दबाव देने के प्रकार


आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा  में दबाव देने के प्रकार


आधुनिक अंगमर्दक थैरेपी :
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परिचय-

          आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने से पहले यह जानना जरूरी है कि रोगों का उपचार करने के लिए बिन्दुओं पर किस प्रकार का दबाव दें। सही तरीके से दबाव देकर ही रोगों का उपचार ठीक प्रकार से किया जा सकता है। जब तक रोगों को ठीक करने के लिए बिन्दुओं पर दबाव सही नहीं पड़ता है तब तक रोगी को सही लाभ भी नहीं मिलता है।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा में दबाव देने के प्रकार निम्नलिखित हैं-

1. अंगूठे से दबाव देना-

          हाथ का अंगूठा मोटा तथा छोटा होता है और उसमें समीपस्थ व दूरस्थ दो पर्व होते हैं। हाथ की बाकी उंगलियों में मध्य पर्व नहीं होता है जैसा कि इस चित्र में दिखाया गया है। स्थिरता के साथ सुविकसित उंगली पर्व तथा भली प्रकार से जुड़ी पेशी-समूह होती हैं। ये सभी पर्व मिलकर अंगूठे को आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा प्रणाली में रोगों के इलाज करने के अनुसार (अंगूठे को बिन्दु पर दबाव देने के अनुरूप) बनाती हैं। अंगूठे से पूरी शक्ति के साथ व्यापक क्षेत्र पर दबाव दिया जा सकता है। इतना ही नहीं अंगूठे के ऊपर की ओर उठा हुआ पर्व का क्षेत्र (अंगूठे के पर्व क्षेत्र) जितना अधिक होगा, उतना ही त्वचा के ज्ञान अंग भी फैले होंगे जिसके परिणाम स्वरूप ज्ञान संग्राहकों की शक्ति बढ़ेगी।

          अंगूठे से दबाव देने के लिए करभास्थि (अंगूठे के हड्डी का सबसे निचला सिरा) व समीपस्थ पर्व (अंगूठे से नीचे तथा कलाई से थोड़ा ऊपर की ओर का क्षेत्र) के मध्य का जोड़ जरा सा मुड़ा होना चाहिए तथा जब यह बिन्दु तनावग्रस्त लगे तो अंगूठे के पर्व से दबाव देना चाहिए। दबाव देते समय हाथ के अंगूठे को छोड़कर शेष चारों उंगलियों की स्थिति ऐसी होनी चाहिए कि उन से अंगूठे के दबाव पर नियंत्रण बना रहे।

          कुछ व्यक्तियों के अंगूठे दूरस्थ पर्व पर प्राकृतिक रूप से मुड़ सकते हैं। लेकिन कुछ व्यक्तियों के ये पर्व नहीं मुड़ते हैं।

          आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार अंगूठे के उभरे पर्व से दबाव दिया जा सकता है। मगर कोमल अंगूठे के मामले में सपीपस्थ व दूरस्थ पूर्व (अंगूठे के नाखूनों से थोड़े नीचे का भाग) के बीच के जोड़ से दबाव नहीं दिया जाना चाहिए और ठीक इसी प्रकार अंगूठे के कठोर होने पर उसकी नोक से दबाव नहीं देना चाहिए। किसी भी चिकित्सक को जैसे-जैसे आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार उपचार करने का अनुभव होता हैं। वैसे-वैसे उसे दबाव देने का अनुभव भी होता जाता है और कहां पर दबाव हल्का देना है, और कहां पर कम देना है यह उस चिकित्सक को ज्ञान हो जाता है।

2. आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा  में रोगों का उपचार करने के लिए हाथ के एक अंगूठे चाहें वह दायां हो या बायां उस से दबाव देना चाहिए। एक अंगूठे के द्वारा दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा  में रोगों का उपचार करने के लिए हाथ के एक अंगूठे चाहें वह दायां हो या बायां उस से दबाव देना चाहिए। दबाव देते समय अंगूठे के अलावा बाकी चारों उंगलियों को सहारे के लिए रोगी के शरीर पर रखना चाहिए।

 

