जलना या झुलसना


जलना या झुलसना

BURNING


प्राथमिक चिकित्सा :

परिचय-

         आग, बिजली, गर्म धातु, एसिड (तेजाब) या आकाश से बिजली आदि गिर जाने के कारण अक्सर जलने की घटनाएं होती रहती हैं। इनमें मुख्यतः शरीर की ऊपरी त्वचा जलती है लेकिन आग की गर्मी तेज होती है तो त्वचा के नीचे का मांस भी जल जाता है। अधिक गर्म दूध या चाय आदि पीने से जीभ अथवा गला भी जल जाता है।

         गर्म तेल, पानी, दूध अथवा चाय के गिरने या आग की लपटों के पास खड़े होने आदि कारणों से, शरीर की त्वचा जलती तो नहीं है लेकिन लाल जरूर पड़ जाती है। ऐसी स्थिति को झुलसना कहते हैं। झुलस जाने पर कभी-कभी त्वचा पर छाले भी पड़ जाते हैं। जिसके कारण त्वचा भी नष्ट हो जाती है तथा गहरे तन्तुवर्ग को हानि भी पहुंचती है। ऐसी स्थिति में दर्द का अनुभव ज्यादा होता है।

         आकाश से बिजली गिरने पर शरीर झुलस जाता है या जल जाता है। जिस व्यक्ति पर आकाश से बिजली गिरती है, वह या तो बेहोश हो जाता है या फिर उसकी मृत्यु हो जाती है।

        घरेलू-बिजली के खुले तारों से छू जाने पर शरीर को जोर का झटका लगता है, रोगी को शॉक पहुंचता है तथा उसका पूरा शरीर सुन्न पड़ जाता है। इसके कारण त्वचा झुलस या जल भी सकती है।

जलने तथा झुलसने से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए-

कपड़ों में आग लगना- खुली हवा लगने से आग अधिक भड़कती है, इसलिए अगर शरीर के कपड़ों में आग लग जाए तो न तो दौड़ना चाहिए और न खड़े ही रहना चाहिए। खड़े रहने से आग की लपटे ऊपर की ओर उठकर मुंह, आंख और सिर को जला सकती है। ऐसी स्थिति में जलने वाले व्यक्ति को तुरंत ही जमी पर लेट जाना चाहिए तथा अपनी आंख, नाक तथा मुंह को दोनों हथेलियों से ढककर खूब लोट लेनी चाहिए। इससे आग के जल्दी बुझने में मदद मिलती है।

         सहायक व्यक्तियों को चाहिए कि जिस व्यक्ति के कपड़ों में आग लगी हो, उसके शरीर के ऊपर कम्बल, कोट, दरी या जो भी मोटा तथा भारी कपड़ा उपलब्ध हो- डाल दें। इससे बाहरी हवा नहीं लगेगी और लगी हुई आग के जल्दी बुझ जाने की सम्भावना रहेगी।

         कम्बल आदि डालने के बाद कपड़ों में आग लगे हुए व्यक्ति को जमीन पर लिटाकर, उसके शरीर को कम्बल आदि से अच्छी तरह कसकर लपेट लेना चाहिए, ताकि आग जल्दी बुझ जाए।

आग में घिर जाना- किसी कारणवश मकान आदि में आग लग जाने पर अगर कोई व्यक्ति गिर गया हो तो उसे चाहिए कि वह पहले दीवार से सटकर पेट के बल लेट जाए, फिर फर्श से सटकर धीरे-धीरे रेंगते हुए दरवाजे या सीढ़ियों को ओर बढ़ते हुए आगे वाली जगह से बाहर निकल जाए।

         अगर आग कमरे के भीतरी भाग में लगी हों और स्वयं कमरे के भीतर हों तो पहले कमरे के दरवाजे तथा खिड़कियों को बंद कर लेना चाहिए, ताकि आग और धुआं काफी समय तक उस कमरे के भीतर प्रवेश न कर सकें। इसी बीच उस जगह से बाहर निकलने का कोई ऐसा रास्ता ढूंढ लेना चाहिए, जो सबसे अधिक आसान हो अथवा जिसमें कम से कम खतरा हो। यदि कोई मकान की ऊपरी मंजिल में आग में घिर गया हो तो खिड़की आदि के रास्ते से नीचे लटककर अथवा कूद कर निकला जा सकता है। ऐसे अवसरों पर जहरीली गैसों से बचने के लिए अपनी नाक तथा मुंह पर गीला कपड़ा या रूमाल बांध लेना चाहिए।               

