चुम्बक का मानव शरीर पर प्रभाव


चुम्बक का मानव शरीर पर प्रभाव


Jis prakar koee mashin apne kaee bhagon se kary karti hai thik usi prakar manushy ka sharer bhi apne ango dwara kary karta hai. प्रकृति के अनुसार मानव के शरीर में विभिन्न कोशिकाएं पाई जाती है। इसमें से कुछ कोशिकाएं एक कोषीय और कुछ बहुकोषीय होती हैं। मनुष्य का शरीर एक प्रकार की ऐसी मशीन है जो अपनी बनावट के अनुसार किसी दूसरे जीवों से मेल नहीं खाती है। इसकी कार्य-प्रणाली भी अन्य जीवों से भिन्न पाई जाती है और यह किसी भी मशीन की स्थिरता से बिल्कुल अलग है तथा अपने मर्म एवं भाव-दशाओं की गहराई में हानि पहुंचाती है। मानवों द्वारा बनाई गई मशीनों के लिये यह एक चुनौती है, क्योंकि जहां तक इस मशीन की अपनी एक अलग उपयोगिता होती है और वही उसकी बनावट तथा सुन्दरता अनुपमेय है। कहने का अर्थ यह है कि जितनी लम्बी सेवा मनुष्य का शरीर दे सकता है उतनी लम्बी सेवा कोई मानव द्वारा बनाई गई मशीन नहीं दे सकती है। उदाहरण के लिये मनुष्य का हृदय एक प्रकार के पम्प का कार्य करता है और इस हृदय की लम्बाई 15 सेटीमीटर तथा आर-पार चौड़ाई 10 सेटीमीटर रहती है....................................