प्लीहा


प्लीहा

(Spleen)


       प्लीहा लसीकाभ ऊतक से बनी एक चपटी दीर्घायताकार (oblong) बड़ी ग्रन्थि है। यह नलिकाविहीन ग्रन्थि होती है तथा उदरीय गुहा में बाईं ओर बाएं अधः पर्शुकीय क्षेत्र (left hypochondriac region) में डायाफ्राम के नीचे (inferior), आमाशय के फण्डस, बाएं वृक्क (गुर्दे), अग्न्याशय (पैन्क्रियाज) की पुच्छ एवं बड़ी आँत के प्लीहज बंक (splenic flexure) को स्पर्श करती हुई स्थित रहती है। इसका आकार एवं आकृति लगभग एक बन्द मुट्ठी के जैसी होती है जो औसतन 12 सेमीमीटर लम्बी, 7 सेमीमीटर चौड़ी और 2.5 सेमीमीटर मोटी होती है। इसका वजन लगभग 200 ग्राम और रंग गहरा बैंगनी होता है।

       प्लीहा के एन्टीरियर एवं पोस्टीरियर दो किनारे तथा दो परत होती हैं। एक परत उत्तल (convex) होती है और डायाफ्राम के नीचे स्थित होती है। दूसरी परत अवतल (concave) होती है जो आमाशय के फण्डस, बाएं वृक्क (गुर्दे), अग्न्याशय (पैन्क्रियाज) और प्लीहज बंक के सम्पर्क में होती हैं। अवतल परत पर नीचे की ओर एक हाइलम होता है जिससे होकर प्लीहज धमनी (splenic artery), तन्त्रिकाएं (nerves) और लसीका वाहिकाएं (lymph vessels) प्लीहा में प्रवेश करती हैं तथा प्लीहज शिरा (splenic vein) इससे बाहर की ओर निकलती है।

       प्लीहा की ऊतक संरचना लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) की सरंचना के जैसी ही होती है जो चारों ओर से संयोजी ऊतक के एक कैप्सूल से ढकी होती है। इससे अन्दर की ओर निकले तन्तु बन्धों (trabeculae) से प्लीहा कई भागों में बंट जाती है। इन बंटे हुए भागों को खण्ड या लोब्यूल्स (lobules) कहा जाता है। मेड्यूला के क्रियात्मक भाग में एक कोशिकीय पदार्थ रहता है जिसे प्लीहज-लुगदी (splenic pulp) कहते हैं। यह दो तरह का होता है- लाल और सफेद। लाल लुगदी (red pulp) पूरे प्लीहा में भरपूर मात्रा में रहती है, जिसमें सफेद लुगदी के छोटे-छोटे द्वीपसमूह बिखरे रहते हैं। सफेद लुगदी (white pulp) प्लीहज धमनी की छोटी-छोटी शाखाओं के चारों ओर लसीका कोशिकाओं (लिम्फोसाइट्स) के घने पिण्डों (compact masses) की बनी होती है। इन पिण्डों को (यह अन्तरालों में होते हैं) प्लीहज पर्विकाएं (splenic nodules) या मैल्पीघीयन कार्पल्स (Malpighian corpuscles) कहते हैं। लाल लुगदी के अंदर रक्त से भरे हुए शिरीय विवर (venous sinsoids) होते हैं तथा इनमें मोनोसाइट्स एवं वृहत्भक्षक कोशिकाएं (macrophages) रहती हैं। इनमें से मोनोसाइट्स रक्तप्रवाह के लिए सफेद रक्त कोशिकाओं को बनाने में मदद करती हैं तथा भक्षक कोशिकाएं (फैगोसाइट्स) टूटने वाली लाल रक्त कोशिकाओं का भक्षण करके उन्हें टुकड़ों में बांट देती हैं।

       प्लीहज धमनी की शाखाएं प्लीहा में पहुंचकर रक्त को सीधे प्लीहज लुगदी (splenic pulp) में डालती हैं। प्लीहा में केशिकाएं नहीं होती हैं। इससे रक्त प्लीहा की कोशिकाओं के सीधे सम्पर्क में आता है और शिरीय विवरों (venous sinusoids) में जमा होता रहता है। यहां से रक्त प्लीहज शिरा की शाखाओं में चला जाता है, जिनके आपस में मिलने से प्लीहज शिरा (splenic vein) बनती है। यह प्लीहज शिरा पोर्टल शिरा से मिल जाती है।

प्लीहा के कार्य (Functions of the spleen)-

  1. प्लीहा का मुख्य कार्य रक्त को छानना (filter) और भक्षक कोशिकाओं- लसीका कोशिकाओं (लिम्फोसाइट्स) तथा मोनेसाइट्स को बनाना है।
  2. प्लीहा में मौजूद अधिक संख्या में भक्षक कोशिकाएं (macrophages) रक्त से नष्ट हुई (damaged) या मृत लाल कोशिकाओं (erythrocytes), प्लेटलेट्स, सूक्ष्म जीवाणुओं तथा दूसरे कोशिकीय कचरे (debris) को हटाने में मदद करती है। भक्षक कोशिकाएं जीर्ण लाल रक्त कोशिकाओं के हीमोग्लोबिन से आयरन को भी हटाती हैं तथा अस्थिज्जा (bone marrow) में लाल रक्त कोशिकाओं को पैदा करने के लिए इसे परिसंचरण में लौटा देती हैं। हीमोग्लोबिन के टूटने से बिलिरुबिन पिगमेन्ट का उत्पादन होता है। यह पिगमेन्ट जिगर में परिसंचरित होता है।
  3. प्लीहा के रक्त में मौजूद एन्टीजन्स लसीका कोशिकाओं (लिम्फोसाइट्स) को क्रियाशील बनाकर कोशिकाओं में विकसित होते हैं तथा एन्टीबॉडीज़ का निर्माण करते हैं।
  4. प्लीहा भ्रूणावस्था में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने का कार्य करता है। बाद में यह ताजी बनी लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेट्लेट्स को जमा करके (store) रखती हैं तथा जरूरत पड़ने पर इन्हें रक्तप्रवाह में छोड़ती है।
  5. रक्त के भण्डार (reservoir) का कार्य प्लीहा द्वारा ही होता है।