बच


बच


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[ B ] से संबंधित आयुर्वेदिक औषधियां

रंग : बच का रंग भूरा होता है।बच को बारीक पीसकर उसके चूर्ण को कपड़े में छानकर रोजाना सुबह निराहार पानी अथवा दूध के साथ एक महीने तक लेने से मनुष्य बहुत ही बुद्धिमान और ज्ञानी होता है।

स्वाद : इसका स्वाद कड़वा होता है।

स्वरूप : इसके पेड़ रेतीली भूमि में काफी अधिक मात्रा पाये जाते हैं। इसके पत्ते लम्बे होते हैं। इसमें फूल नहीं होता है और जड़ को ही बच कहते हैं। बच का रंग भूरा होता है और इसकी सुगन्ध उत्तेजक होती है। इसे सूंघने से ग्लानि पैदा होती है। सबसे अच्छी क्वालिटी की बच कोलकाता में पाई जाती है। प्राय: दुकानदार लोग बच के स्थान पर एक लकड़ी दे देते हैं। परन्तु वह गन्धरहित होती है। डॉक्टरों द्वारा सुगन्धित बच को ही अच्छा बताया जाता है। इसकी अनेक जातियां होती हैं जो निम्नलिखित हैं-

  • घोड़ बच,
  • दूधू बच,
  • खुरासानी बच,
  • महामारी बच,
  • कुलिंजन,
  • आकर करहा,

स्वभाव : इसका स्वभाव गर्म होता है।

हानिकारक : बच गर्म दिमाग वालों के लिए हानिकारक होता है।

दोषों को दूर करने वाला : सौंफ, सिकंजीवन बच के गुणों को सुरक्षित करके इसके दोषों को दूर करता है।

तुलना : इसकी तुलना जराबन्द, लौंग और रेवन्द चीनी से की जा सकती है।

गुण : यह शरीर के खून को साफ करती है। इससे धातु की पुष्टि होती है। यह कफ (बलगम) को हटाती है, गैस को समाप्त करती है, दिल और दिमाग तथा कफ के रोगों से दूर करती है। फालिज और लकवा से पीड़ित रोगियों के लिए बच लाभदायक होता है। यह गले के आवाज की तुतलाहट और हकलाहट को दूर करती है। बच आमाशय और मानसिक बीमारियों को खत्म करती है। यह पुट्ठों, आमाशय को मजबूत और शक्तिशाली बनाता है। दिल को मजबूत करता है। नर्म स्वभाव वाले व्यक्तियों की आंखों की बीमारियों और दांतों के दर्द को दूर करता है। मनुष्यों की आयु को बढ़ाता है। वात और कफ को नष्ट करता है तथा याददाश्त और दिमाग को तेज करता है।

सफेद बच : सफेद बच याददाश्त और बुद्धि को बढ़ाता है। यह पेट की पाचन शक्ति को बढ़ाता है। आयु को बढ़ाता है। यह शरीर में सुदृढ़ और शक्तिशाली वीर्य को बढ़ाता है। यह कफ, वात और भूत-प्रेत की बाधा को दूर करता है तथा पेट के कीड़ों को खत्म करता है।

महामारी बच : महामारी बच बहुत ही तेज गन्ध वाली होती है। इसका प्रयोग कफ, खांसी, गले की आवाज को शुद्ध और साफ करने में किया जाता है। यह एकाग्रता को बढ़ाने में सहायक होती है तथा मुंह की दुर्गन्ध को दूर करती है।

घोड़बच : घोड़बच बहुत ही तेज गंध वाली बच कहलाती है। इसका प्रयोग सिर की जुंओं को मारने के लिए किया जाता है।

बच के चूर्ण के गुण : बच को बारीक पीसकर उसके चूर्ण को कपड़े में छानकर रोजाना सुबह निराहार पानी अथवा दूध के साथ एक महीने तक लेने से मनुष्य बहुत ही बुद्धिमान और ज्ञानी होता है। चन्दग्रहण अथवा सूर्य्रगहण के समय सुगन्धित बच के चूर्ण को दूध के साथ लेने से व्यक्ति अत्यन्त बुद्धिमान और ज्ञानवान हो जाता है। पारसी कवच या बच खुरासानी के गुण भी बच के समान ही होते हैं।

