परिवार नियोजन

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परिचय-

           आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में और बढ़ती हुई मंहगाई को देखकर हर इंसान परिवार नियोजन की तरफ ध्यान दे रहा है और देना भी जरूरी है। हर दम्पत्ति को अपना परिवार बढ़ाने से पहले यह देखना जरूरी है कि उनका बच्चा पैदा करने का सही समय क्या है, उसे कितने बच्चे पैदा करने चाहिए जिनकी वह अच्छी तरह से परवरिश कर सके, उन्हें अच्छे स्कूल में पढ़ा सके, उनकी जरूरतों को पूरा कर सके। इसके अलावा उन्हें यह भी जानना जरूरी है कि एक बच्चा पैदा करने के बाद अगर वह दूसरा बच्चा चाहते हैं तो उन दोनों में कितना अंतर होना चाहिए।

           आज की बढ़ती हुई आबादी के कारण हर चीज का संतुलन बिगड़ चुका है चाहे वह जनसंख्या का हो, पर्यावरण का हो या चाहे किसी और चीज का। आज के समय में भारत जनसंख्या के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर है। इस समय भारत में हर मिनट में लगभग 50 बच्चे जन्म लेते हैं और यहां की जनसंख्या ने 1 अरब की संख्या को भी पार कर दिया है और अगर यही हालात रहे तो भारत कुछ ही समय में जनसंख्या के मामले में 1 नंबर पर आ सकता है।

           इस बढ़ती हुई जनसंख्या का ही परिणाम है कि आज न तो लोगों को नौकरियां मिल रही हैं, न ही स्कूल-कालेजों में एडमिशन मिल पा रहा है। जहां पर भी देखो लंबी-लंबी लाइने लगी हैं और लिखा है प्रतीक्षा कीजिए आप कतार में हैं। लोगों को न तो रहने के लिए घर मिल रहा है. न ही राशन में आटा, चीनी और चावल मिल रहा है। जहां देखो भीड़ ही भीड़ है। बीमारियां फैल रही हैं, अस्पतालों में भी भीड़ बढ़ी हुई है।

भारत में जनसंख्या बढ़ने के कुछ कारण यहां दिये जा रहे हैं-

  • भारत में अभी भी बहुत से लोग अशिक्षित हैं। ऐसे लोग सोचते हैं कि बच्चे तो भगवान की देन हैं और इसी सोच में वह बच्चे पैदा करते रहते हैं।
  • हमारे देश में आज भी लोग लड़के को ही अपना वंश आगे चलाने वाला मानते हैं और इसी धारणा के रहते जब तक उनके घर में लड़का पैदा नहीं हो जाता वे लड़कियां पैदा करते रहते हैं।
  • लोगों को परिवार नियोजन के तरीकों के बारे में अभी भी पूरी तरह से ज्ञान नहीं है। यहां के पुरुष अभी भी नसबंदी के बारे में सोचते हैं कि अगर उन्होंने नसबंदी करा ली तो उनकी मर्दानगी पर असर पड सकता है और स्त्रियां बच्चा बंद करवाने वाले आप्रेशन से डरती हैं उनको लगता है कि अगर वे इस आप्रेशन को कराती हैं तो उनको इसके बाद घर के कामकाज करने में परेशानी आ सकती है या उनको शरीर में दूसरे रोग पैदा हो सकते हैं।
  • लोगों के मन से ऐसी बातों या वहम को निकालने के लिए जरूरी है कि उनको परिवार नियोजन को अपनाने से होने वाली अच्छाइयों को बताया जाए। हर इंसान को शिक्षित बनाया जाए। उनको आने वाले समय के बारे में बताया जाए कि ज्यादा बच्चे पैदा करने से उन्हें और उनके होने वाले बच्चे को कितनी परेशानियां पैदा हो सकती है। यहां पर ऐसे ही लोगों को परिवार नियोजन के उपाय के बारे में बताया जा रहा है इनमें कुछ ऐसे उपाय दिये जा रहे हैं जिनको अगर संभोग करते समय ही अपनाया जाए तो स्त्री का गर्भ ठहरने से रुक सकता है और कुछ ऐसे भी उपाय हैं जिनको अपनाकर गर्भ ठहरने की आशंका ही समाप्त हो जाती है।

