ज्ञानेन्द्रिया

विभिन्न प्रकार की संवेदनाओं (sensations) के द्वारा ही किसी भी इंसान को बाह्य जगत के ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है।

ज्ञानेन्द्रिया


परिचय-

विभिन्न प्रकार की संवेदनाओं (sensations) के द्वारा ही किसी भी इंसान को बाह्य जगत के ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। संवेदना को तभी महसूस किया जा सकता है जब उससे संबन्धित संवेदी- तन्त्रिकाओं (sensory nerves) को सही उद्दीपन (उत्तेजना) (stimulus) प्राप्त हो सके। उद्दीपनों (उत्तेजना) के पैदा हो जाने पर और उनके मस्तिष्क या स्पाइनल कॉर्ड (सुषुम्ना) में संचारित होने के बाद उनका विश्लेषण केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र के द्वारा होता है। हम उस विशेष संवेदना को मस्तिष्क के द्वारा अनुवादित होने पर ही महसूस करते हैं। शरीर ध्वनि, प्रकाश, गंध, दाब आदि के प्रति संवेदनशील होता है। इनकी संवेदना विशेष प्रकार के सांवेदनिक अंगों (Special sense organs) पर निर्भर करती है। यह अंग शरीर के अलग-अलग भागों में स्थित होते हैं।

तन्त्रिका तन्तुओं का सम्बन्ध खास तरह के सांवेदनिक अंगों से रहता है। तन्त्रिका तन्तुओं का खास तरह के सांवेदनिक अंगों में अन्त (termination) होने से पहले ये अपने न्यूरोलीमा (neurolemma) तथा मायलिन आवरण (myelin sheath) का त्याग कर देते हैं। हर संवेदी तन्त्रिका का आखिरी भाग कुछ विशेष प्रकार का बना होता है। इस विशेष सिरे को अन्तांग (end organ) कहते हैं और ये अन्तांग ही संवेदन (sense) के खास अंग होते हैं। हर ज्ञानेन्द्रिय से संबन्धित बहुत से उपांग होते हैं, जो उद्दीपन (उत्तेजना) को अन्तांग तक संचारित (transmit) करते हैं। लेकिन वास्तविक उद्दीपन अन्तांग में ही होता है और वहां से वह मस्तिष्क में पहुंचता है, जहां इसका विश्लेषण होता है ओर खास संवेदना (special sense) का ज्ञान होता है।

मानव शरीर में निम्न पांच ज्ञानेन्द्रियां (sense organs) होती हैं, जिनके द्वारा बाह्य जगत का ज्ञान होता है-

(i.) स्पर्शेन्द्रिय (त्वचा) (Skin)- इस ज्ञानेन्द्रिय द्वारा स्पर्श (छूना), दाब, पीड़ा (दर्द) ताप (गर्मी) (heat) और शीत (सर्दी) (cold) का एहसास होता है।

(ii.) स्वादेन्द्रिय (जीभ) (Tongue)- इस ज्ञानेन्द्रिय द्वारा किसी वस्तु को चखने से उसके स्वाद का ज्ञान होता है।

(iii.) घ्राणेन्द्रिय (नाक) (Nose)- इस ज्ञानेन्द्रिय द्वारा किसी वस्तु की गंध का एहसास होता है।

(iv.) श्रवणेन्द्रियाँ (कान) (Ears)- यह ज्ञानेन्द्रिय हमें कई प्रकार की ध्वनियों का ज्ञान कराती हैं।

(v.) द्रश्येन्द्रियां (आंखे) (Eyes)- इस ज्ञानेन्द्रिय द्वारा संसार की हर वस्तु को देखा जा सकता है।

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