पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल ले जाना


पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल ले जाना

TAKING VICTIM TO THE HOSPITAL


प्राथमिक चिकित्सा :

परिचय-

         दुर्घटना-ग्रस्त और अचानक ही किसी गंभीर रोग का दौरा आदि पड़ जाने पर पीड़ित व्यक्ति को दुर्घटना-स्थल पर ही प्राथमिक उपचार देना बहुत जरूरी होता है। लेकिन ज्यादातर परिस्थितियों में उसे दुर्घटना-स्थल से किसी दूसरे स्थान पर ले जाना बहुत जरूरी हो जाता है। इसका प्रमुख कारण होता है- प्राथमिक उपचार के बाद पीड़ित व्यक्ति को जल्दी से जल्दी डॉक्टर के पास या अस्पताल ले जाना क्योंकि प्राथमिक उपचार पूर्ण उपचार नहीं है। यह उपचार सिर्फ डॉक्टर के आने तक पीड़ित की शारीरिक स्थिति को और अधिक खराब न होने देने के लिए होता है। कुछ परिस्थितियों जैसे- पीड़ित व्यक्ति के जहरीली गैस से भरे कमरे में पड़ा होने पर या वर्षा, तूफान के दौरान बीच सड़क पर पड़ा होने या किसी गहरी खान आदि में गिरा होने पर प्राथमिक उपचार देने से पहले पीड़ित व्यक्ति को किसी सही स्थान पर ले जाना जरूरी होता है।

         अगर प्राथमिक उपचारकर्ता को पीड़ित व्यक्ति को उठाकर किसी दूसरे स्थान पर ले जाने की सही विधि का ज्ञान न हो तो वह पीड़ित को लाभ की बजाय हानि पहुंचा सकता है। ऐसी आशंका उस समय अधिक बढ़ जाती है जब पीड़ित बेहोशी की अवस्था में होता है,  उसके सिर, छाती, रीढ़, कूल्हे आदि की हड्डी टूट गई होती है या उसके शरीर के किसी अंग से बहुत ज्यादा रक्तस्राव हो रहा होता है। इसलिए प्राथमिक उपचारकर्ता के लिए पीड़ित को उठाकर अस्पताल आदि ले जाने के सही तरीकों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। पीड़ित को जल्दी से जल्दी किसी तरह कार में डालकर अस्पताल ले जाने से उसे लाभ की जगह हानि पहुंचने की आशंका अधिक रहती है।

         यहां पर यह बता देना जरूरी होगा कि कई बार प्राथमिक उपचारकर्ता पीड़ित को उपचार देने के लिए सही स्थान पर ले जाने की जल्दी में एक महत्त्वपूर्ण कार्य को नजर-अंदाज कर जाता है, जिसे पीड़ित को घटनास्थल से हटाने से पहले कर लेना चाहिए। यह कार्य है- पीड़ित व्यक्ति की जल्दी लेकिन सावधानीपूर्वक यह जांच करना कि उसके किस अंग को किस प्रकार का नुकसान पहुंचा है। उसी आधार पर यह तय किया जाता है कि पीड़ित व्यक्ति को, किसी दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया जाए। उदाहरण के लिए, चेहरे पर गहरी चोट लगने या शरीर के ऊपरी अंगों में अस्थिभंग हो जाने पर पीड़ित व्यक्ति को पैदल चलाकर ले जाया जा सकता है। लेकिन जिस व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी टूट गई हो उसे स्ट्रेचर पर ही ले जाना चाहिए। दूसरी जगह पहुंचा दिए जाने के बाद पीड़ित की एक बार दुबारा जांच करके देख लेना चाहिए कि यात्रा के दौरान पीड़ित को कोई हानि तो नहीं पहुंची है।

परिवहन (ट्रांसपोर्ट) के सिद्धांत- पीड़ित को दुर्घटना-स्थल से अस्पताल या किसी दूसरे स्थान पर ले जाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • दुर्घटना के बाद पीड़ित व्यक्ति ने अपने-आप जो स्थिति अपना ली है या जिसमें उसको रखा गया है, उसे जरूरत न होने पर बदलें नहीं।
  • अस्पताल आदि ले जाते समय पीड़ित का पूरा ध्यान रखना चाहिए। अगर उसकी ड्रैसिंग की गई हो तो ध्यान रखें कि ड्रैसिंग अपने स्थान से खिसके नहीं या रक्तस्राव दुबारा चालू न हो।
  • पीड़ित को ले जाने वाला वाहन आदि सुरक्षित हो। ज्यादा हिले-डुले नहीं और काफी तेज चलने वाला हो। इस बारे में कुछ दूसरी बातें भी महत्त्वपूर्ण हैं। इन पर पीड़ित को ले जाने के तरीके निर्भर होते हैं। ये हैं- क्या प्राथमिक उपचारकर्ता अकेला है या उसका कोई सहायक है? सहायकों की संख्या कितनी है? स्ट्रेचर, कंबल, चादर आदि उपलब्ध हैं या नहीं। पीड़ित को किस प्रकार के मार्ग से कितनी दूर ले जाना है इत्यादि।