आंतरिक संभोग-

  • आंतरिक संभोगक्रिया में जब पुरुष स्त्री के साथ संभोग करता है तो पुरुष जब चरम पर पंहुचने वाला होता है अर्थात जब उसका वीर्य़ निकलने वाला होता है तभी उसको अपना लिंग स्त्री की योनि से बाहर निकाल देना चाहिए ताकि वीर्य स्त्री की योनि के अंदर न जा सके और स्त्री को गर्भ ठहरने की आशंका ही खत्म हो जाए।
  • संभोग करते समय अगर पुरुष का वीर्य स्त्री की योनि में प्रवेश कर जाए तो स्त्री को तुरंत ही सीधी खड़ी कर देना चाहिए और उसे पेशाब करवाना चाहिए। इसके अलावा स्त्री की योनि में उंगली डालकर वीर्य को बाहर निकाल देना चाहिए। इससे पुरुष का वीर्य स्त्री के गर्भाशय या डिंबाशय की ओर नहीं पहुंच पाएगा।

सुरक्षित काल अथवा रिझ पद्धति-

           सुरक्षित काल अथवा रिझ पद्धति का मतलब होता है ऐसे समय में स्त्री के साथ संभोग नहीं करना चाहिए जिस समय में पुरुष के शुक्राणु स्त्री के डिम्ब से मिल सकते हैं। इसके लिए किसी योग्य चिकित्सक से राय ले लेनी चाहिए क्योंकि चिकित्सक स्त्री के मासिकस्राव की तिथि आदि पता करके यह बता सकता है कि किस-किस दिन पुरुष के शुक्राणु और स्त्री के डिम्ब आपस में मिल सकते हैं। इन दिनों में स्त्री के साथ संभोग करने से गर्भ ठहरने का डर रहता है और इन दिनों के अलावा बाकी दिनों में स्त्री और पुरुष बिना किसी डर के संभोगक्रिया का आनंद उठा सकते हैं।

कंडोम-

           कंडोम गर्भ को ठहरने से रोकने के लिए पुरुषों का एक बहुत ही सस्ता और सरल साधन है। कंडोम बहुत ही पतली रबड़ से बना होता है जिसको पुरुष के द्वारा अपने लिंग पर चढ़ाने पर भी खास महसूस नहीं होताकंडोम गर्भ को ठहरने से रोकने के लिए पुरुषों का एक बहुत ही सस्ता और सरल साधन है। कंडोम बहुत ही पतली रबड़ से बना होता है जिसको पुरुष के द्वारा अपने लिंग पर चढ़ाने पर भी खास महसूस नहीं होता कि लिंग पर कुछ चढ़ा है या नहीं। यह कंडोम पुरुष के लिंग को पूरी तरह से ढक लेता है जिससे उसका वीर्य स्त्री के डिंब से मिल नहीं पाता और स्त्री को गर्भ ठहरने का डर नहीं रहता।

           कंडोम 2 प्रकार के होते हैं- पहला कंडोम प्लेन और आगे-पीछे से समान आकार का होता है। दूसरे प्रकार का कंडोम इससे कुछ अलग होता है। इसका आगे का भाग ऊपर के भाग से कुछ संकीर्ण होता है और वहां पर एक टोंटी सी लगी होती है। इससे संभोगक्रिया के समय जब पुरुष का वीर्यपात होता है तो वह स्त्री की योनि में न जाकर टोंटी में ही जमा हो जाता है।

गर्भ को रोकने वाली गोलियां-

           गर्भनिरोधक गोलियां स्त्रियों के द्वारा प्रयोग किया जाने वाला और गर्भ को रोकने वाला सबसे सरल और अच्छा उपाय है। गर्भनिरोधक गोलियां स्त्रियों के द्वारा प्रयोग किया जाने वाला और गर्भ को रोकने वाला सबसे सरल और अच्छा उपाय है। इन गोलियों को माला डी के नाम से जाना जाता है बहुत से चिकित्सा केंद्रों में तो यह गोलियां मुफ्त दी जाती हैं। इन गोलियों को हार्मोन्स से तैयार किया जाता है और इनके सेवन से डिम्ब तैयार होकर स्त्री के गर्भाशय तक नहीं आता। अगर स्त्री इन गोलियों का सेवन करती है और उसे बच्चा चाहिए तो उसे इनका सेवन बंद कर देना चाहिए। यह गोली रोजाना 1-1 करके खानी पड़ती है। इनका सेवन करते समय अगर किसी दिन गोली खाना भूल जाए तो दूसरे दिन 2 गोली खाई जा सकती हैं।

