जहर खा लेने पर


जहर खा लेने पर

IN CASE OF TAKING POISON


प्राथमिक चिकित्सा :

परिचय-

         बहुत से व्यक्ति जानकर या अनजाने में जहर जैसी खतरनाक चीज का सेवन कर लेते हैं जो शरीर में जाकर पेट में दर्द, जलन, दस्त, उल्टी, अनिद्रा, बेहोशी आदि के लक्षण प्रकट कर देता है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा न मिलने की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।

        जहर कई प्रकार के होते हैं- जिनमें से कई ऐसे होते हैं जो हमारे रोजाना की जिंदगी में प्रयोग होते हैं जैसे- बासी भोजन, मिट्टी का तेल, पेट्रोल, फिनाइल, फर्श-पॉलिश, कीटनाशी रसायन, डिटरजेंट, टॉयलेट क्लीनर और एल्कली, तेजाब, दीवारों के रंग तथा बहुत से रसायन। इनके अलावा ऐसी और भी बहुत सी चीजें हैं जिनको अगर सही मात्रा में ले तों वह मनुष्य के लिए खुराक का काम करती हैं लेकिन अगर उनको ज्यादा मात्रा में ले लिया जाए तो वही जहर का काम भी करती है।

         व्यस्कों की तुलना में बच्चों, खासकर छोटे बच्चों द्वारा अनजाने में घर में मौजूद जहरीली वस्तुओं को खा लेने का खतरा बहुत अधिक होता है। इसलिए जहर के बारे में ‘रोक इलाज से बेहतर’ नीति का पालन करना ही अच्छा होता है।

        जहर का सेवन करने की ज्यादातर घटनाएं घरों में ही होती हैं-जैसे- 34 प्रतिशत रसोईघर में, 27 प्रतिशत बैडरूम में, 15 प्रतिशत स्नानघर और शौचालय में तथा 9 प्रतिशत रहने वाले कमरों में। इसलिए इन स्थानों पर ऐसी वस्तुओं को, जो जहरीली साबित हो सकती हैं, वहां पर रखनी चाहिए जहां तक बच्चों का हाथ आदि न पहुंच सकें। जहरीले पदार्थो को कभी भी खाने वाले पदार्थो के साथ नहीं  रखना चाहिए। साथ ही विषैले पदार्थों और औषधियों को उन पैकिंगों में रखें, जिन पर उनके नाम साफ रूप से लिखें हों। उन्हें किसी दूसरे बर्तन में न डालें. जिस पर उनका नाम न लिखा हो।

        बची हुई या बेकार दवाई को पूरी सावधानी के साथ ऐसी जगह पर फेंकें कि बच्चे उसे न उठा पाएं। इसके लिए उस बेकार दवाई को वाशबेसिन या नाली आदि में फेंककर पानी से बहा देना ज्यादा अच्छा रहता है।

        हर तरह की दवाईयों को बच्चों की पहुंच से दूर ही रखें। बच्चे को कभी भी कोई दवा अंधेरे में न तो खिलानी चाहिए और न ही पिलानी चाहिए।

        बच्चों को मीठी दवाई खिलाते या पिलाते समय कभी यह नहीं कहना चाहिए कि वह टॉफी है। हो सकता है बाद में बच्चा उस दवाई को, टॉफी समझकर, उस समय भी खाता रहे, जब उसे दवाई की जरूरत न हो।

       यह जरूरी नहीं कि जहरीली वस्तुएं ठोस या द्रव के रूप में ही हों वे गैस के रूप में भी हो सकती हैं और सांस के साथ शरीर में पहुंच जाने पर उनके जहरीले प्रभाव प्रकट हो सकते हैं। धुआं, मिट्टी के तेल के स्टोव से निकलने वाली गैस, लाइट पेट्रोलियम गैस (घरेलू ईंधन गैस), सीवर में से निकलने वाली गैसें, मोटर वाहनों से एग्जॉस्ट के रूप में निकलने वाली गैसें, बम विस्फोटों से उत्पन्न गैसें तथा अनेक उद्योगों में बेकार पदार्थों के रूप में निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया, हाइड्रोजन सायनाइड आदि ऐसी ही गैसें हैं।

        बहुत से उद्योगों जैसे रसायन, औषधि, कीटनाशी, पेंट, विस्फोटक आदि में काम करने वाले व्यक्तियों को बहुत ज्यादा जहरीले पदार्थो के साथ काम करना पड़ता है और पर्याप्त सावधानियां बरतने के बावजूद भी कई बार जहरीले पदार्थ उनके शरीर में पहुंच जाते हैं।

        कुछ लोग किसी तरह की परेशानी में घिरकर या सदमे की स्थिति में आत्महत्या करने के लिए जान-बूझकर जहर का सेवन कर लेते हैं। इस प्रकार कितने ही तरीकों से जहर हमारे शरीर में पहुंच सकता है।

        अब मान लीजिए कि गलती से या जान-बूझकर किसी व्यक्ति के शरीर में जहर पहुंच जाता है और उस समय डॉक्टर तक पहुंचने की कोई सुविधा उपलब्ध न हो तो ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए कि जिससे जहर पूरे शरीर में न फैल सके। नीचे कुछ ऐसी उपाय बताए जा रहें है जिनके द्वारा पीड़ित व्यक्ति के शरीर में जहर को फैलने से रोका जा सकता है-

        यदि किसी व्यक्ति के शरीर में कोई जहरीला पदार्थ प्रवेश कर गया हो तो सबसे पहले उस व्यक्ति को खुले स्थान पर ले जाना चाहिए। फिर तुरंत ही डॉक्टर को फोन कर देना चाहिए या किसी दूसरे व्यक्ति से कहकर पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। फिर स्वयं उस चीज को उठाकर अपने पास रख लेना चाहिए जिसका जहर व्यक्ति के शरीर में पहुंचा हो क्योंकि उस वस्तु को देखकर डॉक्टर को तुरंत पता चल जाएगा कि पीड़ित व्यक्ति के शरीर में पहुंचा जहर कौन सा था जिससे उसे चिकित्सा करने में भी आसानी होगी। जहर पी लेने के बाद पीड़ित व्यक्ति द्वारा की गई उल्टी या थूक का नमूना भी डॉक्टरी जांच के लिए रख लेना चाहिए।

        जहर का सेवन करने के बाद अगर व्यक्ति बेहोश हो जाए तो उसे उल्टी करवाने की कोशिश न करें। उसे किसी सख्त सतह पर पीठ के बल लिटा दें। इस स्थिति में पेट के ऊपर कोई दबाव नहीं पड़ता। इसलिए उल्टी आने पर पदार्थ उसके वाक् अंग (वॉयस बॉक्स) में नहीं अटकता और न ही जीभ वायुनली में अटकती है। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर कृत्रिम सांस देने के लिए, यह स्थिति सबसे अच्छी होती है।    

         पीड़ित व्यक्ति अगर बहुत ज्यादा उल्टी कर रहा हो, तो उसे करवट देकर लिटाएं। उसकी एक टांग फैली रहने दें और दूसरी टांग को घुटने और जांघ पर मोड़ दें।

        अगर पीड़ित व्यक्ति बेहोश हो और उसकी सांस बहुत धीमी चल रही हो या रुक गई हो तो डॉक्टर के आने तक उसे कृत्रिम सांस देना शुरू कर दें।

        पीड़ित व्यक्ति के गले के पीछे हल्की थपकियां देकर या उसे नमक का घोल पिलाकर उल्टी करवाने की कोशिश करें। (नमक का घोल बनाने के लिए एक जग गुनगुने पानी में चम्मच नमक डालें।)

       जहर खा लेने का शक हो जाने के बाद पीड़ित व्यक्ति का पेट खाली करा देना अच्छा होता है। अगर वास्तव में उसने जहर खाया होगा, तो ऐसा करने से बहुत लाभ होगा और अगर नहीं खाया होगा  तो भी कोई हानि नहीं होगी। यहां यह बता देना सही रहेगा कि जहर खाने जाने के 8 घंटे के बाद तक भी उसे पेट से निकाला जा सकता है।

