पारदारिक

पराई स्त्री के साथ संभोग करने की इच्छा रखने से पहले यह सोच लेना चाहिए कि वह स्त्री मिल सकती है या नहीं, उसको पाने में कहीं किसी तरह का संकट तो नहीं आ सकता


पारदारिक


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पराई स्त्री के साथ संभोग करने की इच्छा रखने से पहले यह सोच लेना चाहिए कि वह स्त्री मिल सकती है या नहीं, उसको पाने में कहीं किसी तरह का संकट तो नहीं आ सकता, वह स्त्री संभोग करने के लायक है भी या नहीं, उसे अपने वश में करने के बाद उस पर मेरा असर कैसा पड़ेगा और मुझे उससे क्या फायदा होगा..............................
स्त्री का भावदर्शन इस तरह करना चाहिए- जब वह अपने बालों को खोलकर सुखा रही हो, नाखूनों से खुजला रही हो, अपने गहनों को ठीक कर रही हो, अपने नीचे वाले होंठों को चबा रही हो, तब अपने दोस्तों के साथ स्त्री के उन भावों की नकल करने का नाटक करना चाहिए.............................
बहुत सी स्त्रियों की आदत होती है कि वह पुरुष से कई बार मिलने के बाद अचानक मिलना छोड़ देती हैं। वह न तो पुरुष से संभोग कराती हैं और न ही उसे मना ही करती हैं। वह ऐसा करती हैं तो समझती है कि मैने कितना बड़ा काम किया है................................
अगर स्त्री की योनि कम गहराई वाली होती है तो उसके पति पर छोटे लिंग होने का दोष नहीं लगाना चाहिए। उस समय पति के लिंग को बड़ा बताना ही दोष होगा। इस तरह अगर स्त्री बड़वा या हस्तिनी हो तो उसके पति को अश्व या वृष न बोलकर शश कहना ही सही होगा..............................
जब चर्पणी स्त्री कूटने, पीसने, पकाने के सामान को रखने, उठाने, घर की सफाई करने के लिए घर में प्रवेश करे, ऊन, रुई, अलसी, सूत लेने के लिए आए या जिस वक्त उनसे सारी चीजें रखवाई जा रही हो तो इन कामों को करते समय छोटे अधिकारी उनके साथ संभोग कर सकते हैं...............................
रानियां धाय की पुत्री, नौकरानी या अपनी सहेली को पुरुषों की तरह कपड़े आदि पहनाकर बैंगन, मूली या गाजर आदि को नकली लिंग के रूप में बनाकर उन्हें ऊपर लिटाकर नकली प्रकार के संभोग से अपनी काम-उत्तेजना को शांत करती हैं...............................