प्राकृतिक चिकित्सा

Prakartik chikitsa ek prakar ki aisi chikitsa pranali hai jismen prakrtik chijo se upchar kiya jata hai.


प्राकृतिक चिकित्सा


महत्वपूर्ण अर्टिकल :

प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :

मनुष्य की उत्पत्ति प्रकृति से ही हुई है। प्रकृति ही प्रत्येक पौधे को, पशु को तथा मानव को जीवन प्रदान करती है। शायद यही कारण है कि प्रकृति को मां की संज्ञा दी जाती है। लेकिन यदि प्रकृति के नियमों का सुचारू रूप से पालन नहीं किया जाता है तो मनुष्य को उसका दुष्परिणाम भुगतना ही पड़ता है। सबसे बुरा दंड, यदि कोई व्यक्ति अपने को दे सकता है तो वह है प्रकृति के नियमों की उपेक्षा करके बीमारियों का शिकार हो जाना। हममें से अधिकांश व्यक्ति इस बात से अनभिज्ञ हैं कि छोटी अथवा बड़ी बीमारी से ग्रस्त होने पर हमें ठीक होने के लिए दवाइयों का सेवन न करके प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से अपने रोगों का इलाज करना चाहिए।

प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतों से रोगों की चिकित्सा करना प्राचीन सभ्यता की देन है। सम्भवत: हमारे पूर्वजों ने पशु-पक्षियों से प्रेरणा ली थी, क्योंकि वे प्रकृति के बहुत निकट ही रहते थे।

पशु तथा पक्षी दोनों ही प्राणदायिनी पृथ्वी के संपर्क में हमेशा बने रहते हैं। प्रकृति में घूमने के कारण उन्हें सांस लेने के लिए ताजी हवा प्राप्त होती रहती है। पशु पक्षी अपना शरीर रेत में लोटकर, रगड़कर साफ करते हैं। इसके साथ-साथ उनका व्यायाम भी हो जाता है..................>>Read more