       तेजाब, एल्कली, पेट्रोल, मिट्टी का तेल, पेंट, थिनर, फर्नीचर पॉलिश, शैंपू, डिटरजेंट आदि कुछ ऐसी वस्तुएं हैं जिनको खा लेने के बाद पीड़ित व्यक्ति को उल्टी नहीं करानी चाहिए।

       पीड़ित व्यक्ति को काफी मात्रा में ठंडा पानी पिलाने से भी जहर का असर हल्का हो जाता है। इससे शरीर की जलन कम हो जाती है और उल्टियों के कारण शरीर में हो जाने वाली पानी की कमी की भी पूर्ति हो जाती है। कच्चे नारियल का पानी अच्छा रहता है क्योंकि उससे पोषण भी प्राप्त हो जाता है। पीड़ित व्यक्ति को शामक पेय, दूध तथा अंडे का पीला पदार्थ, पानी में मिलाकर देना भी लाभकारी होता है। अगर पीड़ित छोटा बच्चा हो और उसने घर में से ही किसी जहरीली वस्तु की थोड़ी मात्रा ली हो तो ऐसा करना विशेष रूप से उचित रहता है।

    नीचे कुछ जहरीले पदार्थों के नाम, उनका जहरीलापन तथा उनको खा लेने के बाद किए जाने वाले प्राथमिक उपचार दिए गए हैं-

जहरीला पदार्थ

जहरीलापन

प्राथमिक उपचार

एल्कली

इसका असर इसकी ली जाने वाली मात्रा पर निर्भर करता है। (संक्षारक)

पीड़ित को उल्टी कराने की कोशिश न करें बल्कि उसे दूध या नींबू का रस, सिरका या अंडे की सफेदी दें।

अमोनिया

इसका असर ली जाने वाली मात्रा पर निर्भर करता है।

तेज अमोनियो के धुएं को सांस के साथ अंदर ले जाने पर गले और वायुनली में तेज क्षोभ हो जाता है। धुंधली अमोनिया की सांद्रता आमतौर से 8 प्रतिशत होती है जिससे मुंह, ग्रासनली और पेट में जलन हो सकती है तथा बाद में उल्टी भी हो सकती है।

ऊपर दिया गया उपचार करें। कुछ हालातों में, जब बहुत अधिक मात्रा में अमोनिया ली गई हो तो जरूरत होने पर कृत्रिम सांस भी दे सकते हैं। अगर अमोनिया के धुएं से आंखों में जलन हो रही हो तो आंखों की पलकें खोलकर, कई बार पानी से धोएं। बाद में दर्द कम करने के लिए आंखों में तनु बोरिक एसिड घोल की कुछ बूंदें डालें।

आयरन टेबलेट

तीन साल तक के बच्चों के लिए आयरन की एकसाथ 6 गोली खाना बहुत खतरनाक हो सकता है और 14 गोलियां जानलेवा हो सकती हैं। कुछ बच्चों में इसका प्रभाव देर से होता है। इसे खाने पर उल्टी, पेट में दर्द, डायरिया, कमजोरी, नब्ज का तेज चलना, शरीर का नीला हो जाना आदि लक्षण पैदा हो सकते हैं।

पीड़ित बच्चे को तुरंत उल्टी कराएं। उसे दूध और मिल्कऑफ मैग्नीशिया दें। इसके बाद उसे तुरंत ही डॉक्टर के पास ले जाएं।

आर्सेनिक (यह चूहे मारक दवाईयों, खरपतवारनाशकों आदि में काफी मात्रा में मौजूद होता है।)

यह जहर खतरनाक होता है। इसे खाने के 15 मिनट के अंदर ही पीड़ित व्यक्ति को उल्टी होने लगती हैं, डायरिया हो जाता है, गले में कसाव और पेट में तेज दर्द होता है। पेशियां ऐंठ सकती हैं, पेशाब रुक सकता है और बेहोशी आ सकती है।

पीड़ित को 3-4 गिलास दूध या खाने के सोड़े का तनु घोल पिलाएं और बाद में उल्टी कराएं। उसे काफी मात्रा में अंडे की सफेदी या जैतून का तेल दें। उल्टी करने के बाद पानी में चारकोल टेबलेट डालकर पीने को दें।

उर्वरक

यह हल्का जहरीला जहर होता है और इसका सेवन करने से पेट में जलन हो सकती है।

पीड़ित को तुरंत दूध पिलाएं।

एंटीडिप्रेसैंट ड्रग

यह काफी खतरनाक जहर होता है। इसका सेवन करने से नींद आने जैसी अवस्था प्रकट हो सकती है जो बाद में कोमा में बदल सकती है। हृदय के कार्यो में अड़चन पैदा हो सकती है। बच्चों के लिए ये प्राणघातक हो सकता है।

पीड़ित को तुरंत उल्टी कराएं और फिर डॉक्टर के पास ले जाएं।

एंटीसेप्टिक (आमतौर से डेटॉल, मरक्यूरोक्रोम आदि)

हल्का जहरीला

अगर पीड़ित ने इस जहर को ज्यादा मात्रा में पी लिया हो तो उसे अपने-आप उल्टी हो जाएगी। लेकिन अगर उसे उल्टी नहीं होती तो उसे उल्टी कराएं और फिर दूध पिलाएं।

एस्प्रीन

इसका जहरीलापन व्यक्ति में उसकी आयु के अनुसार होता है- व्यस्क के लिए 15 ग्राम या अधिक,

1 साल के बच्चे के लिए 3 ग्राम या अधिक,

1 साल से छोटे बच्चे के लिए आधा ग्राम।

इसके जहरीले प्रभाव धीरे-धीरे प्रकट हो सकते हैं। पीड़ित की सांस तेज हो जाती है, उल्टी हो जाती हैं, बहुत तेज प्यास लगती है, बहुत पसीना आता है, बुखार हो जाता है और वह मानसिक रूप से भ्रमित हो जाता है।

पीड़ित को उल्टी कराएं और काफी मात्रा में दूध या पानी दें। पीड़ित को उल्टी के बाद खाने के सोडे का घोल (एक जग पानी में चाय की एक चम्मच सोड़ा) पीने को दें। कड़क चाय या कॉफी भी पिला सकते हैं।

एयरोसोल स्प्रे

यह बहुत कम जहरीला जहर होता है। अगर यह आंखों में गिर जाए तो आंखें लाल हो जाती हैं और उनमें दर्द होने लगता है।

पीड़ित की आंखों को अच्छी तरह पानी से धुला दें, जिससे उनमें कोई कण न रहें।

ओवन क्लीनर

यह बहुत ज्यादा जहरीला होता है।

पीड़ित को उल्टी कराने की कोशिश न करें बल्कि उसे दूध या नींबू का रस, सिरका या अंडे की सफेदी दें।

कार्बन ट्रेटाक्लोराइड (क्लीनिंग तरल, पेंट रिमूवर, आग बुझानेवाले तरल आदि में मौजूद)

इसका जहरीला प्रभाव पीने और त्वचा द्वारा अवशोषित कर लिये जाने के फलस्वरूप होता है।

पीड़ित व्यक्ति को उल्टी, सिरदर्द, डायरिया, दृष्टिभ्रम तथा तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी होने जैसे लक्षण प्रकट होने लगते है।

इसे सूंघने के बाद एकदम जहरीले प्रभाव प्रकट नहीं होते, लेकिन  बाद में गुर्दे और जिगर को हानि की आशंका रहती है

अगर पीड़ित ने कार्बन ट्रेटाक्लोराइड की भाप सूंघी हो तो उसे ताजा हवा में ले जाएं। जरूरत पड़ने पर उसे कृत्रिम सांस दें।

अगर उसने कार्बन ट्रेटाक्लोराइड पी ली हो तो काफी पानी पिलाकर उसे डॉक्टर की निगरानी में रखें, जिससे उसके गुर्दों और जिगर की हानि को रोका जा सके।

उसे बार-बार उल्टी कराएं।

उसके प्रभावित अंगों को पानी से धो दें तथा उसे किसी भी प्रकार की चिकनाई और एल्कोहल न दें।

कार पॉलिश (ये आमतौर से पानी या मिट्टी के तेल में घुली होती हैं।)

