तुलसी


तुलसी

(BASIL)


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[ T ] से संबंधित आयुर्वेदिक औषधियां

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ताड़

तगर

टगर पादुका

तज

तेजबल

तालीसपत्र न. 1

तालीसपत्र न. 2

तालीसपत्र न0- 3

तून

तोरई

त्रायमाण नं. 1

तालमखाना

टमाटर

तम्बाकू (जंगली)

तम्बाकू

टंकारी

तारामण्डूर गुड़

तरबूज

तरुलता

त्रिलवण

त्रिजातक

तृण पंचमूल

तरवड़

टेसू - (पलास)

तेजबल

तेजपात

तेंदू

तेंदू (काला)

थनैला

थूहर नं. 1 खुरासानी (सातला)

तुलसी बुबई

तुलसी रामा

तुम्बरू (नेपाली धनिया)

थूहर नं0 2 (थोर सुर)

थूहर नं. 3 (नागफनी)

तिल

तिलिया कोरा

टिण्डा

तिनिश

तिपाती

त्रिफला

त्रिकुटा

तोदरी
त्रायमाण नं0 2

तुलसी बालंगा

तुलसी सभी स्थानों पर पाई जाती है। इसे लोग घरों, बागों व मंदिरों के आस-पास लगाते हैं लेकिन यह जंगलों में अपने आप ही उग आती है। तुलसी की अनेक किस्में होती हैं परिचय :

          तुलसी सभी स्थानों पर पाई जाती है। इसे लोग घरों, बागों व मंदिरों के आस-पास लगाते हैं लेकिन यह जंगलों में अपने आप ही उग आती है। तुलसी की अनेक किस्में होती हैं परन्तु गुण और धर्म की दृष्टि से काली तुलसी सबसे अधिक महत्वपूर्ण व उत्तम होती है। आमतौर पर तुलसी की पत्तियां हरी व काली होती है। तुलसी का पौधा सामान्यत: 1 से 4 फुट तक ऊंचा होता है। इसकी पत्तियां 1 से 2 इंच लंबे अंडाकार, आयताकार, ग्रंथियुक्त व तीव्र सुगंध वाली होती है। इसमें गोलाकार, बैंगनी या लाल आभा लिए मंजरी (फूल) लगते हैं। तुलसी के पौधे आमतौर पर मार्च-जून में लगाए जाते हैं और सितम्बर-अक्टूबर में पौधे सुगंधित मंजरियों से भर जाते हैं। शीतकाल में इसके फूल आते हैं जो बाद में बीज के रूप में पकते हैं। तुलसी के पौधे में प्रबल विद्युत शक्ति होती है जो उसके चारों तरफ 200 गज तक प्रवाहित होती रहती है। जिसे घर में तुलसी का हरा पौधा होता है उस घर में कभी वज्रपात (आकाश से गिरने वाली बिजली) नहीं होता है।

हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यधिक महत्व दिया गया है। तुलसी की पुजा सभी घरों में की जाती है और इसी लिए तुलसी घर-घर में लगाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस घर में तुलसी के पौधे होते हैं वहां मच्छर, सांप, बिच्छू व हानिकारक कीड़े आदि नहीं उत्पन्न होते।

तुलसी की पत्तियां हाथ जोड़कर या मन में तुलसी के प्रति सम्मान और श्रद्धा रखते हुए जितनी आवश्यकता हो उतनी ही तोड़नी चाहिए। इसकी पत्तियां तोड़ते समय ध्यान रखें कि मंजरी के आसपास की पत्तियां तोड़ने से पौधा और जल्दी बढ़ता है। अत: मंजरी के पास की पत्तियां ही तोड़ना चाहिए। पूर्णिमा, अमावस्या, संक्रान्तिकाल, कार्तिक, द्वादशी, रविवार, शाम के समय, रात एवं दिन के बारह बजे के आसपास तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए। तेल की मालिश कराने के बाद बिना नहाए, स्त्रियों के मासिक धर्म के समय अथवा किसी प्रकार की अन्य अशुद्धता के समय तुलसी के पौधे को नहीं छूना चाहिए क्योंकि इससे पौधे जल्दी सूख जाते हैं। यदि पत्तों में छेद दिखाई देने लगे तो कंडे (छाणे) की राख ऊपर छिड़क देने से उत्तम फल मिलता है।

विभिन्न भाषाओं में नाम :

कुलनाम लेमीसेई।
संस्कृत तुलसी, सुरसा।
हिंदी तुलसी।
अंग्रेजी बेसिल।
लैटिन ओसिमम सेंक्टम।
बंगाली तुलसी, कुरल।
मराठी तुलसा, काली तुलसी।
गुजराती तुलस।
तेलगू वृन्दा, गगेरा, कृष्णा तुलसी।

रंग : तुलसी का रंग हरा और पीला होता है। 

स्वाद : इसका स्वाद तीखा होता है।

स्वरूप : तुलसी के पौधे घरों, बागों एवं जंगलों में होते हैं। तुलसी का पौधा झाड़ीदार व 1 से 4 फुट ऊंचा होता। तुलसी के पत्ते कुछ गोल लम्बे और छोटे-छोटे होते हैं। तुलसी के फूल के स्थान पर एक प्रकार की बाल निकलती है जिसमें बीज होते हैं।

तुलसी की अनेक जातियां होती है परन्तु साधारणत: औषधि के लिए हमेशा सुलभ और पवित्र तुलसी का ही प्रयोग किया जाता है। औषधियों के रूप में प्रयोग होने वाली तुलसी दो प्रकार की होती है- हरी पत्तियों वाली सफेद तुलसी और काली पत्तियों वाली काली तुलसी। दोनों तुलसी के गुण समान होते हैं लेकिन हरी तुलसी के अपेक्षा काली तुलसी अधिक लाभकारी होती है। काली तुलसी में कफ को नष्ट करने की शक्ति होती है और हरी तुलसी में बुखार को समाप्त करने की शक्ति होती है।

हानिकारक :

चरक संहिता के अनुसार तुलसी के साथ दूध का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे कुष्ठ रोग होने की संभावना रहती है। कार्तिक के महीने में तुलसी के पत्ते पान के साथ सेवन करने से शारीरिक कष्ट हो सकता है। तुलसी का अधिक मात्रा में सेवन करना मस्तिष्क के लिए हानिकारक होता है।

मात्रा : तुलसी के पत्तों का चूर्ण 1 से 3 ग्राम, तुलसी के पत्तों का रस 5 से 10 मिलीलीटर , काढ़ा 20 से 50 मिलीलीटर और बीजों का चूर्ण 1 से 2 ग्राम तक प्रयोग किया जाता है। 

गुण :

आयुर्वेद के अनुसार : आयुर्वेद के अनुसार तुलसी, हल्की, गर्म, तीखी कटु, रूखी, पाचन शक्ति को बढ़ाने वाली होती है।

तुलसी कीडे़ को नष्ट करने वाली, दुर्गंध को दूर करने वाली, कफ को निकालने वाली तथा वायु को नष्ट करने वाली होती है। यह पसली के दर्द को मिटाने वाली, हृदय के लिए लाभकारी, मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में कष्ट होना) को ठीक करने वाली, विष के दोषों को नष्ट करने वाली और त्वचा रोग को समाप्त करने वाली होती है। यह हिचकी, खांसी, दमा, सिर दर्द, मिर्गी, पेट के कीड़े, विष विकार, अरुचि (भोजन करने की इच्छा न करना), खून की खराबी, कमर दर्द, मुंह व सांस की बदबू एवं विषम ज्वर आदि को दूर करती है। इससे वीर्य बढ़ता है, उल्टी ठीक होती है, पुराना कब्ज दूर होता है, घाव ठीक होता है, सूजन पचती है, जोड़ों का दर्द, मूत्र की जलन, पेशाब करने में दर्द, कुष्ठ एवं कमजोरी आदि रोग ठीक होता है। यह जीवाणु नष्ट करती है और गर्भ को रोकती है।

यूनानी चिकित्सकों के अनुसार : यूनानी चिकित्सकों के अनुसार तुलसी बल बढ़ाने वाली, हृदयोत्तेजक, सूजन को पचाने वाली एवं सिर दर्द को ठीक करने वाली होती है। तुलसी के पत्ते बेहोशी में सुंघाने से बेहोशी दूर होती है। इसके पत्ते चबाने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है। तुलसी के सेवन से सूखी खांसी दूर होती है और वीर्य गाढ़ा होता है। इसके बीज दस्त में आंव व खून आना बंद करता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार : वैज्ञानिकों द्वारा तुलसी का रासायनिक विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इसके बीजों में हरे व पीले रंग का एक स्थिर तेल 17.8 प्रतिशत की मात्रा में होता है। इसके अतिरिक्त बीजों से निकलने वाले स्थिर तेल में कुछ सीटोस्टेराल, स्टीयरिक, लिनोलक, पामिटिक, लिनोलेनिक और ओलिक वसा अम्ल भी होते हैं। इसमें ग्लाइकोसाइड, टैनिन, सेवानिन और एल्केलाइड़स भी होते हैं।

तुलसी के पत्ते व मंजरी से लौंग के समान गंधवाले पीले व हरे रंग के उड़नशील तेल 0.1 से 0.3 प्रतिशत की मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें यूजीनाल 71 प्रतिशत, यूजीनाल मिथाइल ईथर 20 प्रतिशत तथा कार्वाकोल 3 प्रतिशत होता है। इसके पत्तों में थोड़ी मात्रा में `केरोटीन` और विटामिन `सी` भी होती है।


For reading tips click below links     विभिन्न रोगों का तुलसी से उपचार :
1. बुखार और जुकाम :

बुखार और जुकाम :

  • तुलसी की 65 पत्ते और 8 कालीमिर्च को 250 मिलीलीटर पानी में अच्छी तरह पकाकर छान लें। फिर इसमें दूध व चीनी डालकर चाय की तरह पीएं। इससे बुखार ठीक होता है और जुकाम शांत होता है।
  • छाया में सुखाई हुई तुलसी की पत्ती 50 ग्राम, बनफ्सा, सौंफ, ब्राहमी बूंटी, लाल चंदन प्रत्येक 30 ग्राम, इलायची व दालचीनी 10-10 ग्राम। इस सभी को कूटकर पानी में मिलाकर चाय बना लें और फिर इसमें दूध व चीनी मिलाकर पीएं। इसके सेवन से सामान्य बुखार, जुकाम और छींके आदि दूर होती है।
  • तुलसी के 15 पत्ते और 4 कालीमिर्च मिलाकर खाने से जुकाम व बुखार ठीक होता है।
2. पित्त ज्वर :

पित्त ज्वर :

पित्त ज्वर से पीड़ित रोगी को यदि अधिक घबराहट हो रही हो तो उसे तुलसी के पत्तों का शर्बत बनाकर पिलाना चाहिए। इससे पित्त ज्वर ठीक होता है।
3. बुखार (ज्वर) होना :

बुखार (ज्वर) होना :