लूप भी स्त्रियों द्वारा प्रयोग किया जाने वाला गर्भ को ठहरने से रोकने का एक अच्छा साधन है। लूप का प्रयोग स्त्री के द्वारा पहले बच्चे को जन्म देने के बाद 2-3 साल तक दूसरे बच्चे का जन्म होने से रोकने के लिए किया जाता है।लूप-

           लूप भी स्त्रियों द्वारा प्रयोग किया जाने वाला गर्भ को ठहरने से रोकने का एक अच्छा साधन है। लूप का प्रयोग स्त्री के द्वारा पहले बच्चे को जन्म देने के बाद 2-3 साल तक दूसरे बच्चे का जन्म होने से रोकने के लिए किया जाता है। एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि लूप का प्रयोग किसी कुशल नर्स आदि की देखरेख में करना चाहिए।

 कापर टी भी लूप की ही तरह का ही एक साधन होता है जिसे स्त्री के गर्भाशय पर फिट किया जाता है। यह अंग्रेजी के टी के आकार मे होता है।कापर टी-

           कापर टी भी लूप की ही तरह का ही एक साधन होता है जिसे स्त्री के गर्भाशय पर फिट किया जाता है। यह अंग्रेजी के टी के आकार मे होता है। इसके ऊपर तांबे के तार लिपटे होते हैं जिसके कारण इसमे गर्भ को रोकने की ताकत और ज्यादा हो जाती है।

चेक पेसरी-   

           गर्भ को ठहरने से रोकने के लिए चेक पेसरी को स्त्रियों के द्वारा प्रयोग किया जाने वाला एक बहुत ही अच्छा साधन माना जाता है। चेक पेसरी टोपी के आकार की होती है और इसे डच भी कहा जाता है। स्त्री को किसी स्त्री विशेषज्ञ से अपने जननांगों की जांच करवाकर अपने साइज की चेक पेसरी लेनी चाहिए। डायाफ्राम पेसरी 50, 55, 60 और 100 नंबर के साइज में होती है। सरवाइकल कैप 0, 1, 2, 3 नंबर के साइज में आते हैं। अगर दोनों आकार की पेसरियों को पहनना हो तो इन्हें पहनने से पहले स्त्री को पेशाब करके अपने मूत्राशय को अच्छी तरह से धोकर साफ कर लेना चाहिए। कुछ स्त्रियां बैठी हुई अवस्था में, कुछ आधी लेटकर और कुछ पूरी तरह से लेटकर पेसरी पहनने में सुविधा महसूस करती हैं। पेसरी को कभी भी पति के सामने नहीं पहनना चाहिए क्योंकि इससे पति के ऊपर मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकता है।

           पेसरी को फिट करने से पहले उसके ऊपर शुक्रकीट नाशक क्रीम या जैली लगा लेनी चाहिए। संभोगक्रिया करने के तुरंत बाद में इसको निकालने की जरूरत नहीं होती अगर रात को संभोग किया गया हो तो सुबह इसे निकाला जा सकता है। शुरू-शुरू में पेसरी को फिट करने के लिए स्त्री विशेषज्ञ की जरूरत पड़ती है लेकिन कुछ समय में स्त्री को खुद इसे फिट करने की आदत पड़ जाती है। वैसे पेसरी को फिट करने का तरीका बहुत ही आसान है। इसके लिए सबसे पहले स्त्री पैरों के बल बैठ जाये तथा योनि के निचले भाग को पैरों पर टिका लें। अब गर्भाशय का मुंह नीचे आ जाता है और आसपास की मांसपेशियां फैल जाती हैं। इसके बाद स्त्री को गर्भ रोकने वाली जैली को पेसरी से चिपकाकर अंगूठे के साथ वाली उंगली में पहनकर चपटी रखे हुए धीरे-धीरे योनि में प्रवेश कराने के बाद उंगली से धीरे-धीरे ऊपर की ओर सरकाएं ताकि पेसरी दोनों किनारों पर सही स्थान पर फिट बैठ जाए। अंगूठे के साथ वाली उंगली को योनि में प्रवेश कराके यह पता लगा लेना चाहिए कि पेसरी फिट बैठ गई है या नहीं।