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा में रोगों का उपचार करने के लिए दो अंगूठों का उपयोग किया जा सकता है।3. दो अंगूठों से दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा में रोगों का उपचार करने के लिए दो अंगूठों का उपयोग किया जा सकता है। दो अंगूठों से दबाव देने के लिए दोनों हाथ के अंगूठों को इस प्रकार पास में लाया जाता है कि अंगूठे के बाहरी किनारे एक-दूसरे को छुएं तथा दोनों अंगूठे 30 डिग्री का कोण बनाते हुए, एक दूसरे से चिपके रहें और फिर इसके बाद बिन्दुओं पर एक साथ दोनों अंगूठों से दबाव देना चाहिए।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा  में रोगों का उपचार करने के लिए दाहिने हाथ के अंगूठे को बाएं हाथ के अंगूठे के पर्व (नाखून) के ऊपर रखते हैं। 4. अंगूठे पर अंगूठा रख कर दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा  में रोगों का उपचार करने के लिए दाहिने हाथ के अंगूठे को बाएं हाथ के अंगूठे के पर्व (नाखून) के ऊपर रखते हैं। दोनों अंगूठे को एक दूसरे के ऊपर इस तरह से रखते हैं कि 30 डिग्री का कोण बन सके। इसके बाद दाहिने हाथ के अंगूठे को उपयुक्त बिन्दु पर रख कर दबाव देना चाहिए। लेकिन इस तरह दबाव देते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि ऊपर वाले अंगूठे से ज्यादा दबाव न पड़ सके तथा इसके साथ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि निचले अंगूठे पर ज्यादा भार न पड़े। खब्बू (उल्टे हाथ से काम करने वाले) व्यक्तियों के लिए यह क्रिया बिल्कुल उल्टी होती है।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए हाथ की तर्जनी उंगली तथा अंगूठे के पर्वों (नाखून) को दूर-दूर रखना चाहिए। 5. तर्जनी उंगली तथा अंगूठे से दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए हाथ की तर्जनी उंगली तथा अंगूठे के पर्वों (नाखून) को दूर-दूर रखना चाहिए। इस तरीके का उपयोग उंगलियों तथा अंगूठों पर दबाव देने के लिए किया जाना चाहिए।

 

 

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए तर्जनी उंगली को बीच की उंगली पर रखकर फिर उंगलियों की ऐसी स्थिति में तर्जनी उंगली के पर्व के द्वारा रुक-रुककर दबाव देना चाहिए।6. तर्जनी तथा बीच की उंगली से दबाव देना - आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए तर्जनी उंगली को बीच की उंगली पर रखकर फिर उंगलियों की ऐसी स्थिति में तर्जनी उंगली के पर्व के द्वारा रुक-रुककर दबाव देना चाहिए। नाक से सम्बन्धित रोगों का उपचार करने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल (उपयोग) किया जाता है।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए बाएं हाथ की बीच की उंगली तथा दाएं हाथ की बीच उंगली को बिन्दुओं पर7. बाएं हाथ की बीच की उंगली तथा दाएं हाथ की बीच उंगली से दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए बाएं हाथ की बीच की उंगली तथा दाएं हाथ की बीच उंगली को बिन्दुओं पर एक दूसरे उंगली के पर्व (नाखून के ऊपर का भाग) पर रखना चाहिए। फिर रोग को ठीक करने के लिए निर्धारित बिन्दु पर दबाव देना चाहिए। खब्बू व्यक्तियों के लिए यह क्रिया विपरीत (उल्टी) होती है।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए तर्जनी उंगली तथा बीच की उंगली को एक कोण बनाते हुए खोलते हैं। 8. तर्जनी तथा बीच की उंगली के द्वारा दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए तर्जनी उंगली तथा बीच की उंगली को एक कोण बनाते हुए खोलते हैं। इन दोनों उंगलियों से बिन्दुओं पर दबाव देना चाहिए।

 

9. तीन उंगलियों से दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए तर्जनी, बीच की उंगलियों तथा अनामिका उंगलियों को एक साथ सटा कर दबाव देना चाहिए। प्रकार दबाव देने से हृदय की धड़कन से सम्बन्धित रोगों को ठीक किया जा सकता हैं।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए एक ही हाथ की चारों उंगलियों को सटा कर रखना चाहिए तथा इन उंगलियों से अंगूठे को जरा सा हटा कर रखना चाहिए 10. खुले अंगूठे तथा चारों उंगलियों से दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए एक ही हाथ की चारों उंगलियों को सटा कर रखना चाहिए तथा इन उंगलियों से अंगूठे को जरा सा हटा कर रखना चाहिए और फिर बिन्दुओं पर दबाव देना चाहिए जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। इस प्रकार का दबाव पश्च कपाल (सिर के पीछे तथा गर्दन के पृष्ठ (गर्दन के पीछे का भाग) भागों में दिया जाना चाहिए।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए एक ही दिशा में एक हाथ की चारों उंगलियों और अंगूठे को बिन्दुओं पर एक साथ रखना चाहिए 11. खुली हुई चारों उंगलियों से दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए एक ही दिशा में एक हाथ की चारों उंगलियों और अंगूठे को बिन्दुओं पर एक साथ रखना चाहिए और उंगलियों से इस प्रकार का दबाव देना चाहिए कि वक्षस्थल (स्तन) तथा अन्त:पार्श्विक क्षेत्रों (पीठ का भाग) का उपचार किया जा सके।

 