  • 25 तुलसी के पत्ते, 15 कालीमिर्च, 10 ग्राम अदरक व 10 दालचीनी का 250 मिलीलीटर पानी में उबालकर दिन में 3-4 बार पीने से बुखार ठीक होता है।
  • 20 तुलसी के पत्ते, 20 कालीमिर्च, 9 ग्राम अदरक और 2 ग्राम दालचीनी को 50 मिलीलीटर पानी में पकाकर चाय बना लें। इसमें 25 ग्राम मिश्री या चीनी मिलाकर दिन में 2-3 बार बुखार से पीड़ित रोगी को पिलाएं। इससे सामान्य बुखार दूर होता है।
  • तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से अधिक पसीना आकर बुखार उतर जाता है।
  • तुलसी के 8-10 पत्ते, आधा चम्मच लौंग, आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण तथा 1 चम्मच कालीमिर्च का चूर्ण। इन सभी को 1 गिलास पानी में उबालें। जब पानी आधा बच जाए तो इसे छानकर थोड़ी-सी चीनी मिलाकर 3-3 चम्मच की मात्रा में दिन में 3-4 बार पिलाने से बुखार का आना ठीक होता जाता है।
  • तुलसी के 10 पत्ते, सोंठ 3 ग्राम, लौंग 5, कालीमिर्च 21 और स्वादानुसार चीनी डालकर उबालें। जब आधा पानी शेष रह जाए तो इसे छानकर रोगी को 3-4 बार पिलाएं। इससे बुखार में जल्दी आराम मिलता है।
4. चेचक (बड़ी माता) :

चेचक (बड़ी माता) :

  • तुलसी के पत्तों के साथ अजवायन को पीसकर प्रतिदिन सेवन करने से चेचक का बुखार शांत होता है।
  • नीम की नई पत्तियां व तुलसी के पत्ते को मिलाकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण शहद या मिश्री के साथ मिलाकर सुबह के समय रोगी को दें। इससे चेचक के दाने कम होते हैं और जलन शांत होती है।
  • चेचक के बुखार से पीड़ित रोगी को तुलसी के बीज व धुली हुई अजवाइन को पीसकर रोगी को पिलाना लाभकारी होता है।
  • सुबह के समय रोगी को तुलसी के पत्तों का रस आधा चम्मच की मात्रा में पिलाने से चेचक के रोग में लाभ मिलता है।
5. निमोनिया (ठंड लगकर बुखार होना) :

निमोनिया (ठंड लगकर बुखार होना) :

  • 20 तुलसी के पत्ते और 5 कालीमिर्च को पीसकर पानी में मिलाकर पीने से निमोनिया रोग ठीक होता है।
  • 20 तुलसी के पत्ते, 5 कालीमिर्च, 3 लौंग, 2 चुटकी हल्दी और एक गांठ अदरक। इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर एक कप पानी में उबालें और जब आधा कप पानी बच जाए तो इसे छानकर निमोनिया के बुखार से पीड़ित रोगी को पिलाएं। इसका सेवन दिन में 2 बार लगभग 10 दिनों तक करने से निमोनिया रोग ठीक होता है।
  • तुलसी की पत्तियों का रस, सोंठ, कालीमिर्च तथा पीपल का चूर्ण बनाकर सेवन कराने से निमोनिया में आराम मिलता है।
6. मियादी बुखार :

मियादी बुखार :

  • तुलसी के 10 पत्ते तथा आधा से 1 ग्राम जावित्री को पीसकर शहद के साथ मिलाकर रोगी को चटाने से मियादी बुखार में आराम मिलता है।
  • काली तुलसी, वन तुलसी और पोदीना बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें और यह काढ़ा दिन में 3 बार 3 से 7 दिनों मियादी बुखार से पीड़ित रोगी को पिलाएं। इससे बुखार उतर जाता है और रोग में आराम मिलता है।
7. विषम ज्वर :

विषम ज्वर :

तुलसी के पत्तों के रस में कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन कराने से विषम ज्वर में लाभ मिलता है।
8. शीतला (मसूरिका) ज्वर :

शीतला (मसूरिका) ज्वर :

तुलसी के पत्तों का रस और अजवायन को पीसकर शरीर पर लेप करने से दबी हुई चेचक (माता) बाहर आ जाती है।
9. सन्निपात ज्वर :

सन्निपात ज्वर :

तुलसी के ताजे पत्ते 25 ग्राम और कालीमिर्च 1 ग्राम को पानी के साथ पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर छाया में सूखा लें। यह 1-1 गोली पानी के साथ सुबह-शाम सेवन कराने से सान्निपात ज्वर में लाभ मिलता है।
10. हिचकी :

हिचकी :

तुलसी के पत्तों का रस 2 चम्मच और शहद 1 चम्मच मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से हिचकी दूर होती है।
11. कान का दर्द :

कान का दर्द :

  • तुलसी के पत्तों के रस को हल्का गर्म करके थोड़ा सा कपूर मिलाकर कान में 2-3 बूंद डालने से कान का दर्द समाप्त होता है।
  • कान से पीब बहने या कान में दर्द होने पर कुछ दिनों तक लगातार कान में तुलसी के पत्तों का रस गर्म करके डालना चाहिए। इससे कान का दर्द ठीक होता है और पीब का बहना बंद होता है।
12. कान की सूजन व गांठ :

कान की सूजन व गांठ :

तुलसी के पत्ते और एरण्ड के ताजे मुलायम पत्ते बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें और फिर इसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर कान के पीछे लगाएं। इससे कान की सूजन दूर हो जाती है और गांठे ठीक होती है। इसका उपयोग कनफेडा रोग में भी किया जाता है।
13. तुलसी का तेल बनाने की विधि :

तुलसी का तेल बनाने की विधि :

जड़ सहित पूरा तुलसी का पौधा लेते हैं। फिर इसे धोकर मिट्टी आदि साफ कर लेते हैं। फिर इसे कूटकर आधा किलो पानी और आधा किलो तिल का तेल मिलाकर धीमी-धीमी आंच पर पकाते हैं। पानी जल जाने और तेल शेष रहने पर मलकर छानकर सुरक्षित रख लेते हैं। यही तुलसी का तेल होता है।
14. बहरापन (कम सुनाई देना) :

बहरापन (कम सुनाई देना) :

तुलसी के पत्तों का रस गर्म करके प्रतिदिन कान में डालने से बहरापन दूर होता है।
15. कनफेड़ा :

कनफेड़ा :

तुलसी के पत्ते, अरण्ड के नए पत्ते और थोड़ा सा नमक एक साथ पीसकर लेप करें। इसका लेप करने से कान की फुन्सियां दूर होती है।
16. दाद :

दाद :

  • तुलसी के पत्तों का रस और नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर दिन में 2 से 3 बार दाद पर लगाने से दाद ठीक होता है। इसके उपयोग से खाज-खुजली, मुंहासे, काले धब्बे, झांई आदि त्वचा के रोग ठीक होते हैं।
  • दाद से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन तुलसी के पत्तों का रस 12 मिलीलीटर की मात्रा में पीना चाहिए।
  • तुलसी के पत्तों का रस दाद पर लगाने से दाद ठीक होता है।
  • तुलसी के 100 पत्ते और चौथाई चम्मच नमक को मिलाकर पीस लें और इसमें आधा नींबू निचोड़कर दाद पर लेप करें। इससे दाद व खाज-खुजली ठीक होती है।
  • तुलसी के 100 पत्ते और लहसुन की 5 कली को एक साथ पीसकर दाद पर लगाने से दाद ठीक होता है।
  • दाद को साफ करके तुलसी के पत्ते को पीसकर लेप करने से 15 दिनों में दाद नष्ट हो जाता है।
17. उल्टी होना :

उल्टी होना :

  • तुलसी के पत्तों का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर पिलाने से उल्टी बंद होती है।
  • तुलसी के पत्तों का रस पिलाने से उल्टी बंद हो जाती है। पेट में यदि कीड़े होने के कारण उल्टी आती हो तो उसे तुलसी के पत्तों का रस पिलाना चाहिए।
  • शहद और तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर चाटने से चक्कर आना व उल्टी बंद होती है।
  • तुलसी का रस, पोदीना और सौंफ का रस मिलाकर पीने से उल्टी बंद होती है।
  • 10 ग्राम तुलसी के पत्तों को 1 ग्राम छोटी इलायची के साथ पीस लें फिर इसमें 10 ग्राम चीनी मिलाकर सेवन करें। इससे पित्त के कारण होने वाली उल्टी दूर हो जाती है।
18. दांतों का दर्द :

दांतों का दर्द :

  • तुलसी के पत्ते, कालीमिर्च और कपूर को पीसकर दर्द वाले दांतों के बीच दबाकर रखने से दांतों का दर्द ठीक होता है।
  • कालीमिर्च और तुलसी के पत्तों को पीसकर गोली बना लें और यह गोली दांत के नीचे रखने से दांतों का दर्द नष्ट होता है।
  • तुलसी के पत्तों का रस पानी में मिलाकर हल्का गर्म करके कुल्ला करें। इससे दांतों का दर्द, मसूढ़ों से खून आना व दांतों के अन्य रोग समाप्त होते हैं।
  • तुलसी के पत्तों का रस, हल्दी व सेंधानमक मिलाकर पानी में मिला लें और इससे कुल्ले करें। इससे मुंह, दांत तथा गले के सभी विकार दूर होते हैं।
19. गुहेरी (आंखों की पलकों पर फुंसियां होना) :

गुहेरी (आंखों की पलकों पर फुंसियां होना) :

आंखों की पलकों पर फुंसियां होने पर तुलसी के पत्ते के रस में लौंग घिसकर लगाएं। इससे फुंसियां समाप्त होती है।
20. सर्दी-जुकाम :

सर्दी-जुकाम :

तुलसी के पत्तों का रस, अदरक का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3-4 बार सेवन करने से सर्दी, जुकाम व खांसी दूर होती है।
21. वीर्यवृद्धि (धातु में वृद्धि) :

वीर्यवृद्धि (धातु में वृद्धि) :

  • तुलसी के बीजों का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में पुराने गुड़ के साथ मिलाकार खाएं और इसके बाद 1 कप दूध पीएं। इसका सेवन नियमित रूप से सुबह-शाम नियमित रूप से कुछ महीनों तक लेने से सेक्स सम्बंधी धातु की वृद्धि होती है। इससे नपुंसकता (नामर्दी) और शीघ्रपतन (धातु का शीघ्र निकल जाना) की समस्याएं दूर हो जाती है।
  • धातुदुर्बलता (वीर्य की कमजोरी) होने पर तुलसी के बीज 60 ग्राम और मिश्री 75 ग्राम को एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ सेवन करें। इससे धातु की कमजोरी दूर होती है।
22. स्वप्नदोष (नाईटफाल) :

स्वप्नदोष (नाईटफाल) :

तुलसी की जड़ का काढ़ा 4-5 चम्मच की मात्रा में रात को सोने से पहले नियमित रूप से कुछ सप्ताह तक पीने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिलता है।
23. शीघ्रपतन (धातु का जल्दी निकल जाना) :

शीघ्रपतन (धातु का जल्दी निकल जाना) :

तुलसी की जड़ या बीज चौथाई चम्मच की मात्रा में पानी में रात को भिगोकर रख दें और सुबह उसका सेवन करें। इससे शीघ्रपतन दूर होकर वीर्य पुष्ट (गाढ़ा) होता है।
24. चक्कर आना :

चक्कर आना :

