पोदीना


पोदीना

(TALLEDMINT), (MENTHA SPICATA), (SPEAR MINT)


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पोदीने की मूल उत्त्पत्ति का स्थान भूमध्यसागरीयप्रदेश है, परंतु आजकल संसार के अधिकतर देशों में पोदीने का उत्पादन हो रहा है। पोदीने की एक प्रकार की पहाड़ी की किस्म भी होती है। परिचय :

          पोदीने की मूल उत्त्पत्ति का स्थान भूमध्यसागरीयप्रदेश है, परंतु आजकल संसार के अधिकतर देशों में पोदीने का उत्पादन हो रहा है। पोदीने की एक प्रकार की पहाड़ी की किस्म भी होती है। भारत के लगभग सभी प्रदेशों में पोदीना उगाया जाता है। पोदीने में अधिक तेज खुशबू होती है। पोदीने की चटनी अच्छी बनती है। पोदीने का उपयोग कढ़ी में और काढ़ा बनाने में किया जाता है। दाल-साग आदि में भी इसका प्रयोग किया जाता है। यदि हरा व ताजा पोदीना उपलब्ध न हो तो उसके पत्तों को सुखाकर उपयोग में लाया जा सकता है। पोदीने में से रस निकाला जाता है। पोदीने की जड़ को जमीन में बोकर पोदीने की उत्त्पति की जाती है। पोदीना किसी भी मौसम में उगाया जा सकता है। घरों के बाहर लॉन में, बड़े गमलों में पोदीने को उगा सकते हैं। पोदीने के पत्तों से भीनी-भीनी सुगंध आती है।

विभिन्न भाषाओं मे नाम :

हिंदी           पोदीना।
संस्कृत       व्यंजन, वान्तहारी।
बंगाली             पुटिना।
मराठी             पुटिना।
गुजराती      पोदीना।
अंग्रेजी             टालेडमिंट, स्पीयर मींट।
लैटिन      मेन्थ स्पाइकेटा।

रंग : पोदीने का रंग हरा होता है।

स्वाद : इसका स्वाद तीखा और तेज बदबू वाला होता है।

स्वरूप : पोदीना एक प्रकार की घास है, जिसके पत्ते गोल छोटे और खुशबूदार होते हैं, यह जमीन के ऊपर फैलता है।

स्वभाव : पोदीना खाने में गर्म और खुश्क होता है।

हानिकारक : पोदीना धातु के लिए हानिकारक होता है। पित्तकारक प्रकृति होने के कारण पित्त प्रवृति के लोगों को पोदीने का सेवन कम मात्रा में कभी-कभी ही करना चाहिए। नियमित रूप से अधिक मात्रा में इसका सेवन करना लाभदायक होता है।

दोषों को दूर करने वाला : गुन्दना, पोदीने के दोषों को दूर करता है।

मात्रा : 6 ग्राम पोदीने का सेवन कर सकते हैं। पोदीने के पत्तों का रस 10 से 20 मिलीलीटर तेल में 1 से 3 बूंद तक ले सकते हैं।

गुण : पोदीना भारी, मधुर, रुचिकारी, मलमूत्ररोधक, कफ, खांसी, नशा को दूर करने वाला तथा भूख को बढ़ाने वाला है। यह हैजा, संग्रहणी (अधिक दस्त का आना), अतिसार (दस्त), कृमि (कीड़े) तथा पुराने बुखार को दूर करने वाला होता है। यह मन को प्रसन्न करता है, हृदय और गुर्दे के दोषों को दूर करता है, हिचकियों को रोकता है, बादी को समाप्त करता है, पेशाब और पसीना लाता है, बच्चा होने में सहायता करता है, इसके सूंघने से बेहोशी दूर हो जाती है। पोदीना अजीर्ण (अपच), मुंह की बदबू, गैस की तकलीफ, हिचकी, बुखार, पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, जुकाम, खांसी आदि रोगों में लाभदायक होता है। पोदीना का प्रयोग अर्क (रस) सूप, पेय के रूप में किया जाता है। यह चेहरे के सौंदर्य को बढ़ाने वाला, त्वचा की गर्मी दूर करने वाला, रोगों के कीटाणुओं को नष्ट करने वाला और दिल को ठंडक पहुंचाने वाला है। यह जहरीले कीड़ों के काटने पर और प्रसूति ज्वर में भी लाभकारी होता है।

विभिन्न रोगों में सहायक :