यदि उपचारकर्ता अकेला हो तो- यदि उपचारकर्ता अकेला हो तो वह निम्नलिखित, किसी भी तरीके से पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल या किसी दूसरे स्थान पर ले जा सकता है-

गोद में- यह तरीका सिर्फ बच्चों या हल्के वजन के व्यक्ति को ले जाने के लिए ही उपयोगी होता है। पीड़ित व्यक्ति को गोद में उठाने के लिए अपनी एक भुजा उसके दोनों घुटनों के काफी नीचे और दूसरी उसकी पीठ पर रखनी चाहिए।

मानव बैसाखी- पीड़ित व्यक्ति के शरीर के ऊपरी भाग में चोट आने पर इस तरीके का इस्तेमाल किया जा सकता है। पीड़ित व्यक्ति को खड़ा करके खुद उसके बराबर, उस ओर खड़े हो जाएं जिधर उसके चोट लगी हो, पीड़ित व्यक्ति की भुजा अपनी गर्दन से होते हुए कंधे पर रखें। उसके हाथ के पंजे को कसकर पकड़ लें।    

     अपनी दूसरी भुजा पीड़ित व्यक्ति की कमर के पीछे से उसकी बगल में ले जाएं और उसके कपड़े पकड़ लें। जरूरत होने पर पीड़ित व्यक्ति अपने दूसरे हाथ में छड़ी इत्यादि पकड़ सकता है। इससे उसको अतिरिक्त सहारा मिल जाएगा।

पीठ पर लादकर- अगर पीड़ित व्यक्ति पूरे होश में हो और किसी वस्तु को पकड़ सकता हो तो उसे पीठ पर लादकर अस्पताल तक पहुंचाया जा सकता है।

     इसके लिए पीड़ित व्यक्ति को पहले किसी ऊंची चारपाई, तिपाई, स्टूल आदि पर पैर लटकाकर बैठा लें। अब आप उसकी ओर पीठ करके खड़े हो जाएं। अपने पैरों को थोड़ा झुका लें। पीड़ित व्यक्ति से कहें कि वह आपकी पीठ पर चढ़ने की कोशिश करे। वह अपने दोनों हाथ आपके कंधों पर से आपकी छाती पर ले जाएं और उन्हें आपस में पकड़ ले तथा पीड़ित व्यक्ति अपने दोनों पैर आपके कूल्हों पर से होते हुए सामने ले आए। आप अपने दोनों हाथ निकालकर उसके घुटनों के नीचे से आपस में पकड़ लें।

फायरमैन लिफ्ट- आमतौर पर इस विधि द्वारा अग्निशामक दस्ते के कर्मचारी पीड़ित व्यक्तियों को, अपने कंधों पर लादकर दुर्घटना-ग्रस्त क्षेत्र आदि से बाहर निकालते हैं। जरूरत पड़ने पर आप भी इसी तरीके द्वारा पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचा सकते हैं।

  • यह तरीका सिर्फ उस समय अपनाना चाहिए जब पीड़ित व्यक्ति का वजन प्राथमिक उपचारकर्ता की तुलना में अधिक न हो।
  • पीड़ित व्यक्ति को सीधा खड़ा कर लें। फिर अपने बाएं हाथ से उसकी दाहिनी कलाई पकड़ लें। अब उसकी फैली हुई दाहिनी भुजा के नीचे थोड़ा-सा झुक जाएं, जिससे आपका दाहिना कंधा उसके पेट के निचले हिस्से की ऊंचाई पर आ जाए। अब अपनी दाहिनी भुजा उसकी टांगों के बीच में अथवा उनके इर्द-गिर्द रख लें।
  • फिर पीड़ित व्यक्ति के भार को अपने दाहिने कंधे पर संभालते हुए सीधे खड़े हो जाएं। उसके शरीर को अपने दोनों कंधों पर सरका लें। इसके बाद उसकी दाहिनी कलाई पर से अपना बायां हाथ हटा लें और उसे अपने दाहिने हाथ से पकड़ लें। इससे आपका बायां हाथ मुक्त हो जाएगा।

दो या अधिक व्यक्ति उपलब्ध होने पर- इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा आसानी से उठाया और किसी दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित तरीके इस्तेमाल किए जा सकते हैं-

चार हाथों की सीट- यह तरीका उस समय इस्तेमाल किया जाता है जब पीड़ित व्यक्ति अपनी एक या दोनों भुजाओं का उपयोग कर सकता हो। उनसे वह उठाने वालों की मदद कर सकता है।

