प्राणायाम

Pranayam ko yoga ka chautha ang mana gaya hai. Yoga shastron men pranayam ke bare men batate huye kaha gaya hai ki pranayam man ko shudhd karke use chintan ke yogy banana k ek kriya hai.


प्राणायाम


1. प्राणायाम और उसकी जानकारी

2. प्राणायाम की क्रिया


कुछ खास अर्टिकल :


प्राणायाम का परिचय   |   प्राणायाम से कुण्डलिनी जागरण और शक्ति प्राप्ति की साधना      |    प्राणायाम के द्वारा मिलने वाले लाभ    |   प्राणायाम और कुण्डलिनी     |    प्राणायाम का शरीर पर प्रभाव    |    प्राणायाम से रोगों को दूर करना    |    प्राणायाम की परिभाषा और भेद    |   प्राणायाम द्वारा आत्मरक्षा     |   प्राणायाम और आध्यात्मिक यज्ञ     |   प्राणायाम का महत्व     |    योग में प्राणायाम का महत्व    |    अग्निसार प्राणायाम    |     भस्त्रिका प्राणायाम   |    कपालभाति    |     उज्जायी प्राणायाम   |     सूर्य भेदन प्राणायम   |   सरल प्राणायाम     |     अनुलोम-विलोम प्राणायाम 

प्राणायाम जो किसी साधारण व्यक्ति को सामान्य जीवन से ऊपर उठाकर पारलौकिक शक्ति का ज्ञान प्राप्त करने के रास्ते को बनाता है।जीवन की सफलता के लिए अपने मन और इन्द्रियों को स्थिर कर अपनी इच्छा के अनुसार अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करना ही योग है। योग के द्वारा मन को अपने अंदर मौजूद शक्ति का ज्ञान कराना और मन में चिंतन शक्ति को जगाकर आत्मा को परमात्मा अर्थात पारलौकिक शक्ति का ज्ञान करना ही योग है। योग के द्वारा मनुष्य अपनी जीवनीशक्ति को सही रूप से जीने के बारे में जान पाता है। योग के 8 अंगो में से एक मुख्य अंग प्राणायाम है। प्राणायाम जो किसी साधारण व्यक्ति को सामान्य जीवन से ऊपर उठाकर पारलौकिक शक्ति का ज्ञान प्राप्त करने के रास्ते को बनाता है। योग की सफलता के लिए प्राणायाम का अभ्यास आवश्यक है। परंतु कुछ योगशास्त्रों के जानकारों ने प्राणायाम की क्रिया को ही योग कहा है। जैसे- महर्षि पतांजलि ने अपने ´दर्शन शास्त्र´ में प्राणायाम की क्रिया को योग कहा है। ´दर्शन शास्त्र´ में यह बताया गया है कि अपने मन और इन्द्रियों को बाहरी वस्तुओं से हटाकर अपने अंदर मौजूद अंतरात्मा में एकाग्र करने से योग की सिद्धि प्राप्त हो जाती है। आत्मा व परमात्मा अर्थात पारलौकिक शक्ति को जानने के लिए योग का अभ्यास आवश्यक है। योग का मुख्य अंग प्राणायाम है। योग में ´आसन´ से शरीर स्वच्छ होता है और उसके बाद प्रत्याहार के द्वारा व्यक्ति आम जीवन से हटकर आत्मा और पारलौकिक ज्ञान की ओर बढ़ता है, परंतु आसन और प्रत्याहार व ध्यान आदि साधनाओं को जो योग जोड़ता है उसे प्राणायाम कहते हैं।