1. मुंह की दुर्गंध: पोदीने की पत्तियों को थोड़े-थोड़े समय के बाद चबाते रहने से मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है। पोदीने की 15-20 हरी पत्तियों को 1 गिलास पानी में अच्छी तरह उबालकर उस पानी से गरारे करने से भी मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है।

2. जहरीले कीड़ों के काटने पर: पोदीने के पत्तों को पीसकर किसी जहरीले कीड़े के द्वारा काटे हुए अंग (भाग) पर लगाएं और पत्तों का रस 2-2 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार रोगी को पिलाने से आराम मिलता है।

3. चेहरे की सौंदर्यता: पोदीने की पत्तियों को पीसकर गाढ़े लेप को सोने से पहले चेहरे पर अच्छी तरह से मल लें। सुबह चेहरा गर्म पानी से धो लें। इस लेप को रोजाना लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे, झांइयां और फुंसियां दूर हो जाती हैं और चेहरे पर निखार आ जाता है।

4. गैस:

  • 4 चम्मच पोदीने के रस में 1 नींबू का रस और 2 चम्मच शहद मिलाकर पीने से गैस के रोग में आराम आता है।
  • सुबह 1 गिलास पानी में 25 मिलीलीटर पोदीना का रस और 30 ग्राम शहद मिलाकर पीने से गैस समाप्त हो जाती है।
  • 60 ग्राम पोदीना, 10 ग्राम अदरक और 8 ग्राम अजवायन को 1 गिलास पानी में डालकर उबाल लें। उबाल आने पर इसमें आधा कप दूध और स्वाद के अनुसार गुड़ मिलाकर पीएं। चौथाई कप पोदीने का रस आघा कप पानी में आधा नींबू निचोड़कर 7 बार उलट-उलट कर पीने से भी गैस से होने वाला पेट का दर्द तुरंत ठीक हो जाता है।
  • पोदीने की ताजी पत्ती, छुहारा, कालीमिर्च, सेंधानमक, हींग, कालीद्राक्ष (मुनक्का) और जीरा इन सबकी चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस निचोड़कर खाने से भोजन के प्रति रुचि उत्पन्न होती है, स्वाद आता है, गैस दूर होकर भोजन पचाने की क्रिया तेज होती है और मुंह का फीकापन दूर होता है।
  • 20 मिलीलीटर पोदीने का रस, 10 ग्राम शहद और 5 मिलीलीटर नींबू के रस को मिलाकर खाने से पेट के वायु विकार (गैस) समाप्त हो जाते हैं।
  • पुदीने की पत्तियों का 2 चम्मच रस, आधा नींबू का रस मिलाकर पीने से लाभ होता है।

5. आंतों के कीड़े: पोदीने का रस रोगी को पिलाने से आंतों के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

6. बिच्छू के काटने पर: बिच्छू के काटने पर पोदीने का लेप करने और पानी में पीसकर रोगी को पिलाने से लाभ होता है।

7. पेट में दर्द अरुचि (भूख का लगना): 3 ग्राम पोदीने के रस में हींग, जीरा, कालीमिर्च और थोड़ा सा नमक डालकर गर्म करके पीने से पेट के दर्द और अरुचि (भोजन की इच्छा न होना) रोग ठीक हो जाते हैं।

8. त्वचा के रोग: खाज-खुजली आदि त्वचा के रोगों में हल्दी और पोदीने का रस बराबर की मात्रा में मिलाकर लगाने से लाभ होता है।

9. सर्दी और खांसी: पोदीने की पत्तियों और कालीमिर्च को मिलाकर गर्म-गर्म चाय रोगी को पिलाने से सर्दी-खांसी, जुकाम, दमा और बुखार में आराम मिलता है।

10. पेट में कीड़े (कृमि): आधा कप पोदीने का रस दिन में 2 बार नियमित रूप से कुछ दिनों तक पिलाते रहने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

11. बदहजमी (भोजन का पचना), भूख की कमी: 4-6 मुनक्का के साथ 8-10 पोदीने की पत्तियां सुबह-शाम खाने के बाद नियमित रूप से चबाते रहने से आराम मिलेगा।

12. खांसी: चौथाई कप पोदीना का रस इतने ही पानी में मिलाकर रोजाना 3 बार पीने से खांसी, जुकाम, कफ-दमा व मंदाग्नि में लाभ होता है।

