फलाहार चिकित्सा

Phalahar chikits men rogon ka upchar karane ke liye phalon ka prayog kiya jata hai tatha rogin ko kaee prakar se bahut ls chijon ka parahej kiya jata hai.


फलाहार चिकित्सा


किसी बहुत बड़े डाक्टर ने अपनी एक पुस्तक में लिखा है कि आज जो डाक्टरों और दवाइयों की प्रणाली मशहूर है वह थोड़े समय के बाद मध्ययुगीन सभ्यता का सिर्फ निशान ही समझी जाएगी क्योंकि आने वाले भविष्य में यह व्यवस्था मानी जाएगी................ 
कोई भी व्यक्ति जब तक बचपन की अवस्था में रहता है तब तक उसका स्वाभाविक भोजन सिर्फ दूध ही होता है और कुछ नहीं। लेकिन जब बच्चा बड़ा होता है तथा उसके दांत भी निकल आते हैं तो उसका स्वाभाविक भोजन बदलकर दूध से भिन्न हो जाता है।................ 
प्रयोगों द्वारा यह साबित हो चुका है कि मनुष्य के जीवन को चलाने के लिए भोजन के जो पदार्थ जरूरी होते हैं वे सारे पदार्थ फलों के अन्दर प्राकृतिक रूप से काफी मात्रा में मौजूद होते हैं। ये शरीर को अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करते हैं और शरीर के अन्दर मौजूद हुए खराब पदार्थों के विकारों को बाहर निकालते हैं।............... 
जिस तरह से फलों के अन्दर कई तरह के गुण मौजूद होते हैं उसी तरह मेवों में भी काफी गुण होते हैं और उनके लगभग सारे लाभकारी तत्व उन्हीं मेवों के अन्दर सुरक्षित होते हैं। एक तरह से देखा जाए तो ये मेवे ताजे फलों से भी ज्यादा लाभकारी साबित होते हैं।............... 
कोई व्यक्ति भोजन क्यों करता है? इसलिए ताकि उस भोजन के जरिये उसके शरीर को ताकत मिले और वह चलता-फिरता रहे लेकिन हर तरह का भोजन हमारे शरीर के लिए जरूरी नहीं है कि लाभकारी हो, कुछ भोजन ऐसे भी होते हैं जो हमारे शरीर को पोषण न देकर नुकसान पहुंचा सकते हैं................. 
फल खाना हमारे लिए बहुत ही जरूरी है। यह स्वादिष्ट होने के साथ मनुष्य के अच्छे स्वास्थ्य के लिए वरदान भी है। फल में सभी रोगों से लड़ने की शक्ति होती है।................. 
पके हुए फालसों को खाने से या उनका शर्बत बनाकर पीने से स्वप्नदोष, प्रमेह रोग, सुजाक रोग, पित्त के कारण उत्पन्न हुए रोग, जलन, चक्कर आना तथा स्त्री-पुरुषों की पेशाब की नली की जलन के रोग आदि समाप्त हो जाते हैं।.................