चुम्बकों के बारे में कुछ जानकारी


चुम्बकों के बारे में कुछ जानकारी


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चुम्बकों का इतिहास

जब हम चुम्बक के इतिहास की ओर देखते हैं तो हमें पता चलता है कि प्राचीन काल के मनुष्यों ने इस धरती पर कई ऐसे पदार्थों की खोज की है जो मनुष्यों के शरीर तथा उनके कार्यो को प्रभावित करते हैं और मनुष्यों के जीवन तथा उनके रोगों पर विशेष प्रभाव डालते हैं। मनुष्यों द्वारा एक ऐसे ही पदार्थ की खोज हुई जो चुम्बक कहलाता है। हमारे पूर्वजों को इस चुम्बक में ऐसी शक्ति दिखाई दी कि यह पदार्थ लोहे से बने पदार्थो, लोह-द्रव्यों तथा लोहा जैसे पदार्थ आदि को अपनी शक्ति से अपनी ओर आकर्षित करता है। बाद में लोगों को यह भी पता लगा कि हमारे शरीर में पाये जाने वाले सभी तरल पदार्थ तथा अर्ध तरल पदार्थ जिनमें लोहे के कुछ कण पाये जाते हैं, चुम्बक उनको भी प्रभावित करता है।  

         पुराने समय की विचार धारा के अनुसार यह भी पता लग गया कि सभी प्रकार के लौह तत्व-द्रव्य पदार्थो पर चन्द्रमा का सीधा प्रभाव पड़ता है। इसके कारण मनुष्य के मस्तिष्क पर भी तेज प्रभाव पड़ता है। कई वैज्ञानिक परीक्षणों से यह भी पता लगा .................

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  चुम्बक बनाने का तरीका

एक चुम्बक को किसी दूसरे चुम्बकीय पदार्थ से आपस में रगड़ने से चुम्बक बनता है। इस यांत्रिक क्रिया के अनुसार जब एक चुम्बक पदार्थ को किसी दूसरे चुम्बक पर एक निश्चित दिशा की ओर बार-बार रगड़कर उसका चुम्बकीकरण किया जाये तो यह चुम्बक पदार्थ दूसरे चुम्बक का गुण ले लेता है और चुम्बक बन जाता है तथा चुम्बक पदार्थ के दोनों ओर किनारे पर उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव बन जाते हैं। इस तरह से बनाये गये चुम्बक निम्न आकर्षण शक्ति वाले होते हैं।
चुम्बक पदार्थ को विद्युत धारा से घेरने पर उस चुम्बकीय पदार्थ में चुम्बक के गुण आ जाते हैं तथा वह पदार्थ चुम्बक बन जाता है। इस तरह से चुम्बक बनने में चुम्बक पदार्थो के चारों ओर एक विद्युत-धारारोधी चक्र को मोड़कर झुका दिया जाता है और विद्युत कोशिकाओं की सहायता से चक्र के माध्यम से उसमें विद्युत-धारा सीधी प्रवाहित की जाती है। जब छड़ के चारों ओर विद्युत-धारा चक्र के समान पड़ती है तो उस पदार्थ का चुम्बकीकरण हो जाता है और चुम्बकीय पदार्थ के दोनों...........
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