थाइमस ग्रन्थि


थाइमस ग्रन्थि
(Thymus gland)


     थाइमस ग्रन्थि वक्ष (छाती) में मीडियास्टाइनम के ऊपरी भाग में उरोस्थि (स्टर्नम) के पीछे स्थित चपटे लसीकाभ ऊतक से बनी गुलाबी-भूरे रंग की एक नलिकाविहीन ग्रन्थि होती है। यह हृदय और इसकी मुख्य रक्त वाहिकाओं के ऊपर रहती है। इसके दो खण्ड (lobes) होते हैं- दाएं और बाएं। यह आपस में संयोजी ऊतक द्वारा जुड़े होते हैं तथा संयोजी ऊतक के एक कैप्सूल में बन्द रहते हैं। हर खण्ड तन्तुबन्धों (trabeculae) द्वारा छोटे-छोटे खण्डों (lobules) में बंटा रहता है। हर खण्डक (lobule) में बाहर की ओर कॉर्टेक्स (cortex) तथा अन्दर केन्द्र में मेड्यूला (medulla) होता है। कॉर्टेक्स में बहुत से छोटे-छोटे लसीका कोशिकाओं (लिम्फोसाइट्स) (इन्हें अक्सर थ्रॉम्बोसाइट्स कहा जाता है) रहते हैं। इनमें से ज्यादातर लसीका कोशिकाओं (लिम्फोसाइट्स) थाइमस ग्रन्थि से निकलने से पहले विघटित (degenerate) हो जाते हैं। थाइमस ग्रन्थि के अन्दर सिर्फ केशिकाएं (capillaries) होती हैं। मेड्यूला में इयोसिनोफिलिक कॉर्पस्कि्ल्स (eosinophilic corpuscles) (इन्हें थाइमिक कॉर्पस्कि्ल्स (thymic corpuscles) या हैसल्स कॉर्पस्कि्ल्स (Hassall’s corpuscles) कहते हैं) पाई जाती है। इन कॉर्पस्कि्ल्स या कोशिकाओं के केन्द्र पर काचाभ (hyaline) पदार्थ रहता है। यह पदार्थ चारों ओर से चपटी एपीथीलियल कोशिकाओं के साथ संयोजी ऊतक के घेरे से घिरा रहता है।

     भ्रूण अवस्था में थाइमस ग्रन्थि लसीका कोशिकाओं (लिम्फोसाइट्स) का उत्पादन करती है तथा एन्टीबॉडीज बनाने में मदद करती है। जन्म के समय थाइमस ग्रन्थि ज्यादा बड़ी होती है (लगभग 12 से 15 ग्राम)। यह नवजात शिशु में एन्टीबॉडीज़ बनाती है तथा रोगक्षमता या इम्यूनिटी संस्थान के शुरुआती विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इसका आकार जन्म से लेकर यौवनारम्भ (puberty) तक बढ़ता रहता है तथा बचपन और वयस्क होने से पहले की आयु में अधिक सक्रिय होती है।

 

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