  • तुलसी का रस, अदरक का रस व शहद मिलाकर सेवन कराने से चक्कर आना बंद होता है।
  • तुलसी के पत्ते को चीनी के शर्बत में पीस लें और फिर उसी शर्बत में अच्छी तरह मिलाकर दिन में 2 से 3 बार पिलाएं। इससे चक्कर आना ठीक होता है।
  • तुलसी के पत्तों का रस 5 बूंद और 1 चम्मच चीनी को आधा कप पानी में मिलाकर सेवन करने से लू (गर्मी) के कारण चक्कर आना ठीक होता है।
25. सिर का दर्द :

सिर का दर्द :

  • नींबू और तुलसी के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर 2-2 चम्मच दिन में 2 से 3 बार सेवन करने से सिर दर्द ठीक होता है।
  • तुलसी के पत्तों के रस में कपूर मिला लें और इस रस में चंदन की लकड़ी को घिसकर सिर पर लेप करें। इससे सिर दर्द दूर होता है।
  • तुलसी और अडूसे का रस मिलाकर सूंघने से कफ के कारण होने वाला सिर दर्द दूर होता है।
  • तुलसी के पत्तों को पीसकर माथे पर लेप करने से सिर का दर्द ठीक होता है।
  • सिर दर्द से पीड़ित रोगी को सुबह खाली पेट तुलसी के रस में शहद मिलाकर चाटना चाहिए। इससे सिर दर्द व माईग्रेन में भी लाभ मिलता है।
  • तुलसी के पत्तों को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाकर सूंघने से सिर दर्द शांत होता है। इस चूर्ण को सेवन करने से पागलपन की उत्तेजना भी दूर होती है।
26. नकसीर (नाक से खून का आना) :

नकसीर (नाक से खून का आना) :

तुलसी के पत्तों का रस निकालकर 3-4 बूंद नाक में टपकाने से कुछ दिनों में नाक से खून आना हो जाता है।
27. दस्त रोग :

दस्त रोग :

  • यदि बच्चे को पतले दस्त बार-बार आते हों तो उसे तुलसी के पत्तों का रस धाय के फूलों के साथ पीसकर मां के दूध में मिलाकर दें। इससे दस्त का बार-बार आना बंद होता है।
  • 2 चम्मच तुलसी का रस और 2 चम्मच मिश्री मिलाकर दिन में 3-4 बार बच्चे को पिलाने से दस्त रोग ठीक होता है। यह दस्त में आंव व खून आना बंद करता है।
  • तुलसी के 5 पत्ते, नीम के 2 पत्ते और पुदीने के 5 पत्तों को लगभग 150 मिलीलीटर पानी में पकाएं। जब पानी केवन आधा कप बच जाए तो इसे छानकर दिन में 3 गर्म करके सेवन करें। इसके सेवन से दस्त रोग ठीक होता है।
  • यदि कोई छोटा बच्चा दस्त रोग से परेशान हो तो उसे तुलसी के पत्तों के रस में चीनी मिलाकर पिलाएं। इससे छोटे बच्चे को पतले दस्त आने बंद हो जाते हैं।
  • तुलसी और अदरक का रस मिलाकर पीने से दस्त का बार-बार आना ठीक होता है।
  • तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर 10 मिलीलीटर की मात्रा में सेवन करने से दस्त रोग के कारण उत्पन्न पेट की मरोड़ व कब्ज दूर होती है।
  • तुलसी के 4 पत्ते और थोड़ा जायफल का चूर्ण मिलाकर काढ़ा बनाकर सेवन करें। इससे दस्त रोग ठीक होता है।
  • तुलसी के बीज चौथाई चम्मच दूध या पानी में पीसकर सेवन करने से दस्त बार-बार आना समाप्त होता है।
28. विषैले जन्तु का दंश :

विषैले जन्तु का दंश :

तुलसी के पत्ते को पीसकर थोड़ा सा नमक मिलाकर दंश वाले स्थान पर लेप करने से विष का असर समाप्त हो जाता है। इसके पत्तों का रस 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करने से विष का असर उतर जाता है।
29. नाक की दुर्गंध :

नाक की दुर्गंध :

  • तुलसी के पत्तों का रस नाक में डालने से नाक की दुर्गंध दूर होती है तथा नाक के कीड़े भी नष्ट होते हैं।
  • तुलसी के सूखे हुए पत्ते सूंघने से नाक की दुर्गंध दूर होती है। इससे पुराना जुकाम भी ठीक होता है।
30. मस्तिष्क की गर्मी :

मस्तिष्क की गर्मी :

रोगी को प्रतिदिन तुलसी के 5 पत्ते और कालीमिर्च को पीसकर 1 गिलास पानी में मिलाकर सुबह पीना चाहिए। इससे मस्तिष्क की गर्मी दूर होती है।
31. मिर्गी :

मिर्गी :

तुलसी के पत्ते को पीसकर मिर्गी से पीड़ित रोगी के पूरे शरीर पर मालिश करें। इसके उपयोग से मिर्गी के दौरे शांत होते हैं।
32. मुर्च्छा (बेहोशी) :

मुर्च्छा (बेहोशी) :

  • तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उस रस में नमक मिलाकर नाक में डालने से बेहोशी दूर होती है।
  • तुलसी के पत्तों का रस निकालकर धीरे-धीरे माथे पर मलने से और 2 बूंद नाक में डालने से बेहोशी दूर होती है।
33. बुखार में घबराहट :

बुखार में घबराहट :

  • यदि बुखार से पीड़ित रोगी को अधिक घबराहट हो तो उसे तुलसी के पत्तों के रस का शर्बत बनाकर पिलाएं। इससे बुखार से पीड़ित रोगी को घबराहट दूर होती है।
34. पुराना बुखार व खांसी :

पुराना बुखार व खांसी :

यदि रोगी को काफी दिनों से बुखार हो और साथ ही खांसी हो जिसमें खांसने पर छाती में दर्द हो तो ऐसे बुखार में रोगी को तुलसी के पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर पिलाएं। इससे पुराना बुखार ठीक होने के साथ खांसी भी समाप्त होती है।
35. मलेरिया का बुखार :

मलेरिया का बुखार :

  • प्रतिदिन तुलसी के पत्ते सेवन करने से मलेरिया का बुखार ठीक होता है। मलेरिया के बुखार से पीड़ित रोगी का जब बुखार उतर जाए तो उसे सुबह के समय तुलसी के 15 पत्ते और 10 कालीमिर्च खिलाना चाहिए। इससे मलेरिया का बुखार दुबारा नहीं होता।
  • 20 तुलसी के पत्ते, 10 कालीमिर्च और एक चम्मच चीनी मिलाकर काढ़ा बनाकर मलेरिया बुखार से पीड़ित रोगी को सेवन कराएं। इससे बुखार में बेहद आराम मिलता है और बुखार उतर जाता है।
  • गुड़, कालीमिर्च व तुलसी के पत्ते को मिलाकर काढ़ा बना लें और इस काढ़ा में नींबू का रस मिलाकर रोगी को 3 घंटे के अंतर पर गर्म करके पिलाएं। साथ ही रोगी को कम्बल ओढ़ा दें। इससे मलेरिया बुखार में जल्दी आराम मिलता है।
  • तुलसी के 15 पत्ते, 10 कालीमिर्च और 2 चम्मच चीनी को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। यह काढ़ा गर्म करके दिन में 3 बार सेवन करने से मलेरिया बुखार में लाभ मिलता हैं।
  • तुलसी के 10 पत्ते, 5 ग्राम करंज की गिरी, 10 कालीमिर्च तथा 5 ग्राम जीरा। इन सभी को एक साथ पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। 2-2 गोलियां दिन में 3 बार सेवन करने से मलेरिया में लाभ मिलता है।
  • तुलसी के पत्ते 10 ग्राम और 7 कालीमिर्च को पानी में पीसकर सुबह-शाम रोगी को खिलाने से मलेरिया बुखार ठीक होता है।
  • तुलसी के 22 पत्ते और 20 पिसी हुई कालीमिर्च को 2 कप पानी में उबाल लें और पानी एक चौथाई बचा रह जाने पर इसमें मिश्री मिलाकर ठंडा करके पीएं। इससे मलेरिया का बुखार ठीक होता है।
36. खांसी, बलगम :

खांसी, बलगम :

  • तुलसी के सूखे पत्ते, कपूर, कत्था व इलायची बराबर-बराबर में लें और फिर इस मिश्रण में 9 गुना चीनी मिलाकर चूर्ण बना लें। इसे चुटकी भर की मात्रा में सुबह-शाम दिन में 2 बार सेवन करने से खांसी-जुकाम, गले की सूजन में आराम मिलता हैं और फेफड़ों में जमा हुआ कफ निकलकर खांसी ठीक होती है।
  • 5 लौंग को तुलसी के पत्ते के साथ चबाने से सभी तरह की खांसी ठीक होती है। तुलसी के पत्ते और 4 ग्राम मिश्री की एक मात्रा लेने से खांसी दूर होती है। इससे फेफड़ों में कफ जमा होने के कारण उत्पन्न घड़घड़ाहट दूर होती है।
  • तुलसी के पत्ते और कालीमिर्च को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और इसकी गोलियां बना लें। इसमें से 1-1 गोली दिन में 4 बार सेवन करने से छाती व गले में फंसा बलगम (कफ) बाहर निकल जाता है।
  • 12 मिलीलीटर तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर इसमें चीनी और दूध मिलाकर पीने से खांसी समाप्त होती है। इससे छाती का दर्द दूर होता है।
  • तुलसी के पत्तों के रस में शहद मिलाकर पीने से खांसी दूर होती है।
  • 3 मिलीलीटर तुलसी का रस, 6 ग्राम मिश्री और 3 कालीमिर्च को एक साथ सेवन करना चाहिए। इससे कफ के कारण छाती की जकड़न, पुराना बुखार व खांसी ठीक होती है।
  • ज्वर, खांसी, श्वास रोग आदि से पीड़ित रोगी को तुलसी के पत्तों का रस, 3 मिलीलीटर अदरक का रस और 5 मिलीलीटर शहद को मिलाकर सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। प्रतिदिन इसका सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है।
  • जुकाम, खांसी, गलशोथ, फेफड़ों में बलगम जमा होना आदि रोग में तुलसी के सूखे पत्ते, कत्था, कपूर और इलायची को बराबर मात्रा में मिलाकर उसमें 9 गुना चीनी मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण चुटकी भर सुबह-शाम सेवन करने से छाती व गले में जमा हुआ बलगम निकल जाता है और खांसी में आराम मिलता है।
  • 3 मिलीलीटर तुलसी के पत्तों के रस में मिश्री को मिलाकर चाटने से खांसी दूर होती है।
  • तुलसी की मंजरी, सोंठ व प्याज का रस बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और इसमें शहद मिलाकर सेवन करें। इससे खांसी का दौरा शांत होता है।
  • 3 मिलीलीटर तुलसी के पत्तों का रस और 3 मिलीलीटर अड़ूसे के पत्ते का रस मिलाकर बच्चे को चटाने से खांसी दूर होती है।
  • प्रतिदिन खांसी से पीड़ित रोगी को तुलसी का पत्ता चबाना चाहिए। इससे खांसी ठीक होती है।
  • 20 ग्राम तुलसी के सूखे पत्ते, 20 ग्राम अजवायन तथा 10 ग्राम कालानमक को एक साथ मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ सेवन करें। इससे जुकाम व खांसी नष्ट हो जाती है।
  • 5 मिलीलीटर तुलसी के पत्तों के रस में 4 दाने इलायची मिलाकर पीस लें और इसमें शहद मिलाकर चाटें। इससे जमा हुआ कफ निकलकर खांसी ठीक हो जाती है।
  • तुलसी के रस, अदरक का रस, पान का रस, कालीमिर्च का चूर्ण, कालानमक व शहद को एक साथ मिलाकर चाटने से सूखी खांसी में आराम मिलता है।
  • तुलसी के 25 से 50 पत्ते खरल में कूटकर मीठे दही या शहद में मिलाकर खाने से श्वास रोग और खांसी में आराम मिलता है।
  • तुलसी के बीजों का चूर्ण 2-2 चुटकी भर सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से खांसी बंद होती है।
  • 5 लौंग को भूनकर तुलसी के पत्तों के साथ चबाने से समस्त प्रकार की खांसी में लाभ मिलता है।
  • प्रतिदिन केवल तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से खांसी ठीक होती है।
  • तुलसी के सूखे पत्ते और 4 ग्राम मिश्री को पिसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण प्रतिदिन एक बार सेवन करने से कफ नष्ट होता है और फेफड़ों की घबराहट दूर होती है।
  • तुलसी के पत्ते और कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और मूंग के आकार की गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली दिन में 4 बार सेवन करने से कुकर खांसी (हूपिंग कफ) ठीक हो जाती है।
  • तुलसी के पत्तों का सूखा चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से भी खांसी में लाभ मिलता है।
  • तुलसी और अदरक का 1 चम्मच रस निकाल लें और इस रस में एक चम्मच शहद मिलाकर चाटें। इससे खांसी और गले के रोग ठीक होते हैं। इससे गले में जमा हुआ कफ दूर होता है और गले की खुश्की भी शांत होती है।
37. खसरा :