13. त्वचा की गर्मी: हरा पोदीना पीसकर चेहरे पर बीस मिनट तक लगाने से त्वचा की गर्मी दूर हो जाती है।

14. जुकाम:

  • पोदीना, कालीमिर्च के पांच दाने और नमक इच्छानुसार डालकर चाय की भांति उबालकर रोजाना तीन बार पीने से जुकाम, खांसी और मामूली ज्वर में लाभ मिलता है।
  • पोदीने के रस की बूंदों को नाक में डालने से पीनस (जुकाम) के रोग में लाभ होता है।
  • पोदीने की चाय बनाकर उसके अंदर थोड़ा-सा नमक डालकर पीने से खांसी और जुकाम में लाभ मिलता है।
  • पोदीने के रस की 1-2 बूंदे नाक में डालने से पीनस (जुकाम) रोग नष्ट हो जाता है।

15. रक्त (खून) का जमना: चोट लग जाने से रक्त जमा हो जाने (गुठली-सी बन जाने पर) पुदीना का अर्क (रस) पीने से गुठली पिघल जाती है।

16. पित्ती: पोदीना 10 या 20 ग्राम को 200 मिलीलीटर पानी में उबालकर छानकर पिलाने से बार-बार उछलने वाली पित्ती ठीक हो जाती है।

17. बिच्छू के डंक: पोदीने का रस पीने से या उसके पत्ते खाने से बिच्छू के डंक मारने से होने वाला कष्ट दूर होता है।

18. सिर का दर्द:

  • सिर पर हरे पोदीने का रस निकालकर लगाने से सिर दर्द दूर हो जाता है।
  • पोदीने की पत्तियों को पानी में पीसकर माथे पर लेप करने से सिर का दर्द खत्म हो जाता है।

19. बच्चों के रोग: कान में दर्द हो तो पोदीना का रस डालें या हरी मकोय का रस कान में डालना चाहिए।

20. हैजा:

  • पोदीने का रस पीने से हैजा, खांसी, वमन (उल्टी) और अतिसार (दस्त) के रोग में लाभ होता है। इससे पेट में से गैस और कीड़े भी समाप्त हो जाते हैं।
  • हैजा होने पर पोदीना, प्याज और नींबू का रस मिलाकर रोगी को देने से लाभ मिलता है।
  • किसी व्यक्ति को हैजा होने पर उस व्यक्ति को प्याज का रस पिलाने से हैजे के रोग में आराम आता है।
  • 30 पुदीने की पत्तियां, 4 कालीमिर्च, काला-नमक 2 चुटकी, 2 भुनी हुई इलायची, 1 चोई इमली पकी। इन सब चीजों में पानी डालकर चटनी बना लें। इस चटनी को बार बार रोगी को चाटने के लिए दें।
  • पोदीना की 30 पत्तियां, कालीमिर्च के दाने 3 नग, कालानमक 1 ग्राम, भुनी हुई 2 छोटी इलायची, कच्ची अथवा पकी इमली 1 ग्राम इन सबको पानी के साथ पीसकर चटनी-सी बना लें। यह चटनी हैजे के रोगी को चटाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त तथा प्यास आदि विकार दूर हो जाते हैं।
  • 10-10 मिलीलीटर पोदीने, प्याज और नींबू का रस मिलाकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रोगी को पिलाने से हैजे के रोग में बहुत लाभ होता है। इससे वमन (उल्टी) भी जल्दी बंद हो जाती है।

21. वायु के रोग: पोदीना, तुलसी, कालीमिर्च और अदरक का काढ़ा पीने से वायु रोग (वात रोग) दूर होता है और भूख भी बहुत लगती है।

22. आंतों के रोग: पोदीना का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से आंतों की खराबी और पेट के रोग मिटते हैं। आंतों की बीमारी से पीड़ित रोगियों के लिए पोदीने के ताजे रस का सेवन करना बहुत ही लाभकारी है।

23. शीत बुखार में: पोदीना और अदरक का रस या काढ़ा पीने से शीतज्वर मिट जाता है। इससे पसीना निकल आता है और हर प्रकार का ज्वर मिट जाता हैं। गैस और जुकाम के रोग में भी यह काढ़ा बहुत लाभ पहुंचाता है।

24. टायफाइड : पोदीना, राम तुलसी (छोटे और हरे पत्तों वाली तुलसी) और श्याम तुलसी (काले पत्तों वाली तुलसी) का रस निकालकर उसमें थोड़ा-सा शक्कर (चीनी) मिलाकर सेवन करने से टायफाइड (मोतीझारा) के रोग में लाभ होता है।

