गर्भाशय (बच्चेदानी) की सूजन


गर्भाशय (बच्चेदानी) की सूजन


स्त्री रोगों का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :

परिचय:-

          गर्भाशय की सूजन हो जाने पर स्त्रियों को हल्का बुखार रहता है तथा इस रोग के कारण उनके गर्भाशय में सूजन भी हो जाती है। इस रोग के कारण अनेक प्रकार के रोग स्त्रियों को हो जाते हैं जो इस प्रकार हैं- सिर में दर्द, भूख न लगना, कमर तथा पेट के निचले भाग में दर्द और योनि के भाग में खुजली होना आदि।

गर्भाशय (बच्चेदानी) की सूजन हो जाने का कारण -

  • भूख से अधिक भोजन सेवन करने के कारण स्त्री के गर्भाशय में सूजन आ जाती है।
  • पेट में गैस तथा कब्ज बनने के कारण गर्भाशय में सूजन हो जाती है।
  • अधिक तंग कपड़े पहनने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है।
  • पेट की मांसपेशियों में अधिक कमजोरी आ जाने के कारण तथा व्यायाम न करने के कारण या अधिक सख्त व्यायाम करने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है।
  • औषधियों का अधिक सेवन करने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है।
  • अधिक सहवास (संभोग) करने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है।
  • गलत खान-पान के कारण गर्भाशय में सूजन हो सकती है।
  • प्रसव के दौरान सावधानी न बरतने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है।

गर्भाशय (बच्चेदानी) की सूजन का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

  • गर्भाशय में सूजन हो जाने पर स्त्री रोगी को चार से पांच दिनों तक फलों का रस पीकर उपवास रखना चाहिए, फिर इसके बाद बिना पका संतुलित आहार लेना चाहिए।
  • गर्भाशय में सूजन से पीड़ित स्त्री को कभी भी नमक, मिर्चमसाला वाला, तली भुनी चीजें तथा मिठाईयां आदि नहीं खानी चाहिए।
  • गर्भाशय में सूजन हो जाने पर स्त्री के पेट पर मिट्टी की गीली पट्टी लगानी चाहिए। इसके बाद एनिमा देनी चाहिए और फिर गर्म कटिस्नान कराना चाहिए। इसके बाद टब में नमक डालकर पन्द्रह से बीस मिनट तक स्त्री को इसमें बैठाना चाहिए।
  • गर्भाशय में सूजन से पीड़ित स्त्री को प्रतिदिन दो से तीन बार एक-दो घंटे तक अपने पैर को एक फुट ऊंचा उठाकर लेटना चाहिए और आराम करना चाहिए। इसके बाद रोगी स्त्री को श्वसन क्रिया करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप उसका रोग ठीक हो जाता है।

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