

  • हृदय संख्या में एक होता है और छाती के बाईं तरफ स्थित होता है जबकि फेफड़े संख्या में दो होते हैं एक छाती के दाईं ओर और एक बाईं ओर।
  • धड़ का निर्माण छाती और पेट को मिलाकर होता है। इन दोनों को अलग रखने के लिए बीच में मध्यपट (Diaphragm) होती है।
  • छाती के अंदर दो मुख्य अंग होते हैं- हृदय और फेफड़े।
  • पेट के अंदर आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत, जिगर, पित्ती, अग्नाशय, गुर्दे तथा मूत्राशय होते हैं।

शरीर की कार्य प्रणाली-

स्नायु तंत्र- हमारा शरीर जो भी प्रतिक्रिया करता है या कोई भी शारीरिक हलचल होती है तो उसकी सूचना स्नायु तंत्र द्वारा मस्तिष्क तक जाती है और फिर मस्तिष्क उस सूचना के अनुसार अंगों को प्रतिक्रिया करने का आदेश देता है। अर्थात स्नायुतंत्र का काम है अंगों की सूचना मस्तिष्क तक पहुंचाना और मस्तिष्क की सूचना अंगों तक पहुंचाना।

रक्तसंचार तंत्र- हृदय जितने भी रक्त को पंप करता है वह रक्त रक्तसंचार तंत्र द्वारा ही पूरे शरीर में पहुंचता है और पूरे शरीर से दूषित खून को हृदय तक पहुंचाता है।

श्वास-प्रणाली- इसके द्वारा स्वच्छ वायु हमारे फेफड़ों में जाती है और फेफड़े पूरे शरीर से लाए गए दूषित खून को साफ करके हृदय में भेजता है।

पाचन प्रणाली- यह प्रणाली भोजन को पचाने, परिचालन और बचे-खुचे को पदार्थ को मल के रूप में बाहर निकालती है। इस क्रिया में मुंह, पाकाशय, पेट, आंते, मलाशय, जिगर, गॉल-ब्लेडर और मलद्वार सम्मिलित है।

  • दोनों गुर्दों का कार्य मल-मूत्र को बाहर निकालने का होता है।
  • ग्रंथियां शारीरिक विकास और हार्मोन्स बनाने में मदद करती है।
  • जननेन्द्रियों द्वारा मनुष्य का विकास क्रम चलता है। 
  • ज्ञानेन्द्रियों का कार्य बाहरी वातावरण से संपर्क रखना और उसकी सूचना मस्तिष्क तक पहुंचाना है। ज्ञानेन्द्रिय पांच होती है- आंख, कान, नाक, जीभ, त्वचा।

पैर में कांच, कांटा आदि चुभ जाने पर- अगर पैर में, कांच, कांटा, लोहे का टुकड़ा आदि घुस जाए तो सबसे पहले घायल पैर को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद पैर में घुसी हुई वस्तु को सुई से निकालने की कोशिश करें। लेकिन इसके लिए पहले सुई को निर्जर्मित करना जरूरी है। निर्जमित सुई से पैर में घुसी हुई वस्तु निकालने के बाद पैर की ड्रैसिंग कर दें। अगर आप पैर में घुसी हुई वस्तु को निकालने में असफल हो जाते हैं तो घायल पैर पर ड्रैसिंग करके पट्टी बांध दें और पीड़ित को डॉक्टर के पास ले जाएं।

आंख में किसी वस्तु का गिर जाना- अक्सर आंख में मिट्टी, कोयले आदि के छोटे-छोटे कण, मच्छर आदि कीटाणु, तिनका, धूल आदि वस्तुएं गिर जाया करती हैं। जिसके कारण आंख लाल हो जाती हैं, उनमें किरकिराहट पैदा हो जाती है तथा पानी बहने लगता है। अगर ऐसी स्थिति में लापरवाही बरती जाती है तो आंख सूज जाने या खराब हो जाने का डर रहता है। ऐसी स्थिति में निम्नलिखित उपचार करने से लाभ प्राप्त होता है-

