मसाज थैरेपी

Malish ki upyogita aur anivaryata dono hi swasthy ke liye atyant labhdayak hain. Prakratik dwara sharer men prawesh karane wali bimariyon ko prakratik chikitsa se hi thik karen. Inmen malish ko mahatwproon sthan diya gaya hai.


मसाज थैरेपी


स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन होता है और स्वस्थ मन में ही स्वस्थ विचार पैदा होते हैं।मालिश करने की परंपरा बहुत ही पुरानी और लोकप्रिय है। ज्यादातर लोगों के अस्वस्थ होने पर या शरीर के अकड़ जाने पर, पहलवानों को मल्लयुद्व (कुश्ती) के दौरान और स्त्रियों को प्रसवकाल के बाद मालिश करवाते देखा गया है। नवजात बच्चे के जन्म से 6 महीने तक उसके शारीरिक विकास के लिए सरसों के तेल से मालिश करना बहुत आवश्यक है। पुराने जमाने के राजा-महाराजा अपने दरबार में बाकायदा मालिश करने वाले को रखते थे। कुछ लोग तो अपने शौक के तौर पर मालिश करवाते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि मालिश की उपयोगिता और अनिवार्यता दोनों ही स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक हैं।

मनुष्य के स्वास्थ्य के बारे में हिन्दी में एक काफी लोकप्रिय कहावत है- स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन होता है और स्वस्थ मन में ही स्वस्थ विचार पैदा होते हैं। स्वस्थ विचारों से आत्म-सन्तुष्टि मिलती है और आत्म-सन्तुष्टि से ही परम सुख की प्राप्ति होती है।

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