जलन


जलन

Burning sensation


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परिचय :

           जलन में रोगी को हर समय यह लगता है कि उसका शरीर जल रहा है उसके पूरे शरीर में जलन होती रहती है।

विभिन्न भाषाओं में नाम :

हिन्दी     जलन, दाह 
तमिल           इरिछल
पंजाबी          जलना    
तेलगू      मन्टा
गुजराती    बड़तर
असमी          पोरानी
मराठी     अगहोणे   
बंगाली          दाह
उड़िया     जलपोड़ा   
कन्नड़          उरि
मलयालम  पुकाछिल  
अंग्रेजी          डिहाइड्रेशन, बर्निग सैन्शेसन

लक्षण :

          शरीर में जलन ज्यादा होने पर रोगी की जीभ बाहर आ जाती है। रोगी के आंखे और मुंह लाल हो जाते हैं। उसकी हालत ऐसी हो जाती है कि उसे पता नहीं होता कि वह क्या कर रहा है उस पर बेहोशी सी छा जाती है।

कारण :

          यह रोग ज्यादा शराब पीने से, खून में खराबी या शरीर में ज्यादा गर्मी बढ़ जाना, ज्यादा खून बहने की वजह से हो जाता है।

भोजन और परहेज :

पथ्य : जलन में रोगी को ताजा दूध, मक्खन, शर्करा, मांस का रस, केला, नारियल और छुआरा खिलाने से लाभ होता है।

अपथ्य : इस रोग में रोगी को खट्टे और तेज रस वाले पदार्थ, पान और बासी भोजन नहीं खिलाना चाहिए। गाड़ी की सवारी करना, ज्यादा घूमना, व्यायाम, मैथुन और ज्यादा तेज घूमना भी नुकसान करता है।

विभिन्न औषधियों से उपचार-

1. चना : दो मुट्ठी भर चने का छिलका लें। फिर 2 गिलास पानी लेकर एक मिट्टी के बर्तन में डाल दें और चने का छिलका उसमें भिगो दें। सुबह उठने पर इस पानी को छानकर पी जायें इससे जलन बिल्कुल मिट जाती है।

2. फालसा :

  • पके हुए फालसे को शक्कर के साथ खाने से शरीर की गर्मी, भभका और जलन दूर होती है।
  • फालसे का शर्बत पीने से शरीर की जलन समाप्त हो जाती है।
  • 20 ग्राम फालसों को शक्कर के साथ खाने से जलन मिट जाती है।
  • पके हुए फालसे शक्कर के साथ खाने से जलन शान्त होती है।
  • फालसे का शर्बत पीने से शरीर की जलन या दाह दूर हो जाती है।

3. ज्वार : ज्वार के आटे को पानी में घोल लें और शरीर पर लेप करें। इससे शरीर की जलन मिट जाती है।

4. खीरा : खीरे के रस को रोजाना पीने से शरीर की जलन दूर होती है।

5. शहतूत : शहतूत का शर्बत पीने से और उसे खाने से शरीर की जलन दूर हो जाती है।

6. धनिया :

  • रात को सोते समय धनिया और चावल को पानी में भिगो दें और सुबह उठने के बाद इसे गर्म करके पी जायें। इससे शरीर की जलन में आराम आता है।
  • रात को धनिये को पानी में भिगों दें और सुबह उठने पर उसे छानकर उसमें मिश्री डालकर पी जायें। इससे शरीर की गर्मी और पेट की जलन दूर हो जाती है।

7. पानी : अगर पैरों में बहुत ज्यादा पसीना आता हो तो एक बर्तन में गर्म पानी लेकर दोनों पैरों को उसमें डालकर आपस में रगड़े फिर बाहर निकालकर किसी कपड़े से पोंछ लें। एक हफ्ते तक लगातार ऐसा करने से बहुत आराम आता है।

8. मेथी : शरीर में जलन होने पर मेथी के पत्तों को ठंड़ाई के जैसे पीस लें और पानी में घोलकर पी जायें। इससे जलन और भभके में आराम आता है।