  • अगर आंख की ऊपरी पलक के नीचे कोई वस्तु घुस जाये तो ऊपरी पलक को खींचकर नीची वाले पलक के ऊपर ले आएं। ऐसा करने पर नीची वाली पलक के बालों में उलझकर वह वस्तु बाहर निकल आयेगी। यदि इसमें सफलता न मिले तो ऊपरी पलक को उलट कर उस वस्तु को साफ तथा गीले कपड़े के कोने से पोंछकर बाहर निकाल देना चाहिए।
  • अगर आंख की निचली पलक में कोई वस्तु घुस जाये तो नीची पलक को पलटकर किसी साफ तथा गीले कपड़े के कोने से उस वस्तु को निकाल देना चाहिए।

नोट- ऊपरी पलक को उलटने की आसान विधि यह है कि रोगी के मुंह को ऊपर उठाकर अपनी छाती से टिका लें। फिर एक माचिस की तीली को लम्बाई में ऊपरी पलक की जड़ में लगाये तथा पलक को आगे पकड़कर तीली पर उलट दें। इस स्थिति में रोगी से नीचे की ओर देखने के लिए कहना चाहिए। जब पलक उलट जाये, तब उस पर चिपकी हुई बाहरी वस्तु को साफ कपड़े, ब्लाटिंग पेपर की नोक या रूई की फुरहरी से बाहर निकाल देना चाहिए।

  • आंख धोने के प्याले (Eyes Glass) में साफ पानी भरकर उससे आंख धोने पर भी आंख में पड़ी वस्तु आसानी से बाहर निकल जाती है।
  • यदि ऊपर दी गई विधियों के द्वारा भी अगर आंख में गई हुई वस्तु बाहर न निकले तो आंख में एक बूंद अण्डी का या जैतून का तेल डाल दें। इसके आंख में गई हुई वस्तु आंसुओं के साथ बाहर निकल जाएगी।
  • रूई की मोटी बत्ती, पानी में भिगोकर निचोड़ा गया साफ कपड़ा, ब्लाटिंग पेपर की नोंक की तथा आई-ग्लास के पानी से धोने पर आंख में पड़े हुए कोयले, मिट्टी के कण तथा दूसरे पदार्थों को आसानी से बाहर निकाला जा सकता है।
  • नाक को इतनी जोर से साफ करें कि आंखों में आंसू आ जाए। इन आंसुओं के साथ ही आंख में गिरी हुई वस्तु भी निकल जायेगी।    
  • जिस आंख में कुछ गिर गया हो, उस आंख को मलने से पलकों की त्वचा तथा डेले के छिल जाने की सम्भावना रहती है, जिसके कारण आंख में गिरी हुई वस्तु निकलने की अपेक्षा और अधिक अंदर घुस जाती है तथा दर्द भी बढ़ जाता है। इसके लिए पीड़ित आंख को छोड़कर स्वस्थ आंख को मलना चाहिए। इससे पीड़ित आंख में पड़ी हुई वस्तु निकल सकती है।
  • सादे पानी के स्थान पर बोरिक-एसिड के घोल से आंख को धोने पर आंख में पड़ी हुई वस्तु आसानी से बाहर निकल जाती है।
  • यदि आंख में कोई ज्वलनशील पदार्थ जैसे तेजाब, क्षार आदि चला गया हो तो पीड़ित आंख को बार-बार मलना नहीं चाहिए। ऐसा करने से तेजाब या क्षार की तीव्रता कम हो जाती है। इसके बाद आंख में साफ वैसलीन लगाकर या एक बूंद अण्डी का तेल डालकर, ऊपर से रूई रखकर पट्टी बांध देनी चाहिए।