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए हाथ की हथेली को बिन्दुओं पर रखकर दबाव देना चाहिए। 12. हथेली से दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए हाथ की हथेली को बिन्दुओं पर रखकर दबाव देना चाहिए। इस प्रकार से दबाव देने कें लिए हाथ की चारों उंगलियों तथा अंगूठे को आपस में सटा कर रखना चाहिए।

 

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए दोनों हाथों की उंगलियों को सटाकर दाहिने हाथ के ऊपर बाएं हाथ की हथेली को रखकर बिन्दुओं पर दबाव देना चाहिए। 13. हाथ पर रखे हाथ से दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए दोनों हाथों की उंगलियों को सटाकर दाहिने हाथ के ऊपर बाएं हाथ की हथेली को रखकर बिन्दुओं पर दबाव देना चाहिए। इस प्रकार से दबाव देने में बाएं हाथ की हथेली को दाएं हाथ के हथेली के ऊपर इस प्रकार रखना चाहिए कि हाथ की हथेली को बिन्दुओं पर आसानी से रखा जा सके।

 

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए दोनों हाथों की हथेलियों को एक-दूसरे के पास इस प्रकार से रखना चाहिए14. दोनों हथेलियों से दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए दोनों हाथों की हथेलियों को एक-दूसरे के पास इस प्रकार से रखना चाहिए कि दोनों हाथों के अंगूठें के बाहरी सिरे एक-दूसरे को स्पर्श (छुएं) और फिर इसके बाद दोनों हाथों से एक साथ बिन्दुओं पर दबाव देना चाहिए।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में फंसा कर कलाई क्षेत्रों से एक साथ बिन्दुओं पर दबाव दबाव देना चाहिए।15. दोनों हाथों को जोड़ कर दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में फंसा कर कलाई क्षेत्रों से एक साथ बिन्दुओं पर दबाव दबाव देना चाहिए। इस प्रकार के दबाव का उपयोग गुर्दे के क्षेत्र में किया जाता है।

 

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए हाथ के हथेली के करतल तल (अंगूठे के बायें भाग) से पेट पर दबाव दिया जाना चाहिए।16. करतल से दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए हाथ के हथेली के करतल तल (अंगूठे के बायें भाग) से पेट पर दबाव दिया जाना चाहिए।

 

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए हाथ की हथेली के कनिष्ठा मूल (हाथ की सबसे छोटी उंगली का दायां भाग) के द्वारा दबाव देना चाहिए।17. कनिष्ठा मूल द्वारा दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगों का उपचार करने के लिए हाथ की हथेली के कनिष्ठा मूल (हाथ की सबसे छोटी उंगली का दायां भाग) के द्वारा दबाव देना चाहिए।

 

 

समय सीमा के अनुसार दबाव के प्रकार-

         आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के द्वारा उपचार करने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि बिन्दु पर दबाव कितने समय के लिए देना चाहिए तथा दबाव किस प्रकार देना चाहिए।

समय सीमा के अनुसार दबाव के प्रकार निम्नलिखित है-

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने के लिए ज्यादातर उपयोग में आने वाले तरीको के द्वारा धीरे-धीरे दबाव देना चाहिए तथा दबाव देते समय यह ध्यान रखना चाहिए1. आम दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने के लिए ज्यादातर उपयोग में आने वाले तरीको के द्वारा धीरे-धीरे दबाव देना चाहिए तथा दबाव देते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि दबाव धीरे-धीरे कब घटाना है। इस प्रकार दबाव देने के लिए 3 से 5 सेकण्ड का समय लेना चाहिए। इस प्रकार दबाव देने की क्रिया को आम दबाव कहते है।

 

2. हथेली को एक जगह रख कर दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने के लिए हथेलियों को एक जगह रख कर दबाव दिया सकता है तथा इस प्रकार के दबाव देने में 5 से 10 सेकेण्ड तक का समय लेना चाहिए।

3. रुक-रुक कर दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने के लिए एक बिन्दु पर पहले हल्का-हल्का दबाव देना चाहिए फिर उसके बाद अंगूठे को त्वचा पर से हटाए बिना दबाव देना चाहिए तथा इसके बाद कुछ देर रुक-रुक कर दबाव देना चाहिए। फिर कुछ देर रुककर इन बिन्दुओं पर वैसे ही दबाव देना चाहिए जैसे कि पहले दिया थे। इसके बाद जब तीसरी बार दबाव देते हैं तो दबाव कुछ तेज कर देना चाहिए। एक बार में दबाव देने के लिए कम से कम  5 से 7 सेकेण्ड का समय लेना चाहिए।

