बांदा


बांदा


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[ B ] से संबंधित आयुर्वेदिक औषधियां

बांदा, बलगम, वात, खूनी विकार फोड़े और जहर के दोषों को समाप्त करता है। बांदा भूत-प्रेत से सम्बंधित परेशानियों को दूर करने में उपयोग किया जाता है तथा वशीकरण आदि कार्यो में भी इसका प्रयोग किया जाता है।  रंग : बांदा का रंग हरा और लाल होता है।

स्वाद : बांदा के अन्दर कोई स्वाद नहीं होता है।

स्वरूप : बांदा विभिन्न प्रकार के पेड़ों में उसी पेड़ के समान होता है, बांदा की जड़ उसी पेड़ में पैदा होती हैं। विद्वानों का मानना है कि कबूतर, कौवे आदि पक्षी किसी पेड़ की शाखा लाकर रख देते हैं, उसी में से पत्ते निकल आते हैं और बांदा उग जाता है, किसी में लाल फूल होता है तो किसी में नीला फूल होता है और पत्ते भी अनेकों प्रकार के होते हैं, गांवों में बांदा को बलायके नाम से जाना जाता है।

स्वभाव : यह ठंडा होता है यूनानी चिकित्सों के अनुसार यह गर्म होता है।

हानिकारक : बांदा खाने से पित्त प्रकुपित होती है।

गुण : बांदा, बलगम, वात, खूनी विकार, फोड़े और जहर के दोषों को समाप्त करता है। बांदा भूत-प्रेत से सम्बंधित परेशानियों को दूर करने में उपयोग किया जाता है तथा वशीकरण आदि कार्यो में भी इसका प्रयोग किया जाता है। यह वीर्य को मजबूत करता है और बढ़ाता है। यह वात और बलगम के दोषों को दूर करता है तथा फोड़े-फुन्सियों में लाभकारी होता है। बांदा के काढ़े से कुल्ला करने से मसूढ़ों के दर्द और सूजन कम होते हैं।

विभिन्न रोगों में सहायक :

1. ब्रोंकाइटिस (श्वांस नली की सूजन) : बांदा (बांझी) के फूलों का रस 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में लेकर सेवन करने से ब्रोंकाइटिस ठीक हो जाता है।

2. ब्राकों न्यूमोनिया (फेफड़ों की सूजन, जलन) : बांदा (बांझी) के फूलों का रस 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में रोजाना सेवन करने से ब्राकों न्यूमोनिया (फुफ्फस प्रदाह) के रोग में लाभ मिलता है। इससे  प्रणालीय फुफ्फस प्रदाह के साथ-साथ अन्य सभी रोग भी दूर हो जाते हैं।

3. आमाशय (पेट) का जख्म : बांदा (बांझी) के फूलों का रस 600 मिली ग्राम से लेकर 1200 मिलीग्राम तक की मात्रा में लेकर सुबह और शाम सेवन करने से आमाशय का घाव धीरे-धीरे ठीक होने लगता है।

4. फुफ्फुसावरण (फेफड़ों के बाहरी आवरण की सूजन): बांदा (बांझी) का (एक प्रकार जिसे उत्तर प्रदेश में किशमिश काबली कहा जाता है) चूर्ण 600 मिलीग्राम से 1.20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दोनों समय सेवन करने से फुफ्फुसावरण पूरी तरह से ठीक हो जाता है।

5. गर्भधारण : पीपल का बांदा (बांझी) को लेकर पीसकर छान लेते हैं। इसे 5 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय बछड़े वाली गाय के 250 मिलीलीटर कच्चे दूध से मासिक-धर्म के बीच में 3 दिनों तक लगातार सेवन करने से गर्भधारण होता है।

6. कमरदर्द : 600 से 1200 मिलीग्राम बांदा के फल को सुबह-शाम सेवन करने से कमर दर्द मिट जाता है।

7. दर्द व सूजन में: किसी भी कारण से हुए दर्द या सूजन पर बांदा के पत्तों और फूल को पीसकर गर्म-गर्म लेप करने से लाभ होता है और सूजन भी दूर हो जाती है।

8. जलोदर (पेट में पानी का भरना) : बांदा (बांझी) के फल को 600 मिलीग्राम से 1800 मिलीग्राम की मात्रा में देने से जलोदर (पेट में पानी का भरना) के रोग में लाभ होता है।

9. पक्वाशय (आमाशय) का जख्म : बांदा (बांझी) यानी किशमिश का चूर्ण 600 मिलीग्राम से 1200 मिलीग्राम की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से पक्वाशय के जख्म भरकर ठीक होते जाते हैं।

10. रक्तपित्त : बांदा के फूल का रस 10 से 20 मिलीलीटर सुबह शाम खाने से रक्तपित्त ठीक हो जाती है।

11. मिर्गी : 10 से 20 मिलीलीटर बांदा (बांझी) के फूलों के रस को सुबह और शाम रोगी को देने से मिर्गी का रोग ठीक हो जाता है।

12. मानसिक उन्माद (पागलपन): लगभग 10 से 20 मिलीलीटर बांदा (बांझी) के फूलों का रस सुबह और शाम सेवन करने से पागलपन ठीक हो जाता है।

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