खसरा :

  • तुलसी के पत्तों का रस लगभग 6-14 मिलीलीटर की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर दिन में 2 बार चाटना चाहिए। इससे खसरा में उत्पन्न दाने समाप्त होते हैं और जलन दूर होती है। इसके सेवन से खसरा में उत्पन्न खांसी भी दूर होती है।
  • रोजाना 1 चम्मच तुलसी के पत्तों का रस लगातार 3 से 4 दिन पिलाने से खसरा ठीक होता है।
38. गले की खराश :

गले की खराश :

यदि गले में खराश खट्टी चीजे खाने से हो तो 25 तुलसी के पत्ते और अदरक पीसकर शहद में मिलाकर चाटें। इसके प्रयोग से गले की खराश दूर होती है।
39. रोगों से बचाव :

रोगों से बचाव :

चाय के स्थान पर तुलसी के पत्तों को चाय की तरह बनाकर प्रतिदिन सेवन करने से अनेक प्रकार के रोगों से बचाव होता है और शरीर भी स्वस्थ रहता है।
40. अग्निमांद्य (पाचनशक्ति का कमजोर होना) :

अग्निमांद्य (पाचनशक्ति का कमजोर होना) :

तुलसी के ताजे पत्तों को पीसकर पानी में मिलाकर प्रतिदिन भोजन करने के बाद पीएं। इससे कब्ज दूर होकर पाचनशक्ति मजबूत होती है। प्रतिदिन भोजन करने के बाद केवल तुलसी के 5 पत्ते सेवन करने से भोजन आसानी से पच जाता है।
41. आधे सिर का दर्द (माइग्रेन) :

आधे सिर का दर्द (माइग्रेन) :

  • चौथाई चम्मच तुलसी के पत्तों का चूर्ण शहद के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से आधे सिर का दर्द दूर होता है।
  • यदि आधे सिर का दर्द सूर्योदय के साथ शुरू होता है और सूर्यास्त के साथ समाप्त होता है तो एक चौथाई चम्मच तुलसी के बीजों को पीसकर शहद में मिलाकर सेवन करें। इसके सेवन से आधे सिर का दर्द ठीक होता है।
  • तुलसी के 11 पत्ते और 11 कालीमिर्च मिलाकर खाने से सिर दर्द दूर होता है। इसे सूंघने से माईग्रेन (आधे सिर का दर्द) ठीक होता है।
42. सर्दी-जुकाम :

सर्दी-जुकाम :

  • 10 तुलसी के पत्ते और 5 कालीमिर्च को पानी में मिलाकर चाय की तरह बनाएं। फिर इसमें थोड़ा सा गुड़ और देशी घी या सेंधानमक डालकर पीएं। इससे सर्दी-जुकाम में लाभ मिलता है।
  • प्रतिदिन केवल तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने से जुकाम ठीक होता है।
  • तुलसी के पत्ते, कालीमिर्च और सोंठ भी चाय की तरह उबालकर चीनी व दूध मिलाकर सेवन करने से जुकाम में आराम मिलता है। तुलसी के सूखे पत्ते को पीसकर सूंघने से नाक से पानी बहना बंद होता है।
  • बच्चों की सर्दी, खांसी, कफ की घड़घड़ाहट में तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर पिलाना चाहिए।
  • 50 ग्राम तुलसी के पत्ते, 20 ग्राम बनफशा और 10 ग्राम मुलहठी को पानी के साथ मिलाकर पकाएं और जब पानी केवल एक चौथाई रह जाए तो छानकर 10 ग्राम मिश्री के साथ चाशनी बनाकर करें। इससे सर्दी-जुकाम ठीक होता है और खांसी भी नष्ट होती है। इससे कफ व बलगम भी निकल जाता है।
  • प्रतिदिन सुबह उठते ही 4 पत्ते तुलसी के और 4 कालीमिर्च मिलाकर खाने से जुकाम और बुखार ठीक होता है।
  • 7 से 11 तुलसी के ताजे पत्ते या सुखाए हुए पत्ते का चूर्ण 1 ग्राम, अदरक 2 ग्राम या आधा ग्राम सोंठ, मोटी-मोटी पिसी हुई 7 कालीमिर्च। इन सभी को 200 मिलीलीटर पानी मे 2 मिनट तक उबालकर उतार लें। फिर इसे छानकर इसमें 200 मिलीलीटर उबले दूध और 1-2 चम्मच चीनी या मिश्री मिलाकर पीएं। इसके बाद चादर ओढ़कर 10 मिनट के लिए सो जाएं। ऐसा करने से सर्दी की वजह से सिर दर्द, नाक से पानी गिरना, जुकाम, पुराना जुकाम, सांस की नली में सूजन, दर्द, हल्का बुखार, मलेरिया, बदहजमी आदि रोग ठीक होता है। बच्चों के सर्दी-जुकाम में यह आधी मात्रा में सेवन कराना चाहिए।
  • तुलसी, कालीमिर्च, दालचीनी और लौंग का काढ़ा बनाकर पीने से जुकाम ठीक होता है।
  • 6-7 तुलसी के पत्ते, 1 चम्मच गुलकंद, 2 कालीमिर्च के दानें, सोंठ की 1 गांठ और 2 लौंग को एक साथ मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से जुकाम में लाभ होता है।
  • तुलसी के सूखे पत्तों का काढ़ा बनाकर सूंघने से जुकाम और नाक के कीड़े व जख्म आदि दूर होते हैं।
  • तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसके अंदर थोड़ी सी मिश्री मिलाकर पीने से सर्दी या गर्मी के मौसम में होने वाले जुकाम, बलगम व सिरदर्द ठीक होते हैं।
  • तुलसी के पत्तों के रस में लगभग 700 ग्राम चीनी मिलाकर चासनी बना लें और एक बोतल में भरकर रख दें। यह चासनी प्रतिदिन लगभग 25 ग्राम दिन में 3 से 4 बार खाने से जुकाम ठीक होता है।
43. बच्चों के दस्त :

बच्चों के दस्त :

तुलसी और पान का रस समान मात्रा में गर्म करके बच्चे को पिलाने से दस्त साफ होता है। इससे पेट फूलना तथा अफारा भी ठीक होता है।
44. दांत निकलना :

दांत निकलना :

  • तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर बच्चे के मसूढ़े पर लगाने से और थोड़ा सा चटाने से दांत निकलते समय होने वाला दर्द ठीक हो जाता है।
  • तुलसी के पत्तों का चूर्ण अनार के शर्बत के साथ बच्चे को पिलाने से दांत निकलते समय का दर्द दूर होता है और दांत आसानी से निकल आते हैं।
45. पेचिश (संग्रहणी, दस्त में आंव व खून आना) :

पेचिश (संग्रहणी, दस्त में आंव व खून आना) :

  • तुलसी के पत्ते को चीनी के साथ खाने से दस्त में खून व आंव आना बंद होता है।
  • तुलसी के पत्तों का रस 10 मिलीलीटर और मिश्री मिलाकर शाम को पीने से पचिश के रोगी का रोग दूर होता है।
46. पेट का दर्द :

पेट का दर्द :

  • तुलसी और अदरक का रस बराबर मात्रा में लेकर गर्म पानी में मिलाकर पीने से पेट का दर्द तुरंत समाप्त होता है।
  • 12 मिलीलीटर तुलसी के पत्तों का रस पीने से पेट के अंदर होने वाली मरोड़ ठीक होते हैं।
47. पेट के मरोड़ :

पेट के मरोड़ :

10 मिलीलीटर तुलसी का रस पीने से पेट के मरोड़ ठीक हो जाते हैं। तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने से दस्तों में लाभ मिलता है। यह प्रयोग कब्ज भी दूर होती है।
48. अजीर्ण, अपच, कब्ज :

अजीर्ण, अपच, कब्ज :

  • तुलसी के 20 पत्ते और 5 कालीमिर्च को प्रतिदिन भोजन करने के बाद चबाकर खाने से कब्ज दूर होती है और पाचन क्रिया ठीक होती है। तुलसी के काढ़े में सेंधानमक और सोंठ मिलाकर पीने से हिचकी भी बंद होती है।
  • प्रतिदिन सुबह 1 तुलसी का पत्ता सेवन करने से कब्ज, गैस, अग्निमांद्य आदि रोग समाप्त होते हैं।
  • तुलसी के 50 पत्ते, थोड़ा सा टुकड़ा अदरक और स्वादानुसार कालानमक को एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण प्रतिदिन सेवन करें। इससे कब्ज दूर होती है और मल साफ आने लगता है।
  • तुलसी के 100 पत्ते और 1 चम्मच गुलाबी फिटकरी को पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें और इसे छाया में सुखा लें। यह 1-1 गोली प्रतिदिन सेवन करने से कब्ज दूर होती है।
  • तुलसी के पत्तें 25 ग्राम को पीसकर 5 ग्राम मीठे दही में मिलाकर सेवन करने से कब्ज दूर होकर पाचन क्रिया ठीक होती है। बच्चे को कब्ज होने पर आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह सेवन कराना चाहिए।
  • तुलसी के 4 पत्ते, दालचीनी, सोंठ, जीरा, सनाय के पत्ते और लौंग बराबर-बराबर मात्रा में लें और पीसकर चटनी बना लें। इस चटनी को 1 कप पानी में उबालें और जब पानी आधा कप रह जाए तो इसे छानकर दिन में 2 सेवन करें। इसके कब्ज, भोजन का न पचना, मल साफ न आना आदि रोग समाप्त होते हैं।
49. यकृत (जिगर) रोग या यकृत का बढ़ना :

