जलोदर


जलोदर

(पेट में पानी भरना- Ascites)


पेट से संबंधित अन्य रोगों का उपचार :

भूख न लगना

कोलेस्ट्राल

डकार आना

दस्त आना

हैजा

जिगर का बढ़ना

जिगर का कैंसर

जिगर का कड़ा पड़ जाना

जिगर के पीले दाग

जिगर के रोग

कब्ज

मोटापा

नाभि के रोग

पेट का कैंसर

पेट फूलना

पेट में दर्द होना

पेट का फोड़ा

पेट में कीड़ें होना

पेट के रोग

खाद्य-विषाक्ता

अफारा

आमाशय में जख्म

अजीर्ण (अग्निमांद्य)

अम्ल रोग

भोजन नली में जलन

अपच (भोजन के दस्त होना)

प्लीहा वृद्धि

बवासीर

भगंदर

जिगर में दर्द

जिगर में कमजोरी होना

जिगर में खून जमा होना

जिगर की सूजन

पाकस्थली का निर्गमन-द्वार

पाकाशय का दर्द

पाकाशय में कैंसर

पाकाशय का घाव

पेट में धंसने की अनुभूति

पेट में वायु जमा होना

पित्त-कोष की सूजन

उड़ने वाले कीड़े

अंगों में जल जमा होने से सूजन होना

सिर में जल भरने से सूजन होना

Read more articles

परिचय :

    जब पेट में लीवर की बीमारी होने पर पेट पर सूजन और पेट में पानी जमा हो जाता है जो जलोदर या पेट में पानी भरना कहलाता है।

कारण :

  जलोदर का रोग निम्न कारणों से हो सकता है। जैसे- घी खाने, उल्टी के बाद ठंडा पानी पीने से, यकृत की धमनी में अधिक दबाव बढ़ जाने से प्लीहा (तिल्ली), वृक (किड़नी), हृदय, स्वरयंत्र (गला), कैंसर, ब्लड वैस्लस, कैकेक्सिया, क्षय (टी.बी.) आदि।

लक्षण :

   जलोदर होने पर पेट के पेप्टिक में बढ़ोत्तरी, नाभि का बाहर निकलना, पार्ष्वपूर्णता (कमन का बढ़ जाना), पानी की हलचल होना, पेट में दर्द होना, पेट का आगे का भाग फूलना, बेचैनी होना, पैर में सूजन, सांस लेने में परेशानी होना और धड़कन बढ़ना, नाड़ी-अर्बुद (एनिउरीजम), धनास्त्रता (थोरोनोसिस) पेशाब कम आना, पेट में भारी पन होना (ठेपण पर शिथिलता), क्षुधामांद्य (भस्मक रोग), कमजोरी होना, प्यास लगना, तथा ठंडा पानी से पैदा हुआ जलोदर नाभि के पास गोल और चिकना हो, पानी भरी मशक के समान बढ़े, दु:खी होना या शरीर कांपना आदि लक्षण पाये जाते हैं।

विभिन्न औषधियों से चिकित्सा :-

1. एपिस :-

  • जलोदर रोग से पीड़ित रोगी को प्यास नहीं लगती है, पेशाब बहुत थोड़ा होता है, गर्मी के कारण से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती है, रोगी को ठंड अच्छी लगती है। रोगी के शरीर के किसी भी अंग में जल जमा होने लगता है। शरीर के अंदर जो अंग हैं उन्हें ढकने वाली परत और उन अंगों के बीच जल जाम हो जाता है। हृदय, मस्तिष्क, पेट आदि में जो आवरक झिल्ली होती है उसके और अंग के बीच जल जमा हो जाता है, इसी से जलोदर या अन्य प्रकार के सूजन वाले रोग हो जाते हैं। इस रोग के कारण से आंखों की निचली पलक भी सूज जाती है। इस प्रकार के लक्षण रोगी में हैं तो उसके इस रोग को ठीक करने के लिए एपिस औषधि की मूलार्क या 1x मात्रा या फिर 6 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी की ऊपरी आंखों की पलक सूज गई हो तो उपचार करने के लिए कैलि कार्ब औषधि उपयोगी होती है।
  • जलोदर रोग से पीड़ित रोगी के पेट में सूजन के साथ ही जलन हो, डंक लगने तथा टीस लगने के समान दर्द हो तो उपचार करने के लिए एपिस औषधि से उपचार करना लाभकारी होता है।

2. ऐपोसाइनम कैन्नेबिनम :-  जलोदर रोग, शरीर के किसी अंग मे जल जमा होना या पूरे शरीर में सूजन होने पर उसे ठीक करने के लिए ऐपोसाइनम कैन्नेबिनम औषधि के मूलार्क का प्रयोग करना लाभदायक होता है। इस रोग से पीड़ित रोगी में प्यास लगने के लक्षण होते हैं। अत: इस औषधि का प्रयोग करते समय यह लक्षण ध्यान में रखकर ही इस औषधि का प्रयोग करें।

3. आर्सेनिक एल्बम :-  जलोदर रोग से पीड़ित रोगी की त्वचा पारदर्शक दिखाई पड़ती है और रोगी को अधिक प्यास नहीं लगती है लेकिन रोगी को थोड़ा सा भी जल सहन नहीं होता, उल्टी हो जाती है, रोगी कुछ जल पीता भी है तो घूंट-घूंट और थोड़ा सा। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए आर्सेनिक एल्बम औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है।

4. ऐसेटिक ऐसिड :-  जलोदर रोग से पीड़ित रोगी के चेहरे तथा शरीर के निचले भाग में सूजन हो जाती है तथा पेट में पानी भर जाता है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए ऐसेटिक ऐसिड औषधि की 3 से 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए। इस औषधि से उपचार करते समय रोगी में कुछ इस प्रकार के लक्षणो ध्यान में रखकर उपयोग में लेना चाहिए जैसे- रोगी को अधिक तेज प्यास लगती है, रोगी को ऐसा लगता है कि पेट में सिरका पड़ा हो, इतनी खटास लगती है, पेट में गड़बड़ होती रहती है, खट्टी डकारें आती हैं, पेट का खट्टा पानी मुंह में उछल आता है, दस्त भी लग जाते हैं।

5. लियैट्रिस स्पाइकेटा :-  जलोदर रोग होने के कारण से सारे शरीर में सूजन आ जाती है। ऐसे रोगी का उपचार करने के लिए लियैट्रिस स्पाइकेटा औषधि के मूलार्क का 1 या 1/2 गैलन का उपयोग दिन में करना चाहिए, इससे पेशाब खुलकर आता है। इसके मूलार्क के 10 बूंद कई बार सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।

6. ऑक्सीडेनड्रौन :-

  • जलोदर रोग होने के साथ ही शरीर के किसी स्थान पर या पूरे शरीर में जल जमा हो गया हो तो ऐसी अवस्था में इस रोग को ठीक करने के लिए ऑक्सीडेनड्रौन औषधि के मूलार्क का प्रयोग करना लाभदायक होता है।
  • जलोदर रोग को ठीक करने के लिए ऐसेटिक ऐसिड, ऐपोसाइनम  या कैन्नेबिनम एपिस औषधि का प्रयोग करने पर कुछ लाभ न हो और पेशाब बिल्कुल भी न आए, बैठने पर सांस लेने में परेशानी हो तो इस औषधि का प्रयोग करने से यह रोग ठीक होने लगता है।

Tags:  Pet ke rog, Stomuch Disease, Aposinum, Acetic Acid, Cannabis, Oxidendran, Liyaris, Spicata