9. मेंहदी : गर्मी के मौसम में जिन लोगों के पैरों में लगातार जलन होती रहती है उनको अपने पैरों में मेंहदी लगानी चाहिए इससे पैरों की जलन दूर होती है।

10. हल्दी : हल्दी को पानी में घोलकर जले हुए अंग पर लेप लगायें सूखने पर बार-बार लेप करें इस प्रयोग से जले हुए में लाभ होता है।

11. राई : जिन रोगों के साथ सूजन रहती है तथा जिसमें शरीर के भीतर आंतरिक जलन होती है, ऐसे रोगों में राई का लेप फायदेमन्द होता है। फेफड़ों की सूजन, फेफड़ों के कोष की सूजन, लीवर (यकृत) कोष की सूजन, श्वास नलिका में सूजन हो, सिर (मस्तिष्क) रोगों की सूजन में राई का लेप बहुत फायदेमन्द है। हृदय की दुर्बलता में हाथ-पैरों और हृदय के ऊपर राई का लेप किया जाता है।

12. चमेली : चमेली के फूलों से निर्मित सुगन्धित तेल जलन को ऐसे नष्ट करता है जैसे जल डालने से आग शान्त हो जाती है।

13. चंदन :

  • चंदन और कपूर को घिसकर शरीर पर लेप करने से शरीर की जलन नष्ट हो जाती है।
  • चावल के पानी में सफेद चंदन घिसकर खांड़ के साथ देना चाहिए।
  • शरीर के किसी जगह पर सूजन होने से उत्पन्न जलन के स्थान पर चंदन को घिसकर कुछ दिनों तक लेप करते रहने से जलन नष्ट होकर सूजन ठीक हो जाती है।
  • ठंड़क के लिए चंदन के लगभग 1 किलो महीन बूरे को आठ सौ ग्राम उत्तम सुगन्धित जल में भिगो दें। चौबीस घंटे के बाद भीगने के बाद उस जल को हल्की आंच पर उबालें। इसके खौलने पर नीचे उतारकर छान लें और आठ सौ ग्राम मिश्री डालकर उसे पका लें। यह चंदन का शर्बत सुबह-शाम 10-10 ग्राम लेने से शरीर की गर्मी दूर हो जाती है।

14. आम :

  • आम के पत्तों को जलाकर इसकी भस्म को जले हुए पर बुरकायें। इससे जलन दूर हो जायेगी।
  • आम के फल को पानी में उबालकर या भूनकर इसका लेप बना लें और शरीर पर लेप करें इससे जलन में ठंड़क मिलती है।

15. मटर : शरीर में कहीं भी दाह या जलन हो तो हरी मटर पीसकर लेप करने से लाभ होता है।

16. चांगेरी :

  • चांगेरी के 5-7 पत्तों को ठंड़ाई के समान घोटकर उसमें मिश्री मिलाकर सुबह-शाम पीने से आंतरिक जलन मिट जाती है।
  • चांगेरी के 10-15 पत्तों को पानी के साथ पीसकर इनकी पुल्टिश बनाकर सूजन पर बांधने से सूजन की जलन मिटती है।
  • चांगेरी के पत्तों का लेप छोटे बच्चों के फोड़े-फुन्सियों पर भी लाभदायक है।

17. चावल : चावल की प्रकृति शीतल होती है। पेट में गर्मी भारी होने पर एवं गर्मी के मौसम में प्रतिदिन चावल खाने से शरीर को ठंड़क मिलती है।

18. मुलहठी :

  • मुलहठी और लाल चंदन पानी के साथ घिसकर लेप करने से जलन शान्त होती है।
  • लाल चंदन के साथ मुलेठी घिसकर लगाने से दाह मिटती है।

19. धाय : शरीर के किसी भी अंग में हो रही बाहृय जलन को दूर करने के लिए धाय के फूलों को गुलाबजल में पीसकर बने लेप को लगाने से जलन दूर हो जाती है।

20. घी :

  • तलवों, हाथ-पैरों में जलन हो तो घी की मालिश करने से सभी प्रकार की जलन दूर हो जाती है।
  • अग्नि से जलने पर घी लगाने से लाभ होता है।