कान में कीड़ा आदि चले जाने पर-

  • कान में अगर कोई कीड़ा आदि घुस जाए तो उसको निकालने के लिए सबसे पहले कमरे में बिल्कुल अंधेरा कर दें और कान में फ्लैश लाइट या टॉर्च की तेज रोशनी डालें। मध्यम रोशनी कीड़े को कान से बाहर आने के लिए प्रेरित करती है। अगर ऐसा करने पर कीड़ा बाहर न निकले तो पीड़ित को इस प्रकार करवट देकर लिटा दें कि वह कान, जिसमें कीड़ा घुसा है, ऊपर की ओर रहे। अब कान में थोड़ी-सी ग्लिसरीन या नारियल अथवा सरसों का तेल डालें। इससे कुछ मिनट में ही कीड़ा तेल में तैरता ऊपर आ जाएगा। इसके बाद किसी चिमटी आदि की सहायता से कीड़े को बाहर निकाल दें। पीड़ित को दूसरी ओर करवट दिलाकर लिटाने पर तेल के साथ बहकर भी कीड़ा बाहर निकल सकता है। 
  • कान में घुसे कीड़े आदि को निकालने के लिए हेयर पिन, माचिस की तीली या सींक इत्यादि कान में न घुसाएं। इससे कीड़े के कान में और ज्यादा अंदर चले जाने का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही हेयर पिन आदि, कान के परदे पर लगकर भी कान में हानि पहुंचा सकती हैं।
  • कान में तेल डालने पर अगर कीड़ा बाहर न निकले तो और कान में और छेड़छाड़ न करके पीड़ित को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।
  • अगर कान में कोई सख्त वस्तु घुस गई हो तो पीड़ित को ऐसी करवट लिटाएं कि वह कान, जिसमें वस्तु घुसी है, नीचे की ओर रहे। अब बाहरी कान को विभिन्न दिशाओं में खींचें। इससे कान में घुसी वस्तु निकल जाएगी। अगर ऐसा करने पर भी वस्तु न निकले तो पीड़ित को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

नाक में किसी वस्तु का फंस जाना- अक्सर छोटे बच्चे खेलते हुए अपनी नाक में मटर, चना आदि छोटी-छोटी वस्तुएं फंसा लेते हैं। जोर से साँस लेने पर यह वस्तुएं और ऊपर की ओर चढ़ जाती हैं। कभी-कभी सांस छोड़ते यह समय बाहर भी निकल भी जाती हैं और कभी-कभी उसी स्थान पर अटकी भी रहती हैं। अगर ऐसी वस्तुओं को तुरंत ही नाक से नहीं निकाला जाता तो पीड़ित बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

नीचे कुछ तरीके बताए जा रहे हैं जिन्हे अपनाकर नाक में घुसी हुई वस्तु को आसानी से बाहर निकाला जा सकता है-

  • बिल्कुल बारीक तार को नाक में इस प्रकार डालें कि वह तार नाक में फंसी हुई वस्तु के पीछे पहुंच जाए। अब उसे धीरे से झटका देकर नाक में फंसी हुई वस्तु को बाहर निकालने की कोशिश करें।
  • पीड़ित बच्चे को छींकने के लिए कहें। छींक लाने के लिए उसे नसवार, तम्बाकू, मिर्च या अमोनिया आदि भी सुंघाया जा सकता है। 
  • जब नाक में अटकी हुई वस्तु बाहर निकल जाये तो पीड़ित बच्चे की नाक के छिद्रों में थोड़ी-सी साफ वैसलीन चुपड़ दें।

नोट- नाक में पानी डालना या खुद ही चिमटी द्वारा फंसी हुई वस्तु को निकालने की कोशिश करना बेकार है, क्योंकि इससे अटकी हुई वस्तु के और ज्यादा ऊपर चढ़ जाने की सम्भावना रहती है।

पेट के अंदर बाहरी वस्तु चला जाना- कभी-कभी छोटे बच्चे खेल-खेल में या बड़े लोग अंजाने में खाने के साथ बटन, छोटे सिक्के, नट, पिन जैसी चीजें भी निगल जाते हैं। निगल जाने पर अगर ये चीजें भोजन की नली में नहीं अटकतीं तो सीधे पेट में पहुंच जाती हैं। छोटे बच्चे, जिन्हें सब कुछ मुंह में ले जाने की आदत होती है, कई बार ऐसी घटना के शिकार हो जाते हैं।

  • अगर ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है तो आपको घबराएं की बिल्कुल जरूरत नहीं है। हमारे शरीर की प्रणाली ऐसी है कि पेट और अंतड़ियाँ खुद ही ऐसी वस्तुओं को मल के साथ बाहर निकालने की कोशिश करती हैं। लेकिन खुली हुई सेफ्टी पिन या बॉबी पिन अंतड़ियों में फंस सकती है, जिसके कारण अंतड़ियों में छेद भी हो सकता है। यह एक गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।
  • अगर इस प्रकार पेट में घुसी हुई बाहरी वस्तु बाहर न निकले तो पीड़ित को केला इत्यादि न खिलाएं और न ही जुलाब दें। ऐसी स्थिति में पीड़ित को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।