         यदि कोई व्यक्ति आग में घिर गया हो और स्वयं बच निकलने में असमर्थ हो तो उस स्थिति में जो लोग आग में घिरे हुए व्यक्ति को बचाने के जाएं, उन्हें अपनी नाक तथा मुंह पर गीला कपड़ा अथवा रूमाल बांध लेना चाहिए, ताकि उनका जहरीली गैसों से बचाव हो सकें। इसके बाद उन्हें रेंगते हुए ही उस स्थान पर पहुंचना चाहिए, जहां आग से घिरा हुआ असमर्थ व्यक्ति हो।

         यदि दुर्घटना में फंसा हुआ व्यक्ति बेहोश हो गया हो तो उसकी दोनों कलाईयों को मिलाकर, रूमाल से बांध देना चाहिए। इसके बाद उसके बंधे हाथों के बीच में अपना सिर डालकर, बेहोश व्यक्ति के हाथों को अपने गले में लटका लें तथा स्वयं रेंगते हुए उसे अपने साथ बाहर निकाल लाएं।

          अगर सीढ़ियों से उतरना सुरक्षित न हों तो आग में घिरे बेहोश व्यक्ति को बड़ी बाल्टी, बोरी या मजबूत चादर की गठरी में बांधकर खिड़की आदि के रास्ते से, रस्सी के सहारे नीचे लटका देना चाहिए। यदि ये चीजें उपलब्ध न हों तो बेहोश व्यक्ति की बगल के नीचे तथा घुटनों के पास रस्सी के दो-दो लपेटे लगाकर कुर्सी-गांठ लगा देनी चाहिए।

         आग लगे हुए कमरे से किसी बच्चे को नीचे उतारना हो तो चादर या धोती में रीफ गांठ लगाकर झोला बना लेना चाहिए तथा बच्चे के हाथ-पांव बांधकर, उसे झोले में डाल देना चाहिए, ताकि वह उछलकर बाहर न निकल पड़े। इसके बाद उसे रस्सी के सहारे धीरे-धीरे नीचे उतार देना चाहिए।

         आग में घिरा व्यस्क एगर अकेला तथा होश में हो तो उसे खिड़की आदि से नीचे कूदते समय किसी रस्सी, धोती आदि को खिड़की से बांधकर उसके सहारे से नीचे उतर जाना चाहिए। इससे चोट लगाने की संभावना कम हो जाती है।

आग को बुझाना- जहां आग लगी हो, वहां से उन बची हुई वस्तुओं को, जिनमें आग लग जाने की संभावना हो- हटा देना चाहिए। इसके बाद आग को बुझाने की कोशिश करनी चाहिए।

         सामान्य आग को पानी डालकर बुझाया जा सकता है लेकिन पैट्रोल, मिट्टी का तेल, स्प्रिट, रंग-रोगन आदि में लाग लगी हो तो उन पर पानी भूलकर भी नहीं डालना चाहिए, अन्यथा ये तरल पदार्थ हल्के होने के कारण पानी में तैरने लगेंगे तथा आग को और अधिक फैला देंगे। जहां तक हो इन्हें दबा देना चाहिए या इन पर रेत-मिट्टी डालकर आग को बुझाना चाहिए।

         बिजली की लगी आग को बुझाने से पहले सर्वप्रथम बिजली के मेन-स्विच तो बंद कर देना चाहिए। बिजली की तारों में लगी आग को भी रेत-मिट्टी डालकर ही बुझाना चाहिए।

          आग बुझाने का काम करने वाले को चुस्त कपड़े पहनने रखने चाहिए तथा मुंह और नाक पर गीला रूमाल बांध लेना चाहिए, ताकि जहरीली गैसों का प्रभाव न पड़े।

         खेत-खलिहान में लगी आग को पेड़ की टहनी में बोरी का टुकड़ा बांधकर तथा उसको पीट-पीटकर बुझाया जा सकता है।            

          जहां फायर-बिग्रेड (दमकल) की सहायता उपलब्ध हो, वहां कैसी भी आग लगने पर फायर-बिग्रेड को तुरंत सूचित करना चाहिए तथा जब फायर-बिग्रेड वाले आ जाएं, तब उन्हें आग बुझाने में पूरा सहयोग देना चाहिए।

प्राथमिक उपचार-

जलने या झुलस जाने पर निम्नलिखित प्राथमिक-उपचार करने चाहिए और इसके बाद रोगी को जल्दी से जल्दी डाक्टरी-सहायता दिलानी चाहिए-