मध्यम जहरीला

पीड़ित को तुरंत दूध पिलाएं।

कार्बन मोनोऑक्साइड गैस (बंद कमरे में जलती हुई कोयले की अंगीठी से उत्पन्न; मोटर वाहनों के एग्जॉस्ट में मौजूद)

यह काफी जहरीली गैस होती है।

इसको सूंघने से चक्कर आना, सिरदर्द और कॉमा की स्थिति  पैदा हो सकती है, तंत्रिका तंत्र गड़बड़ा सकता है। अधिक देर तक कार्बन मोनोऑक्साइड के वातावरण में रहने पर मृत्यु भी हो सकती है।

पीड़ित व्यक्ति को तुरंत ही उस जगह से हटाकर खुली जगह पर ले जाए।

पीड़ित को उठाकर लाएं क्योंकि ऑक्सीजन की कमी के कारण वह बहुत थकान महसूस कर सकता है।

उसे कृत्रिम सांस दें। संभव हो तो शुद्ध ऑक्सीजन दें। इसके बाद तुरंत ही उसे बड़े अस्पताल में ले जाएं। स्वस्थ हो जाने के बाद भी पीड़ित को कई घंटों तक आराम कराएं।

कास्टिक सोडा

वे ही प्रभाव जो एल्कली द्वारा उत्पन्न होते हैं (कास्टिक सोडा प्रबल एल्कली ही है)।

पीड़ित को उल्टी कराने की कोशिश न करें बल्कि उसे दूध या नींबू का रस, सिरका या अंडे की सफेदी दें।

कीड़े मारने और खरपतवार नष्ट करने वाले रसायन

यह बहुत ज्यादा जहरीले होते हैं।

पीड़ित को चक्कर आना, नजर धुंधली पड़ जाना, छाती में रुकावट, नब्ज का धीमा हो जाना, आंखों की पुतलियां सिकुड़ जाना, होंठ नीले हो जाना, मांसपेशियों का संकुचन जैसे लक्षण प्रकट होते हैं।

डॉक्टर को तुरंत फोन करें और उसके आने तक पीड़ित को कृत्रिम सांस देते रहें।

कीड़े भगाने वाले रसायन (इंसैक्ट रिपेलैंट)

यह रसायन बहुत जहरीले होते हैं। इन्हे ज्यादा मात्रा में लेने से उल्टी हो सकती है।

पीड़ित को तुरंत उल्टी कराएं और फिर दूध पिलाएं।

कैलेमाइन लोशन

यह मध्यम जहरीला होता है।

पीड़ित को तुरंत दूध पिलाएं।

क्लीनर (विम आदि)

यह बहुत कम जहरीले होते हैं।

पीड़ित को तुरंत दूध पिलाएं।

उसे उल्टी कराना आमतौर पर जरूरी नहीं होता, क्योंकि इससे झाग पैदा हो सकते हैं।

गंधनाशक (डिओडरेंटः ब्लाक, द्रव और ऐरोसोल के रूप में।)

बहुत कम जहरीले होते हैं।

ब्लाक गंधनाशक- पीड़ित को उल्टी कराएं या फलों का रस पीने को दें।

उसे दूध नहीं देना चाहिए क्योंकि दूध से अवशोषण अधिक होता है।

पीड़ित को उल्टी न कराएं। ऐसा करने पर जहरीला पदार्थ सांस के साथ फेफड़ों में जा सकता है और पीड़ित को निमोनिया हो सकता है। पानी या कच्चे नारियल का पानी अधिक मात्रा में पिलाएं। पैराफीन लिक्विड उपलब्ध हो तो दे दें। यह पानी से अधिक लाभकारी होता है।

चींटी मारने की दवाइयां

यह बहुत जहरीली होती है।

इसको पीने के लगभग एक घंटे बाद उल्टियां होने लगती हैं और दस्त लग जाते हैं।

पीड़ित को तुरंत उल्टी कराएं।

काफी मात्रा में उसे दूध, अंडे की सफेदी या जैतून का तेल दे। उल्टी होने के बाद उसे पानी में चारकोल टेबलेट का चूर्ण दें।

छाती पर मलने वाले मलहम (चैस्ट रब)

बहुत हल्का जहरीला होता है।

पीड़ित को तुरंत दूध पिलाएं।

जहरीले खाद्य पदार्थः

 

 

जहरीली मछली

जहरीली मछली खाने पर उल्टी, डायरिया, पेटदर्द, कमजोरी तथा सुन्नता जैसे लक्षण प्रकट हो जाते हैं, जो मुंह से शुरू होकर हाथ-पैरों में फैल जाते हैं।

इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को तुरंत उलटी कराएं।

जहरीली मशरूम

जहरीली मशरूम खा लेने के कई घंटे बाद उसके हानिकारक लक्षण प्रकट होते हैं जैसे- पेटदर्द, उल्टी और डायरिया।

कुछ परिस्थितियों में पीड़ित शॉक में आ जाता है, या उसकी मांसपेशियों में ऐंठन पैदा हो जाती है या फिर वह बेहोश हो सकता है। इसके कारण रोगी की मृत्यु भी हो सकती है।

पीड़ित को बिस्तर पर लिटाकर रखें। अगर उसे उल्टी नहीं हो रही हो तो जबरदस्ती उल्टी कराएं। रोगी के शरीर को गरम रखने की कोशिश करते हैं जिससे वह शॉक की स्थिति न आने पाए। इसके बाद उसे डॉक्टर के पास ले जाएं।

बाटुलिज्म (सब्जियों में मौजूद बैक्टीरिया, क्लोस्ट्रीडियम बाटुलिज्म, द्वारा उत्पन्न। यह बैक्टीरिया फलों, मांस और भोजन में भी मौजूद हो सकता है; बासी या ठीक प्रकार से डिब्बाबंद न किए गए फलों-सब्जियों में भी मौजूद रहता है। सब्जियों को 20 मिनट तक उबालने से बैक्टीरिया नष्ट हो जाता है

बहुत ज्यादा विषैला, उलटी, डायरिया और पेटदर्द।

ये लक्षण 18 घंटे या उसके बाद भी प्रकट हो सकते हैं। बाद में दृष्टि-भ्रम (एक चीज दो दिखाई देने लगती है); पेशीय कमजोरी, गले और स्वरयंत्र की मांसपेशियों में ऐंठन, भोजन सटकने या साँस लेने में कठिनाई होने लगती है।

पीड़ित को तुरंत उल्टी कराएं। फिर तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

जरूरत के अनुसार पीड़ित व्यक्ति को कृत्रिम सांस दें।

यदि बाकी लोगों ने भी वही संदूषित भोजन किया हो, तो उन्हें भी उल्टी करा दें।

सालमोनेला संक्रमण (सालमोनेलोसिस)- संदूषित भोजन, विशेष रूप से संदूषित मांस और मांस उत्पाद तथा बतख के अंडों में मौजूद सालमोनेला बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न. यह रोग उस जानवर में भी मौजूद हो सकता है जिसके मांस का भक्षण किया जा रहा है।

पेट में ऐंठन, डायरिया, कभी-कभी ठंड के साथ हल्का बुखार। ऐसा लगभग दो दिन तक होता है।

पीड़ित को सेब, ब्लैकबेरी आदि का रस दें।

इससे डायरिया बंद हो जाता है।

अगर पीडित की हालत में सुधार नहीं हो तो डॉक्टर से सलाह लें।

ड्राइक्लीनिंग में प्रयुक्त होने वाले तरल

यह जहर मामूली जहरीला होता है। कुछ में कार्बन ट्रेटाक्लोराइड होता है। कुछ ड्राइक्लीनिंग तरल पदार्थों में व्हाइट स्पिरिट होती है।

अगर पीड़ित ने कार्बन ट्रेटाक्लोराइड की भाप सूंघी हो तो उसे ताजा हवा में ले जाएं। जरूरत पड़ने पर उसे कृत्रिम सांस दें।

अगर उसने कार्बन ट्रेटाक्लोराइड पी ली हो तो काफी पानी पिलाकर उसे डॉक्टर की निगरानी में रखें, जिससे उसके गुर्दों और जिगर की हानि को रोका जा सके।

उसे बार-बार उल्टी कराएं।

उसके प्रभावित अंगों को पानी से धो दें तथा उसे किसी भी प्रकार की चिकनाई और एल्कोहल न दें।

