चयापचय दर को प्रभावित करने वाले कारक


चयापचय दर को प्रभावित करने वाले कारक

(Factors affecting basal metabolic Rate)


शरीर सतह का क्षेत्रफल- सामान्यतः पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों के शरीर का सतही क्षेत्रफल अक्सर कम होता है। इसलिए यह स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में अधिक होती है।

आयु (Age)- आयु बढ़ने के साथ-साथ चयापचयी दर दिन-प्रतिदिन कम होती चली जाती है। सामान्यतः यह दर वयस्कों की अपेक्षा बच्चों में अधिक होती है क्योंकि बच्चों को वृद्धि के दौरान ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है। गर्भवती अथवा स्तनपान कराने वाली स्त्रियों में भी चयापचयी दर बढ़ी हुई होती है।

शारीरिक परिश्रम- शारीरिक परिश्रम करने वाले व्यक्तियों की चयापचयी दर ज्यादा आराम करने वाले या बैठे-बैठे मानसिक कार्य करने वाले व्यक्तियों से ज्यादा बढ़ी हुई होती है।

स्वभाव (Temperament)- शांत स्वभाव वाले व्यक्तियों की अपेक्षा उत्तेजनशील व्यक्तियों में चयापचयी दर बढ़ी हुई होती है। मानसिक तनाव की दशा में श्वसन एवं हृदय गति बढ़ जाने से भी चयापचयी दर बढ़ जाती है।

बुखार (Fever)- बुखार हो जाने पर चयापचयी दर बढ़ जाती है।

भोजन (Food)- खाद्य पदार्थों को पचाने में प्रयुक्त ऊर्जा भोजन की विशिष्ट गतिज क्रिया (Specific dynamic action) कहलाती है। कार्बोहाइड्रेट्स या वसा युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने की अपेक्षा प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने पर चयापचयी दर बढ़ जाती है।

उपवास- उपवास में चयापचयी दर कम हो जाती है।

हॉर्मोंस (Hormones)- कुछ हॉर्मोंस चयापचयी दर को फीड-बेक सिस्टम के द्वारा बरकरार रखने में मदद करते हैं जैसे- जब चयापचयी दर अधिक धीमी होती है, तो एपिनेफ्रीन (Epinephrine) और थाइरॉक्सीन नामक हॉर्मोंस का स्राव बढ़ जाता है। थाइरॉक्सीन, थाइरॉयड ग्रंथि से स्रावित होता है, जो दूसरे किसी हॉर्मोंन की अपेक्षा चयापचय को अधिक प्रभावित करता है। जब थाइरॉक्सीन हॉर्मोंन का स्राव बढ़ जाता है (हाइपरथाइरॉयडिज्म), तो चयापचयी दर सामान्य से 100 प्रतिशत तक बढ़ जाती है (ऐसा नेत्रोत्सेधी गलगण्ड में होता है) तथा थाइरॉक्सीन का स्राव घट जाने पर (हाइपोथाइरॉयडिज्म) चयापचयी दर सामान्य से 40 प्रतिशत तक कम हो जाती है (ऐसा मिक्सीडीमा में होता है)।

     चयापचयी दर किसी तरह की चिंता (anxiety) आदि करने से बढ़ जाती है तथा अवसाद (depression) से कम हो जाती है। डर या क्रोध की दशाओं में एड्रीनल ग्रंथियां अतिरिक्त एपिनेफ्रीन हॉर्मोंन का स्राव करने के लिए उत्तेजित हो जाती है, जिससे चयापचयी दर बढ़ जाती है। चयापचयी दर ग्रोथ हॉर्मोंन (GH) और सेक्स हॉर्मोंस के प्रभाव से भी बढ़ जाती है।

     अन्य कारकों में जलवायु (climate) और विभिन्न जातियां (race) भी चयापचयी दर को प्रभावित करती है।