यकृत (जिगर) रोग या यकृत का बढ़ना :

  • 1 गिलास पानी में 10 ग्राम तुलसी के पत्ते उबालें और जब पानी उबले हुए केवल एक चौथाई बच जाए तो इसे छानकर पीएं। इससे जिगर का बढ़ना ठीक होता है। इसके प्रतिदिन सेवन से यकृत के अन्य रोग भी दूर होते हैं।
  • यकृत बढ़ने पर रोगी को तुलसी के पत्तों का रस गाय के दूध के साथ 20 दिन तक पिलाना चाहिए। इससे यकृत का बढ़ना ठीक होता है।
50. बच्चों का श्वास रोग :

बच्चों का श्वास रोग :

तुलसी के पत्तों का रस 5 बूंदे आधे चम्मच शहद में मिलाकर बच्चों को पिलाने से बच्चों का श्वास रोग नष्ट होते हैं।
51. दमा या श्वास रोग :

दमा या श्वास रोग :

  • तुलसी के रस में बलगम को पतला करके निकालने का गुण होता है। इसीलिए यह खांसी व जुकाम में यह बहुत लाभकारी होता है। तुलसी का रस, शहद, अदरक व प्याज का रस मिलाकर सेवन करने से दमा रोग ठीक होता है।
  • तुलसी व अदरक का रस 5-5 ग्राम लेकर शहद के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से दमा रोग में आराम मिलता है। इससे गले या छाती में जमा हुआ कफ निकल जाता है।
  • तुलसी के पत्ते और कालीमिर्च बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से दमा नष्ट होता है।
  • एक साल से अधिक आयु वाले बच्चे को दमा रोग हो तो उसे ठीक करने के लिए तुलसी के 5 पत्ते को बारीक पीसकर शहद के साथ चटाना चाहिए। इसका उपयोग प्रतिदिन सुबह-शाम 3-4 सप्ताह तक करने से बच्चों के दमा रोग ठीक होता है। 1 साल से कम आयु वाले बच्चे को दमा रोग होने पर तुलसी के पत्तों का 2 बूंद रस शहद में मिलाकर दिन में 2 बार चटाएं।
52. प्रदर स्राव :

प्रदर स्राव :

  • तुलसी के पत्तों के रस में शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम चाटने से प्रदर रोग में आराम मिलता है।
  • तुलसी के रस में जीरा मिलाकर गाय के दूध के साथ सेवन करने से प्रदरस्राव ठीक होता है।
53. रक्तप्रदर :

रक्तप्रदर :

  • तुलसी के ताजे पत्तों का रस तालमिश्री के साथ पीने से रक्तप्रदर रोग मिटता है।
  • तुलसी के पत्तों का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम चाटने प्रदरस्राव ठीक होता है।
54. प्रसव का कष्ट (बच्चे जन्म देने के समय का दर्द) :

प्रसव का कष्ट (बच्चे जन्म देने के समय का दर्द) :

  • प्रसव पीड़ा के समय तुलसी के पत्तों का रस स्त्री को पिलाने से पीड़ा कम होती है और बच्चे का जन्म आसानी से हो जाता है।
  • तुलसी की जड़ प्रसूता स्त्री की कमर पर बांधने से प्रसव के समय का दर्द कम होता है।
55. बंद मासिकधर्म :

बंद मासिकधर्म :

मासिकधर्म रुक जाने पर तुलसी के बीजों का सेवन प्रतिदिन करना चाहिए। इससे मासिकधर्म सम्बंध गड़बड़ी दूर होकर मासिकधर्म नियमित होता है।
56. गर्भनिरोध (गर्भधारण से रोकने के लिए) :

गर्भनिरोध (गर्भधारण से रोकने के लिए) :

  • मासिकधर्म बंद होने के बाद 30 दिनों तक 1 कप तुलसी के पत्तों का काढ़ा प्रतिदिन एक बार सेवन करने से गर्भ नहीं ठहरता है तथा कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • तुलसी के पत्ते मिश्री के साथ पीसकर सेवन करने से गर्भ नहीं ठहरता है।
57. गर्भधारण न होना या बांझपन :

गर्भधारण न होना या बांझपन :

  • यदि किसी स्त्री को मासिकधर्म नियमित रूप से सही मात्रा में आने के बाद भी गर्भ नहीं ठहरता हो तो मासिकधर्म के दिनों में स्त्री को तुलसी के बीज को चबाना चाहिए या पानी में पीसकर या काढ़ा बनाकर सेवन करना चाहिए। इससे गर्भधारण होता है। यदि 2 से 4 महीने के सेवन से गर्भधारण न हो तो इसका सेवन एक वर्ष तक करें। इस प्रयोग से गर्भाशय निरोग, सबल बनकर गर्भधारण के योग्य बनता है।
  • तुलसी के बीज 5 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ मासिकधर्म शुरू होने से पहले 3 दिनों तक नियमित सेवन करने से गर्भधारण होता है।
58. मुंह के छाले :

मुंह के छाले :

  • तुलसी और चमेली के पत्ते को एक साथ चबाने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।
  • बच्चों के मुंह के छाले होने पर 2 कालीमिर्च और 4 तुलसी के पत्ते को मिलाकर पीस लें और इसमें शहद मिलाकर बच्चे को चटाएं। इससे मुंह के छाले खत्म होते हैं।
  • तुलसी के 4-5 पत्ते प्रतिदिन सुबह-शाम चबाकर ऊपर से पानी पीने से मुंह के छाले व दुर्गंध दूर होती है।
  • मुंह के छाले व जख्म होने पर तुलसी की सूखी लकड़ी को पानी के साथ घीसकर छालों पर लगाएं। इससे छाले व जख्म जल्दी ठीक होते हैं।
  • त्वचा के रोग में : तुलसी के पत्तों का रस और नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर दाग, खाज, चेहरे झाइयां, कील, मुंहासे व अन्य त्वचा रोग पर लगाने से वे ठीक होते है।
69. घाव :

घाव :

  • तुलसी के पत्ते को छाया में सुखाकर बारीक पीस लें और कपड़े से छानकर घाव पर छिड़कें। इससे घाव भर जाते हैं।
  • फोड़े, जख्म व घाव होने पर काली तुलसी के पत्ते को पीसकर लगाना चाहिए। इससे फोड़े अच्छी तरह से पककर फूट जाते है और दर्द से आराम मिलता है।
  • तुलसी की लकड़ी को पानी में घिसकर चंदन की तरह घाव पर लगाने से आराम मिलता है।
  • तुलसी के पत्तों का रस या पत्तों के काढ़े से घाव को धोने से घाव व जख्म जल्दी भर जाते हैं।
60. घाव में कीड़े होना :

घाव में कीड़े होना :

  • तुलसी के पत्तों को उबालकर उस पानी से घाव को धोएं और ऊपर से तुलसी के पत्तों का बारीक चूर्ण घावों पर छिड़कना चाहिए। इससे घाव के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
  • तुलसी के पत्तों के रस में पतला कपड़ा भिगोकर पट्टी बांधने से घाव के कीड़े नष्ट होते हैं।
61. आग से जलने पर :

आग से जलने पर :

  • तुलसी के पत्तों का रस 250 मिलीलीटर और नारियल का तेल 250 मिलीलीटर को मिलाकर आग पर गर्म करें और जब केवल तेल बच जाए तो इसमें 15 ग्राम मोम डाल दें। इसके बाद मोम अच्छी तरह मिल जाने पर इसे उतार लें और आग से जले हुए स्थान पर लगाएं। इससे आग की जलन शांत होती है। इसका उपयोग खुजली और फुंसी को नष्ट करने के लिए भी किया जा सकता है।
  • नारियल के तेल में तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर जले हुए अंगों पर लगाने से जलन व दर्द शांत होता है और फफोले भी नहीं पड़ते। इसे छाले व घाव पर भी लगाया जा सकता है।
62. सफेद दाग (ल्यूकोडार्मा) :

सफेद दाग (ल्यूकोडार्मा) :

  • एक तुलसी का ताजा हरा पौधा जड़ समेत उखाड़ लें और इसे धोकर साफ करके आधे किलो पानी व आधे किलो सरसों के तेल में हल्की-हल्की आग पर पकाएं। जब पकते-पकते केवल तेल बच जाए तो इसे उतारकर छान लें। इस तरह तैयार तुलसी के तेल को सफेद दाग पर लगाने से सफेद दाग ठीक होता है। यह खुजली, फुंसियों व जख्मों को भी ठीक होता है।
  • काली तुलसी के पत्तों का रस कालीमिर्च के साथ प्रतिदिन 2 बार सेवन करने और सफेद दाग पर लगाने से लाभ होता है।
  • तुलसी के पौधे की जड़ और तने को साफ करके छोटे-छोटे टुकड़े कर लें और फिर इसे आधे किलो तिल के तेल में डालकर पकाएं। पक जाने पर इसे छानकर एक शीशी में भर लें। इस तेल को दिन में 3-4 बार रुई के फोहे से सफेद दागों पर लगाने से सफेद दाग मिट जाते हैं।
63. कुष्ठ (कोढ़) :

कुष्ठ (कोढ़) :

तुलसी के 20 पत्ते को पीसकर दही में मिलाकर 4 से 5 सप्ताह तक खाने से कुष्ठ (कोढ़) रोग ठीक होता है।
64. बच्चों के रोग :

बच्चों के रोग :

पेट फूलना, दस्त, सर्दी, जुकाम, खांसी और उल्टी आदि कष्ट होने पर तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें चीनी मिलाकर शर्बत बना लें। यह शर्बत बच्चे को एक छोटे चम्मच से पिलाएं। इससे बच्चों के सभी रोग समाप्त होते हैं।
65. बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए :

बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए :

तुलसी और अदरक का रस गर्म कर लें और ठंडा होने पर शहद मिलाकर बच्चे को पिलाएं। इससे बच्चे निरोग व स्वस्थ रहते हैं।
66. बीमारी से बचाव :

बीमारी से बचाव :

  • शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रतिदिन तुलसी के 6 पत्ते खाना चाहिए। इससे अनेक रोगों से बचाव होता है।
  • तुलसी के पत्ते को पीसकर एक चम्मच की मात्रा में शहद मिलाकर सेवन करने से सर्दी, खांसी, जुकाम आदि सामान्य रोगों से बचाव होता है।
67. गृध्रसी (साइटिका पेन) :

गृध्रसी (साइटिका पेन) :

तुलसी के पत्तों को पानी में उबालकर उसकी भाप वातनाड़ी पर देने से गृध्रसी शूल (साइटिका पेन) में बहुत लाभ मिलता है।
68. मोटापा दूर करना :

मोटापा दूर करना :

