ग्रासनली


ग्रासनली

(Oesophagus)


       ग्रसनी से आमाशय तक भोजन पहुंचाने वाली लगभग 25 सेमीमीटर लंबी पेशीय नली को ग्रासनली कहा जाता है। यह नली छठे सर्वाइकल वर्टिब्रा के स्तर से शुरू होकर, नीचे को श्वास प्रणाली और हृदय के पीछे होती हुई दसवें थॉरेसिक वर्टिब्रा के स्तर पर पहुंचकर डायाफ्राम को छिद्रित करती हुई, ग्यारहवें थॉरेसिक वर्टिब्रा के स्तर पर ऊपर की तरफ एक मोड़ (वक्र) बनाती हुआ आमाशय के कार्डियक सिरे पर जाकर खुलती है।

       ग्रासनली की भित्ति चार परतों से मिलकर बनी होती है। इसकी सबसे भीतरी परत श्लेष्मिक कला स्तरित श्लकी उपकला द्वारा स्तरित होती है और श्लेष्मा का स्राव करती है। इसके ऊपर अवश्लेष्मिक परत होती है जो म्यूकोसा और पेशीय परत को जोड़ती है। इसमें रक्त वाहिकाओं और तंत्रिकाओं के साथ-साथ श्लेष्मक ग्रंथियां भी होती है। इसके ऊपर पेशीय परत (muscularis externa) होती है जिसमें अनैच्छिक पेशी की दो परतें होती है। बाह्य परत के पेशी तंतु लंबे आकार के होते हैं और अंदरूनी परत के पेशी तंतु वृत्ताकार होते हैं। इसकी सबसे बाहरी को को ’एडवैन्टीशिया कहा जाता है और यह शिथिल तंतुमय ऊतकों से बनी होती है।

     ग्रासनली की पेशीय परत (musciaris externa) का ऊपर का एक तिहाई भाग कंकालीय पेशीयों से, बीच का एक तिहाई भाग कंकालीय और चिकनी पेशीयों से तथा नीचे का एक तिहाई भाग सिर्फ चिकनी पेशियों से बना होता है। ग्रासनली के तंत्रिका आपूर्ति वेगस तंत्रिका से निर्मित होती है।

     ग्रासनली का ऊपरी और निचला सिरा संकोचनी पेशियों द्वारा बंद रहते हैं। ऊपर वाली संकोचनी पेशी को क्राइकोफैरिन्जीयल संकोचनी (Cricopharyngeal sphincter) कहते हैं। यह पेशी सांस लेते समय वायु को ग्रासनली में पहुंचने से तथा ग्रासनली के पदार्थों को बाहर निकलने से रोकने का काम करती है। निचली संकोचनी पेशी को ईसोफेजियल संकोचनी (oesophageal sphincter) कहा जाता है। इसे चिकनी पेशी का एक छल्ला ही कहा जाता है जिसमें ग्रासनली के आमाशय से जुड़ने से पहले ग्रासनली का आखिरी 4 सेमीमीटर का भाग शामिल होता है। यह छ्ल्ला वैसे तो संकुचित अवस्था में ही रहता है लेकिन भोजन और तरल पदार्थों के आमाशय में पहुंचने के दौरान शिथिल हो जाता है और पेट में दबाव बढ़ने पर आमाशय से भोजन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को वापस ग्रासनली में लौटने से रोकता है।