बंध

Yog ke abhyas men bandh ka bahut adhik mahtw hai iski sahayata se vibhinn prakar ke rogon ko thik kiya ja sakata hai.


बंध

जलंधर बंध :

जलंधर बंध का मतलब होता है सांस की नली को सिकोड़ना। सबसे पहले जमीन पर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। फिर दोनों घुटनों को जमीन पर टिका लें। इसके बाद दोनों हाथों की हथेलियों को घुटनों पर रखकर बैठ जाएं। अब दोनों आंखों को बंद करके शरीर को ढीला छोड़ दें। फिर गहरी सांस लेकर सांस को अंदर ही रोककर रखें तथा सिर को नीचे की ओर झुका लें और ठोड़ी को उसी जगह पर जोर से दबाएं। ................................

मूल बंध :

सबसे पहले सिद्धासन की अवस्था में बैठ जाएं। ध्यान रहे आपके दोनों घुटने जमीन को छूते हुए तथा हथेलियां उन पर टिकी होनी चाहिए। फिर गहरी सांस लेकर वायु को अंदर ही रोक लें और जलंधर बंध का अभ्यास करें। इसके बाद गुदा प्रदेश को पूरी तरह से सिकोड़ लें ताकि पूरा श्रोणि प्रदेश भी सिकुड़ जाएं। अब सांस को रोककर रखने के साथ आरामदायक समयावधि तक मुद्रा को बनाए रखें।..............................

उडि्डयान बन्ध :

उडि्डयान बन्ध का मतलब होता है आंतों का सिकुड़ना। इस मुद्रा को करने के लिए सबसे पहले किसी आसन की मुद्रा में बैठ जाएं। फिर दोनों घुटनों को जमीन पर टिका लें। इस दौरान आपकी हथेलियां जमीन पर टिकी होनी चाहिए। इसके बाद आंखों को बंद करके पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें। फिर सांस को बाहर छोड़कर सांस को लेना बंद कर दें।...............................