  • तुलसी के पत्तों का रस 10 बूंद और शहद 2 चम्मच एक गिलास पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से मोटापा कम होता है।
  • तुलसी के कोमल और ताजे पत्ते को पीसकर दही के साथ बच्चों को सेवन कराने से बच्चों के शरीर में चर्बी का अधिक बनना कम होता है।
  • हृदय की कमजोरी : सर्दी के मौसम में तुलसी के 10 पत्ते, 4 कालीमिर्च और 4 बादाम को मिलाकर पीस लें और शर्बत की तरह आधे कप पानी में घोलकर प्रतिदिन सेवन करें। इससे हृदय की कमजोरी दूर होती है और हृदय के अन्य रोग समाप्त होता है।
69. बिजली गिरना (वज्रपात) :

बिजली गिरना (वज्रपात) :

  • तार की बिजली अथवा वर्षा में आकाश से गिरने वाली बिजली से यदि कोई व्यक्ति बेहोश हो गया हो तो उसके सिर व चेहरे पर तुलसी के पत्तों का रस डालें। इससे बेहोशी दूर होती है।
  • काली तुलसी की जड़ से बनाया हुआ माला पहनने से वज्रपात से आघात पहुंचने का डर नहीं रहता।
  • बिजली का करंट लगने पर पीड़ित व्यक्ति के मस्तक, छाती, हथेली व तलवों पर तुलसी के पत्तों के रस से मालिश करना चाहिए। इससे बेहोशी दूर होकर रोगी जल्दी होश में आ जाता है।
70. पानी को शुद्ध करने लिए :

पानी को शुद्ध करने लिए :

पानी में तुलसी के पत्ते डालने से पानी शुद्ध होता है।
71. फोड़ा :

फोड़ा :

तुलसी के पत्ते पानी में उबालकर फोड़े को धोएं और तुलसी के पत्ते को पीसकर फोड़े पर लगाएं। इससे फोड़े पककर सूख जाते हैं।
72. नारू, गंदा पानी पीने से होने वाला रोग :

नारू (गंदा पानी पीने से होने वाला रोग, बाला रोग) :

शरीर में जहां पर बाला निकल रहा हो उस जगह पर तुलसी की जड़ को घिसकर लेप करने से 2 से 3 इंच तक बाला बाहर आ जाता है। इसे बांध देना चाहिए। दूसरे दिन फिर उसी तरह से लेप करें। इस तरह से लगातार लेप करते रहने से पूरा बाला बाहर आ जाता है। जब बाला पूरी तरह से बाहर आ जायें तो भी उस स्थान पर लेप करते रहना चाहिए जिससे कि बाला का जहर पूरी तरह से खत्म हो जाता है।
73. बाल झड़ना (पलित रोग) या बाल सफेद होना :

बाल झड़ना (पलित रोग) या बाल सफेद होना :

  • यदि कम आयु में बाल गिरते हों या सफेद हो गए हों तो तुलसी के पत्तों का रस व आंवले का चूर्ण पानी में मिलाकर सिर पर लगाएं। यह लेप सिर पर लगाने के 10 मिनट बाद सिर को धो लें। ऐसा करने से बालों की जड़े मजबूत होती है और बालों का सफेद होना समाप्त होता हैं। ध्यान रखें कि लगाते व सिर धोते समय इसका पानी आंखों में नहीं जाना चाहिए।
  • तुलसी के पत्तों का रस और नारियल का तेल मिलाकर पका लें और यह नियमित रूप से सिर पर लगाएं। इससे सफेद बाल काले होते हैं।
74. बवासीर (अर्श) :

बवासीर (अर्श) :

  • बवासीर के रोग से पीड़ित रोगी को तुलसी के पत्तों को पीसकर बवासीर पर लेप करना चाहिए। इसका प्रयोग प्रतिदिन करने से बवासीर के मस्से सूखकर झड़ जाते हैं।
  • तुलसी के पत्ते का रस और नीम का तेल मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से सूख जाते हैं।
75. विषैले दंश :

विषैले दंश :

बिच्छू, बर्र या सांप काट लेने पर तुलसी के पत्ते को पीसकर पानी में मिलाकर पिलाएं। इससे विष का असर उतर जाता है।
76. मच्छरों से बचाव :

मच्छरों से बचाव :

तुलसी के पत्तों का रस शरीर पर लगाने से मच्छर नहीं काटता।
77. खून में कॉलेस्ट्राल बढ़ना :

खून में कॉलेस्ट्राल बढ़ना :

यदि खून में कॉलेस्ट्राल की मात्रा बढ़ गई हो तो तुलसी का रस पीने से खून में कॉलेस्ट्राल की अधिक मात्रा सामान्य होती है।
78. एलर्जी, एक्जिमा :

एलर्जी, एक्जिमा :

  • एलर्जी या एक्जिमा से प्रभावित अंग पर तुलसी के पत्तों का रस लगाने से एलर्जी व एक्जिमा समाप्त होता है।
  • तुलसी के पत्तों के रस में घी मिलाकर किसी तांबे के बर्तन में अच्छी तरह घोटकर मलहम की तरह बनाकर रोगग्रस्त स्थानों पर लगाने से एक्जिमा व एलर्जी समाप्त होती है।
79. रतौंधी (रात को दिखाई न देना) :

रतौंधी (रात को दिखाई न देना) :

तुलसी के पत्तों का रस 1-1 बूंद आंखों में डालने से रतौंधी में लाभ मिलता है।
80. थकावट अधिक होना :

थकावट अधिक होना :

50 तुलसी के पत्ते 200 मिलीलीटर पानी में उबालकर चीनी मिलाकर पीने से थकान दूर होकर स्फूर्ति बनी रहती है।
81. गुर्दे की पथरी :

गुर्दे की पथरी :

तुलसी गुर्दों की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। एक चम्मच तुलसी के रस में 2 चम्मच शहद और 3 चम्मच पानी मिलाकर लगातार 4-6 महीने तक पीते रहने से पथरी गलकर निकल जाती है।
82. स्मरण शक्ति का कम होना :

स्मरण शक्ति का कम होना (याददाश्त का कम होना) :

  • तुलसी के नियमित सेवन करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है और दिमाग तेज होता है। लगभग तुलसी के रस का सेवन एक साल तक करना चाहिए।
  • तुलसी के 10 पत्ते, 5 कालीमिर्च और 5 बादाम को दूध के साथ मिलाकर पीने से दिमाग को ताजगी के साथ-साथ दिमाग की कमजोरी दूर होती है।
83. चेहरे दाग-धब्बे व काले घेरे :

चेहरे दाग-धब्बे व काले घेरे :

तुलसी के पत्तों पर नींबू निचोड़कर बारीक पीसकर लें और चेहरे के दाग-धब्बे, काले दाग पर प्रतिदिन लेप करना चाहिए। इससे दाग, धब्बे, काले घेरे आदि समाप्त होते हैं।
84. कैंसर रोग :

कैंसर रोग :

तुलसी के 40 पत्ते पीसकर एक कप छाछ के साथ सुबह-शाम 2 बार प्रतिदिन खिलाने से कैंसर रोग ठीक होता है। ध्यान रखें कि औषधि सेवन करने के आधे घंटे के बाद नाश्ता करना चाहिए। कैंसर के रोगी को दूध, दही का अधिक सेवन करें और तेल, लालमिर्च आदि का सेवन न करें।
85. पसीना बंद होना :

पसीना बंद होना :

यदि किसी कारण से पसीना आना बंद हो गया हो तो तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिलाने से पसीना आने लगता है।
86. गले का दर्द :

गले का दर्द :

तेज बोलने से गले मे दर्द हो तो तुलसी के 20 पत्ते को पीसकर 1 चम्मच शहद मिलाकर चाटें। इससे गले का दर्द ठीक होता है।
87. फोड़े-फुंसियां, बालतोड़ :

फोड़े-फुंसियां, बालतोड़ :

  • यदि बाल टुटने के कारण जख्म बन गया हो जो तुलसी के पत्ते को पानी में उबालकर उस जख्म को धोएं और तुलसी के ताजा पत्ते को पीसकर जख्म पर लगाएं। इससे जख्म जल्दी भर जाता है। यह फोड़े-फुंसियों के लिए भी उपयोग किया जाता है।
  • तुलसी और पीपल के नए कोमल पत्ते बराबर मात्रा में पीसकर फोड़ों पर प्रतिदिन 3 बार लगाने से फोड़े और बाल टुटने से होने वाले जख्म ठीक होते हैं।
  • गर्मी या वर्षा ऋतु में होने वाली फुंसियों पर तुलसी की लकड़ी को घिसकर लेप करना चाहिए।
88. क्षय (टी.बी.) होने पर :

क्षय (टी.बी.) होने पर :

तुलसी के 10 पत्ते, 5 कालीमिर्च पीसकर शहद में मिलाकर प्रतिदिन चाटना चाहिए। इसे चाटने से क्षय (टी.बी.) की गांठ ठीक हो जाती है।
89. नाक में फुन्सी :

नाक में फुन्सी :

तुलसी के 100 पत्ते को थोड़े से पानी के साथ मिलाकर पीस लें और दाल के बराबर कपूर मिलाकर नाक में फुंसी पर लगाने से फुंसी ठीक होती है। यह गले हुए दांतों व खड्डे में रुई से लगाने पर दांतों का दर्द ठीक होता है।
9. इंफ्लूएंजा बुखार :

इंफ्लूएंजा बुखार :

  • तुलसी के 12 ग्राम पत्तों को 250 मिलीलीटर पानी में पकाएं। जब एकत्था चौथाई पानी शेष रह जाए तो छानकर सेंधानमक मिलाकर गर्म-गर्म ही रोगी को पिलाना चाहिए। इससे इंफ्लूएंजा बुखार ठीक होता है।
  • तुलसी के पत्ते 12 ग्राम, लौंग 7 पीस, नमक 3 ग्राम को 250 मिलीलीटर पानी में उबालें आधे बच जाने पर छानकर पिलाएं। इसे इंफ्लूएंजा बुखार समाप्त होता है।
  • 12 ग्राम तुलसी के पत्तों को 250 मिलीलीटर पानी में औटा लें। जब चौथाई पानी रह जाये तो पानी को छानकर सेंधा नमक मिलाकर गर्म-गर्म मिलाकर पिला दें।
  • तुलसी के 4-5 पत्ते, 2 लौंग के पीस, लाल इलायची का 1 दाना, 2 कालीमिर्च मिलाकर एक कप पानी में पका लें। यह काढ़ा जब आधा कप रह जाए तो छानकर इंफ्लूएंजा बुखार से पीड़ित रोगी को रात को सोने से पहले पिलाएं। इससे बुखार में लाभ मिलता है।
91. प्यास लगने पर :

प्यास लगने पर :

प्यास अधिक लगे तो तुलसी के पत्तों को पीसकर पानी में मिलाकर, नींबू निचोड़कर, मिश्री मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।
92. वात के रोग :

वात के रोग :

  • तुलसी के पत्तों को उबालने से उत्पन्न भाप को वात (गैस) के कारण जिस अंग में दर्द हो रहा हो उस अंग पर भाप लेने से दर्द में आराम मिलता है।
  • तुलसी के पत्ते, कालीमिर्च तथा गाय का घी इन तीनों को मिलाकर सेवन करना से वात का कारण उत्पन्न दर्द व अन्य रोग समाप्त होते हैं।
93. स्नायु (नाड़ी) का दर्द :