  • इस तरीके में दो व्यक्ति पीड़ित व्यक्ति के बिल्कुल पीछे, एक-दूसरे के आमने-सामने, खड़े हो जाते हैं। वे एक-दूसरे की बाईं कलाइयों को अपने दाहिने हाथों से तथा दाहिनी कलाइयों को बाएं हाथों से पकड़ लेते हैं। इस प्रकार चार हाथों से सीट जैसी आकृति बन जाती है।
  • अब पीड़ित व्यक्ति अपनी एक भुजा एक व्यक्ति के गले में और दूसरी भुजा दूसरे व्यक्ति के गले में डाल लेता है। अपने हाथों पर जोर डालकर (हाथों की) सीट पर बैठ जाता है। उसके दोनों हाथ उठाने वालों के कंधों पर होते हैं। इसलिए ले जाते समय पीड़ित व्यक्ति खिसकता नहीं है।          
  • फिर दोनों व्यक्ति एक साथ खड़े हो जाते हैं। चलना शुरू करते समय दाहिनी ओर का व्यक्ति पहले अपना दाहिना पैर आगे बढ़ाता है और बाईं ओर का व्यक्ति अपना बांया पैर आगे बढ़ाता है।

दो हाथों की सीट- यदि पीड़ित व्यक्ति की भुजाओं में चोट लगी हो और उठने-बैठने में वह उनका सहारा नहीं ले सकता हो तो यह तरीका इस्तेमाल किया जाता है-

  • इसमें एक व्यक्ति पीड़ित की एक ओर तथा दूसरा दूसरी ओर उकड़ू होकर बैठ जाता है। उनके मुंह आमने-सामने होते हैं। वे अपनी एक-एक भुजा पीड़ित व्यक्ति के सिर के पास से, कंधे पर से होते हुए पीठ के पीछे ले जाते हैं और, अगर हो सके तो पीड़ित व्यक्ति के वस्त्र पकड़ लेते हैं। इस प्रकार से भुजाएं रखने से कैंची जैसी आकृति बन जाती है।
  • अब दोनों व्यक्ति पीड़ित व्यक्ति की पीठ को थोड़ा ऊपर उठाकर अपनी दूसरी भुजाएं उसकी जांघों के नीचे से निकालकर एक-दूसरे के पंजे में फंसा लेते हैं।
  • फिर दोनों व्यक्ति एकसाथ खड़े हो जाते हैं और एकसाथ चलना शुरू करते हैं। दाहिनी ओर का व्यक्ति पहले अपना दाहिना पैर आगे बढ़ाता है और बाईं ओर का व्यक्ति अपना बायां पैर।

आगे और पीछे से उठाने का तरीका (फोर एंड ऑफ्ट मेथड़)- यह तरीका उस समय इस्तेमाल किया जाता है जब पीड़ित व्यक्ति बहुत तंग जगह पर पड़ा हो तथा जहां दो-तीन व्यक्ति साथ-साथ खड़े नहीं हो सकते हों। दूसरे शब्दों में, उस जगह जहां न तो चार हाथों वाली सीट का तरीका प्रयोग हो सकता है और न ही दो हाथों वाली सीट का।

  • इस तरीके से पीड़ित व्यक्ति को उठाने के लिए एक व्यक्ति पीड़ित व्यक्ति के सामने, उसकी ओर पीठ करके, उसकी टांगों के बीच में खड़ा होता है। दूसरा व्यक्ति पीड़ित व्यक्ति के पीछे उसकी ओर मुंह करके खड़ा होता है। अब पहला व्यक्ति झुककर उसके घुटनों के नीचे अपने दोनों हाथ फंसाकर, पीड़ित व्यक्ति की टांगों को उठा लेता है। यह व्यक्ति उसकी टांगों के बीच में रहता है।
  • साथ ही पीछे खड़ा व्यक्ति पीड़ित की बगलों में से अपनी बांहें निकालकर उसे उठा लेता है। वह व्यक्ति अपने हाथों के पंजों को आपस में फंसा लेता है।     
  • इस प्रकार पीड़ित व्यक्ति को उठाने के बाद दोनों व्यक्ति आपस में कदम मिलाकर चलते हैं।

कुर्सी पर बैठाकर ले जाना- यह तरीका बहुत आसान है। इसमें बिना हाथों वाली, खड़ी कुर्सी पर पीड़ित व्यक्ति को बैठा लिया जाता है और दो व्यक्ति कुर्सी की बाजुओं की ओर, एक दूसरे की ओर मुंह करके खड़े हो जाते हैं। फिर वे मिलकर कुर्सी को उठा लेते हैं और कदम-से-कदम मिलाकर चलते हैं।

         यदि पीड़ित व्यक्ति को उठाने वाले चार व्यक्ति हों तो पीड़ित को कंबल या चादर आदि की मदद से भी उठाया और आसानी से ले जाया जा सकता है।