विभिन्न रोगों में सहायक : 

1. अंडकोष की सूजन : 10 ग्राम बच और 10 ग्राम सरसों को पानी के साथ पीसकर रोजाना अंडकोष पर लेप करने से अंडकोष की सूजन दूर हो जाती है।

2. खांसी  : 

  • सूखी खांसी में 24 मिलीग्राम से 48 मिलीग्राम घोड़बच का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसते रहने से लाभ मिलता है। बच्चों को खांसी में घोड़बच का काढ़ा देना लाभकारी होता है।
  • बच को सरसों के तेल में पीसकर नाक पर मालिश करने से जुकाम की खांसी तथा बुखार ठीक हो जाता है।

3. बांझपन दूर करना : यदि गर्भाशय शीतल (ठंडा) हो गया तो बच, काला जीरा और असगंध इन तीनों को सुहागे के पानी में पीसकर उसमें रूई का फाहा भिगोकर तीन दिनों तक योनि में रखने से उसकी शीतलता दूर हो जाती है। इस प्रयोग के चौथे दिन मैथुन करने से गर्भ ठहर जाता है।

4. उल्टी कराने वाली औषधियां : गर्म पानी में नमक मिलाकर उसमें 1 से 2 ग्राम घोड़बच (बच) को मिलाकर रोगी को पिलाने से उल्टी हो जाती है। खांसी और दमा के रोगियों को पिलाने से उल्टी के साथ बलगम भी बाहर आ जाता है और रोगी को आराम मिल जाता है लेकिन ज्यादा कमजोर लोगों को और बच्चों को यह नहीं देना चाहिए क्योंकि उल्टी करने में ताकत की जरूरत होती है।

5. दस्त :

  • बच (घोड़बच) को 240 मिलीग्राम से लेकर 480 मिलीग्राम की मात्रा में शहद के साथ भूनकर बच्चों को खिलाने से दस्त के रोग में लाभ होता है।
  • बच, हरड़, दारूहल्दी, नागरमोथा, सोंठ और अतीस को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर सेवन करने से आमातिसार की बीमारी से रोगी को मुक्ति मिल जाती है।

6. हकलाना, तुतलाना  :

  • हकलाने वाले व्यक्ति को रोजाना सुबह-शाम आधा से 1 ग्राम बच का चूर्ण शहद में मिलाकर खिलाने से हकलाना बन्द हो जाता है।
  • मीठी बच, मीठी कूट, असगन्ध और छोटी पीपल को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस 1 ग्राम चूर्ण को रोजाना शहद में मिलाकर चाटने से आवाज साफ होती है और हकलापन का रोग दूर होता है।

7. गर्भवती स्त्री के विकार : बच और लहसुन को सिलपर पीसकर लुग्दी तैयार कर लेते हैं फिर दूध में डालकर उबाल लेते हैं। जब दूध उबल जाए तो इसे उतारकर छान लेते हैं फिर उसमें थोड़ी-सी हींग तथा कालानमक मिलाकर गर्भवती स्त्री को पिला देते हैं। इससे उसका पेट फूल जाने का रोग ठीक हो जाता है।

8. योनि की जलन और खुजली :

  • बच, अड़ू़सा, कडुवे परवल के पत्ते, प्रियंगु के फूल, नीम की छाल का बारीक चूर्ण बनाकर कपड़े में छानकर पोटली बना लेते हैं और स्त्री के गुप्तांग में रखते हैं अथवा जल भांगरा के रस को साफ रूई में भिगोकर रखने से स्त्री के गुप्तांग की जलन, खुजली और गुप्तांग से निकलने वाला दूषित मवाद का जाना बन्द जाता है।
  • बच का रस रोजाना पीने से योनि की जलन और पीड़ा नष्ट हो जाती है।

9. संग्रहणी (पेचिश) : 240 से 480 मिलीग्राम बच को शहद के साथ मिलाकर खाने से संग्रहणी अतिसार की बीमारी से रोगी को छुटकारा मिल जाता है।