4. सक्शन दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने के लिए रोगी की त्वचा पर तीन उंगलियों या हथेली को इस प्रकार रखना चाहिए कि त्वचा पर आसानी से दबाव दिया जा सके।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने के लिए रोग के अनुसार एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु पर दबाव एक साथ सहज व सरलता के साथ देना चाहिए।5. तरल दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने के लिए रोग के अनुसार एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु पर दबाव एक साथ सहज व सरलता के साथ देना चाहिए। इस प्रकार दबाव देने के लिए हाथों के अंगूठों से 1 से 2 सेकेण्ड तक प्रत्येक बिन्दु पर दबाव देना चाहिए। ऐसे ही बहुत सारे बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए रोगी के बगल में ऊपर तथा नीचे की ओर दबाव देना चाहिए।

6. कंपायमान (हाथ को कंपकपाते हुए दबाव देना) दबाव देना- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने के लिए किसी एक बिन्दु पर 5 से 10 सेकेण्ड तक दबाव देने के लिए अंगूठे तथा तीन उंगलियों और हथेली को बिन्दु पर रख कर दबाव देना चाहिए। दबाव देते समय हाथ को कंपकंपाना चाहिए। इस तरीके से दबाव देने के और भी रूप हो सकते हैं जो इस प्रकार हो सकते हैं- दो हथेलियों से दबाव, एक हथेली से दबाव या फिर हथेली के ऊपर दूसरी हथेली को रख कर दबाव।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने के लिए हाथ के एक अंगूठे पर, दूसरे हाथ के अंगूठे को रखकर किसी एक बिन्दु पर 5 से 7 सेकेण्ड तक धीरे-धीरे दबाव को तेज करते हुए दबाव देना चाहिए7. संकेंद्रित दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने के लिए हाथ के एक अंगूठे पर, दूसरे हाथ के अंगूठे को रखकर किसी एक बिन्दु पर 5 से 7 सेकेण्ड तक धीरे-धीरे दबाव को तेज करते हुए दबाव देना चाहिए तथा जब दबाव एक दम सामान्य रूप (कम) में हो जाता है तो अंगूठे को रोगी की त्वचा पर से हटाये बिना दबाव को धीरे-धीरे कम करते जाना चाहिए।

 8. हथेली द्वारा तेज दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से उपचार करने के लिए हाथ की सभी उंगलियों को एक साथ सटा कर हथेली को रोगी की त्वचा पर नीचे की ओर लाइए। इस प्रकार का दबाव हथेली पर दूसरी हथेली को रख कर भी दबाव दिया जा सकता है।

दबाव देने की तेज स्थितियां-

धुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के द्वारा दबाव देते समय दबाव की तीव्रता (तेज) तथा कम हो सकती हैं जो इस प्रकार हैं-

 दबाव-देने-के-प्रकार1. हल्का दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के द्वारा दबाव देते समय उंगलियों की स्पर्श की अवस्था से हल्का सा दबाव देते हुए आगे की बढ़ते जाते हैं तथा दुबारा स्पर्श की स्थिति में वापस लौटते जाते हैं। इस प्रकार का दबाव एक बिन्दु पर बार-बार या कई बिन्दुओं पर एक साथ देते हैं। इस प्रकार के दबाव में दबाव की तीव्रता सौ ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक होना चाहिए।

2. स्पर्श- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के द्वारा दबाव देने के लिए इस पद्धति का उपयोग हृदय की धड़कन तथा कई प्रकार के रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है और रोगी की त्वचा पर हल्का सा दबाव देने के लिए होता है। इस प्रकार के दबाव में दबाव की तीव्रता लगभग सौ ग्राम होनी चाहिए।

3. कोमल दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के द्वारा दबाव देने के लिए कोमल दबाव हल्के दबाव से ज्यादा होता है। लेकिन फिर भी यह दबाव रोगी के सहन शक्ति के अनुकूल होना चाहिए। कोमल दबाव देते समय श्वसन क्रिया के अनुरूप दबाव को धीरे-धीरे बढ़ाते रहना चाहिए तथा जब दबाव अधिकतम सीमा पर पहुंच जाए तो दबाव को धीरे-धीरे घटाना चाहिए। इस प्रकार के दबाव में दबाव की तीव्रता 1 से 5 किलो तक होती हैं।

4. मध्यम दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के द्वारा दबाव देने के लिए दबाव देते समय दबाव को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। इस दबाव की शुरूआत में थोड़ा बहुत कष्ट होता है। लेकिन दबाव धीरे-धीरे आनन्ददायक हो जाता है। इस प्रकार के दबाव की तीव्रता 5 किलोंग्राम से 15 किलोग्राम होती है।

5. तेज दबाव- आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के द्वारा इस प्रकार का दबाव देने के लिए रोगी के शरीर की बिन्दुओं पर 15 किलोग्राम से 30 किलोग्राम तक की भार की तीव्रता वाला दबाव देना चाहिए। इस प्रकार के दबाव में रोगी को थोड़ा बहुत कष्ट होता है।

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