           पेसरी को जब निकालना हो तो उससे पहले योनि को खूब अच्छी तरह से धो लेना चाहिए और उसे निकालने के बाद पेसरी को भी अच्छी तरह से धो लेना चाहिए। इसके बाद इसे सूखे कपड़े से साफ करके इस पर बर्थ कंट्रोल पाउडर छिड़ककर डिब्बे में बंद करके रख लेना चाहिए। पेसरी को दुबारा प्रयोग में लाने से पहले इस पर पाउडर छिड़क लेना चाहिए। पेसरी को उसी अवस्था में निकाला जा सकता है जिस अवस्था में उसे फिट किया गया था।

     इनके अलावा क्रीम मलहम पाउडर और झागवाली गोलियां भी गर्भ को ठहरने से रोकने के लिए प्रयोग में लाई जाती हैं। इनका प्रयोग संभोगक्रिया से पहले योनि में डालकर किया जाता है।

नसबंदी-

           नसबंदी गर्भ को रोकने के लिए किया जाने वाला एक छोटा सा आप्रेशन है जिसमें डाक्टर पुरुष की शुक्र नलिका को काट देता है। ऐसी दशा में निकलने वाले वीर्यरस में शुक्राणु मौजूद नहीं होते अर्थात वह रस शुक्राणुविहीन होता है। अगर वीर्य में शुक्राणु ही नहीं होंगे तो वह डिंब के साथ मिल ही नहीं पाएगा। नसबंदी के बाद भी पुरुष पहले की ही तरह संभोग कर सकता है और पूर्ण संतुष्टि पा सकता है।

           पुरुषों की तरह ही स्त्रियों की भी नसबंदी की जाती है। यह भी एक छोटा सा आपरेशन होता है जिसमें स्त्री की डिंब नलिका काट दी जाती है ताकि डिंबकोष से निकलकर डिंबाणु वहां तक न पहुंचे जहां शुक्राणु से मिलने के बाद गर्भधारण होता है। नसबंदी एक स्थायी उपाय है और इसे तभी कराएं जब पति और पत्नी दोनों ने आगे बच्चा पैदा न करने का फैसला कर लिया हो।

मैथुन बाधा-

           मैथुन बाधा गर्भ को ठहरने से रोकने वाला कई बहुत ही सफल कहे जाने वाला उपाय नहीं है। इसमें पुरुष संभोग क्रिया करते समय स्खलित होने से पहले अपने लिंग को स्त्री की योनि से बाहर निकाल लेता है। लेकिन इस तरीके को अपनाने से भी स्त्री को गर्भ ठहरने का अंदेशा रहता है क्योंकि कभी-कभी लिंग के उत्तेजित होने के समय काउपर ग्रंथि से आने वाले द्रव्य में भी 1-2 बूंद वीर्य की जमा हो जाती है और उसमें शुक्राणु हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में गर्भधारण होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

जानकारी-

           बहुत सी स्त्रियां खासकर गांव में रहने वाली स्त्रियां संभोग करने के बाद गर्भ को ठहरने से रोकने के लिए अपनी योनि को साबुन मिले पानी से धो लेती हैं। लेकिन यह उपाय किसी तरह से कारगर नहीं है क्योंकि वीर्य के स्खलित होते ही शुक्राणु स्त्री के गर्भाशय में प्रवेश कर जाते हैं और साबुन का पानी आदि उसे वहां तक पहुंचकर साफ नहीं कर पाता। इसके अलावा हर साबुन शुक्राणुओं को समाप्त करने वाला नहीं होता है और ऐसा करने से स्त्रियों को अक्सर जननांगों में जलन के अलावा कुछ नहीं मिलता।

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