डिटरजेंट

यह आमतौर से जहरीले नहीं होते लेकिन यह जठरीय क्षोभ और डायरिया पैदा कर सकते हैं।

पीड़ित को दूध पिलाएं या अंडे की सफेदी दें। उल्टी कराने की कोशिश न करें।

ऐसा करने से झाग पैदा हो सकते हैं और सांस के साथ शरीर के अंदर डिटरजेंट जाने की आशंका हो सकती है।

डी.डी.टी. और दूसरे क्लोरीनेटेड कार्बनिक कीटनाशक (इनमें बगीचों और खेतों में इस्तेमाल किए जाने वाले रसायन जैसे एल्ड्रिन, बेंजीन हैक्साक्लोराइड, डी.डी,टी., डी.डी.ई., डी.एफ.डी.टी., डिल्ड्रिन, हेप्टाक्लोर, लिंडेन आदि भी शामिल हैं।)

इनको सूंघने या त्वचा के संपर्क में आने से अंगों में दर्द, तंत्रिका क्षोभ, सोचने में मंदता आना, मांसपेशियों का ऐंठ जाना, बेहोश हो जाना जैसी स्थिति प्रकट होती है।

यदि पीड़ित व्यक्ति ने इन्हें खा लिया गया हो, तो उसे तीन-चार गिलास गुनगुना पानी पिलाएं और गले में अंगुली डालकर उल्टी कराएं। ऐसा कई बार करें, इससे उसका पेट बिल्कुल खाली हो जाए।

पीड़ित को चिकनाईयुक्त कोई चीज खाने को न दें।

अगर सूंघने से सांस लेने में रूकावट पैदा हो गई हो तो उसे कृत्रिम सांस दें और डॉक्टर के पास ले जाएँ।

ड्रेन क्लीनर (नाली आदि साफ करने के रसायन)

यह बहुत ज्यादा जहरीले होते हैं। ये मुंह और अंदरूनी अंगों को जला सकते हैं। पीड़ित व्यक्ति की नब्ज और सांस तेज चलने लगती है और भोजन-नली संकरी हो सकती है।

अगर पीड़ित व्यक्ति पी सके तो उसे हल्का सिरका, नींबू का रस या संतरे का रस पीने को दें।

जैतून का तेल देने से दर्द में राहत मिलती है।

तारपीन का तेल

यह जहरीला होता है। तारपीन का तेल पेट्रोलियम उत्पाद है। यह मिट्टी के तेल की अपेक्षा कुछ ज्यादा जहरीला होता है।

पीड़ित को उल्टी न कराएं। ऐसा करने पर जहरीला पदार्थ सांस के साथ फेफड़ों में जा सकता है और पीड़ित को निमोनिया हो सकता है। पानी या कच्चे नारियल का पानी अधिक मात्रा में पिलाएं। पैराफीन लिक्विड उपलब्ध हो तो दे दें। यह पानी से अधिक लाभकारी होता है।

तेजाब (प्रबल) (प्रबल तेजाबों में हाइड्रोक्लोरिक एसिड, सलफ्यूरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड जैसे तेजाब शामिल हैं।)

इसका असर इसकी ली जाने वाली मात्रा पर निर्भर करता है। (संक्षारक)

पीड़ित को उल्टी कराने की कोशिश न करें। इससे ग्रासनली के ऊतकों को हानि पहुंच सकती है जो तेजाब पीने के कारण पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।

अगर पीड़ित पी सके तो बड़ी मात्रा में पानी, दूध, मिल्क ऑफ मैग्नीशिया या एंटएसिड मिक्सचर पीने को दें। बाइकार्बोनेट का घोल न दें।

नींद की गोलियां (स्लीपिंग टेबलेट, बारबीचुरेट। बारबीचुरेटों में अनेक ओषधियां शामिल होती हैं, जिनका उपयोग शामक के रूप में किया जाता है।)

नींद लाने के लिए पर्याप्त मात्रा से दस गुनी मात्रा ज्यादा लेना भयंकर जहरीली होती है।

बहुत अधिक मात्रा में लेने से जड़िमा या कोमा की स्थिति पैदा हो सकती है।

सांस धीमी हो जाती है, रक्तदाब गिर जाता है और शॉक की स्थिति आ जाती है। इन स्थितियों से पहले कुछ समय के लिए नशे की-सी स्थिति छा जाती है।

पीड़ित होश में हो तो उसे उल्टी कराएं। उल्टी कराने के लिए खाने के सोडे का तीन-चार गिलास घोल पिलाएं।

जहर को पेट में से अधिकाधिक मात्रा में निकाल दें। मैग्नीशियम सल्फेट का घोल (एक जग पानी में चाय की दो चम्मच) दें।

उसे गर्म कॉफी पिलाएं।

पीड़ित को सोने न दें।

अगर पीड़ित बेहोश हो जाए, तो उल्टी कराने की कोशिश न करें। जरूरत पड़ने पर पीड़ित को कृत्रिम सांस दें।

निकोटिन (अनेक कीटनाशक मिश्रणों में मौजूद)

यह बहुत ज्यादा जहरीला होता है। यह शरीर में बहुत तेजी से अवशोषित होता है। तंत्रिका संवेगों के पारेषण में बाधा पहुंचाता है। इसकी थोड़ी-सी मात्रा भी घातक हो सकती है।

पीड़ित को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

नेल पॉलिश

यह हल्की जहरीली होती है।

पीड़ित को तुरंत दूध पिलाएं।

नेल पॉलिश रिमूवर

यह हल्का जहरीला होता है। इनमें ऐसीटोन और ब्यूटिल ऐसीटेट होते हैं। ये मुंह और गले के अस्तर में क्षोभ और बेचैनी पैदा कर सकते हैं।

अगर पीड़ित ने इसे 20 मिलीलीटर से ज्यादा मात्रा में लिया हो तो उसे तुरंत उल्टी कराएं और बाद में दूध पिलाएं।

नेल हार्डनर

यह मामूली जहरीला होता है।

अगर अधिक मात्रा में लिया हो तो पीड़ित को तुरंत उल्टी कराएं। फिर दूध पिलाएं।

नेप्थलीन की गोलियां

यह बहुत ज्यादा जहरीली होती है। एक गोली निगल जाने पर भी बच्चों को उल्टी हो सकती है, डायरिया हो सकता है। इसके बाद चिड़चिड़ापन और बेचैनी हो सकती है तथा पीड़ित व्यक्ति संभ्रमित हो सकता है। उसे मूत्र त्यागने में जलन महसूस हो सकती है, मानसिक अवसाद (डिप्रैशन) हो सकता है और मूर्च्छा आ सकती है। पीड़ित के गुर्दो और जिगर को भी हानि पहुंच सकती है।

पीड़ित को बार-बार उल्टी कराएं, ताकि उसका पेट खाली हो जाए।

उसे काफी मात्रा में तरल पदार्थ पीने को दें, जिससे उसके गुर्दो में जहर की मात्रा कम हो जाए।

काफी मात्रा में दूध या खाने के सोडे का घोल पिलाने से पीड़ित को उल्टियां आएगी।

पीड़ित को कोई चिकनाई या एल्कोहल न दें।

पारा और उसके यौगिक (टीथिंग पाउडर आदि में मौजूद; मुँह में थर्मामीटर टूट जाने से शरीर के अंदर पारा जा सकता है।)

जहरीले।

पीड़ित को अंडे की सफेद पानी में मिलाकर दें।

बाद में दूध देकर उसे उल्टी कराएं और डॉक्टर के पास ले जाएं।

प्रुसिक एसिड (फोटोग्राफी और इलेक्ट्रोप्लेटिंग में प्रयुक्त; कडुवे बादामों के तेल और बाँस के कच्चे अंकुरों में मौजूद)

बहुत अधिक जहरीला।

पीड़ित को तुरंत उल्टी कराएं और कृत्रिम सांस दें। फिर जल्दी से जल्दी डॉक्टर को बुलवाएं।

पेंट

चित्रकारों के पेंट आमतौर पर बहुत ज्यादा जहरीले होते हैं। दीवारों, फर्नीचर के पेंट भी जहरीले होते हैं।