25. न्युमोनिया (ठंड लगकर बुखार आना) : पोदीना का ताजा रस शहद के साथ मिलाकर हर 1 घंटे के बाद देने से न्युमोनिया (त्रिदोषज्वर-वात, पित्त और कफ) से होने वाले अनेक विकारों (बीमारियों) की रोकथाम करता है और बुखार को समाप्त करता है।

26. चेहरे की झांइयां: पोदीने के रस को मुल्तानी मिट्टी में मिलाकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की झांइयां समाप्त हो जाती हैं और चेहरे की चमक बढ जाती है।

27. पेट के रोग:

  • पोदीने का रस कृमि (कीड़े) और वायु विकारों (रोगों) को नष्ट करने वाला होता है। पोदीने के 5 मिलीलीटर रस में नींबू का 5 मिलीलीटर रस और 7-8 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से उदर (पेट) के रोग दूर हो जाते हैं।
  • 2 चम्मच पुदीने का रस, 1 चम्मच नींबू का रस और 2 चम्मच शहद को मिलाकर सेवन करने से पेट के रोग दूर होते हैं।
  • 100 मिलीलीटर पुदीना का रस गर्म करके, 9 ग्राम शहद और लगभग 6 ग्राम नमक को मिलाकर पीने से उल्टी होकर पेट की बीमारी ठीक हो जाती है।

28. दाद:

  • शरीर के किसी भाग में दाद होने पर उस भाग पर पोदीने के रस को 1 दिन में 2-3 बार दाद पर लगाने से लाभ मिलता है।
  • पोदीने का रस दाद पर बार-बार लगाते रहने से दाद ठीक हो जाता है।

29. बुखार:

  • पुदीना और तुलसी का काढ़ा बनाकर रोजाना पीने से आने वाला बुखार रुक जाता है।
  • पोदीने और अदरक को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें, फिर इसे छानकर दिन में 2 बार पीने से बुखार ठीक हो जाता है। प्रतिश्याय (जुकाम) में भी इससे बहुत लाभ होता है।
  • पुदीना के पत्तों और मिश्री को मिलाकर शर्बत बनाकर बार-बार पीने से कफ के साथ-साथ बुखार में आराम मिलता है।

30. अरुचि (भोजन की इच्छा करना): हरा धनिया, पोदीना, कालीमिर्च, अंगूर या अनार की चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस मिलाकर खाने से अरुचि (भूख का न लगना) समाप्त होती है और पाचन क्रिया तेज होने से भूख भी अधिक लगती है।

31. शरीर में गर्मी: पोदीने की पत्तियों को पानी के साथ पीसकर शरीर पर लेप करने से शरीर की गर्मी दूर होती है।

32. त्वचा का तैलीयपन: चेहरे की त्वचा अधिक तैलीय होने पर रोजाना पोदीने का रस रूई के साथ चेहरे पर लगाने से त्वचा का तैलीयपन कम होता है और चेहरे का सौंदर्य भी बढ़ता है।

33. शारीरिक कमजोरी: पुदीने में विटामिन-ई पाया जाता है, जो शरीर की शिथिलता (कमजोरी) और वृद्धावस्था (बुढ़ापे) को आने से रोकता है। इसके सेवन करने से नसे भी मजबूत होती हैं।

34. पेट के कीड़े: पुदीना को नियमित रूप से खाने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

35. सर्दी-जुकाम: पुदीने के रस की 1 बूंद दिन में 3-4 बार नाक में डालने से सर्दी और जुकाम में लाभ मिलता है।

36. मुंह की सफाई के लिए: पुदीना चबाकर खाने से दांतों के बीच छिपे भोजन के कण दूर होते हैं और मुंह की सफाई भी हो जाती है।

37. आंखों के रोगों में: पुदीना में विटामिन-ए मिलता है, जो आंखों के रोगों में लाभदायक होता है।

38. दांतों का दर्द:

  • सूखे पुदीने को पीसकर प्रतिदिन मंजन करने से दांतों का दर्द ठीक होता है।
  • पुदीना पाचक (हाजमेदार) होता है व पेट का दर्द, वायुविकार, अपच (भोजन) आदि को ठीक कर दांतों का दर्द ठीक करता है।

