प्राणायाम की जानकारी

Pranayam ko yog ka chautha ang mana gaya hai. Yog shastron men pranaym ke bare men batate huye kaha gaya hai ki pranayam man ko shudhd karke use chintan ke yogy banana ki kriya hai.


प्राणायाम की जानकारियां


प्राणायाम का परिचय    |    प्राणायाम साधना    |    प्राणायाम से पहले नाड़ी शोधन    |    प्राणायाम के असाधारण प्रयोग     |    भ्रमण प्राणायाम    |    प्राणायाम में मुद्राओं का महत्व    |    प्राणायाम एक सरल, व्यवहारिक, सर्वोपयोगी योग साधना    |    लयबद्ध सांस क्रिया और प्राणायाम    |    प्राणायाम से कुण्डलिनी जागरण और शक्ति प्राप्ति की साधना    |    प्राणायाम द्वारा भूत-प्रेत दूर करना    |    प्राणायाम के द्वारा मिलने वाले लाभ    |     प्राणायाम में ओंकार का महत्व    |  प्राणायाम और कुण्डलिनी    |    प्राणायाम का शरीर पर प्रभाव     |    प्राणाधन के दिव्य मंत्र    |    प्राणायाम से रोगों को दूर करना    |    प्राणायाम के अभ्यास में सावधानियां (ध्यान रखने योग्य बातें।)    |    प्राणायाम (स्वास्थ्य की रक्षा और आयु में वृद्धि के लिए)    |    प्राणायाम की परिभाषा और भेद    |    प्राणायाम और जीवन की उलझी समस्याएं     |    प्राणायाम द्वारा आत्मरक्षा     |    प्राणायाम की आध्यात्मिक उपलब्धियां    |    प्राणायाम और आध्यात्मिक यज्ञ    |    प्राणायाम और सूर्य नमस्कार    |    प्राणायाम का रोगों में उपयोग    |    श्वास क्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन    |    योग में प्राणायाम का महत्व    |    प्राणशक्ति (जीवनशक्ति) की विशेषता    |    प्राणायाम का महत्व

प्राणायाम के बारे में अनेक प्रकार की धारणाएं हैं। कोई प्राणायाम को पारलौकिक ज्ञान को प्राप्ति का साधन मानता है, तो कोई इसे खून को साफ कर जीवनशक्ति को बढ़ाने की एक क्रिया मानता है। विज्ञान के अनुसार प्राणायाम के अभ्यास से वायुमण्डल में फैली शुद्ध ऑक्सीजन (शुद्ध वायु) शरीर में प्रवेश करती है जिससे शरीर का खून साफ होता है और ऑक्सीजन की अधिक मात्रा शरीर में पहुंचने से शरीर के अंदर के दूषित तत्व या विजातीय द्रव्य बाहर निकल जाते हैं।

          प्राणायाम को योग का चौथा अंग माना गया है। योग शास्त्रों में प्राणायाम के बारे में बताते हुए कहा गया है कि प्राणायाम मन को शुद्ध करके उसे चिंतन के योग्य बनाने की एक क्रिया है। जब व्यक्ति आसन के द्वारा शारीरिक स्वास्थ्यता प्राप्त कर लेता है, तब मन को स्वस्थ, शांत, स्थिर व एकाग्र करने के लिए प्राणायाम का अभ्यास करना पड़ता है। प्राणायाम के अभ्यास के बिना प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि प्राप्त करना सम्भव ही नहीं है। इसलिए प्राणायाम को आसन और ध्यान, समाधि आदि का जोड़ कहा गया है। प्राणायाम से पहले आसन के द्वारा व्यक्ति अपने शरीर को स्वस्थ करता है और प्राणायाम से मन को स्वस्थ और स्थिर कर योग के ध्यान, धारणा व समाधि की ओर बढ़ता है।