पीड़ित को तुरंत उल्टी कराएं। फिर उसे दूध पिलाएं।

पैराक्वाट

बहुत अधिक जहरीला।

पीड़ित को तुरंत अस्पताल ले जाएँ।

पैरासिटमोल

यह ज्यादा मात्रा में लेने पर बहुत अधिक जहरीली साबित हो सकती है।

वयस्कों के लिए इसकी 15 ग्राम की मात्रा जहरीली होती है। बच्चों के लिए उनके प्रति एक किलोग्राम वजन के लिए 210 मिलीग्राम की मात्रा जहरीली हो सकती है। (ज्यादातर गोलियों में अधिकतम मात्रा 0.5 ग्राम. होती है।)

इसको बहुत अधिक मात्रा में खा लेने पर उल्टी होना चालू हो जाती हैं, बहुत अधिक पसीना आता है और रक्तदाब कम हो जाता है।

कुछ दिन बाद पीड़ित के जिगर में परेशानी हो सकती है।

पीड़ित को तुरंत अस्पताल ले जाएं। आपातकालीन दवा के रूप में उसे पिसी हुई चारकोल टेबलेट दी जा सकती है।

फर्नीचर पॉलिश

ज्यादातर में व्हाइट स्पिरिट होती है।

पीड़ित को उल्टी न कराएं। ऐसा करने पर जहरीला पदार्थ सांस के साथ फेफड़ों में जा सकता है और पीड़ित को निमोनिया हो सकता है। पानी या कच्चे नारियल का पानी अधिक मात्रा में पिलाएं। पैराफीन लिक्विड उपलब्ध हो तो दे दें। यह पानी से अधिक लाभकारी होता है।

फर्श पॉलिश

अधिकांश पॉलिश जलीय इमल्शन होती हैं। कुछ में मिट्टी का तेल होता है।

पीड़ित को दूध पिलाएं लेकिन उल्टी न कराएं।

फॉलीडॉल (गुबरैलों और कॉकरोचों को मारने के लिए प्रयुक्त)

ज्यादा जहरीले।

पीड़ित को उल्टी कराएं। पानी या नारयल का पानी पीने को दें। जरूरत होने पर कृत्रिम सांस दें। डॉक्टर के पास ले जाएँ।

फॉस्फोरस (चूहे मारने वाले रसायनों में मौजूद)

जहरीला। मुंह, भोजन-नली और पेट में जलन, डायरिया और उल्टी। उल्टी, मल और मूत्र में लहसुन जैसी गंध, फॉस्फोरस के कणों के कारण चमक, गुर्दों और जिगर की हानि।

फॉस्फोरस विषाक्तता का सबसे अच्छा उपचार है नीला थोथा (कॉपर सल्फेट)। पीड़ित को शीघ्र नीले थोथे का बहुत हल्का घोल (500 मिलीलीटर पानी में 1/8 चाय की चम्मच) पिलाएं। बाद में खाने के सोडे का घोल (एक लीटर पानी में चार चाय की चम्मच सोडा) पिलाएँ। फिर उल्टी कराएं। ज्यादा मात्रा में पानी या कच्चे नारियल का पानी पिलाएं।

फिनाथिआजीन

बहुत अधिक जहरीले। मुख्य लक्षण- ज्यादा सुस्ती आना।

पीड़ित को उल्टी कराएं और डॉक्टर के पास ले जाएं।

फिनोल (इनमें लायसोल, क्रिओसोट और क्रिसाइलिक एसिड शामिल हैं।)

बहुत अधिक जहरीले। ये त्वचा तथा मुंह और गले के अस्तर के संक्षारक है।

पीड़ित को तुरंत उल्टी कराएं। दूध, अंडे की सफेदी और जैतून का तेल दें। त्वचा को पानी से अच्छी तरह धोकर जैतून का तेल मलें। पीड़ित को डॉक्टर के पास ले जाएं।

फोल्कोडीन (खाँसी की दवाइयों का एक आम घटक)

मामूली जहरीली। बच्चे के लिए लगभग 200 मिलीलीटर की मात्रा जहरीली रहती है। वयस्कों के लिए इससे कहीं ज्यादा की मात्रा। बेचैनी, घबराहट। पीड़ित ठीक प्रकार से चल नहीं पाता।

पीड़ित को उल्टी कराएं।

बाल हटाने वाले रसायन (डिपीलेटरीः इनमें आमतौर से अत्यधिक विषैला पदार्थ थैलियम ऐसीटेट अथवा मामूली विषैले पदार्थ बेरियम सल्फाइड और सोडियम सल्फाइड मौजूद होते हैं। आमतौर से इन्हें बच्चे खा लेते हैं।)

खा लेने के कई घंटे बाद जहर के प्रभाव प्रकट होते हैं। पाचन अंग प्रभावित, पेट में दर्द, उल्टी और डायरिया जिसमें रक्त भी आ सकता है। तंत्रिका तंत्र को हानि, पलकों का भारी हो जाना, चेहरे की मांसपेशियों में ऐंठन। गुर्दों और जिगर को भी हानि पहुंच सकती है।

पीड़ित का पेट खाली करना जरूरी है। उसे उल्टी कराएं और बाद में दूध पिलाएं। उसके शरीर को गरम और अधलेटी अवस्था में रखें। उसके पैर शरीर से ऊंचे रखें। इससे शॉक का उपचार हो जाएगा। गुर्दो को होने वाली हानि से बचाने के लिए पीड़ित को काफी सारा पानी पिलाएं। जरूरी होने पर उसे कृत्रिम सांस दें। विरेचक के रूप में एप्सम साल्ट उपयुक्त रहता है।

ब्रेक फ्लुइड

मामूली जहरीले (15 मिलीलीटर से ज्यादा की मात्रा ले लेने पर)

पीड़ित को अपने-आप उल्टी हो जाती है।

बैटरी एसिड (इसमें आमतौर से 30 प्रतिशत गंधक का तेजाब होता है।)

तेजाब के समान।

पीड़ित को उल्टी कराने की कोशिश न करें। इससे ग्रासनली के ऊतकों को हानि पहुंच सकती है जो तेजाब पीने के कारण पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।

अगर पीड़ित पी सके तो बड़ी मात्रा में पानी, दूध, मिल्क ऑफ मैग्नीशिया या एंटएसिड मिक्सचर पीने को दें। बाइकार्बोनेट का घोल न दें।

ब्लीच रसायन (अधिकांश रसायनों में हाइपोक्लोराइट होते हैं।)

मामूली जहरीले। पेट में तेज जलन हो सकती है।

पीड़ित को अपने-आप उल्टी हो जाती है। उसे काफी मात्रा में दूध पिलाएं।

माचिस की तीलियों के सिरे

आमतौर से जितनी मात्रा में इनके खाए जाने की संभावना होती है, वह विषैली नहीं होती।

पीड़ित को दूध पिलाएं।

मिथिल अल्कोहल (मेथिलेटेड स्पिरिट बनाने के लिए यह अल्कोहल में जानबूझकर मिलाई जाती है, जिससे अल्कोहल विषैली हो जाए और लोग उसे पीएँ नहीं। पेंट, थिनर और पेंट-रिमूवर में आमतौर से मौजूद। इसे ‘वुड अल्कोहल’ भी कहा जाता है।)

ज्यादा जहरीली। पानी से नशा होने के साथ-साथ सिरदर्द, पेट में दर्द और उल्टियां लग सकती है। सबसे भयानक प्रकाशीय तंत्रिका पर, फलस्वरूप पीड़ित अंधा भी हो सकता है।

‘जहरीली शराब’ में आमतौर से मिथिल अल्कोहल की मिलावट होती है। इसीलिए उसे पीने से लोग अंधे हो जाते हैं और उनकी मृत्यु तक हो जाती है।

पीड़ित का पेट खाली कराएं। उसे खाने के सोडे का हल्का घोल (एक लीटर पानी में एक चाय की चम्मच) पिलाएं। फिर पीड़ित के गले में अंगुली डालकर कई बार उल्टी कराएं।

उसकी आंखों को रोशनी से बचाएं। अगर पीड़ित की सांस ठीक प्रकार से नहीं चल रही हो तो उसे कृत्रिम सांस दें।

 

 

 

