प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी वस्तुएं


प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी वस्तुएं

IMPORTANT THINGS FOR FIRST AIDS


प्राथमिक चिकित्सा :

परिचय-

         प्राथमिक उपचार की जरूरत सबसे ज्यादा उस समय पड़ती है जब कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना आदि में घायल हो जाता हैं और उसे डॉक्टर की सहायता मिलने में या अस्पताल तक जाने में समय लगता है। ऐसी स्थिति में जरूरी चिकित्सा मिलने तक घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपाचर दिया जाता है। प्राथमिक उपचार के लिए उपचारकर्त्ता के पास कुछ वस्तुओं का होना जरूरी होता है जैसे-

  • रूई- प्राथमिक उपचार के लिए सबसे पहले उपचारकर्त्ता के पास साफ रूई होनी चाहिए। यह रूई घायल व्यक्ति के शरीर के जो अंग कट-फट गए हो या जिनमें से खून निकल रहा हो इन्हे साफ करने के काम में आती है।
  • पिन- उपचारकर्त्ता के पास कुछ पिन होनी चाहिए। इन पिनों की सहायता से पीड़ित अंग पर पट्टी बांधकर पिन की सहायता से रोका जा सकता है।
  • टेप- उपचारकर्त्ता के पास एक टेप होनी चाहिए। इस टेप की सहायता से कटे-फटे स्थान पर रूई रखकर चिपकाई जाती है।
  • गाज- उपचारकर्त्ता के पास साफ गॉज होना चाहिए। यह गॉज जख्म आदि को बांधने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
  • कैंची- उपचारकर्त्ता के पास एक कैंची होनी चाहिए। यह कैंची पट्टी को काटने के लिए प्रयोग में लाई जाती है।
  • चम्मच और गिलास- चम्मच और गिलास रोगी को दवा और दूध आदि पिलाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
  • बड़ी पट्टियां- बड़ी पट्टियां घाव या मोच पर बांधने के लिए प्रयोग में लाई जाती है।
  • मेज- मेज रखकर घायल व्यक्ति के पीड़ित अंग पर पट्टी बांधी जाती है।
  • खपच्ची- खपच्ची को टूटी हुई हड़्डी पर रखकर बांधा जाता है। ।
  • चिमटी- कांच आदि चुभ जाने पर उसे निकालने के लिए चिमटी का प्रयोग किया जाता है।
  • गर्म पानी की बोतल- इस बोतल को पीड़ित अंग पर सेंक देने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
  • बर्फ की टोपी- अधिक तेज बुखार में सिर पर रखने के लिए बर्फ की टोपी का प्रयोग किया जाता है।
  • डॉक्टरी सुई और धागा- जख्मों पर टांका आदि लगाने के लिए डॉक्टरी सुई और धागे का प्रयोग किया जाता है।

प्राथमिक उपचार करते समय उपचारकर्त्ता के पास ये सारी सामग्रियां होने के साथ-साथ कुछ दवाईयां भी होना जरूरी है जैसे-

          दर्द दूर करने वाली दवाईयां, दिल का दौरा आदि पड़ने पर आराम के लिए कुछ दवाईयां, पट्टी पर रखने के लिए कुछ ऐंटिबायटिक दवाइयां, घाव साफ करने के लिए ऐंटिवायटिक लोशन, अमृतधारा, पेन-बाम, वैसलीन, पोटाशियम परमेगनेट, बरनैल, बोरिक एसिड पॉउडर, सीवाजौल पॉउडर, डेटॉल, टिंक्चर आयोडीन, पिसाहुआ नमक, अरण्डी का तेल, तारपीन का तेल, स्प्रिट, अमोनिया, चूना, नौसादर, फिटकरी, सरसों का तेल आदि।

इसके अलावा प्राथमिक उपचार करने वाले उपचारकर्त्ता में कुछ जरूरी गुण होना जरूरी है-