  • दो बूंद कार्बोलिक एसिड को एक छोटे चम्मच वैसलीन में डालें। अगर वैसलीन न मिले तो उसे उबले हुए नारियल के तेल में मिलाकर लगाने से भी जलन शान्त होती है।
  • कार्बोलिक लोशन या सोड़ा घुले हुए गर्म पानी में कपड़ा भिगोकर इसे जले हुए स्थान पर रखें। बोरिक एसिड या नमकीन पानी में कपड़े के टुकड़ों को भिगोकर रखना भी अच्छा रहता है।
  • गाढ़ी चाय बनाकर उसे ठंडी हो जाने पर छानकर जले हुए अंग पर लगाने से भी आराम मिलता है।
  • उबले हुए आलू को बारीक पीसकर जले हुए अंग पर रखने से भी ठंडक पहुंचती है।
  • अगर जलने के कारण शरीर की त्वचा पर कपड़ा चिपक गया हो तो सबसे पहले उसे अलग करने की कोशिश करना चाहिए। जले हुए स्थान पर से कपड़ा उतारने में मुश्किल पड़ती है, इसलिए पहले उस भाग के चारों ओर के कपड़ों को काट देना चाहिए। इसके बाद जले हुए भाग पर चिपके हुए कपड़े को नारियल या तिल के तेल से भिगोकर आसानी से हटाया जा सकता है।
  • जलने के बाद पीड़ित व्यक्ति के दिल पर बड़ा शॉक लगता है, इसलिए इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को सांत्वना देनी चाहिए और उसकी हानि को भी बहुत कम रूप में प्रकट करना चाहिए। शॉक को दूर करने के लिए पीड़ित व्यक्ति को दूध पिलाना चाहिए। अगर शॉक ज्यादा हो तो पीड़ित व्यक्ति को थोड़ी सी ब्राण्डी भी दी जा सकती है।
  • पीड़ित व्यक्ति के शरीर को कम्बल तथा कपड़ों से ढककर गर्म रखना चाहिए। इसके लिए जरूरत अनुसार गर्म पानी की बोतलों का प्रयोग भी किया जा सकता है।
  • यदि पीड़ित व्यक्ति बेहोश हो गया हो तो उसे होश में लाने की कोशिश करनी चाहिए और अगर उसे सांस लेने में परेशानी हो रही हो तो उसे कृत्रिम सांस दी जा सकती है।
  • पीड़ित के शरीर के जले हुए भाग पर छाले उठने से पहले ही लगातार ठंडा पानी डालने या उसे ठंडे पानी में डुबोए रखने अथवा उस पर किसी मोटे तथा मुलायम कपड़े की गद्दी को ठंडे पानी में भिगोकर रखने से जलन शांत हो जाती है लेकिन यह उपचार तभी लाभ करता है, जब छाले न पड़े हों।
  • गर्म पानी, चाय या दूध आदि के गिर जाने से अगर त्वचा पर छाले पड़ गए हों तो उन्हें फोड़ना नहीं चाहिए। बल्कि उन पर बोरिक एसिड छिड़ककर साफ कपड़े की पट्टी बांध देनी चाहिए।
  • जले हुए अंग पर तिल का तेल, जैतून का तेल या नारियल का तेल लगाने से ठंडक पहुंचती है तथा जलन के कारण होने वाला दर्द कम हो जाता है।
  • अधिक गर्म दूध या चाय आदि पीने से अगर जीभ या गला जल जाए तो पीड़ित व्यक्ति के शरीर को कपड़ों में अच्छी तरह लपेटकर बैठा दें। फिर गर्म पानी में भिगोकर अच्छी तरह निचोड़े हुए कपड़े के टुकड़ों को गले की त्वचा पर रखकर सेंक पहुंचाए। अगर बर्फ हो तो उसके टुकड़े रोगी को निरन्तर चुसाने चाहिए अथवा खूब ठंड़ा पानी करके पिलाना चाहिए।
  • जलने के कारण अगर शरीर पर घाव हो गया हो और रोगी को डाक्टरी चिकित्सा जल्द उपलब्ध न हो पाए तो उसगके जले हुए अंग पर पूर्वोक्त वस्तुओं का लेप करने के बाद पट्टी बांध देनी चाहिए, ताकि वह जला हुआ अंग बाहरी गदंगी, धूल तथा कीटाणुओं से सुरक्षित रहे।
  • प्राथमिक उपचारों के बाद पीड़ित व्यक्ति को जल्द से जल्द डाक्टर के पास ले जाना चाहिए।  

तेजाब से चलना- गंधक, नमक या शोरे का तेजाब गिरने के कारण अगर शरीर का कोई अंग जल गया हो तो उस अंग को तुरंत ही अमोनिया या खाने के सोडे के घोल से धो देना चाहिए लेकिन पानी नहीं डालना चाहिए। इसके बाद पीड़ित व्यक्ति को डाक्टर के पास ले जाना चाहिए।

क्षार से जलना- चूना, कास्टिक या पोटाश आदि से जले हुए अंग पर सिरका या नींबू के रस को पानी में मिलाकर लगाने से आराम पहुंचता है।

