प्रेक्षाध्यान

Preksha dhyan ka mukhy sidhant hai- dekhana isliye iska nam prekshadhyan rakha gaya tha. Is sadhana men vicharon ko ekagr karane ke sthan par pratyksh Gyaan kop rapt karane wale dhyan ko batya gaya hai.


प्रेक्षाध्यान

कायोत्सर्ग का अर्थ चेतन ज्ञान के साथ शरीर का त्याग करना है। आम भाषा में यह शरीर की सामूहिक गतिविधियों का चेतनापूर्ण ठहराव होता है। इससे शरीर की मांसपेशियां शिथिल बनती हैं तथा चयापचयी क्रिया तीव्र रूप से घट जाती है। शरीर की ऐसी स्थिति मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक होती है। कायोत्सर्ग का अभ्यास ध्यान का अभ्यास करने से पहले किया जाता है। इसलिए इसे ध्यान की पहली स्थिति कहा जाता है। किसी भी प्रकार के अभ्यास से पहले इस क्रिया को कुछ मिनट तक अवश्य करना चाहिए..............................
जैन धार्मिक ग्रंथ ´दासाविलियम´ के द्वारा दिया गया  सूत्र ध्यान ही ´प्रेक्षा ध्यान´ प्रणाली का मूल सिद्धांत है, जिसकी रचना महान विचारक तथा दार्शनिक परम संत ´आचार्य महाप्रज्न´ ने की थी। ´प्रेक्षा ध्यान´ साधना के विषय में कहा गया है- ´सम्प्रेक्षता आत्मानामात्मान। इस सूत्र का सरल अर्थ है- ´तुम स्वयं अपने आप को देखो या अपने अस्तित्व को पहचानों.............................
प्रेक्षा ध्यान साधना के संस्थापक आदिनाथ थे। जैन धार्मिक शास्त्रों में 23 तीर्थंकरों का वर्णन किया गया है। परन्तु अब तक पहले 22 तीर्थंकरों के विषय में कोई जानकारी नहीं मिली है। जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे तथा इनका जन्म आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था। वर्धमान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे तथा जिनका जन्म बिहार के वैशाली नगर में 540 ई. पूर्व. में हुआ था..............................

कुछ खास अर्टिकल


 योगासन       |    भुजंगासन       |      चक्रासन     |     मत्स्यासन      |     पद्मासन      |     शीर्षासन      |     हस्तपादास      |      नटराज आसन     |      सिद्धासन     |    सर्वांग आसन       |    सूर्य नमस्कार आसन      |    शवासन       |     ताड़ासन      |     सुखासन क्या है?      |     वज्रासन          |     हठयोग और मुद्राएं      |     मुद्रा      |   अग्नि मुद्रा        |    अपान मुद्रा       |    ध्यान मुद्रा       |    हस्तमुद्रा      |       ज्ञान मुद्रा    |    लिंग मुद्रा       |     नमस्कार मुद्रा      |   मयूरी मुद्रा        |     पंचशक्ति मुद्रा      |     योनिशून्य मुद्रा      |      शक्ति पान मुद्रा     |     रज मुद्रा      |      भ्रमण प्राणायाम     |      प्राणायाम और कुण्डलिनी       |    योग में     कपालभाति       |    मूर्च्छा प्राणायाम       |       सरल प्राणायाम     |      शीतली प्राणायाम     |    यौन समस्याओं से संबन्धित घटनाएं          |   प्रेक्षाध्यान क्या है?         |      षट्चक्र     |      पंचकोश विज्ञान     |     कुण्डलिनी शक्ति      |     चक्र ध्यान      |    ध्यान       |     वस्तिकर्म       |       कुन्जन      |     जलनेति      |       बस्ति कर्म    |