चुम्बक का रूप और सूचीवेधन बिन्दु


चुम्बक का रूप और सूचीवेधन बिन्दु


चुम्बक

प्राचीन समय में एशिया माइनर में मैग्नीशिया नामक स्थान पर कुछ काले पत्थरों की खोज की गई जिनका नाम इसी स्थान के नाम पर मैग्नेट रखा गया। मैग्नेट शब्द अंग्रेजी में है और हिन्दी में इसका अर्थ चुम्बक होता है। चुम्बक को लाडस्टोन या नेचुरल मैग्नेट के रुप में भी जाना जाता है। जब इन पत्थरों को स्वतन्त्र रुप से हवा में लटका दिया जाये तो ये पत्थर अपनी पहले की स्थिति में आ जाते हैं तथा एक निश्चित दिशा की ओर संकेत करते हैं इसलिए इन पत्थरों को लोडस्टोन कहा जाता है। इन पत्थरों में एक विशेष प्रकार का गुण ..........

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सूचीवेधन बिन्दु

Soochivedhan bindu manushy ke sharer ki bahari satah par paye jate hain jinhe rog lakshno ko thik karane ke liye vedha, dabaya ya garamaya jata hai.  सूचीवेधन बिन्दु मनुष्य के शरीर की बाहरी सतह पर पाए जाते हैं जिन्हे रोग-लक्षणों को ठीक करने के लिये वेधा, दबाया या गरमाया जाता है। शरीर पर पाये जाने वाले ये बिन्दु अपने गुणों में भिन्न होते हैं तथा जो समान गुणों वाले बिन्दुओं को एक कल्पित डोरी या मार्ग से परस्पर जोड़ देते हैं जिसे एक मोतियों वाले हार समान कहा जाता है। मनुष्य के शरीर में पाये जाने वाले सूचीवेधन बिन्दु को 14 भागों में बांटा जाता है- इनमें 12 युगल माध्यम...........

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चुम्बकों का चिकित्सा में प्रयोग 

जिस प्रकार दूसरी चिकित्साओं में औषधियों का प्रयोग रोगों का उपचार करने के लिए किया जाता है ठीक उसी प्रकार चुम्बक चिकित्सा में भी चुम्बकों का प्रयोग रोगों को ठीक करने के लिये किया जाता है। चुम्बक को रोगों को ठीक करने के लिये एक अत्यन्त शक्तिशाली हथियार माना जाता है। चुम्बक रोगी के ज्ञान, बुद्धि और विवेकशीलता को मिलाकर उन होठों की खोई हुई मुस्कान को वापस ले आता है जिन्हे रोगी कब का भूल चुका होता है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हर चिकित्सा में धैर्य, दया एवं विवेक सफलता के गुण माने जाते हैं। ठीक इसके ...........

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