मिथिल सेलीसिलेट

एस्प्रीन की ही तरह कुछ ज्यादा जहरीला।

पीड़ित को उल्टी कराएं और काफी मात्रा में दूध या पानी दें। पीड़ित को उल्टी के बाद खाने के सोडे का घोल (एक जग पानी में चाय की एक चम्मच सोड़ा) पीने को दें। कड़क चाय या कॉफी भी पिला सकते हैं।

मैटल क्लीनर और पॉलिश

मामूली जहरीले। ज्यादातर इनमें व्हाइट स्पिरिट और मेथिलेटेड स्पिरिट होती है। सांस के साथ फेफड़ों में पहुंच जाने और निमोनिया हो जाने की आशंका रहती है।

पीड़ित का पेट खाली कराएं। उसे खाने के सोडे का हल्का घोल (एक लीटर पानी में एक चाय की चम्मच) पिलाएं। फिर पीड़ित के गले में अंगुली डालकर कई बार उल्टी कराएं।

उसकी आंखों को रोशनी से बचाएं। अगर पीड़ित की सांस ठीक प्रकार से नहीं चल रही हो तो उसे कृत्रिम सांस दें।

 

 

 

मिट्टी का तेल, डीजल, बेंजीन, पेट्रोल नेप्था इत्यादि।

जहरीले। बाह्य लक्षण मस्तिष्क और फेफड़े पर जहर के असर पर निर्भर। पेट में जलन पैदा हो सकती है उल्टी हो सकती है। तंत्रिका तंत्र भी गड़बड़ा सकता है।

पीड़ित को उल्टी न कराएं। ऐसा करने पर जहरीला पदार्थ सांस के साथ फेफड़ों में जा सकता है और पीड़ित को निमोनिया हो सकता है। पानी या कच्चे नारियल का पानी अधिक मात्रा में पिलाएं। पैराफीन लिक्विड उपलब्ध हो तो दे दें। यह पानी से अधिक लाभकारी होता है।

मूत्रल दवाईयां (ऐसी दवाईयां जिनको खाने/पीने से मूत्र अधिक आता है।)

मामूली जहरीली।

पीड़ित को उल्टी कराएं और द्रव, दूध आदि तरल पदार्थ पीने के लिए दें।

लुब्रीकेटिंग तरल

आमतौर पर ये तरल अंतड़ियों द्वारा अवशोषित नहीं हो पाते और ज्यादा जहरीले नहीं होते।

पीड़ित को दूध पिलाएं।

शैंपू

ज्यादातर शैंपू जहरीले नहीं होते। सिर्फ वे शैंपू ही जहरीले होते हैं जिनमें सोलेनियम सल्फाइड अथवा कैडामियाम सल्फाइड मौजूद होता है।

कुछ शैंपुओं में हेक्साक्लोरोफेन मौजूद होता है। ये अधिक मात्रा में पी लेने पर ही जहरीले होते हैं।

पीड़ित को उल्टी कराएं।

 

 

 

 

 

संक्रमणहारी (डिसइंफेक्टेंट, फिनायल)

बहुत ही ज्यादा जहरीला। इसमें क्रिसाइलिक एसिड होता है जो संक्षारक है। यह त्वचा, मुंह और गले में क्षरण पैदा कर सकता है.

पीड़ित को तुरंत उलटी कराएं और दूध पिलाएं। उसे अंडे की सफेदी और जैतून का तेल दें। त्वचा को पानी से अच्छी तरह धो दें और उस पर जैतून का तेल मलें। पीड़ित को शीघ्र ही डॉक्टर के पास ले जाएं।

साबुन (बट्टी और चूरा)

मामूली जहरीले। उल्टी और पेट की जलन से डायरिया।

पीड़ित को दूध पिलाएं।

सायनाइड (सिल्वर पॉलिश, चूहे मारने वाली दवाइयां और बगीचों में इस्तेमाल किए जाने वाले रसायनों में मौजूद)

अत्यधिक घातक और बहुत जल्दी असर करने वाला जहर, वास्तविक सायनाइड की विषाक्तता से बहुत कम व्यक्ति जीवित बच पाते हैं। सायनाइडयुक्त रसायनों के सूंघने, खाने या उनके घाव के संपर्क में आने पर तत्काल प्रभाव।

बहुत कम मात्रा में लेने पर सांस लेने में दिक्कत, मानसिक भ्रम, उल्टी और डायरिया, मांसपेशियों का अत्यधिक संकुचन।

पीड़ित के मुंह में अंगुली डालकर उसे तुरंत उल्टी कराएं। अगर एमाइल नाइट्रेट एम्प्यूल उपलब्ध हों (कुछ लोग दिल के दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए इन्हें अपने आप रखते हैं) तब एक एम्प्यूल को तोड़कर रूमाल में डालकर 15 से 30 सेकंड तक पीड़ित को सुंघाए। दो मिनट बाद फिर ऐसा करें। ऐसा कई बार करें और  तत्काल डॉक्टर को बुलाएं।

सीसा (सीसे के यौगिकों से संदूषित वस्तुएँ खाने, इन यौगिकों की वाष्प को साँस के साथ शरीर के भीतर ले जाने अथवा त्वचा द्वारा सीसे के यौगिकों के अवशोषण से उत्पन्न होने वाली विषाक्तता। आमतौर पर पेंट, स्टोरेज बैटरी और गैसोलिन उद्योग के कर्मचारी अधिक प्रभावित)

बहुत ज्यादा जहरीला। लक्षण सीसे की मात्रा और उसके अंतर्ग्रहण करने की दर पर निर्भर। मुंह का स्वाद धात्विक हो जाना, गले का सूखना, प्यास लगना, पेट में दर्द, उल्टी, कब्ज, सिरदर्द, कुछ मांसपेशियों का संकुचन, खून की कमी।

तेज जहर की हालत में सोडियम सल्फेट या एप्सम साल्ट का एक प्रतिशत घोल दें। अगर पीड़ित उल्टी कर रहा हो तो भी उसे उपर्युक्त घोल के दो से चार गिलास तक पिला दें। फिर उसके गले में अंगुली डालकर उल्टी कराएं। उसके शरीर को गरम रखें और तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

स्याही (मार्किंग इंक)

मामूली जहरीली।

पीड़ित को तुरंत उल्टी कराएं।

हेयर डाई

मामूली जहरीली। डाई जितनी तेज होगी, उतनी ही ज्यादा जहरीली होगी।

10 मिलीलीटर से अधिक पी लेने पर पीड़ित को तुरंत उल्टी कराएं और बाद में दूध पिलाएं।

हेयर स्प्रे

द्रव हेयर स्प्रे बहुत जहरीले होते हैं। इनमें काफी मात्रा में मिथिलेटेड स्पिरिट मौजूद रहती है।

पीड़ित का पेट खाली कराएं। उसे खाने के सोडे का हल्का घोल (एक लीटर पानी में एक चाय की चम्मच) पिलाएं। फिर पीड़ित के गले में अंगुली डालकर कई बार उल्टी कराएं।

उसकी आंखों को रोशनी से बचाएं। अगर पीड़ित की सांस ठीक प्रकार से नहीं चल रही हो तो उसे कृत्रिम सांस दें।

 

 

 

जंतुओं का जहर-

सांप का काटना-  भारत में अनेक प्रकार के सांप पाये जाते हैं, जिनमें कुछ जहरीले और कुछ बिना जहर वाले होते हैं। जहरीले सांप को काटने से अक्सर मृत्यु भी हो जाती है, लेकिन अगर इसकी सावधानीपूर्वक चिकित्सा कर ली जाए तो व्यक्ति के बचने की काफी सम्भावना रहती है। कहा जाता है कि सांप का काटा व्यक्ति मरता नहीं है बल्कि बेहोशी की गहरी दशा में उसकी सभी इन्द्रियां शिथिल हो जाती है और उसे मरा हुआ समझ लिया जाता है। असल में मरता वही व्यक्ति है जिसका सिर चटक जाता है या जिसके नाक-कान से खून बहने लगता है.