जलने से घाव होने के कारण-

  • सूखी गर्मी से जैसे आग, तपे हुए धातु के टुकड़े, विद्युत प्रवाह से।
  • क्षयत्व रसायनों (Corrosive Substances) जैसे- तेजाब और क्षार।
  • रगड़ से।
  • सूर्य की किरणों से।

झुलसना- झुलसना वह चोट है जो गीली गर्मी से जैसे-

  • खोलते पानी।
  • भाप।
  • गर्म तेल या कोलतार।

जल जाने की गहराई-

  • त्वचा लाल हो सकती है या उस पर छाले पड़ सकते हैं और सूजन आ सकती है। ऊपरी त्वचा की सतह जल जाती है।
  • त्वचा की दूसरी सतह का जल जाना। इससे त्वचा उखड सी जाती है और उस पर छाले पड़ जाते हैं।
  • त्वचा की तीनों परतों का जल जाना तथा तन्तुओं का जल जाना। इस स्थिति को अधिक जल जाना कहते हैं।

जले का विस्तार- निम्नलिखित नौ के नियम से शरीर के कुल जले हुए भाग का प्रतिशत निकाला जाता है जैसे- खोपड़ी 9 प्रतिशत, हर ऊपरी बांह 9 प्रतिशत, हर पैर 2 गुना 9 प्रतिशत सामने का धड़ 2 गुना 9 प्रतिशत पीछे का धड़ 2 गुना 9 प्रतिशत और ऊरूसन्धि 1 प्रतिशत।

चिन्ह व लक्षण-

  • जले हुए स्थान पर दर्द।
  • लाली कम जलना।
  • सूजन और बेचैनी।
  • फफोला पड़ना (छाले)।
  • गहरा शॉक।

जलने और झुलसने पर प्राथमिक सहायता-

  • जलने को रोकने के लिए पहला कार्य है, उसे तुरंत ठंडा करना। जले हुए भाग पर ज्यादा से ज्यादा ठंडा पानी डालें। अच्छी तरह ठंडक पहुंचाने में दस मिनट या उससे अधिक का समय लग सकता है।
  • जलन को ठंडा करते समय वायु दशा, श्वास क्रिया और कब्ज का ध्यान रखें और जरूरी हो तो कृत्रिम सांस क्रिया का पालन करें।
  • इससे पहले कि सूजन हो तो रोगी की पेंट, जूते और जले हुए कपड़ों को आराम से उतारें परंतु कोई भी चीज जो जलने से शरीर पर चिपक गई हो तो उसे न हटाएं नहीं तो संक्रमण हो सकता है।
  • तैयार की हुई सूखी कीटाणु रहित मरहम पट्टी से साफ लिन्ट, धुले हुए कपड़े या किसी ऐसे पदार्थ से ग्रस्त भाग को ढक दें।
  • शॉक लगने का उपचार करें।
  • रोगी को जल्दी से जल्दी अस्पताल ले जाएं। .

क्या न करें-

  • जले हुए हिस्से को न छुएं।
  • छालों को न फोड़े।
  • लोशन या ओएंरमेट या तैलीय पदार्थ न लगाएं।

कम जलने और झुलसने पर प्राथमिक चिकित्सा-

  • पीड़ित व्यक्ति के शरीर के जले हुए भाग को नल से बहते हुए पानी से ठंडा करें या उसे ठंडे पानी में डुबों दें। अगर पानी न मिले तो कोई भी तरल पदार्थ जैसे दूध या ठंडे पदार्थ का प्रयोग करें।
  • घड़ी या संकुचित वस्त्रों को आराम से हटाएं।
  • उस भाग को कीटाणुरहित पट्टी से ढक दें। अस्थाई रूप से ढकने के लिए एक साफ पोलिथीन बैग अच्छा रहता है।

विशिष्ट प्रकार के जलने के कारण-

रसायनिक पदार्थ से जलना- तेज तेजाब और क्षार-

  • दूषित कपड़ों को तुरंत हटाएं।
  • तेजाब से जलने पर
  • तुरंत सादे पानी से धोएं।
  • अगर खाने का सोड़ा मिल जाए तो उसका घोल बनाएं। (दो चाय के चम्मच थोड़े से पानी में) और उससे धोएं।
  • पानी से दोबारा धोएं।
  • कीटाणुरहित कपड़े और पट्टी से ढकें।
  • पीड़ित व्यक्ति को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाए।

क्षार से जलने पर-

  • पानी से धोएं।
  • सिरके व पानी का हल्का सा घोल बनाकर उससे धोएं।
  • दोबारा पानी से धोएं।

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