39. दमा या श्वास

  • दमा, खांसी, मंदाग्नि और जुकाम होने पर चौथाई कप पोदीने का रस इतना ही पानी मिलाकर प्रतिदिन पीते रहने से लाभ मिलता है।
  • चौथाई कप पोदीने का रस इतने ही पानी में मिलाकर प्रतिदिन 3 बार पीने से लाभ मिलता है। खांसी और दमा इत्यादि विकारों पर पुदीना अपने `कफनिस्सारक` गुणों के कारण काफी असरकारक सिद्ध होता है। पुदीने का रस इन सभी रोगों में बहुत ही लाभकारी होता है।

40. अफारा (गैस का बनना):

  • पोदीना के 5 मिलीलीटर रस में थोड़ा-सा सेंधानमक मिलाकर सेवन कराने से आध्यमान (अफारा) ठीक हो जाता है।
  • पोदीने का रस 50 मिलीलीटर, मिश्री 5 ग्राम और 2 ग्राम यवक्षार मिलाकर खाने से आध्यमान (अफारा, गैस) दूर हो जाता है।
  • पोदीने के पत्तों का शर्बत बनाकर पीने से अफारा में लाभ होता है।

41. खट्टी डकारे आना: पोदीना और इमली को पीसकर उसमें सेंधानमक या शहद मिलाकर खाने से खट्टी डकारे और उल्टी आना शांत हो जाती है।

42. वमन (उल्टी):

  • 4 पोदीने के पत्ते और 2 आम के पत्तों को लेकर 1 कप पानी में डालकर उबालने के लिए रख दें। जब उबलता हुआ पानी आधा बाकी रह जाए तो उस पानी में मिश्री डालकर काढ़े की तरह पीने से उल्टी ठीक हो जाती है।
  • 6 मिलीलीटर  पोदीने का रस और लगभग लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधानमक मिलाकर पीस लें इसे ताजे पानी में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
  • अगर पेट के खराब होने की वजह से छाती भारी-भारी लग रही हो और बेचैनी के कारण उल्टी हो रही हो तो 1 चम्मच पुदीने के रस को पानी के साथ पिलाने से लाभ होता है।
  • 2-2 ग्राम पोदीना, छोटी पीपल और छोटी इलायची को एक साथ मिलाकर खाने से उल्टी होना बंद हो जाती है।
  • 10 बूंद पुदीने के रस को पानी में मिलाकर उसमें शक्कर डालकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
  • पुदीना के पत्तों का शर्बत दिन में कई बार पीने से उल्टी और जी मिचलाना (उबकाई) आदि रोग दूर होते हैं।
  • पोदीने का रस और नींबू के रस को बराबर मात्रा में दिन में 1 चम्मच की मात्रा में 3-4 बार रोगी को पिलाने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
  • पोदीना को नींबू के साथ देने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
  • आधा कप पोदीना का रस 2-2 घण्टे के अंतराल में पिलाते रहने से लाभ उल्टी, दस्त और हैजा में मिलता है।

43. गर्भनिरोध (गर्भ का ठहराना): पोदीने को सुखाकर बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इसे स्त्री को संभोग (सहवास) करने से पहले लगभग 10 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ पिलाने से स्त्री का गर्भ नहीं ठहरता हैं। ध्यान रहे कि जब गर्भाधान अपेक्षित हो तो इस चूर्ण का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

44. मुंह के छाले: हरा पोदीना, सूखा धनिया और मिश्री बराबर मात्रा में लेकर चबायें और लार को नीचे टपकायें। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

45. दस्त: पुदीने को पीसकर प्राप्त रस को 1 चम्मच की मात्रा में लेकर 1  कप पानी में डालकर पीयें।

46. हिचकी:

  • पोदीने के पत्तों को चूसने और पत्तों को नारियल (खोपरे) के साथ चबाकर खाने से हिचकी दूर होती है।
  • पोदीने के पत्ते या नींबू को चूसने या पोदीने के पत्तों को शक्कर (चीनी) में मिलाकर चबाने से हिचकी का आना बंद हो जाता है।
  • पुदीना के सूखे और हरे पत्ते को शक्कर के साथ चबाने से हिचकी नहीं आती है।
  • 2 मिलीलीटर हरे पुदीने के रस में 2 ग्राम चीनी मिलाकर चबाने से हिचकी मिट जाती है।
  • पुदीने के पत्ते को मिश्री के साथ खाने से हिचकी मिट जाती है।
  • पुदीना के रस को हिचकी में पीने से लाभ होता है।
  • हिचकी बंद न हो तो पुदीने के पत्ते या नींबू चूसें। पुदीने के पत्तों पर शक्कर डालकर हर दो घंटे में चबाने से हिचकी में फायदा होता है।
  • 1-1 गोली पुदीना खाना-खाने के बाद सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है।
  • 1 चम्मच पुदीने का रस, 1 चम्मच नींबू का रस और 1 चम्मच शक्कर आदि तीनों को एक साथ मिलाकर पीने से हिचकी नहीं आती है।