21. गन्ना : गुड़ को पानी में मिलाकर 25 बार कपड़े में छानकर पीने से दाह (जलन) शान्त होती है। बुखार की गर्मी की शान्ति के लिए इसे पिलाया जाता है।

22. शरपुंखा : शंरपुंखा के दस से बीस ग्राम बीजों को एक गिलास शीतल पानी में भिगाकर मसलकर छानकर पिलाने से शरीर की जलन और गर्मी समाप्त होती है।

23. लाल कचनार : इसकी छाल के 5 ग्राम रस में 20 ग्राम जीरे का चूर्ण मिलाकर दिन में दो बार पिलाने से जलन मिटती है।

24. इलायची : गले या सीने में जलन हो, शरीर में एसिड बहुत बनता हो तो वंशलोचन, छोटी इलायची, तेजपात, छोटी हरड़, मोथा, बच, आंवला, अकरकरा सबको समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण का एक-एक चम्मच दो बार पानी के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है।

25. करेला : करेले के पत्तों के रस का लेप करने से भी जलन खत्म होती है।

26. केला : केले और कमल के पत्तों पर सोने से शरीर की जलन शान्त होती है।

27. खस (पोस्त के दाना) : सफेद चंदन और खस की जड़ को बराबर मिलाकर पानी में पीस लें और उस लेप को जले हुए अंग पर लगायें।

28. नींबू : 10 ग्राम नींबू के रस को 250 मिलीलीटर पानी में घोल लें। फिर चीनी को मिलाकर पीने से पित्त की बीमारी से उत्पन्न जलन शान्त होती है।

29. ब्राह्मी : 5 ग्राम ब्राही के साथ धनिया मिलाकर रात को भिगो दें। इसे सुबह पीस-छानकर मिश्री के साथ मिलाकर पी लें।

30. बिजौरा नींबू : बिजौरे नींबू के रस में चीनी डालकर उसका पाक बनाकर उसमें ठंड़ा पानी मिलाकर पीने से जलन और पित्त शान्त हो जाती है।

31. भांगरा :

  • भांगरा के पत्तों को मेंहदी और मरवा के पत्तों के साथ पीसकर लेप करने से तुरन्त ही लाभ मिलता है। तथा नवीन त्वचा शरीर के त्वचा के अनुसार ही होती है।
  • जब घाव कुछ दिन होने लगे तब भांगरा के पत्तों का रस 2 भाग, काली तुलसी के पत्तों का रस 1 भाग, दिन में 2-3 बार लगाते रहने से जलन शान्त हो जाती है, और शरीर पर किसी भी प्रकार का दाग नहीं पड़ने पाता है।
  • हाथ-पैरों की जलन व शरीर की खुजली में और सूजन पर भांगरा के रस की मालिश करनी चाहिए।

32. नीम : नीम के पत्तों को पीसकर लगाना चाहिए। इससे खून साफ होकर जलन शान्त होती है।

33. अनार :

  • अनार के 10-12 ताजे पत्तों को पीसकर हथेली और पैरों के तलुवों पर लेप करने से हाथ-पैरों की जलन में आराम मिलता है।
  • 250 ग्राम अनार के ताजे पत्तों को पांच लीटर पानी में उबालें तथा चार लीटर पानी शेष रहने पर नहाने के लिए प्रयोग करने से गर्मी के सीजन की पित्ती शान्त होती है।

34. नारियल : सुबह भूखे पेट नारियल के पानी में नींबू के रस को मिलाकर पीने से शरीर की सारी गर्मी, मूत्र और मल के साथ निकल जाती है और खून साफ हो जाता है।

35. एरण्ड : बुखार में होने वाली जलन में एरण्ड के पत्ते धोकर साफ कर शरीर पर धारण करने से जलन नष्ट हो जाती है।

36. बथुआ : आग से जले अंग पर कच्चे बथुए का रस बार-बार लगायें, इससे लाभ होगा।

37. अरीठे : अरीठे का फेन मलने से ठंड़क मिलती है।

38. अर्जुन : आग से जलने पर उत्पन्न घाव पर अर्जुन की छाल के चूर्ण को लगाने से घाव जल्द ही भर जाता है।

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