सांप के काटे के लक्षण- सांप अक्सर काटने के बाद अंधेरे में गायब हो जाता है। ऐसी स्थिति में यह पता नहीं लगता कि पीड़ित को किस जन्तु ने काटा है। सांप के काटने की स्थिति में निम्नलिखित लक्षण प्रकट होते हैं-

  • सांप के द्वारा काटे हुए स्थान पर बहुत दर्द होता है और सूजन आ जाती है।
  • सांप के द्वारा काटे हुए स्थान के आस-पास की त्वचा बैंगनी रंग की हो जाती है तथा काटे हुए स्थान पर छोटे-छोटे छिद्र दिखाई देते हैं।
  • सांप के द्वारा काटे हुए व्यक्ि को घबराहट होती है तथा उस पर बेहोशी व निद्रा छाने लगती है।
  • सांप के काटने पर कभी-कभी पीड़ित व्यक्ति का शरीर सुन्न पड़ जाता है।
  • पीड़ित व्यक्ति के मुंह से बूंद-बूंद करके लार टपकने लगती है।
  • पीड़ित की आंखों की पुतलियां सिकुड़ने लगती है।
  • सांप के द्वारा काटे हुए व्यक्ति की सांस का आना-जाना बन्द हो जाता है और उसके हाथ-पैरों में ऐंठन होने लगती है।
  • सांप के काटे हुए व्यक्ति को अगर नीम की पत्तियां खिलाई जाए तो उसे उन पत्तियों का स्वाद मीठा लगता है।

प्राथमिक चिकित्सा-

  • सांप के काटने पर तुरन्त डॉक्टर को बुलाना चाहिए। डॉक्टर के आने तक जहर को शरीर में फैलने से रोकने की पूरी-पूरी कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए काटे हुए स्थान से हृदय की ओर बंधन बांधने चाहिए, जिससे रक्त का संचारण रुक जाए और जहर शीघ्रता से पूरे शरीर में न फैले।
  • बन्धन बांधने के बाद सांप के द्वारा काटे हुए स्थान को तेज धार वाले चाकू से काटकर वहां पर से थोड़ा-सा रक्त बाहर निकाल देना चाहिए। फिर उस घाव को पौटैशियम परमैंगनेट से धोकर उसमें इसे भर देना चाहिए।
  • सांप के द्वारा काटे हुए व्यक्ति को सांत्वना देते रहना चाहिए क्योंकि डर के कारण उसकी हालत बिगड़ सकती है।
  • पीड़ित व्यक्ति को सोने नहीं देना चाहिए, इसके लिए उसके मुंह पर ठण्डे पानी के छींटे मारते रहना चाहिए।
  • पीड़ित के शरीर को गर्म रखने के लिए उसे गर्म चाय या कॉफी देते रहना चाहिए।
  • यदि सांस का आना बन्द होने लगे तो पीड़ित व्यक्ति को कृत्रिम तरीके से सांस देनी चाहिए।

बिच्छू का डंक मारना- बिच्छू एक जहरीला जन्तु है। वास्तव में बिच्छू काटता नहीं है बल्कि इसकी पूंछ के सिरे पर डंक रहता है। पूंछ के इसी स्थान की थैली में जहर भरा रहता है।

     जब किसी व्यक्ति के शरीर में बिच्छू अपने डंक को मारता है तो जहर भी छोड़ देता है। वैसे बिच्छू के डंक मारने से व्यक्ति का जी मिचलाता है, उल्टी हो जाती है, भयंकर पीड़ा होती है तथा शरीर के अन्दर एक प्रकार की झनझनाहट होती है।

     जहर के अधिक फैलने से रक्त परिसंचरण धीमा किन्तु श्वास की गति तेज हो जाती है। ध्यान रखें कि डंक के स्थान के चारों ओर अधिक जलन होना, बिच्छू के द्वारा डंक मारने का खास लक्षण हैं।

बिच्छू के डंक मारने का पर निम्नलिखित प्रकार से प्राथमिक उपचार करना चाहिए-

         किसी कपड़े में बर्फ रखकर बिच्छू के डंक मारे हुए अंग पर रखऩे से दर्द कम हो जाता है। इसके बाद पीड़ित व्यक्ति को तुंरत ही अस्पताल ले जाने की व्यवस्था करनी चाहिए।

पागल जानवर के काटने के बाद क्या करें?- किसी पागल जानवर के काटने के बाद पीड़ित व्यक्ति का प्राथमिक उपचार करना बहुत जरूरी होता है। काटने वाली जगह को साबुन से अच्छी तरह कई बार धोयें। इससे घाव पर लगी जानवर की लार धुल जाती है, जिससे रोग के होने की सम्भावना काफी कम हो जाती है। घाव को सुखाकर उस पर कोई एण्टिसेप्टिक क्रीम या घोल आदि को लगाना भी लाभप्रद होता है। कई लोग काटने की जगह पर चूना या लाल मिर्च भर देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत है। कटी हुई जगह के घावों पर सामान्यतः टांके नहीं लगाये जाने चाहिए। यदि घाव बड़ा हो, तो उसमें एण्टीरेबीज सीरम भर कर टांके लगाये जाते हैं। इसके साथ ही जानवर के काटने के एक-दो दिन के अन्दर ही रोकथाम के लिए टीके लगवाने शुरू कर देने चाहिए।

रेबीज की रोकथाम ऐसे करें-

  • पालतू और लावारिस कुत्तों तथा दूसरे जानवरों को हर साल ऐण्टीरेबीज वैक्सीन जरूर लगवाएं।
  • किसी व्यक्ति को काट चुके कुत्तों या दूसरे जानवर को 10-15 दिन तक घर से अलग किसी जगह पर बांधकर रखें। अगर वह जाननवर रेबीज से ग्रस्त है, तो दस दिन के अन्दर जरूर मरेगा। यदि इससे पहले ही वह मार दिया जाता है, तो उसके मस्तिष्क की जांच करायें।
  • यदि आपने पागल जानवर को छुआ है या उसकी देखभाल ही की है, तो भी खुद को रोग प्रतिरोधक टीका जरूर लगवाएं।
  • मानव चिकित्सकों, पशु चिकित्सकों, जंगल व चिड़िया घरों में काम करने वालों, कसाइयों व चमड़े उतारने का काम करने वाले लोगों को बचाव के लिए पहले से ही टीके लगवा लेने चाहिए।
  • गली-सड़कों के लावारिस कुत्तों को दर्दहीन तरीकों से मार दिया जाना चाहिये। अगर ऐसा करना सम्भव न हो तो नसबन्दी द्वारा इनका प्रजनन क्रिया बंद कर देनी चाहिये।

पागल कुत्ते की पहचान कैसे करें?- पागल कुत्ते के व्यवहार में बदलाव आ जाता है। बेचैनी, लोगों से छिपना, खाना पीना छोड़ देना, उत्तेजना, अचानक बिना बात किसी को काट लेना तथा कई किलोमीटर तक सीधे चलते जाना आदि कुत्ते के पागल होने के लक्षण हैं। पागल कुत्ते के जबड़े की मांसपेशियों को लकवा हो जाता है, जिससे उसका मुंह खुला रहता है, अधिक लार बहती है, जीभ बाहर निकल आती है तथा भौंकने की आवाज भी बदल जाती है। पागल कुत्ता तेज चल रहे व्यक्तियों, पशुओं व दूसरी चीजों पर झपटता है। कुछ दिन बाद पागलपन बढ़ जाने की अवस्था में उसके शरीर के लगभग सभी भागों में लकवा हो जाता है, जिससे वह खा-पी नहीं सकता है। पैरों की कमजोरी से वह लड़खड़ाने लगता है और अन्ततः रोग के लक्षण दिखाई देने के 10 दिन के अन्दर मर जाता है।

लक्षण-

  • पीड़ित के बदन पर डंक लगे निशान दिखाई देते हैं।
  • हाथों या पैरों में छेद नजर आ सकते हैं।
  • डंक लगे स्थान पर जलन, दर्द या खुजली महसूस हो सकती है।
  • यदि हाथ या पैर पर जन्तु ने काटा या डंक मारा है, तो पहले उस स्थान पर तेज जलन पैदा होगी फिर दर्द बढ़कर सारे हाथ या पैर में फैल जायेगा।
  • काटे हुए या डंक वाले स्थान पर सूजन या फफोला दिखायी देगा।
  • मरीज कमजारी महसूस करेगा या उसे चक्कर आते महसूस होगें।
  • नब्ज तेज या धीमी हो जायेगी और सांस लेने में दिक्कत महसूस होगी।
  • पीड़ित व्यक्ति को मितली या उल्टी भी हो सकती है।
  • छाती में जकड़न, मांसपेशियों में खिंचाव या जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं।
  • अधिक पसीना आना या लार बनने जैसे लक्षण भी महसूस किये जाते हैं।
  • कुछ व्यक्तियों में जहर की वजह से तेज एलर्जी और बेहोशी आ सकती है।