स्नायु (नाड़ी) का दर्द :

तुलसी के बीजों के चूर्ण का सेवन करने से स्नायुशूल में लाभ मिलता है।
94. पागलनपन :

पागलनपन :

पागलनपन में तुलसी के 15 पत्ते और 5 कालीमिर्च को पीसकर 1 कप पानी में घोलकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से पागलपन दूर होता है।
95. पित्ती उछलना:

पित्ती उछलना:

चौथाई चम्मच तुलसी के बीज एक आंवले के मुरब्बे पर डालकर प्रतिदिन 2 बार खाने से पित्ती उछलना ठीक होता है।
96. अनिद्रा (नींद का न आना) :

अनिद्रा (नींद का न आना) :

तुलसी के 5 पत्तों को खाएं और 100 पत्ते तकिए के आस-पास फैलाकर सोना चाहिए। इससे रात को नींद अच्छी आती है।
97. पेशाब की सूजन :

पेशाब की सूजन :

तुलसी के बीज और जीरा समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण एकत्था ग्राम की मात्रा में 3 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ लें। इससे पेशाब की जलन दूर होती है। इससे पूय तथा बस्तिशोथ भी दूर होती है।
98. नपुंसकता :

नपुंसकता :

  • धातु दुर्बलता में तुलसी के बीज एक ग्राम दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने नपुंसकता दूर होती है और कामशक्ति बढ़ती है।
  • तुलसी की जड़ और जमीकंद को पान में रखकर खाने से शीध्रपतन की शिकायते दूर होती है।
  • तुलसी के बीज या तुलसी की जड़ के चूर्ण में पुराना गुड़ समान मात्रा में मिलाकर 3-3 ग्राम की गोली बना लें। यह 1-1 गोली सुबह-शाम गाय के ताजे दूध के साथ 1 से 6 सप्ताह तक लेने से नपुंसकता दूर होती है।
  • वन तुलसी का बीज 350 से 700 मिलीग्राम की मात्रा में मिश्री मिलाकर गाय के दूध में सेवन करने से नपुंसकता दूर होकर कामशक्ति बढ़ती है।
99. स्वरभंग (गला बैठना) :

स्वरभंग (गला बैठना) :

तुलसी की जड़ को मुलेठी की तरह चूसते रहने से स्वरभंग ठीक होता है।
100. सांप काटने पर :

सांप काटने पर :

सांप काट लेने पर तुलसी के पत्तों के रस को 5-10 मिलीग्राम की मात्रा में रोगी को पिलाएं और इसकी मंजरी व जड़ को घिसकर दंश वाले स्थान पर बार-बार लेप करें। इससे दंश की पीड़ा समाप्त होता है और विष उतर जाता है। अगर रोगी बेहोश हो गया हो तो तुलसी के रस को नाक में तब तक टपकाते रहे जब तक रोगी होश में न आ जाएं।
101. दांत के दर्द में :

दांत के दर्द में :

  • तुलसी के पत्ते को पीसकर उसकी गोलियां बनाकर इन गोली को दर्द वाले दांत के नीचे दबाकर रखने से दांत का दर्द ठीक होता है।
  • तुलसी के पत्ते तथा कालीमिर्च को मिलाकर पीसकर दर्द वाले दांतों के नीचे रखने से दर्द में आराम मिलता है।
102. फेफड़ों के रोग :

फेफड़ों के रोग :

फेफड़े में कफ जमा हो तो तुलसी के सूखे पत्ते, कत्था, कपूर और इलायची समान मात्रा में लेकर 9 गुना चीनी मिलाकर बारीक पीस लें। इसे चुटकी भर की मात्रा में लेकर सुबह-शाम सेवन करने से फेफड़े में जमा हुआ कफ बाहर निकल जाता है।
103. फेफड़ों की सूजन :

फेफड़ों की सूजन :

तुलसी के पत्तों का रस 1 चम्मच प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से फेफड़ों की सूजन मिटती है।
104. बच्चों के रोग :

बच्चों के रोग :

बच्चों के दमा के अलावा पुराना सिर दर्द, जीर्ण माइग्रेन, पुरानी एलर्जिक सर्दी, जीर्ण दमा आदि रोगों में तुलसी के पत्तों का काढ़ा या चूर्ण सेवन कराने से बेहद लाभ मिलता है। प्रतिदिन सुबह पानी से साफ की गई तुलसी की 7-8 हरी पत्तियां को बारीक पीसकर शहद के साथ आवश्यकतानुसार 2-3 सप्ताह तक प्रयोग कराने से बच्चों के सभी रोग ठीक होते हैं।
105. काली खांसी :

काली खांसी :

  • तुलसी के पत्तों के 3 ग्राम रस में शहद मिलाकर चाटने से काली खांसी में बहुत अधिक लाभ मिलता है।
  • तुलसी के पत्ते और कालीमिर्च समान मात्रा में पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर रख लें। यह 1-1 गोली दिन में 4 बार लेने से काली खांसी (कुकुर खांसी) नष्ट होती है।
106. बालों का सफेद होना :

बालों का सफेद होना :

तुलसी और हरा धनिया बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और इसमें आंवले का रस मिलाकर बालों में लगाएं। कुछ देर बाद बालों को ताजे पानी से धो लें। इससे बाल काले व घने बनते हैं।
107. पुरानी खांसी :

पुरानी खांसी :

  • काली तुलसी के पत्तों का रस 7 से 14 मिलीमीटर को 4 से 6 ग्राम शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पुरानी खांसी नष्ट होती है।
  • तुलसी के रस, अदरक का रस, पान का रस, कालीमिर्च, कालानमक तथा शहद मिलाकर चाटने से तीव्र काली खांसी समाप्त होती है। इससे गले में अटका हुआ बलगम निकल जाता है और गले की खराश दूर होती है।
108. गैस्ट्रिक अल्सर :

गैस्ट्रिक अल्सर :

तुलसी के पत्तों को खाने या रस को पीने से पैप्टिक अल्सर और तनाव से पैदा होने वाले रोग ठीक होता है।
109. सिर की रूसी :

सिर की रूसी :

वनतुलसी का रस सिर में लगाने से सिर की रूसी समाप्त होती है।
110. पेट में गैस बनना :

पेट में गैस बनना :

तुलसी के 4 पत्ते, 4 लौंग और 2 कालीमिर्च को मिलाकर 1 कप पानी के साथ काढ़ा बनाकर सेवन करें। इससे पेट की गैस दूर होती है और दर्द भी समाप्त होता है।
111. मुंह की दर्गन्ध :

मुंह की दर्गन्ध :

  • मुंह से बदबू आने पर तुलसी के पत्तों को प्रतिदिन भोजन करने के बाद चबाने से मुंह से आने वाली बदबू दूर होती है।
  • मुंह या नाक से दुर्गन्ध आती हो तो तुलसी के पत्तों का रस निकाल कर सूंघना चाहिए। इससे नाक की दुर्गन्ध दूर होती है और कीड़े मर जाते हैं।
112. मूत्ररोग :

मूत्ररोग :

  • तुलसी के पत्ते को पीस कर मिश्री मिले शर्बत में घोटकर सेवन करने से बार-बार पेशाब का आना बंद होता है।
  • मूत्राशय की सूजन से पीड़ित रोगी को वनतुलसी के पत्तों को पीसकर मूत्राशय पर लेप करें। इससे मूत्राशय की सूजन दूर होती है।
113. मासिकधर्म के समय खून आना :

मासिकधर्म के समय खून आना :

  • तुलसी की जड़ को छाया में सुखाकर पीसकर चौथाई पान में रखकर खाने से अनावश्यक रक्त-स्राव बंद हो जाता है।
  • मासिकधर्म होने पर यदि कमर में दर्द रहता हो तो तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच सुबह के समय सेवन करने से कमर दर्द नष्ट होता है और मासिकधर्म में खून का आना बंद होता है।
  • तुलसी के बीज, पलाश, पीपल, असगंध, नागकेसर तथा नीम की सूखे पत्ते को समान मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में थोड़ी सी मिश्री मिलाकर 2 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह गाय के दूध के साथ सेवन करने से मासिकधर्म की नियमितता दूर होकर मासिकधर्म अनियमित होता है। इससे मासिकधर्म में अधिक खून का स्राव होना भी बंद होता है।
114. गुर्दे का दर्द व अन्य रोग :

गुर्दे का दर्द व अन्य रोग :

20 ग्राम तुलसी के सूखे पत्ते, 20 ग्राम अजवायन और 10 ग्राम सेंधानमक मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ खाने से गुर्दे का तेज दर्द दूर होता है। इससे गुर्दे का अन्य रोग भी दूर होता है।
115. लकवा (पक्षाघात, फालिस, परालिसिस) :

लकवा (पक्षाघात, फालिस, परालिसिस) :

  • तुलसी के पत्ते और सेंधा नमक को पीसकर लेप की तरह पीड़ित भाग पर लगाने से लकवा ठीक होता है।
  • तुलसी के पत्तों को उबालकर रोग ग्रस्त अंग को भाप देने से लकवा रोग में आराम मिलता है।
  • तुलसी के पत्ते को पीसकर इसमें सेंधानमक व दही मिलाकर लकवा से पीड़ित रोगी को अंगों पर लगाने से लकवा रोग ठीक होता है।
116. मोच या चोट लगने पर :

मोच या चोट लगने पर:

तुलसी के पत्तों का रस तथा सरसों का तेल मिलाकर थोड़ी-थोड़ी देर बाद मोच या चोट पर लगाने से दर्द में आराम मिलता है और सूजन हो गई हो तो सूजन दूर होती है।
117. कफ :

कफ :

50 ग्राम तुलसी के पत्तों का रस और 5 चम्मच चीनी को पानी के साथ मिलाकर शर्बत बना लें। यह एक छोटा चम्मच प्रतिदिन पीने से कफ (बलगम) निकल जाता है।
118. प्यास अधिक लगना :

प्यास अधिक लगना :

तुलसी के पत्तों को पीसकर एक गिलास पानी में मिला लें और इसमें नींबू निचोड़कर व मिश्री मिलाकर पीएं। इसका उपयोग दिन में 3-4 बार करने से प्यास का अधिक लगना कम होता है।
119. लू (गर्मी) का लगना :

लू (गर्मी) का लगना :

  • तुलसी के पत्तों का चूर्ण लगभग 5 ग्राम, पिप्पली का चूर्ण लगभग 3 ग्राम और नमक 5 ग्राम लेकर पानी में उबालकर पीने से लू का असर समाप्त होता है।
  • तुलसी के लगभग 20 ग्राम रस में मिश्री मिलाकर चटाने से लू से बचाव होता है।
120. पेट के सभी रोग :

पेट के सभी रोग :

तुलसी की 4 ताजी पत्ते प्रतिदिन खाने या छोटी गोली बनाकर पानी के साथ खाने से पेट के सभी रोग समाप्त होते हैं।
121. पेट के कीड़े :

पेट के कीड़े :