10. कान का बहना : 10 ग्राम बच के चूर्ण को 50 मिलीलीटर तिल के तेल में डालकर पका लें। फिर उसमें 3 ग्राम कपूर मिलाकर छानकर रख लें। इस तेल को बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान में से मवाद बहने के साथ अगर दर्द भी हो तो वह भी दूर हो जाता है।

11. कमजोरी :

  • 240-480 मिलीग्राम बच रोजाना सुबह-शाम शहद या दूध के साथ सेवन करने से दिमागी ताकत (स्मरण शक्ति) बढ़ती है। इसे अधिक दिनों तक दें। मात्रा न बढ़ाये नहीं तो सिर दर्द होता है।
  • बच, ब्राह्मी, शंखपुश्पी तीनों को बराबर मात्रा में लेकर ब्राह्मी के रस में 3 उबाल देकर सुखाकर चूर्ण बनाकर रख लें। इसमें से आधा से 1 ग्राम सुबह-शाम समान मात्रा में शहद और घी के साथ सेवन करने से कमजोरी दूर होती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है।

12. स्तनों के आकार में वृद्धि:

  • बच और दाड़िम को सरसों के तेल में पकाकर शुद्ध हुए तेल की स्तनों पर मालिश करने से स्तन सुन्दर, पुष्ट और आकर्षक बन जाते हैं।
  • बच और दाड़िम को गंभारी (श्रीपर्णी) के रस में शुद्ध करके छान करके रख लें, फिर इसी तेल को एक दिन में सुबह और शाम लगभग 10-10 मिनट तक मालिश करने से स्त्री के स्तनों के आकार में बढ़ोत्तरी होती है।

13. अधिक नींद और ऊंघ आना : बच को बारीक पीसकर उसके चूर्ण को आंखों में लगाने से और सूंघने से नींद की बीमारी दूर हो जाती है।

14. पेट के कीड़ों के लिए : एक चुटकी बच के चूर्ण को हींग के दानों के साथ पीसकर पानी के साथ बच्चों को देने से लाभ होता है।

15. गुल्म होने पर :

  • बच, हरड़, हींग, अम्लवेत, सेंधानमक, अजवायन और जवाखार को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर छान लें। इस चूर्ण में 3 से 6 ग्राम तक गर्म पानी के साथ खुराक के रूप में सेवन करने से सात दिन में ही गुल्म का रोग पूरा समाप्त हो जाता हैं।
  • बच 20 ग्राम, हरड़ 30 ग्राम, बायबिडंग 60 ग्राम, सोंठ 40 ग्राम, हींग 10 ग्राम, पीपल 80 ग्राम, चीता 50 ग्राम और अजवायन 70 ग्राम आदि को मिलाकर पीसकर और छानकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2 से 4 ग्राम तक की मात्रा में गर्म पानी या शराब के साथ सेवन करने से गुल्म का रोग समाप्त हो जाता है।

16. स्तनों में दूध के सूख जाने पर : यदि स्तनों में दूध सूख गया हो तो बच, नागरमोथा, अतीस, देवदारू, सोंठ, शतावर तथा अनन्तमूल इन सभी का काढ़ा बनाकर पिलाने से लाभ मिलता है।

17. पेशाब का अधिक आना : 6 ग्राम बच और 4 ग्राम जवाखार को पीसकर पानी के साथ लेने से पेशाब का अधिक आना दूर होता है।

18. पेट में दर्द :

  • भुनी और पिसी हुई 240 मिलीग्राम बच को दूध में मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
  • बच, अदरक, चीता, इन्द्र-जौ, कूट, पाढ़, अजमोद और पीपल को बराबर मात्रा में पीसकर बने चूर्ण को 6 ग्राम से लेकर 10 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ सेवन करने से `प्लीहोदर´ प्लीहा का दर्द और पेट की बीमारियां समाप्त हो जाती हैं।