          प्राथमिक उपचार करने वाले उपचारकर्त्ता में कुछ गुणों का होना जरूरी है ताकि वह जल्दी से जल्दी पीड़ित व्यक्ति को सहायता प्रदान कर सके। जब भी कोई व्यक्ति दुर्घटना-ग्रस्त होता है तो उसकी सहायता के लिए बहुत से लोग आ जाते हैं लेकिन उनमें से कोई भी प्राथमिक उपचार करने वाला नहीं होता। योग्य प्राथमिक उपचार करने वाले व्यक्ति में निम्नलिखित गुण होने जरूरी है जैसे-

  • प्राथमिक उपचार करने वाले उपचारकर्त्ता में पूरा आत्मविश्वास होना जरूरी है। उसके चेहरे पर घबराहट या परेशानी नहीं होनी चाहिए। घायल व्यक्ति को संभाल सके और समय के अनुसार जल्दी से जल्दी सही फैसला ले सके।
  • प्राथमिक उपचार करने वाले में सहानुभूति पूर्ण व्यवहार होना चाहिए ताकि वह पीड़ित को सांत्वना दे सके क्योंकि ऐसी स्थिति में पीड़ित को सांत्वना की भी बहुत जरूरत होती है।
  • प्राथमिक उपचार करने वाले व्यक्ति को धैर्यवान तथा आशावान होना चाहिए क्योंकि प्राथमिक चिकित्सक ही अगर निराशा से भरा हुआ और अधीर होगा तो रोगी की ठीक होने की उम्मीद स्वयं ही खत्म हो जाएगी।
  • प्राथमिक उपचार करने वाले व्यक्ति को स्थानीय भाषा की सही जानकारी होनी चाहिए ताकि वह दुर्घटना की सही जानकारी पीड़ित के परिवार वालों को दे सकें।
  • जब कोई आकस्मिक दुर्घटना घटती है तब उसमें बहुत से लोगों की स्थिति बहुत ही दयनीय होती है। ऐसी स्थिति में कमजोर हृदय वाला प्राथमिक उपचारकर्त्ता खुद भी घबरा जाता है।
  • प्राथमिक उपचार करने वाले व्यक्ति को शरीर और शरीर के विभिन्न अंगों की क्रिया प्रणाली का प्रारम्भिक ज्ञान होना चाहिए। इसके अलावा उसे जरूरी औषधियां और पट्टियां बांधने का भी ज्ञान होना चाहिए।
  • प्राथमिक उपचारकर्त्ता को घटनास्थल की स्थिति का जायजा लेने की पूरी नॉलेज होनी चाहिए।
  • प्राथमिक उपचार करने वाले की ओर से रोगी या घायल व्यक्ति को कुछ औषधियां या दूसरी सहायता दी जाती है। इसलिए उसके पास उपचार और सहायता के जरूरी साधन होने जरूरी है।
  • प्राथमिक उपचार करने वाले को बहुत चतुराई से काम लेना चाहिए। चतुर व्यक्ति स्थिति की वास्तविकता को शीघ्र ही समझ लेता है तथा सही कदम उठाने में देर नहीं करता है।
  • प्राथमिक उपचार करने वाले को विवेकशील होना चाहिए। कई बार दुर्घटना के समय अनेक समस्याएं खड़ी हो जाती है। ऐसी स्थिति में प्राथमिक उपचार करने वाले को सबसे पहले उस कार्य को करना चाहिए जो सबसे जरुरी हो।

नोट-

  • प्राथमिक उपचार के बारे में हर आदमी को जानकारी होनी चाहिए क्योंकि पता नहीं कब, कहां और किसे प्राथमिक उपचार देने की जरूरत पड़ जाए।
  • प्राथमिक उपचार की जानकारी कभी भी बेकार नहीं जाती। अगर इस जानकारी से आपने अपने जीवन में एक भी आदमी के प्राण बचा लिए तो समझिए कि आपकी जानकारी पूर्ण रूप से सार्थक हो गई।

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