  • तुलसी के पत्तों के 10 मिलीलीटर रस को प्रतिदिन सुबह-शाम गर्म करके बच्चे को पिलाने से पेट के कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं।
  • तुलसी के पत्तों का रस पीने से पेट के कीड़े समाप्त होते हैं और दर्द ठीक होता है।
  • तुलसी के 10 पत्ते, बायविंडग का चूर्ण 2 ग्राम और एक चुटकी कालानमक को एक साथ पीसकर पानी में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली रात को सोने से पहले पानी के साथ सेवन कराएं। इससे पेट के कीड़े मर जाते हैं और कीड़े के कारण होने वाले दर्द समाप्त होते हैं।
122. नाक के रोग :

नाक के रोग :

  • तुलसी, बच, सोंठ, कालीमिर्च, दन्ती की जड़, कटेरी की जड़, सहजना की छाल, सेंधा नमक और छोटी पीपल को बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ मिलाकर बारीक पीसकर चटनी की तरह बना लें। इस चटनी को 4 गुना तेल में डालकर आग पर पकाने के लिए रख दें। पकने के बाद जब केवल तेल बाकी रह जाए तो इसे छानकर रख लें। इस तेल को नाक मे डालने से नाक से सांस की बदबू दूर होती है और नाक के अन्य रोग भी दूर होते हैं।
  • तुलसी के पत्तों का चूर्ण सूंघने से पीनस (पुराना जुकाम) ठीक होता है।
123. आमवात (गठिया, घुटनों के दर्द में) :

आमवात (गठिया, घुटनों के दर्द में) :

  • तुलसी के पत्तों के रस में अजवायन मिलाकर खाने से गठिया रोग नष्ट होता है।
  • तुलसी के पत्ते आधा मुट्ठी, एरण्ड की नई पत्तियां और आधा चम्मच नमक। इन सभी को पीसकर गर्म करके घुटनों पर 10 दिन तक लेप करने से घुटनों का दर्द समाप्त होता है।
  • तुलसी, सिनुआर और भंगरैया के रस को अजवायन के चूर्ण के साथ मिलाकर सेवन करने से गठिया रोग समाप्त होता है।
  • तुलसी के पत्तों का रस आधा चम्मच, पिसी हुई कालीमिर्च 4 ग्राम, 2 चुटकी कालानमक तथा 2 चम्मच शहद। इन सबको मिलाकर 40 दिनों तक सेवन करने से गठिया का दर्द ठीक होता है।
124. पेशाब का रंग काला या हरा होना :

पेशाब का रंग काला या हरा होना :

थोड़े से तुलसी के पत्तों को पीसकर मिश्री के शर्बत में मिलाकर प्रतिदिन 3 से 4 बार पीने से पेशाब साफ होता है और खुलकर आता है।
125. हृदय की कमजोरी में :

हृदय की कमजोरी में :

सर्दी के मौसम में तुलसी के 7 पत्ते, 4 काली मिर्च और 4 बादाम इन सबको ठंडाई की तरह पीसकर आधा कप पानी में घोल कर प्रतिदिन पीने से हृदय को शक्ति मिलती है।
126. खाज-खुजली :

खाज-खुजली :

तिल्ली के तेल में तुलसी का रस मिलाकर खाज-खुजली पर लगाने से कुछ ही दिनों में खाज-खुजली दूर हो जाती है।
127. उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) :

उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) :

4 तुलसी की पत्तियों, 2 नीम की पत्तियां 2-4 चम्मच पानी के साथ घोटकर 5-7 दिनों तक लगातार सुबह-सुबह खाली पेट पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।
128. फोड़ा :

फोड़ा :

लगभग 1 ग्राम तुलसी के पत्तों को पीसकर फोड़े पर बांधने से फोड़े से निकलने वाला खून बंद हो जाते हैं और फोड़ा सूख जाता है।
129. मिर्गी (अपस्मार) होना :

मिर्गी (अपस्मार) होना :

  • तुलसी के हरे पत्ते को पीसकर मिर्गी से पीड़ित रोगी के शरीर पर प्रतिदिन लगाने से मिर्गी में आराम मिलता है।
  • हरे या सूखे तुलसी के पत्ते को मिर्गी के रोगी को सुंघाने से मिर्गी के दौरे नष्ट होते हैं।
  • तुलसी के पत्तों का रस और चुटकी भर सेंधानमक मिलाकर नाक में टपकाने से मिर्गी के दौरों में उत्पन्न बेहोशी दूर होती है।
  • तुलसी के पत्तों के रस में कपूर मिलाकर सुंघाने से मिर्गी रोग में लाभ मिलता है।
130. विसर्प फुंसियों का दल बनना :

विसर्प फुंसियों का दल बनना :

अगर नाक के अंदर फुंसी हो तो तुलसी के सूखे पत्तों को पीसकर सूघें। तुलसी के पत्तों का रस और नारियल का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर पकाएं और जब पानी जलकर केवल तेल बच जाए तो इसमें 12 ग्राम पीला मोम डालकर लेप तैयार करें। यह लेप प्रतिदिन जख्म, खुजली, फोड़े-फुंसी पर लगाने से आराम मिलता है।
131. घमौरियां होना :

घमौरियां होना :

तुलसी की लकड़ी को पीसकर चंदन की तरह शरीर पर मलने से गर्मी के मौसम में होने वाली घमौरियां समाप्त होती है।
132. नाड़ी का छुटना :

नाड़ी का छुटना :

तुलसी के पत्तों का रस, मकरध्वज 240 मिलीग्राम और 360 मिलीग्राम कस्तूरी को शहद में मिलाकर सेवन करने से नाड़ी का छुटना दूर होता है।
133. चेहरे की दाग-दब्बे, कील, मुंहासे, झांइयां :

चेहरे की दाग-दब्बे, कील, मुंहासे, झांइयां :

  • चेहरे पर काली झांइयां हो तो सुबह पोदीने को पीसकर चेहरे पर लगाएं और आधे घंटे बाद पानी से धोकर साफ कर लें। शाम को तुलसी के पत्तों को पीसकर चेहरे पर लेप करें और आधा घंटे बाद पानी से चेहरे को धोकर साफ कर लें। इस तरह 3 महीने तक लगातार करने से चेहरे की झांइया मिटकर चेहरा साफ होता है।
  • तुलसी के पत्ते को पीसकर पानी में मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की झाइयां दूर होती है।
  • तुलसी के पत्तों को पीस कर उन में नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर प्रतिदिन लेप करने से त्वचा मुलायम और सुंदर होती है। इससे चेहरे की कील, मुंहासे, झाइयां एवं काले धब्बे-निशान ठीक होते हैं।
  • तुलसी का चूर्ण मक्खन में मिलाकर चेहरे पर लगाने से कील, मुंहासे और झाइयां में आराम मिलता है।
134. कण्ठमाला रोग :

कण्ठमाला रोग :

तुलसी के पत्ते, नागरमोथा और नागरबेल के पत्तों को पानी में पीसकर पीने से गण्डमाला अर्थात गले की गांठे ठीक होती है।
135. गले की सूजन में :

गले की सूजन में :

एक कप पानी में 4-5 कालीमिर्च तथा 5 तुलसी के पत्ते उबालकर काढ़ा बनाकर पीएं। इससे गले की सूजन दूर होती है और आवाज भी साफ होता है।
136. बच्चों की पसली चलना :

बच्चों की पसली चलना :

10 ग्राम तुलसी के पत्तों के रस को 6 ग्राम गाय के घी में मिलाकर गुनगुना कर लें। यह बच्चे को 1 या 2 बार में सेवन कराएं। इससे पसली चलना ठीक होता है। यह निमोनिया रोग में भी लाभकारी होता है। लेकिन प्रयोग मल बंद होने के साथ अफारा (गैस) होने पर ही करें। बुखार होने पर इसका उपयोग न करें।
137. उल्टी एवं अतिसार :

उल्टी एवं अतिसार :

120 मिलीग्राम चौकिया सुहागा, तुलसी के पत्तों के रस के साथ पीस लें और शहद मिलाकर मूंग के बराबर की छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इसमें से 1-1 गोली पानी के साथ खाने से उल्दी व अतिसार बंद होता है। इसका सेवन आवश्यकता के अनुसार दिन में 2 से 3 बार कर सकते हैं।
138. शरीर को ताकतवर बनाना :

शरीर को ताकतवर बनाना :

  • तुलसी के बीज या पत्ते को भूनकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण के बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर लगभग 1-1 ग्राम की गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली गाय के दूध के साथ सुबह-शाम लेने से शरीर में भरपूर ताकत आती है।
  • लगभग आधा ग्राम तुलसी के पीसे हुए बीजों को सादे या कत्था लगे पान के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम खाली पेट खाने से बल, वीर्य, खून बढ़ता है।
  • लगभग 10 ग्राम तुलसी के बीजों के चूर्ण को 20 ग्राम पुराने गुड़ में मिलाकर प्रतिदिन खाने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। इसका प्रयोग 40 दिनों तक करना चाहिए। इसका सेवन केवल सर्दी के दिनों में ही करना चाहिए क्योकि यह गर्म होता है।
  • शौच आदि से आने के बाद सुबह के समय तुलसी के 5 पत्ते पानी के साथ खाने से बल, तेज व स्मरणशक्ति बढ़ती है। तुलसी के पत्तों का रस 8 बूंद पानी में मिलाकर प्रतिदिन पीने से मांसपेशियां और हडि्डयां मजबूत होती है। तुलसी के बीज दूध में उबालकर चीनी मिलाकर पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है।
139. टांसिल का बढ़ना :

टांसिल का बढ़ना :

  • तुलसी के 4-5 पत्तों को पानी में उबालकर गरारे करने से गले का दर्द ठीक होता है और टांसिल की सूजन दूर होती है।
  • तुलसी की 1 चुटकी मंजरी (बीज) को पीसकर शहद के साथ चाटने से टांसिल ठीक होकर गला खुल जाता है।
  • तुलसी की लकड़ी का माला बनाकर गले में पहनने से हृदय की बीमारी दूर होती है।
140. सभी रोगों में सहायक :

सभी रोगों में सहायक :

तुलसी की प्रकृति गर्म होती है इसलिए इसे गर्मियों में कम मात्रा में लेते हैं। बड़ों के लिए 25 से 100 पत्ते एवं बालकों के लिए 5 से 25 पत्ते एक बार पीसकर शहद या गुड़ या एक कप दही में मिलाकर प्रतिदिन 3 बार 2-3 महीनों तक लेनी चाहिए। सुबह भूखे पेट पहली मात्रा लेनी चाहिए। इससे कैंसर, गठिया, आर्थराइटिस, ऑस्टियों आर्थराइटिस, स्नायुशूल (नाड़ी का दर्द), गुर्दों की खराबी व सूजन, पथरी, सफेद दाग, रक्त में चर्बी बढ़ना, मोटापा, कब्ज, गैस, अम्लता, पेचिश, कोलाइटिस, प्रोस्टेट के रोग, मंद बुद्धि बच्चे, सर्दी-जुकाम, प्रदाह, बार-बार बुखार आना, घाव भरना, टूटी हुई हडि्डयां, घाव न भरना, कैंसर, बिवाइयां, दमा, श्वास रोग, एलर्जी, आंखों का दुखना, विटामिन `ए` और `बी` की कमी, खसरा, सिरदर्द, आधे सिर का दर्द आदि सभी रोग नष्ट हो जाते हैं।


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