19. चक्कर आना : लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में बच, तोरई और सौंठ को पीसकर इसका बारीक चूर्ण बना लें। इसके बाद इसको छानकर इसमें लगभग 5 ग्राम की मात्रा में अफीम मिलाकर पानी में पीसकर सिर पर लेप की तरह लगाने से चक्कर आना बन्द हो जाते हैं।

20. गठिया रोग :

  • 2 चुटकी बच के चूर्ण को रोजाना सुबह-शाम गर्म पानी से लेने से गठिया के रोग में लाभ होता है।
  • घोड़बच का लेप या उसके तेल से मालिश करने से गठिया के रोग में आने वाला आलस्य और दर्द ठीक होता है।

21. मिरगी (अपस्मार) :

  • 10 ग्राम बच के चूर्ण को एक चम्मच शहद में मिलाकर चाटें या एक कप दूध में फंकी लें। इससे मिर्गी के दौरों में लाभ प्राप्त होता है।
  • बच, तगर, सिरस के बीज, मुलहठी, हींग, लहसुन और कड़वा कूठ इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर बकरी के मूत्र में बारीक पीस लें। अब इस मिश्रण को आंख में लगाने से मिर्गी का रोग दूर हो जाता है।
  • खुरासानी बच और कुटकी को ब्राह्मी रस के साथ सेवन करने से मिर्गी के दौरे दूर हो जाते हैं।
  • बच के चूर्ण को शहद में मिलाकर रोजाना खाने के बाद दूध और चावल का भोजन करें। ऐसा करने से पुराने से पुराना मिर्गी का रोग ठीक हो जाता है।

22. मानसिक उन्माद (पागलपन) :

  • लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में बच, सिरस के फूल, मजीठ, पीपल, सरसों, हल्दी और सौंठ को कूट-छानकर बकरे के पेशाब में चने के आकार की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें और पागलपन से पीड़ित व्यक्ति को एक गोली पानी में पीसकर आंखों में लगाने से यह रोग ठीक हो जाता है।
  • बच, ग्वारपाठे का रस और ब्राह्मी को पेठे के रस में मिलाकर पीने से पागलपन खत्म हो जाता है।

23. कुष्ठ (कोढ़) : सफेद बच को पानी में पीसकर लेप करने से `चर्मदल´ कुष्ठ ठीक हो जाता है।

24. बच्चों का रोना : अगर बच्चा स्नायविक रोग के कारण चिड़चिड़ा हो जाए और लगातार रो ही रहा हो तो उसे 1 से 3 ग्राम बच का चूर्ण शहद और घी के साथ मिलाकर रोजाना सुबह और शाम खिलायें। इससे बच्चे को आराम आ जाता है।

25. बच्चों के दांत निकलना : जब बच्चे के दांत निकल रहे हो तो 120 मिलीग्राम से 240 मिलीग्राम बच के टुकड़े को रोजाना दो बार बच्चे को चबाने को देने से दांत निकलने में आसानी होती है।

26. लिंग वृद्धि : बच, असगंधा, कूट, कड़वी कटेली की जड़ और सतावरी 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर उसे बारीक पीसकर 500 ग्राम पानी में उबाल लें। उबलने पर एक चौथाई पानी रह जाने पर उतारकर 100 ग्राम तिल के तेल को मिलाकर फिर गर्म करें। पानी जल जाने पर उसे उतार लें और रात को सोते समय उसका 3-4 बूंद लिंग पर लगायें और ऊपर से कच्चे धागे से बांध दें। इससे लिंग की मोटाई बढ़ती है।

27. सिर का दर्द : पानी में बच को घिसकर सिर पर लेप की तरह से लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।

28. शरीर में सूजन :

  • लगभग 10-10 ग्राम की मात्रा में बच और सरसों को पानी में पीसकर अंडकोष की सूजन पर लेप की तरह से लगाने से सूजन दूर हो जाती है।
  • शरीर में चोट लगने पर घोड़बच का लेप लगायें या इससे प्राप्त तेल की मालिश करें इससे सूजन और पीड़ा कम हो जाती है।

29. गले की सूजन : 40 मिलीलीटर घोड़बच (बच) का काढ़ा रोजाना 2-3 बार पीने से गले की सूजन समाप्त हो जाती है।