47. मुंह की बदबू: पुदीना को पानी से पीसकर घोल बनाकर दिन में 3 से 4 बार कुल्ला करने से मुंह से दुर्गंध व अन्य रोग भी ठीक होते हैं।

48. गर्भवती स्त्री का जी मिचलाना: पुदीना का रस लगभग 30 मिलीलीटर  प्रत्येक 6 घंटे पर गर्भवती स्त्री को सेवन कराने से जी का मिचलाना बंद हो जाता है।

49. कान के कीड़े: कान के अंदर अगर बहुत ही बारीक कीड़ा चला जाये तो कान में पुदीने का रस डालने से कान का कीड़ा समाप्त हो जाता है।

50. मासिक-धर्म की अनियमितता: पुदीने की चटनी कुछ दिनों तक लगातार खाने से मासिक-धर्म नियमित हो जाता है।

51. चोट से खून जमने पर:

  • पोदीने का रस पिलाने से जमा हुआ खून टूटकर बिखर जाता है।
  • सूखा पोदीना पीसकर फंकी लेने से खून का जमाव बिखर जाता है।

52. नष्टार्तव (बंद माहवारी): पुदीना के पत्तों का अधिक मात्रा में बार-बार सेवन करने से माहवारी शुरू हो जाती है। इसे चाहे जिस रूप में सेवन किया जाए या इसके पत्तों को पीस-घोलकर या मिश्री मिलाकर शर्बत के रूप में सेवन करना चाहिए।

53. घाव: पुदीने के पत्तों को पीसकर पोटली बनाकर जख्म पर बांधने से घाव के कीड़े मर जाते हैं।

54. अग्निमांद्यता (अपच): 20 हरे पुदीना की पत्तियां, 5 ग्राम जीरा और थोड़ी-सी हींग, कालीमिर्च के 10 दाने, चुटकीभर नमक को मिलाकर चटनी बनाकर 1 गिलास पानी में उबालें जब पानी आधा गिलास शेष रह जाए, तो छानकर पीने से लाभ होता है।

55. अम्लपित्त: 1 कप पानी में पुदीने की चटनी बनाकर, थोड़ी-सी चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त के कारण पेट में होने वाली जलन को शांत होती है।

56. कफ: कफ (बलगम) होने पर चौथाई कप पोदीने का रस इतने ही गर्म पानी में मिलाकर रोज 3 बार पीने से कफ में लाभ होता है।

57. प्रसव (प्रजनन का दर्द) वेदना: जंगली पुदीना और हंसराज दोनों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सेवन करने से प्रजनन में दर्द नहीं होता है।

58. यकृत का बढ़ना: पुदीने के रस में नींबू का रस मिलाकर, पानी में डालकर पिलाने से यकृत वृद्धि मिट जाती है।

59. पित्त ज्वर: घबराहट व बैचेनी में पोदीने का रस लाभदायक होता है।

60. लू का लगना:

  • लगभग 20 पोदीने की पत्तियां, लगभग 3 ग्राम सफेद जीरा और 2 लौंग मिलाकर इन सबको पीसकर जल में घोलकर, छानकर रोगी को पिलाने से लू से होने वाली बेचैनी खत्म हो जाती है।
  • लगभग 150 मिलीलीटर पोदीने के रस को इतने ही ग्राम पानी के साथ पीने से लू से होने वाले खतरों से बचा जा सकता है।
  • सूखा पोदीना, खस तथा बड़ी इलायची लगभग 50-50 ग्राम की बराबर मात्रा में लेकर कूट लें और इसका चूर्ण बना लें, फिर इसे एक लीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को ठंडा करके लगभग 100 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से लू ठीक हो जाती है।

61. शीतपित्त:

