बबूल का गोंद


बबूल का गोंद

(GUM OF ACACIA)


रंग : इसका रंग हल्के पीले रंग का होता है।बबूल की गोंद का प्रयोग करने से छाती मुलायम होती है। यह मेदा (आमाशय) को शक्तिशाली बनाता है तथा आंतों को भी मजबूत बनाता है। यह सीने के दर्द को समाप्त करता है,

स्वाद : इसका स्वाद हल्का मीठा होता है।

स्वरूप : बबूल के पेड़ का गोंद बहुत ही प्रसिद्ध है। इसका निर्माण बबूल के सूखे हुए दूध से होता है। 

स्वभाव : यह ठंडा होता है।

हानिकारक : कतीरा और विहीदाना के साथ इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

दोषों को दूर करने वाला : पलास की गोंद बबूल के गोंद के दोषों को दूर करता है।

मात्रा : इसकी मात्रा 6 ग्राम के लगभग होनी चाहिए।

गुण : बबूल की गोंद का प्रयोग करने से छाती मुलायम होती है। यह मेदा (आमाशय) को शक्तिशाली बनाता है तथा आंतों को भी मजबूत बनाता है। यह सीने के दर्द को समाप्त करता है, तथा गले की आवाज को साफ करता है। इसका प्रयोग फेफड़ों के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। इससे शरीर में धातु की पुष्टि होती है तथा यह वीर्य बढ़ता है। इसके छोटे-छोटे टुकड़े घी, खोवा और चीनी के साथ भूनकर खाने से शरीर शक्तिशाली हो जाता है।

विभिन्न रोगों में सहायक :

बवासीर (अर्श) : बबूल का गोंद, कहरवा समई और गेरु 10-10 ग्राम लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसके 1 से 2 ग्राम चूर्ण को गाय के दूध की छाछ (मट्ठा) में मिलाकर 2 से 3 सप्ताह तक पीयें। यह बादी बवासीर और खूनी बवासीर दोनों रोगों में लाभकारी होता है।

Tags:  Babool ki gond ka rang, Babool ki gond ka ped