ऐसे हालात मे क्या करें?- पीड़ित व्यक्ति को जमीन या बिस्तर पर लिटा दें और उसका सिर शरीर के स्तर से नीचे रखें। उसकी त्वचा पर मौजूद डंक के टुकड़ों या फफोंलों का ब्लेड या किसी पतली मगर सख्त चीज से खुरच दें। डंक को हाथ से या चिमटी से खींचकर कभी न निकालें। ब्लेड से खुरचने पर डंक अपने-आप बाहर निकल आयेगा।

     काटे हुये स्थान पर बर्फ की पोटली रखें या बर्फ का टुकड़ा घिस दें। यदि व्यक्ति डंक के जहर के प्रति संवेदनशील है, तो आपातकालीन चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध कराने के साथ-साथ उसे किसी डॉक्टर के पास जल्दी से जल्दी ले जायें। यदि पीड़ित इस बात को जानता है कि वह डंक के जहर के प्रति संवेदनशील है, तो उसे स्वयं इंजेक्शन लगाने कि लिए अपने पास किट रखनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि ऐसे मरीजों के इलाज की शुरूआत एड्रेनलीन (Adrenaline) का इंजेक्शन देकर की जाती है।

     यदि पीड़ित की हालत गम्भीर हो, तो डॉक्टरी सहायता मिलने तक उसे कृत्रिम सांस देते रहें और साथ ही उसके सीने की मालिश भी करते रहें। अगर मुंह, नाक, या गले में डंक लगा हो, तो तत्काल डॉक्टरी सहायता हासिल करने की कोशिश करें। दरअसल, मुंह व गले में डंक लगने पर, इनमें आयी सूजन की वजह से पीड़ित को सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है जो जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।

कीड़े-मकोड़ों का काट लेना-

  1. सुई, ब्लेड या फिर हाथ के नाखूनों की सहायता से डंक को निकाल लें। डंक निकालने के लिये चिमटी का इस्तेमाल न करें। चिमटी के दबाव से डंक में मौजूद बाकी जहर के भी शरीर में पहुंचने का, खतरा रहता है।
  2. घाव को किसी मेडिकेटेड साबुन, डेटॉल और पानी से धोएं। सूजन न होने पाये, इसके लिये डंक वाले स्थान पर बर्फ रख दें। अगर हाइड्रार्कोर्टिसॉन क्रीम उपलब्ध हो तो डंक वाले स्थान पर उसे लगाने से सूजन कम हो जाती हैं।

कीड़ा न छोड़े-

  1. अगर कीड़ा आपकी त्वचा से चिपका हो तो उसे वहां से हटाने के लिये एक जलती हुई सिगरेट या माचिस की तीली उसके करीब लाये। सिरगेट या तीली की आंच के चलते वह आपकी त्वचा को छोड़ देगा। लेकिन त्वचा न जलने पाए इस बात का ध्यान रखें।
  2. कीड़ा जिस स्थान पर चिपका हो, शरीर के उस स्थान को अच्छी तरह, डेटॉल या साबुन और पानी से धोकर सुखा लें।

जहर उतारने के घरेलू उपचार-

सांप का जहर-

  • मनुष्य का मूत्र पीने से सांप का जहर नष्ट हो जाता है।
  • चौलाई की जड़ को चावलों के पानी में पीसकर ठण्डे पीने के साथ पीने से सांप का जहर उतर जाता है।
  • केवल जमालगोटे को घी में पीसकर ठण्डे पानी के साथ पीने से सांप का जहर उतर जाता है।
  • घी, शहद, मक्खन, पीपल, अदरक, काली मिर्च तथा सेंधानमक में से पीसने योग्य वस्तुओं को पीसकर छान लें। फिर सबकों मिलाकर सांप के द्वारा काटे हुए व्यक्ति को पिलाने से सांप का जहर नष्ट हो जाता है।

बिच्छू का जहर-

  • कौंच के बीजों को छीलकर काटे हुए स्थान पर मलने से बिच्छू का जहर उतर जाता है।
  • नींबू के रस को काटे हुए स्थान पर मलने से बिच्छू का जहर उतर जाता है।
  • कपास के पत्ते और राई को एकसाथ पीसकर डंक लगे हुए स्थान पर लेप करने से बिच्छू का जहर उतर जाता है।
  • लगभग 30 ग्राम लहसुन का रस तथा 30 ग्राम शहद को एकसाथ मिलाकर बिच्छू के काटे हुए व्यक्ति को पिलाने से बिच्छू का जहर तुरन्त उतर जाता है।
  • अजझारा (चिरमिटा, अपामार्ग या ओंगा) की जड़ को सिर्फ दिखाने से ही सामान्य-बिच्छू का जहर उतर जाता है। यदि अजाझारे की जड़ को पानी में घिसकर बिच्छू के डंक लगे हुए स्थान पर लगा दिया जाये तो तुंरत लाभ होता है।

चूहे का जहर-

  • कैथ के रस तथा गोबर के रस में शहद मिलाकर चाटने से चूहे का जहर उतर जाता है।
  • सिरस की जड़ को शहद, चावलों के पानी अथवा बकरी के मूत्र के साथ पीने से चूहे का जहर नष्ट हो जाता है।

बर्र का जहर-

  • छोटी पीपल को पानी के साथ पीसकर पीने से बर्र का जहर उतर जाता है।
  • गन्धक को पानी में पीसकर डंक लगे स्थान पर लगाने से बर्र का जहर उतर जाता है।

कुत्ते का जहर-

  • कुत्ते के काटे हुए स्थान पर आक का दूध लगाने से लाभ होता है।
  • कुत्ते के काटे हुए स्थान पर पहले दीपक का तेल लगायें और फिर जख्म में पिसी हुई लाल मिर्च भर दें। उसके ऊपर मकड़ी का सफेद जाला रखकर कसकर पट्टी बांध दें, इससे लाभ होगा।
  • 10 ग्राम लिसौड़े के पत्ते और 1 ग्राम कालीमिर्च को 125 ग्राम पानी में घोटकर 9 या 15 दिन तक पीते रहने से कुत्ते का काटा अपने आप ही ठीक हो जाता है।

मकड़ी का जहर-

  • खल और हल्दी को पानी में पीसकर लेप करने से मकड़ी का जहर उतर जाता है।
  • सौंठ तथा सफेद जीरे को पानी में पीसकर लेप करने से मकड़ी का जहर नष्ट हो जाता है।
  • चौलाई के साग को पानी में पीसकर लेप करने से मकड़ी का जहर उतर जाता है।

स्थावर-जहर-

  • 10 ग्राम हरी चौलाई की जड़ को पानी में पीसकर गाय के घी के साथ खाने से गर्म जहर उतर जाता है। यदि चौलाई की जड़ सूखी हो तो उसे सिर्फ 6 ग्राम ही लेना चाहिए।
  • नीम की निबौरियों को पानी के साथ पीसकर पीने से संखिया आदि स्थावर जहर शान्त हो जाते हैं।
  • मुर्गें की बीट को पानी में मिलाकर पीने से उल्टी होने के साथ ही जहर भी बाहर निकल जाता है।
  • कालीमिर्च, नीम के पत्ते, निंबौरी, सेंधानमक, शहद और घी को मिलाकर पीने से स्थावर तथा जंगम दोनों प्रकार के जहर शान्त हो जाते हैं।
  • बिनौलों की गिरी को कूट-पीसकर गाय के दूध में औटाकर पीने से अनेक प्रकार के जहर शान्त हो जाते हैं।
  • सिरस की छाल, जड़, पत्ते, मूल तथा बीजों को गोमूत्र में पीसकर शरीर पर लेप करने से जहर उतर जाता है।

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