  • पोदीना 7 ग्राम और 20 ग्राम गुड़ को 100 मिलीलीटर पानी में उबालकर पीने से बार-बार पित्ती निकलना ठीक हो जाती है।
  • पोदीने को पानी के साथ काढ़ा बनाकर थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर खाने से पित्त में बहुत ही लाभ होता है।

62. पेट में दर्द:

  • 2 चम्मच पोदीने के पत्तों का सूखा चूर्ण और 1 चम्मच मिश्री या चीनी मिलाकर सेवन करने से पेट के दर्द में आराम होता है।
  • सूखा पोदीना और चीनी को बराबर मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच की फंकी लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता है।
  • 5-5 मिलीलीटर पोदीना का रस, अदरक का रस और 1 ग्राम सेंधानमक को मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द दूर हो जाता है।
  • 5 मिलीलीटर पोदीने का रस और 5 मिलीलीटर अदरक के रस को मिलाकर, उसमें थोड़ा-सा सेंधानमक डालकर सेवन करने से उदर शूल (पेट में दर्द) समाप्त हो जाता है।
  • पोदीना के 7 पत्ते और छोटी इलायची का 1 दाना पानी के पत्ते में लगाकर खाने से पेट में होने वाले दर्द में लाभ करता है।
  • पोदीना के पत्तों का शर्बत पीने से पेट का दर्द समाप्त हो जाता है।
  • 4 ग्राम पुदीने में आधा-आधा चम्मच सौंफ और अजवायन, थोड़ा-सा कालानमक और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग हींग को मिलाकर बारीक मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें, इस बने चूर्ण को गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट में होने वाले दर्द में लाभ होता है।
  • 3 ग्राम पोदीना, जीरा, हींग, कालीमिर्च और नमक आदि को पीसकर पानी में मिलाकर पीने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
  • पोदीना, सौंफ, सोंठ और गुलकंद को अच्छी तरह पीसकर पानी में उबालकर दिन में 3 बार रोजाना खुराक के रूप में पीने से पेट के दर्द और कब्ज की शिकायत दूर होती है।
  • 2 चम्मच सूखे पुदीने को काले नमक के साथ सेवन करने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
  • सूखा पोदीना और चीनी को बराबर मात्रा में पीसकर रख लें, फिर 2 चम्मच को फंकी के रूप में गर्म पानी के साथ पीने से पेट के दर्द में लाभ होता है।

63. मुर्च्छा (बेहोशी):

  • बेहोश व्यक्ति को पुदीना की खुशबू सुंघाने से बेहोशी दूर हो जाती है।
  • पोदीने के पत्तों को मसलकर सुंघाने से बेहोशी दूर हो जाती है।

64. मूत्ररोग: 2 चम्मच पुदीने की चटनी शक्कर में मिलाकर भोजन के साथ खाने से लाभ होता है।

65. गठिया (घुटनों के दर्द):  गठिया के रोगी को पोदीने का काढ़ा बनाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है और गठिया रोग में आराम मिलता है।

66. त्वचा के रोग: हरे पोदीने को पीसकर कम से कम 20 मिनट तक चेहरे पर लगाने से चेहरे की गर्मी समाप्त हो जाती है।

67. निम्नरक्तचाप (लो ब्लडप्रेशर): 50 ग्राम पोदीने को पीसकर उसमें स्वाद के अनुसार सेंधानमक, हरा धनिया और कालीमिर्च को डालकर चटनी के रूप में सेवन करने से बहुत लाभ होता है।

68. पीलिया:

  • पोदीना के अधिक सेवन से पीलिया में लाभ होता है।
  • पोदीने की चटनी नित्य रोटी के साथ खाने से पीलिया में लाभ होता है।
  • पुदीना के रस को शहद के साथ पन्द्रह दिनों तक सेवन करने से पीलिया में लाभ होगा।

69. चेहरे के दाग-धब्बे: शराब के अंदर पुदीने की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग, धब्बे, झांई सब मिट जाते हैं और चेहरा चमक उठता है।

70. गले के रोग: 5-5 ग्राम पोदीना, लोहबान और अजवायन का रस, 5 ग्राम कपूर और 5 ग्राम हींग को 25 ग्राम शहद में मिलाकर एक साफ शीशी में भरकर रख लें, फिर पान के पत्ते में चूना-कत्था लगाकर शीशी में से 4 बूंदे इस पत्ते में डालकर खाने से गले का दर्द दूर होता है।

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